राजस्थान के ऊर्जा संसाधन एवं विद्युत परियोजनाएँ (Energy Resources and Power Projects in Rajasthan)
1. राजस्थान में ऊर्जा परिदृश्य: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं वर्तमान स्थिति
ऐतिहासिक विकास यात्रा
- **1949 (एकीकरण के समय):** राजस्थान की कुल स्थापित विद्युत क्षमता मात्र **13.27 मेगावाट (MW)** थी। उस समय पूरे राज्य में केवल 42 नगर और कस्बे ही आंशिक रूप से विद्युतीकृत थे। - **1 जुलाई 1957:** विद्युत विकास को गति देने हेतु **राजस्थान राज्य विद्युत बोर्ड (RSEB - Rajasthan State Electricity Board)** का गठन विद्युत प्रदाय अधिनियम 1948 के अंतर्गत किया गया। - **19 जुलाई 2000 (RSEB का पुनर्गठन):** राजस्थान ऊर्जा क्षेत्र सुधार अधिनियम 1999 के तहत RSEB को 5 स्वतंत्र सरकारी कंपनियों में विभाजित किया गया: 1. राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (RVUNL) - विद्युत उत्पादन हेतु। 2. राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड (RVPNL) - उच्च दाब पारेषण (Transmission) हेतु। 3. जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (JVVNL) - जयपुर, दौसा, अलवर, भरतपुर, धौलपुर, सवाई माधोपुर, टोंक, करौली, झालावाड़, बारां, कोटा, बूंदी हेतु। 4. अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (AVVNL) - अजमेर, भीलवाड़ा, नागौर, सीकर, झुंझुनूं, उदयपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा हेतु। 5. जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (JdVVNL) - जोधपुर, पाली, सिरोही, बाड़मेर, जालौर, जैसलमेर, बीकानेर, चूरू, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ हेतु। - **2015:** तीनों वितरण निगमों (Discoms) की विद्युत खरीद और पावर ट्रेडिंग के समन्वय हेतु **राजस्थान ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (RUVNL)** का गठन किया गया।ऊर्जा क्षमता का स्रोतवार वर्गीकरण (स्थापित क्षमता)
राजस्थान की कुल अधिष्ठापित क्षमता में पारंपरिक (तापीय, जल, परमाणु) तथा गैर-पारंपरिक/अक्षय ऊर्जा (सौर, पवन, बायोमास) का योगदान निम्नलिखित है: 1. **तापीय ऊर्जा (Thermal Power):** राज्य का सबसे बड़ा आधारभूत विद्युत स्रोत (कोयला, गैस एवं लिग्नाइट)। 2. **सौर ऊर्जा (Solar Energy):** राजस्थान भारत में सौर ऊर्जा की स्थापित क्षमता में **प्रथम स्थान** पर है। 3. **पवन ऊर्जा (Wind Energy):** पश्चिमी राजस्थान (विशेषकर जैसलमेर, फलोदी, बाड़मेर) में विशाल पवन फार्म स्थापित हैं। 4. **जलविद्युत ऊर्जा (Hydro Power):** चंबल घाटी, माही परियोजना तथा अंतरराज्यीय भाखड़ा-ब्यास परियोजनाओं से विद्युत प्राप्त होती है। 5. **परमाणु ऊर्जा (Nuclear Power):** रावतभाटा (चित्तौड़गढ़) में देश का दूसरा व राज्य का प्रथम परमाणु संयंत्र स्थापित है।2. तापीय विद्युत परियोजनाएँ (Thermal Power Projects)
