अध्याय 6: संतों की वाणी - राजस्थान के लोक संत

परीक्षा प्रासंगिकता: RPSC / RSSB / REET / बोर्ड परीक्षा

SECTION 2: मूल विचार

राजस्थान की संत परंपरा में निर्गुण और सगुण भक्ति, योग-साधना, गुरु-भक्ति तथा लोकभाषा में उपदेश की अनेक धाराएँ मिलती हैं। दादू, जसनाथ, चरणदास, रामचरण और अन्य संतों की शिक्षाओं ने आध्यात्मिक जीवन और साहित्य को प्रभावित किया। अनेक संतों ने जातिगत ऊँच-नीच, बाहरी आडंबर और धार्मिक संकीर्णता की आलोचना की। सभी संतों को एक ही पंथ या एक जैसी मान्यताओं में रखना सही नहीं है।

मुख्य शब्द: निर्गुण, सगुण, नाथ, जसनाथी, रामस्नेही, चरणदासी, दादू पंथ, पुष्टिमार्ग, निरंजनी, वाणी, साखी, पद। परीक्षा में प्रश्नों की संख्या निश्चित नहीं होती।

SECTION 3: जिला और क्षेत्र के अनुसार परिचय

जिला/क्षेत्र संत या परंपरा प्रमुख स्थान और संबंध
जयपुर दादूदयाल और दादू पंथ नरैना प्रमुख पीठ; सांभर और आमेर भी दादू के जीवन से जुड़े हैं; सांगानेर दादू-शिष्य रज्जब से संबंधित
बीकानेर जसनाथजी कतरियासर, जसनाथी परंपरा और अग्निनृत्य
जालोर जालंधरनाथ सिरे मंदिर; नाथ परंपरा
जोधपुर क्षेत्र रामदास और दयालुदास खेड़ापा की रामस्नेही पीठ
भीलवाड़ा रामचरण शाहपुरा की रामस्नेही पीठ और रामद्वारा
अलवर क्षेत्र चरणदास देहरा जन्मस्थली; प्रमुख कर्मभूमि दिल्ली
डीडवाना-कुचामन हरिदास निरंजनी कापड़ोद जन्मस्थली; डीडवाना क्षेत्र में गाढ़ा धाम
राजसमंद वल्लभ/पुष्टिमार्ग नाथद्वारा में श्रीनाथजी का मंदिर
झालावाड़ पीपा गागरोन; रामानंद की शिष्य-परंपरा से संबंध
डूंगरपुर मावजी साबला और निष्कलंकी परंपरा; इसे दादू-नरैना से न मिलाएँ
अवध, उत्तर प्रदेश दूलनदास जगजीवन साहब की सतनामी परंपरा; राजस्थान की रामस्नेही शाखा नहीं

स्थान-सावधानी: नरैना को टोंक, सांगानेर को प्रतापगढ़ और नाथद्वारा को भीलवाड़ा न लिखें। रामस्नेही शाहपुरा भीलवाड़ा क्षेत्र वाला शाहपुरा है, जयपुर वाला नहीं। कापड़ोद पुराने विवरणों में नागौर जिले में मिलता है। वर्तमान जिलों और पुराने प्रश्नपत्रों के जिला-विभाजन में अंतर हो सकता है।

SECTION 4: संप्रदायों का सही परिचय

परंपरा प्रमुख संत/आचार्य मुख्य बात
दादू पंथ दादूदयाल निर्गुण भक्ति, नाम-स्मरण और समता; नरैना प्रमुख पीठ
जसनाथी जसनाथजी 36 नियमों की परंपरा; कतरियासर; जीव-दया और अग्निनृत्य
नाथ मत्स्येंद्रनाथ, गोरखनाथ, जालंधरनाथ की योग-परंपरा जसनाथजी को पूरे नाथ पंथ का संस्थापक न मानें
रामस्नेही शाहपुरा शाखा: रामचरण; खेड़ापा शाखा: रामदास विभिन्न शाखाएँ हैं; दयालुदास खेड़ापा के बाद के आचार्य हैं
चरणदासी चरणदास चरणदास की स्वतंत्र शिष्य-परंपरा; सहजोबाई और दयाबाई प्रमुख शिष्याएँ
वल्लभ/पुष्टिमार्ग वल्लभाचार्य; विस्तार में विट्ठलनाथ की भूमिका श्रीकृष्ण की सगुण भक्ति और सेवा; नाथद्वारा प्रमुख केंद्र
निरंजनी हरिदास निरंजनी (हरिपुरुष जी) कापड़ोद और डीडवाना क्षेत्र से संबंधित
सतनामी, अवध की धारा जगजीवन साहब और शिष्य दूलनदास इसे रामस्नेही या छत्तीसगढ़ की समान नाम वाली परंपरा से न मिलाएँ

