राजस्थान के प्रमुख उद्योग एवं औद्योगिक क्षेत्र (Major Industries and Industrial Regions of Rajasthan)

1. राजस्थान का औद्योगिक परिदृश्य एवं आर्थिक योगदान

ऐतिहासिक एवं संरचनात्मक पृष्ठभूमि

- **1949 (एकीकरण के समय):** राजस्थान औद्योगिक दृष्टि से अत्यंत पिछड़ा राज्य था। पूरे राज्य में मात्र **11 बड़े कारखाने** कार्यरत थे: - 7 सूती वस्त्र मिलें (ब्यावर, भीलवाड़ा, पाली, श्रीगंगानगर आदि में) - 2 चीनी मिलें (भोपालसागर एवं श्रीगंगानगर) - 2 सीमेंट कारखाने (लाखेरी एवं सवाई माधोपुर) - **सकल राज्य मूल्य संवर्धन (GSVA) में योगदान:** राजस्थान की आर्थिक समीक्षा के अनुसार राज्य के जीएसवीए में उद्योग क्षेत्र (मैन्युफैक्चरिंग, माइनिंग, निर्माण, विद्युत-गैस-जल आपूर्ति) का योगदान लगभग **27.7 प्रतिशत** (प्रचलित मूल्यों पर) रहता है। इसमें विनिर्माण (Manufacturing) उप-क्षेत्र का हिस्सा लगभग 36-38 प्रतिशत है। - **औद्योगिक नीतियों की विकास यात्रा:** 1. **प्रथम औद्योगिक नीति (1978):** तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत के कार्यकाल में घोषित (लघु व कुटीर उद्योगों तथा खादी को प्राथमिकता)। 2. **द्वितीय औद्योगिक नीति (1990):** औद्योगिक बुनियादी ढाँचे और रोजगार सृजन पर बल। 3. **तृतीय औद्योगिक नीति (1994):** निजी क्षेत्र और विदेशी निवेश को आकर्षित करने की शुरुआत। 4. **चतुर्थ औद्योगिक नीति (1998):** तीव्र औद्योगीकरण, निवेश प्रोत्साहन और सूचना प्रौद्योगिकी को बढ़ावा। 5. **औद्योगिक विकास नीति 2010 एवं 2015:** क्लस्टर विकास और इज ऑफ डूइंग बिजनेस। 6. **राजस्थान औद्योगिक विकास नीति 2019 (1 जुलाई 2019 से प्रभावी):** राज्य को समावेशी, संतुलित एवं सतत औद्योगिक केंद्र बनाना, 4G इंफ्रास्ट्रक्चर, ई-गवर्नेंस और उन्नत मैन्युफैक्चरिंग।

2. वस्त्र उद्योग (Textile Industry)

वस्त्र उद्योग राजस्थान का सबसे प्राचीन, परंपरागत, सुसंगठित और कृषि के बाद सर्वाधिक रोजगार प्रदाता उद्योग है।

प्रमुख ऐतिहासिक सूती वस्त्र मिलें

मिल का नाम स्थापना वर्ष स्थान / जिला क्षेत्र (Sector) एवं मुख्य तथ्य
द कृष्णा मिल्स लिमिटेड 1889 ब्यावर (अजमेर/ब्यावर) • राजस्थान की प्रथम सूती वस्त्र मिल।
• सेठ दामोदर दास राठी एवं श्यामजी कृष्ण वर्मा द्वारा निजी क्षेत्र में स्थापित।
एडवर्ड मिल्स लिमिटेड 1906 ब्यावर • राज्य की दूसरी सूती वस्त्र मिल।
महालक्ष्मी मिल्स लिमिटेड 1925 ब्यावर • निजी क्षेत्र की स्थापित मिल।
मेवाड़ टेक्सटाइल मिल्स 1938 भीलवाड़ा • भीलवाड़ा में स्थापित प्रथम वस्त्र मिल।
महाराजा उम्मेद मिल्स 1942 पाली • उत्पादन और करघों की दृष्टि से राजस्थान की सबसे बड़ी सूती वस्त्र मिल।
शार्दुल टेक्सटाइल्स 1946 श्रीगंगानगर • कपास उत्पादक क्षेत्र में स्थापित।
कोटा टेक्सटाइल्स 1956 कोटा • स्वतंत्रता के बाद स्थापित प्रमुख मिल।