राजस्थान में तापीय विद्युत उत्पादन तीन प्रमुख ईंधनों पर आधारित है: कोयला (Coal), लिग्नाइट (Lignite) और प्राकृतिक गैस (Natural Gas)।
प्रमुख कोयला आधारित सुपर थर्मल पावर स्टेशन
| विद्युत संयंत्र का नाम | जिला एवं स्थान | स्थापित क्षमता (MW) | प्रमुख तकनीकी विशेषताएँ |
|---|---|---|---|
| सूरतगढ़ सुपर थर्मल पावर स्टेशन (SSTPS) | श्रीगंगानगर (ठुकराना गाँव) | 2820 MW | • राजस्थान का प्रथम सुपर थर्मल पावर स्टेशन। • इसे 'राजस्थान का आधुनिक विकास तीर्थ' कहा जाता है। • चरण 1 से 6: 6 × 250 MW (सब-क्रिटिकल)। • इकाई 7 एवं 8: 2 × 660 MW (सुपर-क्रिटिकल तकनीक)। |
| छाबड़ा सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर स्टेशन | बारां (चौकी मोतीपुरा) | 2320 MW | • चरण 1: 4 × 250 MW (1000 MW)। • चरण 2: 2 × 660 MW (1320 MW सुपर क्रिटिकल)। • राजस्थान में सुपर क्रिटिकल तकनीक की वाणिज्यिक इकाइयाँ प्रारंभ करने वाला अग्रणी स्टेशन। |
| कोटा सुपर थर्मल पावर स्टेशन (KSTPS) | कोटा (चंबल नदी के किनारे) | 1240 MW | • राजस्थान का पहला प्रमुख कोयला आधारित ताप विद्युत गृह (जनवरी 1983 में प्रथम इकाई चालू)। • 7 इकाइयाँ: 2×110 MW + 3×210 MW + 2×195 MW। • अपने उत्कृष्ट प्लांट लोड फैक्टर (PLF) हेतु कई बार राष्ट्रीय उत्पादकता पुरस्कार से सम्मानित। |
| कालीसिंध थर्मल पावर स्टेशन | झालावाड़ (उंदल गाँव) | 1200 MW | • 2 × 600 MW की दो सुपर क्रिटिकल इकाइयाँ। • यहाँ एशिया का सबसे ऊंचा प्राकृतिक ड्राफ्ट कूलिंग टॉवर (NDCT) स्थापित किया गया। |
| कवई थर्मल पावर स्टेशन | बारां (अडाणी पावर) | 1320 MW | • निजी क्षेत्र (Adani Power Rajasthan Ltd) द्वारा स्थापित सुपर क्रिटिकल संयंत्र। • 2 × 660 MW इकाइयाँ। |
लिग्नाइट आधारित थर्मल पावर स्टेशन
राजस्थान में कोयले की तुलना में लिग्नाइट (भूरा कोयला) के स्थानीय भंडार बीकानेर, बाड़मेर एवं नागौर में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं।
- गिरल लिग्नाइट ताप विद्युत परियोजना (बाड़मेर - थुंबली गाँव):
- क्षमता: 250 MW (2 × 125 MW)।
- जर्मनी की KfW की तकनीकी सहायता से स्थापित।
- यह देश का पहला ऐसा संयंत्र है जो सर्कुलेटिंग फ्लुइडाइज्ड बेड कम्बशन (CFBC) तकनीक पर आधारित है, जिससे उच्च सल्फर युक्त लिग्नाइट का सुरक्षित दहन होता है।
- बरसिंगसर लिग्नाइट पावर स्टेशन (बीकानेर):
- क्षमता: 250 MW (2 × 125 MW)।
- केंद्र सरकार के उपक्रम NLC इंडिया लिमिटेड (पूर्व में नेवेली लिग्नाइट कॉर्पोरेशन) द्वारा संचालित खान-मुहाना (Pit-head) संयंत्र।
- कपूरड़ी-जालीपा थर्मल प्रोजेक्ट (बाड़मेर):
- क्षमता: 1080 MW (8 × 135 MW)।
- मेसर्स राज वेस्टपावर लिमिटेड (JSW एनर्जी) द्वारा स्थापित।