निर्गुण भक्ति निराकार परमात्मा पर बल देती है। सगुण भक्ति ईश्वर के गुणयुक्त, साकार रूप की आराधना करती है। संत-काव्य में ज्ञान, भक्ति और योग का मेल भी मिलता है; ये श्रेणियाँ हमेशा कठोर सीमाएँ नहीं हैं।

SECTION 5: प्रमुख संत, काल और योगदान

संत काल-सूचना स्थान/परंपरा योगदान
दादूदयाल सामान्यतः 1544-1603 ई. जन्म अहमदाबाद माना जाता है; राजस्थान कर्मभूमि; नरैना दादू-वाणी, साखियाँ और पद; निर्गुण उपासना और समता
जसनाथजी परंपरागत 1482-1506 ई. कतरियासर, बीकानेर; जसनाथी नैतिक अनुशासन, जीव-दया और 36 नियमों की परंपरा
जालंधरनाथ निश्चित जीवन-तिथियों पर मतभेद नाथ योगी; जालोर का सिरे मंदिर योग-साधना की परंपरा
रामचरण अठारहवीं शताब्दी शाहपुरा, भीलवाड़ा; रामस्नेही निर्गुण राम-भक्ति; अनुभव वाणी
दयालदास/दयालुदास खेड़ापा के उत्तरवर्ती रामस्नेही आचार्य खेड़ापा, जोधपुर क्षेत्र संत-काव्य और आचार्य परंपरा; सीकर एवं 1544 ई. वाला विवरण पुष्ट नहीं
चरणदास 1703 ई. जन्म; अठारहवीं शताब्दी देहरा, अलवर; दिल्ली; चरणदासी गुरु-भक्ति, योग और भक्ति का समन्वय
दूलनदास जगजीवन साहब की शिष्य-परंपरा अवध, उत्तर प्रदेश; सतनामी संत-काव्य; अलवर, रामस्नेही और 1544 ई. का संयुक्त दावा गलत
हरिदास निरंजनी मध्यकालीन संत; जन्म-वर्ष पर मतांतर कापड़ोद; निरंजनी आंतरिक साधना और संत-वाणी
गोस्वामी विट्ठलनाथ सोलहवीं शताब्दी; जन्म 1515/1516 ई. के विवरण मिलते हैं वल्लभाचार्य के पुत्र; पुष्टिमार्ग पुष्टिमार्गीय सेवा और भक्ति का विस्तार; स्वयं नाथद्वारा के 1672 ई. वाले संस्थापक नहीं
पीपा मध्यकालीन संत; तिथियों में मतांतर गागरोन, झालावाड़ रामानंद के परंपरागत शिष्य; आंतरिक भक्ति
रैदास/रविदास मध्यकालीन उत्तर भारतीय संत वाराणसी से संबंध; निर्गुण भक्ति मानव-समता, श्रम की गरिमा और भक्ति-काव्य

संत-कवयित्रियाँ: सहजोबाई और दयाबाई चरणदास की प्रमुख शिष्याएँ थीं। उनकी उपस्थिति संत साहित्य में महिलाओं के योगदान को स्पष्ट करती है। रैदास और दूलनदास को राजस्थान-जन्मे संतों की सूची में बिना भेद के न रखें; वे व्यापक उत्तर भारतीय भक्ति परंपरा के संदर्भ में यहाँ शामिल हैं।

SECTION 6: प्रमुख स्थल और संस्थान

स्थान जिला/क्षेत्र महत्व
नरैना जयपुर दादू पंथ की प्रमुख पीठ; दादूदयाल के अंतिम जीवन और स्मृति का केंद्र
कतरियासर बीकानेर जसनाथी परंपरा का प्रमुख स्थान
सिरे मंदिर जालोर जालंधरनाथ से संबंधित नाथ तीर्थ
खेड़ापा जोधपुर क्षेत्र रामदास और दयालुदास की रामस्नेही परंपरा
शाहपुरा रामद्वारा भीलवाड़ा क्षेत्र रामचरण की रामस्नेही शाखा
देहरा / दिल्ली अलवर / दिल्ली चरणदास की जन्मस्थली / प्रमुख कर्मभूमि
कापड़ोद डीडवाना-कुचामन हरिदास निरंजनी का जन्मस्थान
नाथद्वारा राजसमंद श्रीनाथजी मंदिर; पुष्टिमार्गीय सेवा
गागरोन झालावाड़ संत पीपा का स्थान

नाथद्वारा के नाम में “नाथ” होने से वह नाथ संप्रदाय का केंद्र नहीं हो जाता। यहाँ श्रीनाथजी अर्थात श्रीकृष्ण की पुष्टिमार्गीय आराधना होती है।