भीलवाड़ा: राजस्थान का मैनचेस्टर

- भीलवाड़ा को **'राजस्थान का मैनचेस्टर' (Manchester of Rajasthan)** और **'वस्त्र नगरी' (Textile City)** कहा जाता है। - यह भारत में सिंथेटिक (Polyester-Viscose) सूटिंग्स और धागे का सबसे बड़ा उत्पादन केंद्र है। - **टाउन ऑफ एक्सपोर्ट एक्सीलेंस (TEE):** वस्त्र निर्यात में विशिष्ट योगदान के कारण केंद्र सरकार के वाणिज्य मंत्रालय द्वारा वर्ष **2009** में भीलवाड़ा को 'Town of Export Excellence' का दर्जा प्रदान किया गया। - प्रमुख क्लस्टर: किशनगढ़ (पॉवरलूम), बालोतरा (पोपलीन कपड़ा व रंगाई-छपाई), पाली (रंगाई-छपाई उद्योग)।

सहकारी एवं सार्वजनिक क्षेत्र: स्पिंफेड (SPINFED)

- **गठन:** **1 अप्रैल 1993** को राज्य की तीन सहकारी कताई मिलों तथा एक जिनिंग मिल को मिलाकर **राजस्थान राज्य सहकारी स्पिनिंग एवं जिनिंग मिल्स फेडरेशन लिमिटेड (SPINFED)** का गठन किया गया: 1. राजस्थान सहकारी कताई मिल (गुलाबपुरा, भीलवाड़ा - 1965) 2. गंगापुर सहकारी कताई मिल (गंगापुर, भीलवाड़ा - 1981) 3. श्रीगंगानगर सहकारी कताई मिल (हनुमानगढ़ - 1978) 4. गुलाबपुरा जिनिंग प्रेसिंग सहकारी मिल।

पीएम मित्र (PM MITRA) मेगा टेक्सटाइल पार्क

- भारत सरकार की पीएम मित्र योजना के तहत राजस्थान के जोधपुर जिले के **कांकाणी (Kakani)** में 1000 एकड़ क्षेत्र में विश्वस्तरीय प्लग-एंड-प्ले सुविधाओं वाला **मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल (PM MITRA) पार्क** स्वीकृत किया गया है।

3. सीमेंट उद्योग (Cement Industry)

राजस्थान सीमेंट के कच्चे माल (विंध्यन चूना पत्थर, जिप्सम एवं कोयला निकटता) की प्रचुरता के कारण भारत में सीमेंट उत्पादन में प्रथम स्थान रखता है।

प्रमुख मील के पत्थर एवं संयंत्र

सीमेंट कंपनी / संयंत्र स्थान एवं जिला प्रमुख विशेषताएँ
क्लिक निक्सन कंपनी (ACC) लाखेरी (बूंदी) • राजस्थान का प्रथम सीमेंट कारखाना (1915 में स्थापित, 1917 से उत्पादन)।
जयपुर उद्योग लिमिटेड सवाई माधोपुर • 1953 में स्थापित; अपने समय में एशिया का सबसे बड़ा सीमेंट संयंत्र रहा (वर्तमान में बंद)।
जे.के. सीमेंट वर्क्स निंबाहेड़ा (चित्तौड़गढ़) • 1974 में स्थापित, राज्य के सबसे बड़े संयंत्रों में शामिल।
बिड़ला सीमेंट वर्क्स चंदेरिया (चित्तौड़गढ़) • चित्तौड़गढ़ को राजस्थान की 'सीमेंट नगरी' (Cement City) कहा जाता है।
श्री सीमेंट लिमिटेड ब्यावर (अजमेर/ब्यावर) • ऊर्जा दक्षता और शून्य अपशिष्ट हेतु विश्व स्तर पर ख्यातिप्राप्त (रसम, सिरोही व सूरतगढ़ में भी इकाइयाँ)।
अल्ट्राटेक सीमेंट कोटपूतली (जयपुर) व सांवरिया (चित्तौड़गढ़) • देश की सबसे बड़ी सीमेंट उत्पादक कंपनी।
श्रीराम सीमेंट कोटा • श्रीराम फर्टिलाइजर्स कॉम्प्लेक्स के साथ एकीकृत।

सफेद सीमेंट संयंत्र (White Cement Plants)

