अध्याय 5: जन-जन के भगवान - राजस्थान के लोक देवता एवं लोक देवियाँ

परीक्षा प्रासंगिकता: RPSC / RSSB / REET / बोर्ड परीक्षा

SECTION 2: परीक्षा दृष्टि से महत्वपूर्ण

राजस्थान के लोक देवता प्रायः ऐसे वीर, संत और लोकनायक हैं जिन्हें पशुधन की रक्षा, जनसेवा, साधना और सामाजिक समरसता के लिए याद किया जाता है। लोक देवियों की परंपरा में शक्ति-उपासना, कुलदेवियाँ और स्थानीय मातृदेवियाँ भी शामिल हैं। सभी देवियों को ऐतिहासिक मानव व्यक्तित्व मानना सही नहीं है।

मारवाड़ के पंच पीर हैं: पाबूजी, हड़बूजी, रामदेवजी, मेहाजी और गोगाजी। तेजाजी प्रमुख लोक देवता हैं, लेकिन इस सूची में शामिल नहीं हैं। अनेक लोकदेवताओं की आराधना जाति और धर्म की सीमाओं से आगे जाती है; क्षेत्रीय परंपराओं में भिन्नता भी मिलती है।

मुख्य शब्द: पंच पीर, कामड़िया, बिश्नोई, निष्कलंकी, तेरहताली, फड़, ओरण। अवतार, चमत्कार और जन्मकथाओं को यहाँ लोकमान्यता के रूप में पढ़ें। प्रश्नों की संख्या परीक्षा के अनुसार बदलती है।

SECTION 3: जिला-वार परिचय

जिला/क्षेत्र देवता या देवी प्रमुख संबंध
बीकानेर जाम्भोजी, करणी माता समराथल धोरा, मुकाम; देशनोक
बाड़मेर रामदेवजी जन्मस्थली उण्डू काशमीर
जैसलमेर रामदेवजी समाधि: रामदेवरा (रूणेचा)
हनुमानगढ़ गोगाजी गोगामेड़ी
चूरू गोगाजी जन्मस्थली ददरेवा
डूंगरपुर मावजी साबला; वागड़ की भक्ति परंपरा
फलोदी पाबूजी, हड़बूजी, मेहाजी कोलू, बेंगटी, बापिणी; पूर्व जोधपुर क्षेत्र
नागौर तेजाजी, जाम्भोजी खरनाल (खड़नाल), पीपासर
डीडवाना-कुचामन तेजाजी, हरिदास निरंजनी परबतसर मेला; कापड़ोद, डीडवाना क्षेत्र
सिरोही/गोड़वाड़ भूरिया बाबा मीणा समुदाय के आराध्य; गौतम बाबा परंपरा
सीकर झुंझारजी, जीण माता स्यालोदड़ा; जीणमाता धाम
भरतपुर देव बाबा नगला जहाज
जयपुर शीतला माता चाकसू का शील की डूंगरी मंदिर
अलवर नारायणी माता बरवा क्षेत्र का मंदिर
करौली कैला देवी कैला देवी धाम
चित्तौड़गढ़ आवरी माता असावरा
जोधपुर सचिया माता ओसियां
भीलवाड़ा देवनारायणजी मालासेरी डूंगरी

जिला-सावधानी: कोलू पुराने विवरणों में जोधपुर और परबतसर पुराने विवरणों में नागौर में मिलता है। वर्तमान जिला पूछे जाने पर क्रमशः फलोदी और डीडवाना-कुचामन पढ़ें। पुराने प्रश्नों में उस समय का जिला-विभाजन लागू हो सकता है।