SECTION 7: कालक्रम

वर्ष/काल घटना या संबंध
1482 ई. जसनाथजी का परंपरागत जन्म-वर्ष
सोलहवीं शताब्दी विट्ठलनाथ की पुष्टिमार्गीय गतिविधियाँ
1544 ई. दादूदयाल का सामान्यतः स्वीकृत जन्म-वर्ष
1603 ई. दादूदयाल का सामान्यतः स्वीकृत निधन-वर्ष
1672 ई. श्रीनाथजी की नाथद्वारा में प्रतिष्ठा
1703 ई. चरणदास का जन्म
अठारहवीं शताब्दी रामचरण की शाहपुरा रामस्नेही शाखा का विस्तार

तिथि-सावधानी: 1544 ई. को दादूदयाल, दयालदास और दूलनदास तीनों का जन्म-वर्ष न मानें। विट्ठलनाथ के जन्म के 1515/1516 ई. संबंधी मतांतर को देखते हुए अभ्यास में उनकी शताब्दी और आचार्य-परंपरा पूछी गई है। नाथ परंपरा जसनाथजी से पहले की है; उसका आरंभ सोलहवीं शताब्दी में बताना गलत है।

SECTION 8: लघु अभ्यास प्रश्न

ये अभ्यास प्रश्न हैं। परीक्षा और वर्ष के अपुष्ट दावे हटाए गए हैं; इन्हें प्रमाणित पिछले वर्ष के प्रश्न न मानें।

Q1. दादूदयाल का संबंध किस पंथ से है?

उत्तर: दादू

व्याख्या: दादूदयाल दादू पंथ के प्रवर्तक हैं।

Q2. जसनाथजी का प्रमुख स्थान कौन-सा है?

उत्तर: कतरियासर

व्याख्या: कतरियासर बीकानेर में है।

Q3. नाथद्वारा में किस संप्रदाय का प्रमुख केंद्र है?

उत्तर: वल्लभ/पुष्टिमार्ग

व्याख्या: नाथद्वारा श्रीनाथजी की पुष्टिमार्गीय सेवा का प्रमुख केंद्र है।

Q4. चरणदास के अनुयायियों की परंपरा क्या कहलाती है?

उत्तर: चरणदासी

व्याख्या: चरणदास से चरणदासी संप्रदाय संबंधित है।

Q5. हरिदास निरंजनी का जन्मस्थान कौन-सा है?

उत्तर: कापड़ोद

व्याख्या: कापड़ोद डीडवाना-कुचामन में है; पहले नागौर जिले में था।

SECTION 9: त्वरित पुनरावृत्ति

संत/परंपरा याद रखने का सूत्र
दादूदयाल दादू पंथ; नरैना-जयपुर; 1544-1603 ई.
जसनाथजी जसनाथी; कतरियासर-बीकानेर; 1482 ई.
जालंधरनाथ नाथ; सिरे मंदिर-जालोर
रामचरण शाहपुरा-भीलवाड़ा; रामस्नेही
दयालुदास खेड़ापा; रामस्नेही
चरणदास देहरा-अलवर; दिल्ली; चरणदासी; 1703 ई.
दूलनदास जगजीवन साहब; अवध; सतनामी
हरिदास निरंजनी; कापड़ोद
विट्ठलनाथ वल्लभाचार्य के पुत्र; पुष्टिमार्ग
पीपा गागरोन-झालावाड़; रामानंद की शिष्य-परंपरा

SECTION 10: भ्रम दूर करें

  • रामचरण और चरणदास अलग हैं: रामचरण-शाहपुरा-रामस्नेही; चरणदास-देहरा/दिल्ली-चरणदासी।
  • नाथ और जसनाथी एक ही नाम नहीं हैं: योग-परंपरा का प्रभाव और विशिष्ट संप्रदाय का प्रवर्तन अलग बातें हैं।
  • दादूदयाल, दयालुदास और दूलनदास अलग हैं: इनके नाम, स्थान और काल न मिलाएँ।
  • वल्लभाचार्य और विट्ठलनाथ: प्रथम पुष्टिमार्ग के प्रवर्तक, द्वितीय उनके पुत्र और विस्तारक आचार्य।
  • जन्म, कर्मभूमि और पीठ: चरणदास की देहरा जन्मस्थली है; दिल्ली कर्मभूमि। दादू का जन्म अहमदाबाद माना जाता है; नरैना उनकी राजस्थान स्थित प्रमुख पीठ है।
  • मानचित्र स्मरण: जयपुर-नरैना; बीकानेर-कतरियासर; जालोर-सिरे मंदिर; जोधपुर-खेडापा; भीलवाड़ा-शाहपुरा; अलवर-देहरा; राजसमंद-नाथद्वारा; झालावाड़-गागरोन।