1. **जे.के. व्हाइट सीमेंट - गोटन (नागौर):** वर्ष **1984** में स्थापित **भारत का प्रथम सफेद सीमेंट कारखाना**। 2. **बिड़ला व्हाइट सीमेंट - खारिया खंगार (जोधपुर):** वर्ष **1988** में स्थापित, देश का सबसे बड़ा सफेद सीमेंट विनिर्माण परिसर। 3. **जे.के. व्हाइट - मांगरोल (चित्तौड़गढ़):** अतिरिक्त आधुनिक इकाई।

4. खनिजाधारित उद्योग (Mineral-based Processing)

  • सीसा-जस्ता प्रद्रावक (Smelters):
    • देबारी (उदयपुर - 1968): हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड (HZL) द्वारा स्थापित जस्ता प्रद्रावक संयंत्र।
    • चंदेरिया (चित्तौड़गढ़): हाइड्रो-मेटलर्जिकल एवं पाइरो-मेटलर्जिकल तकनीकों वाला एशिया का सबसे बड़ा एकल-स्थान सीसा-जस्ता स्मेल्टर कॉम्प्लेक्स।
    • दरीबा (राजसमंद): लेड-जिंक स्मेल्टर।
  • ताँबा प्रद्रावक (Copper Smelter):
    • खेतड़ी कॉपर कॉम्प्लेक्स (KCC - झुंझुनूं): हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) द्वारा 1975 में चालू किया गया एकीकृत ताँबा खनन, सांद्रण, प्रद्रावक और रिफाइनरी संयंत्र।
  • पत्थर प्रसंस्करण (Dimension Stone Processing):
    • किशनगढ़ (अजमेर): एशिया की सबसे बड़ी मार्बल मंडी (कच्चे ब्लॉक आयात कर पॉलिशिंग व कटिंग)।
    • मकराना (डीडवाना-कुचामन): सफेद कैल्साइट संगमरमर की कटाई व नक्काशी।
    • रामगंजमंडी एवं सुकेत (कोटा): कोटा स्टोन कटिंग व पॉलिशिंग हब।
    • जालौर: ग्रेनाइट कटिंग, पॉलिशिंग एवं गैंगसॉ इकाइयाँ (ग्रेनाइट सिटी)।
  • सिरेमिक एवं ग्लास उद्योग (Ceramics & Glass):
    • सेंट-गोबेन ग्लास (Saint-Gobain) - कहरानी (भिवाड़ी): एशिया का सबसे बड़ा फ्लोट ग्लास (Float Glass) विनिर्माण संयंत्र।
    • गिलौठ (नीमराना): रीको द्वारा विकसित देश का प्रमुख सिरेमिक एवं सैनिटरीवेयर औद्योगिक क्षेत्र।
    • धौलपुर ग्लास वर्क्स (धौलपुर): सिलिका बालू की प्रचुरता के कारण ऐतिहासिक कांच उद्योग।

5. इंजीनियरिंग एवं ऑटोमोबाइल उद्योग (Engineering & Automobile)

ऑटोमोबाइल एवं जापानी क्लस्टर

- **भिवाड़ी-नीमराना-टपूकड़ा-खुशखेड़ा बेल्ट (खैरथल-तिजारा / अलवर):** - उत्तरी भारत का प्रमुख ऑटोमोबाइल विनिर्माण केंद्र। - **होंडा कार्स इंडिया:** टपूकड़ा में मेगा ऑटोमोबाइल असेंबली व इंजन संयंत्र। - **हीरो मोटोकॉर्प:** नीमराना में दोपहिया वाहन संयंत्र एवं ग्लोबल पार्ट्स सेंटर (GPC)। - **जापानी औद्योगिक क्षेत्र (Japanese Industrial Zones):** - **नीमराना (फेज-I):** रीको (RIICO) और जापान एक्सटर्नल ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (JETRO) के मध्य 2006 में हस्ताक्षरित एमओयू के तहत भारत का पहला समर्पित जापानी औद्योगिक क्षेत्र (दाइकिन, निसिन, मित्सुई, यूनिकार्म आदि)। - **गिलौठ (फेज-II):** दूसरा जापानी क्लस्टर (सिरेमिक्स, इलेक्ट्रॉनिक और इंजीनियरिंग)।