- स्थानीय कपूरड़ी एवं जालीपा लिग्नाइट खानों से ईंधन आपूर्ति।
- गुढ़ा एवं बीठनोक लिग्नाइट परियोजनाएँ (बीकानेर):
- राज्य स्वामित्व एवं संयुक्त उपक्रम में विकसित।
प्राकृतिक गैस आधारित विद्युत परियोजनाएँ
| संयंत्र | जिला | क्षमता | संचालन एवं मुख्य तथ्य |
|---|---|---|---|
| अंता गैस विद्युत परियोजना | बारां | 419.33 MW | • NTPC द्वारा संचालित केंद्र सरकार का संयंत्र। • राजस्थान का प्रथम गैस आधारित विद्युत संयंत्र (1989)। • एचबीजे (हजीरा-विजयपुर-जगदीशपुर) पाइपलाइन से गैस प्राप्त। |
| रामगढ़ गैस थर्मल पावर स्टेशन | जैसलमेर | 273.5 MW | • RVUNL का अपना पहला गैस टरबाइन संयंत्र (1994)। • जैसलमेर बेसिन (तनोट/डांडेवाला) से प्राप्त प्राकृतिक गैस पर आधारित। |
| धौलपुर कंबाइंड साइकिल गैस स्टेशन | धौलपुर | 330 MW | • 3 × 110 MW (2 गैस टरबाइन + 1 स्टीम टरबाइन)। • चंबल नदी से जल और गेल (GAIL) पाइपलाइन से गैस प्राप्त। |
| कैप्टिव गैस संयंत्र | झामरकोटड़ा (उदयपुर) | 4 MW | • RSMML के रॉक फॉस्फेट खनन संचालन हेतु कैप्टिव विद्युत उत्पादन। |
3. जलविद्युत परियोजनाएँ (Hydroelectric Power Projects)
राजस्थान एक अल्प-वर्षा वाला राज्य है, अतः अधिकांश जलविद्युत का उत्पादन अंतरराज्यीय बहुउद्देश्यीय नदी घाटी परियोजनाओं के माध्यम से किया जाता है।
चंबल नदी घाटी जलविद्युत परियोजना
चंबल परियोजना राजस्थान और मध्य प्रदेश की **50:50 हिस्सेदारी** वाली संयुक्त परियोजना है। इसके अंतर्गत तीन बाँधों पर जलविद्युत केंद्र स्थापित हैं:चंबल घाटी जलविद्युत संयंत्र (कुल 386 MW; राजस्थान का हिस्सा = 193 MW)
├── 1. गांधी सागर बाँध (मंदसौर, MP): 115 MW (5 × 23 MW) ── राजस्थान हिस्सा: 57.5 MW
├── 2. राणा प्रताप सागर बाँध (रावतभाटा, चित्तौड़गढ़): 172 MW (4 × 43 MW) ── राजस्थान हिस्सा: 86.0 MW
└── 3. जवाहर सागर बाँध (कोटा-बूंदी सीमा): 99 MW (3 × 33 MW) ── राजस्थान हिस्सा: 49.5 MW
* नोट: कोटा बैराज से केवल सिंचाई होती है, विद्युत उत्पादन शून्य है।
- राणा प्रताप सागर जलविद्युत गृह: राजस्थान की भौगोलिक सीमा के भीतर स्थित सबसे बड़ा जलविद्युत गृह है।
माही बजाज सागर जलविद्युत परियोजना (बांसवाड़ा)
- 1966 के राजस्थान-गुजरात अंतरराज्यीय समझौते के अनुसार, बाँध निर्माण की लागत में गुजरात की हिस्सेदारी सिंचाई लाभों हेतु थी, परंतु **माही बाँध से उत्पादित होने वाली समस्त जलविद्युत (100%) पर राजस्थान का अनन्य अधिकार** निर्धारित किया गया। - कुल स्थापित क्षमता: **140 MW** - पावर हाउस 1 (माही मुख्य बाँध): 2 × 25 MW = 50 MW - पावर हाउस 2 (कागदी पिकअप बाँध/लीलावानी): 2 × 45 MW = 90 MW - लाभान्वित क्षेत्र: दक्षिणी राजस्थान का सम्पूर्ण टीएसपी (आदिवासी) अंचल।अन्य लघु एवं साझा जलविद्युत परियोजनाएँ