SECTION 4: मूल अवधारणाएँ और संप्रदाय

  • लोक देवता: लोकस्मृति में पूज्य वीर, संत या रक्षक; सभी का परिचय एक ही प्रकार का नहीं है।
  • पंच पीर: पाबूजी, हड़बूजी, रामदेवजी, मेहाजी, गोगाजी।
  • बिश्नोई: जाम्भोजी द्वारा 1485 ई. में समराथल धोरा में स्थापित; 29 नियम, जीव-दया और प्रकृति संरक्षण प्रमुख मूल्य हैं।
  • कामड़िया: रामदेवजी से जुड़ी भक्ति परंपरा; कामड़िया महिलाओं का तेरहताली नृत्य प्रसिद्ध है।
  • निष्कलंकी: संत मावजी और वागड़ क्षेत्र से संबंधित परंपरा।
  • निरंजनी: हरिदास निरंजनी (हरिपुरुष जी) से संबंधित; जन्मस्थान कापड़ोद, प्रमुख पीठ गाढ़ा धाम, डीडवाना क्षेत्र।
  • फड़: चित्रित पट पर आधारित लोकगाथा-गायन परंपरा; पाबूजी और देवनारायणजी की फड़ विशेष प्रसिद्ध हैं।
  • ओरण: देवस्थान से जुड़ा पवित्र वन या सामुदायिक संरक्षित भूभाग; इसे कोई ग्रंथ या संस्था न समझें।

SECTION 5: प्रमुख लोक देवता एवं देवियाँ

प्रमुख लोक देवता

देवता/संत जन्म/क्षेत्र पहचान और प्रमुख स्थल
रामदेवजी उण्डू काशमीर, बाड़मेर रामसा पीर; रामदेवरा, जैसलमेर में समाधि; घोड़े पर प्रतिमा
पाबूजी कोलू, फलोदी (पूर्व जोधपुर) राठौड़ लोकनायक; गायों की रक्षा की गाथा; ऊँटों के संरक्षक के रूप में भी पूज्य; घोड़ी केसर कालमी
गोगाजी ददरेवा, चूरू जाहरपीर, नागों से संबंधित रक्षक; गोगामेड़ी, हनुमानगढ़
तेजाजी खरनाल, नागौर गो-रक्षा, वचन-पालन और सर्प-संबंधी लोककथा; घोड़ी लीलण; परबतसर मेला
जाम्भोजी पीपासर, नागौर बिश्नोई संस्थापक; समराथल धोरा और मुकाम, बीकानेर
मावजी साबला, डूंगरपुर निष्कलंकी परंपरा; वागड़ में कृष्णावतार की मान्यता; बेणेश्वर से संबंध
हड़बूजी मारवाड़ पंच पीर; बेंगटी, फलोदी में पूजा; गाड़ी की पूजा की परंपरा
मेहाजी मारवाड़ पंच पीर; बापिणी, फलोदी प्रमुख स्थल
भूरिया बाबा गोड़वाड़ मीणा समुदाय के आराध्य; सिरोही क्षेत्र की गौतम बाबा परंपरा
झुंझारजी इमलोहा, सीकर की लोकपरंपरा गाँव की रक्षा का वीर; स्यालोदड़ा में रामनवमी मेला; खेजड़ी से जुड़ा थान
हरिपुरुष जी कापड़ोद, डीडवाना क्षेत्र हरिदास निरंजनी; गाढ़ा धाम की परंपरा, गागरोन नहीं
देवनारायणजी मालासेरी डूंगरी, भीलवाड़ा विशेषतः गुर्जर समुदाय में पूज्य; विष्णु-अवतार की मान्यता; फड़-गायन में जंतर
देव बाबा भरतपुर क्षेत्र नगला जहाज का मंदिर; पशुपालक समुदायों में श्रद्धा

रामदेवजी के माता-पिता लोकपरंपरा में अजमाल (अजमल) और मैणादे हैं। वीरमदेव (बीरमदेव) उनके बड़े भाई माने जाते हैं, पुत्र नहीं। पाबूजी के पिता धांधल राठौड़ माने जाते हैं। गोगाजी को नाग की कोई जैविक प्रजाति बताना गलत है।