प्रमुख ऐतिहासिक भारी इंजीनियरिंग इकाइयाँ

- **नेशनल इंजीनियरिंग इंडस्ट्रीज (NEI / NBC Bearings, जयपुर):** 1946 में सी.के. बिड़ला समूह द्वारा स्थापित। 'NBC' ब्रांड नेम से बॉल एवं रोलर बेयरिंग का **एशिया का सबसे बड़ा विनिर्माता**। - **इंस्ट्रूमेंटेशन लिमिटेड (Instrumentation Ltd - कोटा):** भारत सरकार का सार्वजनिक उपक्रम (स्थापना 1964), औद्योगिक नियंत्रण व मापन उपकरणों का विनिर्माण (वर्तमान में पुनर्गठित)। - **हिंदुस्तान मशीन टूल्स (HMT - अजमेर):** 1967 में चेकोस्लोवाकिया के सहयोग से ग्राइंडिंग मशीन टूल्स हेतु स्थापित (केंद्रीय पीएसयू)। - **सिम्को वैगन वर्क्स (SIMCO - भरतपुर):** सेंट्रल इंडिया मशीनरी मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (स्थापना 1957), रेलवे वैगनों का प्रमुख निजी विनिर्माण संयंत्र।

6. रसायन एवं उर्वरक उद्योग (Chemical & Fertilizer)

  • चंबल फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड (CFCL) - गडेपान (कोटा):
    • निजी क्षेत्र (के.के. बिड़ला समूह) का भारत का सबसे बड़ा गैस-आधारित यूरिया संयंत्र।
    • एचबीजे पाइपलाइन से प्राकृतिक गैस प्राप्त कर गडेपान-I, II और III इकाइयाँ संचालित।
  • श्रीराम फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स - कोटा:
    • डीसीएम (DCM) समूह द्वारा संचालित; यूरिया, कास्टिक सोडा, पीवीसी रेजिन और हाइड्रोक्लोरिक एसिड का एकीकृत परिसर।
  • राजस्थान स्टेट केमिकल वर्क्स - डीडवाना (नागौर/डीडवाना):
    • राज्य सरकार का उपक्रम; स्थानीय खारे पानी से सोडियम सल्फेट और सोडियम सल्फाइड का उत्पादन।
  • मोदी एल्केलीज एंड केमिकल्स - अलवर:
    • कास्टिक सोडा, क्लोरीन और हाइड्रोक्लोरिक एसिड का प्रमुख उत्पादक।
  • उर्वरक संयंत्र - कपासन (चित्तौड़गढ़) व झामरकोटड़ा (उदयपुर):
    • सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) एवं डी-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) विनिर्माण।

7. कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग (Agro & Food Processing)

चीनी उद्योग (Sugar Industry)

1. **दी मेवाड़ शुगर मिल्स - भोपालसागर (चित्तौड़गढ़):** वर्ष **1932** में स्थापित **राजस्थान की प्रथम चीनी मिल** (निजी क्षेत्र)। 2. **दि गंगानगर शुगर मिल्स - श्रीगंगानगर:** - स्थापना: 1937 में बीकानेर इंडस्ट्रियल कॉरपोरेशन के रूप में (निजी क्षेत्र)। - 1956 में राज्य सरकार द्वारा अधिग्रहीत (सार्वजनिक क्षेत्र)। - **1968 में चुकंदर से चीनी बनाने का भारत का पहला संयंत्र** यहाँ स्थापित किया गया। - वर्तमान में इसे कमीनपुरा (श्रीगंगानगर) में आधुनिक एकीकृत चीनी, डिस्टिलरी एवं को-जनरेशन प्लांट के रूप में स्थानांतरित किया गया है। 3. **दि केशोरायपाटन सहकारी शुगर मिल - बूंदी:** - स्थापना: वर्ष **1965** (राज्य की **एकमात्र सहकारी क्षेत्र की चीनी मिल**; वर्तमान में पेराई बंद)।

ऊन एवं चमड़ा उद्योग

- राजस्थान भारत के कुल ऊन उत्पादन का **लगभग 35 से 40 प्रतिशत** उत्पादन कर देश में **प्रथम स्थान** पर है। - **बीकानेर:** **एशिया की सबसे बड़ी ऊन मंडी (Wool Mandi)**। - **स्टेट वूलन मिल्स:** बीकानेर (सार्वजनिक क्षेत्र का कताई संयंत्र)। - **वूलन यार्न मिल्स:** चूरू एवं लाडनूं (डीडवाना)। - **केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान (CSWRI):** अविकानगर (मालपुरा, टोंक)। - **मानपुरा माचेड़ी (जयपुर):** चमड़ा परिसर (लेदर कॉम्प्लेक्स)।