- **जाखम लघु जलविद्युत परियोजना (प्रतापगढ़):** 9 MW (2 × 4.5 MW) - जाखम बाँध पर स्थापित। - **भाखड़ा नांगल परियोजना (सतलुज नदी):** राजस्थान, पंजाब और हरियाणा की साझी परियोजना। राजस्थान का हिस्सा **15.22%** (लगभग 227 MW विद्युत आवंटन)। - **ब्यास परियोजना:** - देहर पावर हाउस (ब्यास-सतलुज लिंक): राजस्थान की हिस्सेदारी **20%**। - पोंग पावर हाउस (ब्यास बाँध): राजस्थान की हिस्सेदारी **58.5%**। - **राहुघाट जलविद्युत परियोजना (करौली):** चंबल नदी पर प्रस्तावित लघु जलविद्युत परियोजना।4. परमाणु ऊर्जा (Nuclear Power)
राजस्थान परमाणु ऊर्जा संयंत्र (RAPS / RAPP) - रावतभाटा (चित्तौड़गढ़)
- **स्थापना एवं पृष्ठभूमि:** भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू और डॉ. होमी जहांगीर भाभा की पहल पर महाराष्ट्र के तारापुर के बाद यह **भारत का दूसरा परमाणु ऊर्जा संयंत्र** बना। - **स्थान:** चित्तौड़गढ़ जिले के रावतभाटा में राणा प्रताप सागर बाँध के समीप। - **सहयोग:** कनाडा की परमाणु ऊर्जा एजेंसी (AECL) के सहयोग से **कैंडू (CANDU - Canada Deuterium Uranium)** दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWR) तकनीक पर आधारित। - **इकाइयों का विवरण:** - **इकाई 1 (100 MW):** 16 दिसंबर 1973 को व्यावसायिक रूप से चालू हुई। यह भारत का पहला दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWR) था। (वर्तमान में स्थायी रूप से बंद)। - **इकाई 2 (200 MW):** 1981 में चालू हुई (कनाडा द्वारा 1974 के पोखरण परीक्षण के बाद सहयोग वापस लेने पर भारतीय वैज्ञानिकों ने स्वदेशी रूप से पूर्ण की)। - **इकाई 3 एवं 4 (प्रत्येक 220 MW):** पूर्णतः स्वदेशी तकनीक से वर्ष 2000 में प्रारंभ। - **इकाई 5 एवं 6 (प्रत्येक 220 MW):** वर्ष 2010 में चालू। - **इकाई 7 एवं 8 (प्रत्येक 700 MW = 1400 MW):** स्वदेशी 700 MW श्रेणी के अत्याधुनिक PHWR रिएक्टर निर्माणाधीन। - **भारी जल संयंत्र (Heavy Water Plant):** रावतभाटा में परमाणु रिएक्टरों के मंदक (Moderator) एवं शीतलक (Coolant) के रूप में प्रयुक्त भारी जल (D2O) का विशाल संयंत्र स्थापित है।माही बांसवाड़ा परमाणु ऊर्जा परियोजना (प्रस्तावित)
- **स्थान:** बांसवाड़ा जिले के घाटोल/कटुम्बी क्षेत्र में माही बाँध के बैकवाटर के समीप। - **क्षमता:** **2800 MW** (4 इकाइयाँ × 700 MW स्वदेशी PHWR)। - **प्रवर्तक:** NPCIL एवं NTPC का संयुक्त उपक्रम **'अश्विनी' (ASHVINI - Anushakti Vidhyut Nigam Ltd)**।5. सौर ऊर्जा (Solar Energy)
राजस्थान की प्राकृतिक सौर अनुकूलता