प्रमुख लोक देवियाँ

देवी प्रमुख स्थान पहचान
करणी माता देशनोक, बीकानेर मंदिर में पूजे जाने वाले चूहे, जिन्हें काबा कहते हैं
शीतला माता शील की डूंगरी, चाकसू, जयपुर लोकमान्यता में रोगों से रक्षा; वाहन गधा
आवरी माता असावरा, चित्तौड़गढ़ स्थानीय मातृदेवी का प्रसिद्ध मंदिर
जीण माता सीकर शक्ति-उपासना और नवरात्रि मेला
कैला देवी करौली शक्ति-उपासना और चैत्र मेला
नारायणी माता बरवा, अलवर क्षेत्र स्थानीय आस्था का प्रमुख स्थल
सचिया माता ओसियां, जोधपुर ओसियां का प्रसिद्ध देवी मंदिर
खोडियार माता राजपरा, भावनगर, गुजरात का प्रसिद्ध धाम पड़ोसी क्षेत्र की देवी-परंपरा; इसे राजस्थान का जिला न मानें

नाम-सावधानी: सही नाम खोडियार माता है। राजपरा का प्रसिद्ध खोडियार माता मंदिर गुजरात के भावनगर क्षेत्र में है।

SECTION 6: प्रमुख स्थल और परीक्षा में अंतर

स्थल क्या याद रखें
उण्डू काशमीर / रामदेवरा रामदेवजी की जन्मस्थली / समाधि; बाड़मेर / जैसलमेर
ददरेवा / गोगामेड़ी गोगाजी की जन्मस्थली / प्रमुख धाम; चूरू / हनुमानगढ़
कोलू / खरनाल पाबूजी / तेजाजी; दोनों को न मिलाएँ
मुकाम / समराथल धोरा जाम्भोजी की समाधि / बिश्नोई स्थापना; दोनों बीकानेर क्षेत्र में
साबला / बेणेश्वर मावजी का जन्मस्थान / उनकी भक्ति परंपरा से जुड़ा तीर्थ
स्यालोदड़ा झुंझारजी का मेला, सीकर
कापड़ोद / गागरोन हरिदास निरंजनी / संत पीपा; अलग संत और अलग स्थान
नगला जहाज देव बाबा का मंदिर, भरतपुर
भूरिया बाबा / गौतमेश्वर समान नाम वाले तीर्थों से भ्रम न करें; भूरिया बाबा की गोड़वाड़-सिरोही परंपरा को उदयपुर न लिखें

SECTION 7: प्रमुख तिथियाँ और मेले

तिथि/वर्ष संबंध
1485 ई. जाम्भोजी द्वारा बिश्नोई संप्रदाय की स्थापना
भाद्रपद शुक्ल द्वितीयाा से एकादशी रामदेवरा मेले की परंपरागत मुख्य अवधि
भाद्रपद कृष्ण नवमी गोगा नवमी; गोगामेड़ी के मेले से संबंधित मुख्य पर्व
चैत्र शुक्ल नवमी (रामनवमी) झुंझारजी का स्यालोदड़ा मेला
भाद्रपद शुक्ल पंचमी और चैत्र शुक्ल पंचमी देव बाबा के नगला जहाज में दो वार्षिक मेले
भाद्रपद शुक्ल दशमी तेजा दशमी; तेजाजी की आराधना, परबतसर मेला इसी पर्व-परंपरा से जुड़ा है
चैत्र अमावस्या कोलू में पाबूजी का परंपरागत मेला

चंद्र-पंचांग की तिथि और किसी वर्ष मेले की पूरी प्रशासनिक अवधि एक नहीं होती। रामदेवजी के लिए दिया गया “1409-1462 वि.सं. जन्मकाल” प्रमाणित जन्मतिथि नहीं है; इसे याद करने योग्य निश्चित कालखंड के रूप में नहीं रखा गया है। जीवन-तिथियों की अलग लोकपरंपराएँ मिलती हैं।

SECTION 8: लघु अभ्यास प्रश्न

नीचे के प्रश्न अभ्यास के लिए हैं। मूल प्रश्नपत्र से पुष्टि न होने के कारण किसी परीक्षा या वर्ष का दावा नहीं किया गया है।

Q1. निम्न में से कौन मारवाड़ के पंच पीरों में शामिल नहीं हैं?