खाद्य तेल एवं तिलहन उद्योग

- राजस्थान भारत में सरसों का सबसे बड़ा उत्पादक है। - **भरतपुर:** **'इंजन छाप'** सरसों तेल का देशव्यापी प्रसिद्ध केंद्र। - **जयपुर:** 'वीर बालक' सरसों तेल व खाद्य तेल रिफाइनरियां। - **अलवर, कोटा, श्रीगंगानगर:** प्रमुख तेल पेराई एवं सॉल्वेंट एक्सट्रैक्शन क्लस्टर।

एग्रो फूड पार्क्स एवं मेगा फूड पार्क

- **रीको (RIICO) द्वारा विकसित 4 एग्रो फूड पार्क्स:** 1. रानपुर (कोटा) 2. बोरानाडा (जोधपुर) 3. श्रीगंगानगर (रैंपुरा मंडी) 4. मत्सय (अलवर) - **ग्रीनटेक मेगा फूड पार्क (Greentech Mega Food Park):** रूपनगढ़ (अजमेर) - भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सहयोग से निजी क्षेत्र द्वारा स्थापित राज्य का प्रथम मेगा फूड पार्क।

8. नमक उद्योग (Salt Industry)

राजस्थान अंतःस्थलीय (Inland) खारे पानी से नमक उत्पादन में भारत में प्रथम स्थान पर है तथा कुल नमक उत्पादन में गुजरात और तमिलनाडु के बाद तृतीय स्थान (लगभग 8-9%) रखता है।

प्रमुख नमक उत्पादन केंद्र

1. **सांभर झील (जयपुर/नागौर/अजमेर सीमा):** - **सांभर साल्ट्स लिमिटेड (SSL):** भारत सरकार के उपक्रम हिंदुस्तान साल्ट्स लिमिटेड (60%) एवं राजस्थान सरकार (40%) का संयुक्त उपक्रम। - यहाँ क्यार पद्धति (Kyar Salt) और रीश पद्धति (Reshta Salt) से उच्च गुणवत्ता वाला आयोडीन युक्त नमक तैयार किया जाता है। 2. **पचपदरा (बालोतरा/बाड़मेर):** - स्थानीय **खारवाल जाति** द्वारा परंपरागत रूप से **'मोरली झाड़ी'** की टहनियों का उपयोग कर गड्ढों (कूंओं) के खारे जल से स्फटिक नमक तैयार किया जाता है। - इस नमक में 98 प्रतिशत तक सोडियम क्लोराइड (NaCl) होता है, जिससे यह खाने की दृष्टि से सर्वोत्तम माना जाता है। 3. **डीडवाना (नागौर/डीडवाना):** - निजी संस्थाओं द्वारा गड्ढे बनाकर तैयार किया जाने वाला नमक **'देवल' (Deval)** कहलाता है। - सोडियम सल्फेट की अधिकता के कारण यह नमक खाने योग्य नहीं होता और इसका उपयोग चमड़ा शोधन तथा रंगाई उद्योगों में होता है।

9. रत्न-आभूषण उद्योग एवं विशेष आर्थिक क्षेत्र (Gems, Jewellery & SEZ)

रत्न एवं आभूषण (Gems & Jewellery)

- जयपुर विश्व स्तर पर **पन्ना (Emerald), माणक, नीलम और अर्ध-बहुमूल्य पत्थरों की कटाई-तराशी (Cutting & Polishing)** का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय केंद्र है। - **जौहरी बाजार (जयपुर):** एशिया का प्रसिद्ध रत्न व्यापार बाजार। - कुंदन, मीनाकारी और जड़ाऊ आभूषणों के विनिर्माण का प्रमुख औद्योगिक आधार।

विशेष आर्थिक क्षेत्र (Special Economic Zones - SEZ)

सेज (SEZ) का नाम स्थान प्रवर्तक मुख्य उत्पाद / फोकस
सीतापुरा सेज-I एवं II सीतापुरा (जयपुर) RIICO • जेम्स, ज्वैलरी, रंगीन रत्न एवं आभूषण निर्यात
महिंद्रा वर्ल्ड सिटी कलवाड़ा (जयपुर) महिंद्रा समूह एवं RIICO • बहु-उत्पाद सेज (IT/ITeS, ऑटो कंपोनेंट्स, इंजीनियरिंग, हैंडीक्राफ्ट)
बोरानाडा सेज बोरानाडा (जोधपुर) RIICO • हस्तशिल्प (Handicrafts) एवं ग्वार गम उत्पाद

10. सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME Sector)

राजस्थान एमएसएमई नीति 2022

- अधिसूचना तिथि: **17 सितंबर 2022** (प्रतिवर्ष 17 सितंबर को **राज्य एमएसएमई दिवस** मनाया जाता है)। - प्रमुख लक्ष्य: 20,000 नई एमएसएमई इकाइयों की स्थापना, 10,000 करोड़ का निवेश और 1 लाख नए रोजगार सृजित करना।

राजस्थान एमएसएमई (स्थापना और प्रवर्तन का सुगमीकरण) अधिनियम 2019

- **अधिसूचना:** 17 जुलाई 2019 को लागू। - **प्रावधान:** राज्य में नया सूक्ष्म, लघु या मध्यम उद्योग लगाने वाले उद्यमी को 'राजउद्योग मित्र' पोर्टल पर केवल एक 'डिक्लेरेशन ऑफ इंटेंट' (घोषणा पत्र) प्रस्तुत करना होता है। - पावती प्रमाणपत्र जारी होने की तिथि से **3 वर्ष (बाद में संशोधित कर 5 वर्ष किया गया)** तक राज्य सरकार के सभी अधिनियमों के तहत **निरीक्षणों (Inspections) और पूर्व अनुमतियों (Approvals) से पूर्ण छूट** प्रदान की जाती है।

मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना (MLUPY)

- लागू तिथि: **13 दिसंबर 2019** - उद्देश्य: विनिर्माण, सेवा एवं व्यापार क्षेत्र में नए उद्यम स्थापित करने या आधुनिकीकरण हेतु बैंकों के माध्यम से रियायती ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराना। - **ब्याज अनुदान स्लैब (Interest Subvention):** - ₹25 लाख तक के ऋण पर: **8 प्रतिशत** ब्याज अनुदान - ₹25 लाख से ₹5 करोड़ तक: **6 प्रतिशत** ब्याज अनुदान - ₹5 करोड़ से ₹10 करोड़ तक: **5 प्रतिशत** ब्याज अनुदान

11. औद्योगिक संस्थागत संरचना (Institutional Architecture)

1. रीको (RIICO - Rajasthan State Industrial Development and Investment Corporation)

- **स्थापना:** 28 मार्च 1969 को 'राजस्थान राज्य उद्योग एवं खनिज विकास निगम' (RSIMDC) के रूप में स्थापित; **जनवरी 1980** में खनिज विभाग अलग होने के बाद स्वतंत्र रूप से **RIICO** बना। - **मुख्यालय:** उद्योग भवन, जयपुर। - **कार्य:** - राज्य में औद्योगिक क्षेत्रों की योजना बनाना, भूमि अधिग्रहण और अधोसंरचना विकास (सड़क, पानी, बिजली, सीईटीपी)। - राज्य में 390 से अधिक औद्योगिक क्षेत्रों का संचालन। - मध्यम एवं बड़े उद्योगों को सावधि ऋण (Term Loan) एवं वित्तीय सहायता। - विशिष्ट पार्कों का विकास (एग्रो पार्क, जापानी पार्क, टेक्सटाइल पार्क, इलेक्ट्रॉनिक्स पार्क)।

2. राजस्थान वित्त निगम (RFC - Rajasthan Financial Corporation)

- **स्थापना:** **17 जनवरी 1955** को राज्य वित्त निगम अधिनियम 1951 के अंतर्गत। - **मुख्यालय:** जयपुर। - **कार्य:** सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम श्रेणी के नए उद्योगों की स्थापना, विस्तार व आधुनिकीकरण हेतु **₹20 करोड़ तक का दीर्घकालिक ऋण** प्रदान करना। - योजनाएँ: शिल्पबाड़ी योजना, सेमफैक्स (भूतपूर्व सैनिकों हेतु), महिला उद्यम निधि।

3. राजसिको (RAJSICO - Rajasthan Small Industries Corporation)