- राजस्थान में औसतन **प्रतिवर्ष 325 से अधिक धूप वाले दिन (Sunny Days)** रहते हैं। - सौर विकिरण (Solar Insolation) की तीव्रता **6 से 7 kWh/m²/day** है, जो देश में सर्वाधिक है। - नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के अनुसार राजस्थान में लगभग **142 गीगावाट (GW)** सौर ऊर्जा उत्पादन की विभव क्षमता (Potential) विद्यमान है। - **राष्ट्रीय स्थिति:** राजस्थान 20 GW से अधिक ग्रिड-कनेक्टेड सौर ऊर्जा स्थापित कर भारत में **शीर्ष स्थान (Rank 1)** पर विद्यमान है।प्रमुख मेगा सौर पार्क (Solar Parks)
1. भड़ला सोलर पार्क (Bhadla Solar Park) - फलोदी (पूर्व में जोधपुर)
- **विश्व का सबसे बड़ा संचालित सोलर पार्क** (कुल क्षमता: **2245 MW**)। - लगभग 14,000 एकड़ के बंजर मरुस्थलीय भूभाग में चार चरणों में विकसित: - **चरण I (75 MW):** राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम (RRECL) द्वारा विकसित। - **चरण II (680 MW):** RRECL द्वारा विकसित। - **चरण III (1000 MW):** सौरभ ऊर्जा कंपनी राजस्थान लिमिटेड (SURKL - RRECL एवं आईएलएंडएफएस का 50:50 संयुक्त उद्यम)। - **चरण IV (500 MW):** अडानी रिन्यूएबल एनर्जी पार्क राजस्थान लिमिटेड (AREPRL - RRECL एवं अडानी एंटरप्राइजेज का 50:50 संयुक्त उद्यम)।2. नोख सोलर पार्क (Nokh Solar Park) - जैसलमेर
- क्षमता: **925 MW** - विकासकर्ता: RRECL द्वारा जैसलमेर जिले के नोख गाँव में विकसित।3. फतेहगढ़ सोलर पार्क (Fatehgarh) - जैसलमेर
- क्षमता: **1500 MW** - निजी-सार्वजनिक साझेदारी एवं अल्ट्रा मेगा रिन्यूएबल एनर्जी पावर पार्क (UMREPP) योजना के तहत विकसित।4. पूगल सोलर पार्क (Pugal) - बीकानेर
- क्षमता: **1450 MW** - RRECL एवं कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) के संयुक्त उपक्रम द्वारा बीकानेर के पूगल तहसील में स्थापित।प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-KUSUM)
| कंपोनेंट | उद्देश्य | राजस्थान की स्थिति |
|---|---|---|
| कंपोनेंट-A | किसानों द्वारा अपनी बंजर/अनुपयोगी भूमि पर 500 kW से 2 MW क्षमता के विकेंद्रीकृत ग्रिड-कनेक्टेड सौर संयंत्रों की स्थापना। | • देश का प्रथम सौर संयंत्र: राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ (तत्कालीन जयपुर) जिले के भालोजी गाँव में 1 MW क्षमता का कमीशन किया गया। |
| कंपोनेंट-B | ऑफ-ग्रिड क्षेत्रों में 7.5 HP तक के स्टैंडअलोन सोलर कृषि पंपों की स्थापना। | • राजस्थान देश में सर्वाधिक सोलर पंप स्थापित कर प्रथम स्थान पर रहा। |
| कंपोनेंट-C | मौजूदा ग्रिड-कनेक्टेड कृषि पंपों का सोलराइजेशन (व्यक्तिगत पंप एवं फीडर-लेवल सोलराइजेशन)। | • फीडर लेवल सोलराइजेशन से किसानों को दिन के समय सिंचाई हेतु विश्वसनीय बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। |
6. पवन ऊर्जा (Wind Energy)
संभावना एवं भौगोलिक कारक
- पश्चिमी राजस्थान के मरुस्थलीय जिलों में तेज और निरंतर चलने वाली पछुआ हवाएं पवन चक्कियों के संचालन हेतु सर्वोत्तम परिस्थितियां निर्मित करती हैं। - नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ विंड एनर्जी (NIWE) के अनुसार 120 मीटर हब ऊंचाई पर राजस्थान की पवन ऊर्जा क्षमता लगभग **127.7 GW** आकलित की गई है।प्रमुख पवन ऊर्जा केंद्र एवं मील के पत्थर