उत्तर: नामदेव जी

व्याख्या: नामदेव महाराष्ट्र की वारकरी भक्ति परंपरा से जुड़े संत हैं। पाबूजी, गोगाजी और रामदेवजी पंच पीरों में शामिल हैं।

Q2. बिश्नोई परंपरा में किस संस्थापक संत को विशेष श्रद्धा से पूजा जाता है?

उत्तर: जाम्भोजी की

व्याख्या: बिश्नोई जाम्भोजी को गुरु और विष्णु का अवतार मानते हैं। विष्णु-भक्ति भी इस संप्रदाय का प्रमुख आधार है।

Q3. 'कामड़िया पंथ' के संस्थापक कौन थे?

उत्तर: संत रामदेव

व्याख्या: बाबा रामदेवजी ने कामड़िया पंथ की शुरुआत की।

Q4. गोगाजी का मेला किस माह में भरता है?

उत्तर: भाद्रपद

व्याख्या: गोगामेड़ी का प्रमुख वार्षिक मेला भाद्रपद में लगता है; गोगा नवमी भाद्रपद कृष्ण नवमी है।

Q5. संत मावजी का संबंध है?

उत्तर: डूंगरपुर

व्याख्या: संत मावजी का जन्म डूंगरपुर के साबला गाँव में हुआ।

Q6. गोगाजी का जन्म स्थान?

उत्तर: ददरेवा

व्याख्या: गोगाजी का जन्म चूरू जिले के ददरेवा में हुआ।

Q7. मुकाम प्रसिद्ध है?

उत्तर: बिश्नोइयों के लिए

व्याख्या: मुकाम बिश्नोई संप्रदाय का सबसे पवित्र मुक्तिधाम है।

SECTION 9: त्वरित पुनरावृत्ति

विषय याद रखने का सूत्र
पंच पीर पा-ह-रा-मे-गो: पाबू, हड़बू, रामदेव, मेहा, गोगा
रामदेवजी कामड़िया; रामसा पीर; जन्म बाड़मेर, समाधि जैसलमेर
गोगाजी ददरेवा-चूरू; गोगामेड़ी-हनुमानगढ़; गोगा नवमी
पाबूजी कोलू-फलोदी; राठौड़; केसर कालमी
तेजाजी खरनाल; लीलण; तेजा दशमी
जाम्भोजी 1485 ई.; 29 नियम; मुकाम
मावजी साबला; वागड़; निष्कलंकी
करणी / शीतला देशनोक के चूहे / चाकसू, गधा वाहन

SECTION 10: अतिरिक्त परीक्षा बिंदु

  • “रामदेव = कामड़िया”, “जाम्भो = बिश्नोई”, “मावजी = निष्कलंकी” याद रखें।
  • रामदेवजी के चमत्कारों की कथाएँ पर्चे और भक्तिगीत ब्यावले कहलाते हैं।
  • जातीय संबंध किसी लोकदेवता की आराधना को केवल एक समुदाय तक सीमित नहीं करते।
  • किसी स्थल के साथ जन्म, समाधि, मेला या मंदिर में से कौन-सा संबंध पूछा गया है, पहले पहचानें।
  • उत्तर-पश्चिम में बीकानेर-मुकाम-देशनोक; उत्तर में चूरू-ददरेवा और हनुमानगढ़-गोगामेड़ी; पश्चिम में बाड़मेर-जन्मस्थली, जैसलमेर-रामदेवरा, फलोदी-कोलू; दक्षिण में डूंगरपुर-साबला याद रखें।