- **स्थापना:** **3 जून 1961** को कंपनी अधिनियम के तहत। - **कार्य:** - लघु व हस्तशिल्प इकाइयों को कच्चा माल (कोयला, लोहा, स्टील आदि) रियायती दर पर उपलब्ध कराना। - हस्तशिल्प उत्पादों के विपणन हेतु **'राजस्थली' (Rajasthali)** एम्पोरियम का संचालन (जयपुर, दिल्ली, कोलकाता, उदयपुर)। - निर्यात संवर्धन हेतु अंतर्देशीय कंटेनर डिपो (Inland Container Depots - ICDs / Dry Ports) का संचालन।

4. निवेश संवर्धन ब्यूरो (BIP - Bureau of Investment Promotion)

- **स्थापना:** वर्ष **1991** में। - **भूमिका:** राज्य में **₹10 करोड़ से अधिक के बड़े निवेश प्रस्तावों** के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम (Single Window System) की राज्य नोडल एजेंसी।

5. जिला उद्योग एवं वाणिज्य केंद्र (DICs)

- राजस्थान के सभी 33/50 जिलों में उद्यमियों को स्थानीय स्तर पर सहायता, पंजीकरण और परामर्श प्रदान करने हेतु **36 जिला उद्योग एवं वाणिज्य केंद्र** तथा **8 उप-केंद्र** कार्यरत हैं।

12. औद्योगिक गलियारे, निर्यात एवं निवेश नीतियाँ

दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा (DMIC)

- **अवधारणा:** दादरी (उत्तर प्रदेश) से जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (मुंबई) तक 1504 किमी लंबा वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (WDFC) का प्रभाव क्षेत्र। - **राजस्थान में हिस्सेदारी:** WDFC का लगभग **38 प्रतिशत हिस्सा (लगभग 1150 किमी)** राजस्थान से होकर गुजरता है। - **निवेश क्षेत्र एवं नोड्स (राजस्थान में):** 1. **खुशखेड़ा-भिवाड़ी-नीमराना निवेश क्षेत्र (KBNIR - 165 वर्ग किमी):** प्रथम चरण का शीर्ष विनिर्माण हब। 2. **जोधपुर-पाली-मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र (JPMIA - 154 वर्ग किमी):** द्वितीय प्रमुख नोड।

अंतर्देशीय कंटेनर डिपो (ICDs / Dry Ports)

- राज्य के निर्यातकों को समुद्री बंदरगाह जैसी सीमा शुल्क व कंटेनर क्लीयरेंस सुविधा उपलब्ध कराने हेतु राजसिको द्वारा 4 शुष्क बंदरगाह (Dry Ports) संचालित हैं: 1. **जयपुर (सांगानेर)** 2. **जोधपुर (बासनी)** 3. **कोटा (रावथा रोड)** 4. **भीलवाड़ा**

राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना (RIPS 2019 एवं RIPS 2022)

- **RIPS 2022:** 7 अक्टूबर 2022 (इन्वेस्ट राजस्थान समिट 2022 के दौरान) लागू की गई। - **प्रोत्साहन:** पूंजीगत अनुदान (Capital Subsidy), रोजगार सृजन अनुदान, विद्युत शुल्क, मंडी शुल्क और स्टाम्प ड्यूटी में **100 प्रतिशत तक छूट**।

निर्यात परिदृश्य एवं 'मिशन निर्यातक बनो'

- **मिशन निर्यातक बनो (Mission Niryatak Bano):** राजस्थान उद्योग विभाग एवं रीको द्वारा **29 जुलाई 2021** को प्रारंभ किया गया। इसका उद्देश्य राज्य के स्थानीय विनिर्माताओं और उद्यमियों को प्रशिक्षण एवं आईईसी कोड (IEC Code) जारी कर निर्यातक बनाना है। - **राजस्थान के शीर्ष 5 निर्यात उत्पाद:** 1. इंजीनियरिंग वस्तुएं (Engineering Goods) 2. वस्त्र एवं परिधान (Textiles & Readymade Garments) 3. धातु उत्पाद एवं रासायनिक उत्पाद 4. रत्न एवं आभूषण (Gems & Jewellery) 5. हस्तशिल्प एवं ग्वार गम उत्पाद - **वार्षिक निर्यात:** वित्तीय वर्ष 2022-23 तथा 2023-24 में राजस्थान से कुल वस्तु निर्यात **₹75,000 करोड़ से अधिक** दर्ज किया गया।