- **अमरसागर (जैसलमेर):** 10 अप्रैल 1999 को राजस्थान की **प्रथम पवन ऊर्जा परियोजना** (क्षमता 2 MW) RRECL द्वारा स्थापित की गई। - **देवगढ़ (प्रतापगढ़):** 6 मार्च 2001 को राज्य की **दूसरी पवन ऊर्जा परियोजना** स्थापित की गई। - **फलोदी (जोधपुर/फलोदी):** राज्य की **तीसरी पवन ऊर्जा परियोजना** (2001)। - **बड़ा बाग (जैसलमेर):** निजी क्षेत्र की राज्य में **प्रथम पवन ऊर्जा परियोजना** (मेसर्स राजस्थान रिन्यूएबल्स द्वारा)। - **अन्य प्रमुख पवन फार्म:** सोढ़ा बंधन, आकल, हंसुआ, पोकरण (जैसलमेर) तथा हर्ष पर्वत (सीकर)। - जैसलमेर जिले को बड़ी संख्या में पवन चक्कियाँ स्थापित होने के कारण **'पंखों की नगरी' (City of Windmills)** कहा जाता है।7. जैव ऊर्जा एवं बायोमास (Biomass & Bio-Energy)
ईंधन स्रोत एवं कार्यप्रणाली
- राजस्थान में कृषि अपशिष्ट (सरसों की तूड़ी, कपास के डंठल, चावल की भूसी) तथा मरुस्थलीय खरपतवार 'विलायती बबूल' (Prosopis juliflora) बायोमास विद्युत उत्पादन के प्रमुख ईंधन स्रोत हैं। - बायोमास ऊर्जा पर्यावरण अनुकूल है क्योंकि यह पराली/तूड़ी जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण को रोकती है और किसानों को अतिरिक्त आय प्रदान करती है।प्रमुख बायोमास संयंत्र
- **पदमपुर (श्रीगंगानगर):** राजस्थान का **पहला बायोमास पावर प्लांट** (सरसों की तूड़ी पर आधारित)। - **रंगपुर (कोटा):** चावल की भूसी (Paddy Husk) आधारित बायोमास संयंत्र। - **कोटपूतली (जयपुर):** सरसों की तूड़ी आधारित संयंत्र। - **खेड़ली (अलवर):** सरसों की तूड़ी आधारित संयंत्र। - **बालोतरा (बाड़मेर):** शहरी एवं औद्योगिक अपशिष्ट आधारित। - **कंप्रेस्ड बायो-गैस (CBG):** 'सैटैट' (SATAT) पहल और गोबर-धन योजना के तहत डेयरी अपशिष्ट से बायोगैस उत्पादन।8. संस्थागत संरचना एवं नियामक तंत्र (Institutional Framework)
राजस्थान विद्युत क्षेत्र का प्रशासनिक ढाँचा
├── ऊर्जा विभाग, राजस्थान सरकार (Department of Energy)
├── 1. उत्पादन: राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (RVUNL)
├── 2. पारेषण: राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड (RVPNL - State Transmission Utility)
├── 3. वितरण (Discoms): JVVNL (जयपुर), AVVNL (अजमेर), JdVVNL (जोधपुर)
├── 4. ट्रेडिंग/समन्वय: राजस्थान ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (RUVNL)
├── 5. अक्षय ऊर्जा नोडल एजेंसी: राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड (RRECL)
└── 6. विनियामक संस्था: राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग (RERC)