अध्याय 13: राजस्थान में किसान आंदोलन
(धरती के बेटों का संघर्ष: बिजौलिया, बेगूं, बूंदी, शेखावाटी, अलवर, बीकानेर व मारवाड़ किसान आंदोलन)
Exam Relevance: RPSC (RAS Pre & Mains, School Lecturer, 2nd Grade, College Assistant Professor) / RSSB (CET Graduate & 12th Level, Patwar, VDO, Police Constable) / REET Mains
1. अध्याय और परीक्षा उपयोगिता (Chapter Overview and Exam Significance)#
- रणनीतिक महत्व: राजस्थान के किसान आंदोलन (धरती के बेटों का संघर्ष) भारत के स्वतंत्रता संग्राम एवं आधुनिक किसान इतिहास के सबसे अनुशासित, दीर्घकालीन एवं निर्णायक जन-आंदोलन हैं। इन आंदोलनों ने सामंती जागीरदारी शोषण, अमानवीय करों और बेगार के विरुद्ध संगठित होकर राजपूताना में प्रजामंडल आंदोलनों और लोकतांत्रिक चेतना की मजबूत नींव रखी।
- परीक्षा उपयोगिता: राज्य स्तरीय भर्ती परीक्षाओं (RPSC / RSSB) में इस अध्याय से विभिन्न प्रश्न पूछे जाते रहे हैं और यह आधुनिक राजस्थान के इतिहास का एक अत्यंत महत्वपूर्ण खंड है।
- पाठ्यक्रम के प्रमुख केंद्र बिंदु:
- बिजौलिया किसान आंदोलन (1897–1941 ई., 44 वर्ष): अपनी लंबी अवधि और संगठित अहिंसक स्वरूप के लिए प्रसिद्ध, इसके तीन विशिष्ट चरण, संस्थागत ढाँचा (ऊपरमाल पंच बोर्ड), राष्ट्रीय समाचार पत्र (प्रताप), गांधीजी व तिलक का समर्थन, तथा प्रमुख नेतृत्व (साधु सीताराम दास, विजय सिंह पथिक, माणिक्य लाल वर्मा, जमनालाल बजाज)।
- बेगूं किसान आंदोलन (1921–1925 ई.): भैरव कुण्ड (मेनाल) से शुभारंभ, रामनारायण चौधरी का नेतृत्व, बोल्शेविक समझौता, तथा गोविंदपुरा गोलीकांड में रूपा जी व कृपा जी धाकड़ की शहादत।
- बूंदी (बरड़) किसान आंदोलन (1922–1927 ई.): पं. नयनूराम शर्मा का नेतृत्व, डाबी गोलीकांड (2 अप्रैल 1923), तथा झंडा गीत गाते हुए नानक जी भील व देवीराम गुर्जर का सर्वोच्च बलिदान (माणिक्य लाल वर्मा का 'अर्जी' गीत)।
- सीकर व शेखावाटी किसान आंदोलन (1922–1935 ई.): राव राजा कल्याण सिंह का कर-विस्तार, कटराथल का ऐतिहासिक महिला सम्मेलन (1934, किशोरी देवी के नेतृत्व में 10,000 महिलाएँ), जयसिंहपुरा कांड (जागीरदार को सजा), तथा कूदन गोलीकांड (ब्रिटिश संसद के हाउस ऑफ कॉमन्स में गूँज)।
- अलवर किसान आंदोलन: सुअर विरोधी आंदोलन (1921), नीमूचाणा हत्याकांड (14 मई 1925, जिसे गांधीजी ने 'दोहरी डायरशाही' / Dyerism double distilled कहा), तथा मेव किसान आंदोलन (1932–1933)।
- अन्य क्षेत्रीय आंदोलन: बीकानेर (दूधवा खारा, कांगड़, रायसिंहनगर में बीरबल सिंह ढालीवाल का बलिदान), मारवाड़ (डाबड़ा हत्याकांड 1947), भरतपुर (भोजी लम्बरदार), तथा मातृकुण्डिया (1880 ई.)।
2. सामंती शोषण, जागीरदारी व्यवस्था और किसान असंतोष के कारण#
- भू-स्वामित्व संरचना:
- राजपूताना में भूमि दो मुख्य भागों में विभक्त थी: खालसा (राजा के सीधे नियंत्रण वाली भूमि) तथा जागीर (सामंतों और जागीरदारों को दी गई भूमि)। कुल कृषि योग्य भूमि का लगभग 60% से अधिक भाग जागीरों के अधीन था।
- जागीर क्षेत्रों में किसानों को पट्टेदारी अथवा बपी (स्थायी पैतृक अधिकार) प्राप्त नहीं थे; उन्हें मनमाने ढंग से बेदखल किया जा सकता था।
- आर्थिक शोषण के प्रमुख रूप:
- अत्यधिक भू-राजस्व (हासिल / भोग): उत्पादन का 1/3 से लेकर 1/2 भाग तक लगान के रूप में वसूला जाता था।
- लाटा और कूंता प्रणाली: लगान निर्धारण की सामंती व्यवस्था जिसने किसानों में गहरा असंतोष पैदा किया:
- लाटा: खलिहान में कटी फसल/अनाज को एकत्रित कर उसकी माप तथा राज्य के हिस्से का निर्धारण और पृथक्करण करना, जिसमें कर्मचारी प्रायः वजन व माप में हेरफेर करते थे।
- कूंता: मनमाने ढंग से संभावित उपज का अनुमान लगाना। मानक राजस्थान पाठ्यपुस्तकों में कूंता का अर्थ खेत में खड़ी फसल की संभावित पैदावार का अनुमान लगाना है; विद्वत्तापूर्ण क्षेत्रीय शब्दावलियों (जैसे तनुजा कोठियाल, नोमैडिक नैरेटिव्स, पृ. xvi) में 'कांकड़ कूंता' (खेत में खड़ी फसल का अनुमान) तथा 'कूंता' (खलिहान में कटी फसल का अनुमान) का सूक्ष्म भेद भी मिलता है।
- लाग-बाग (अवैध उपकर): अकेले मेवाड़ की जागीरों में 84 प्रकार की लाग-बाग प्रचलित थीं, जिनमें हल-कर, कुआं-कर, चारा-कर, खिचड़ी-कर, बैलों का कर, और जागीरदार के घर होने वाले हर उत्सव का कर किसानों से लिया जाता था।
- विशिष्ट शोषणकारी कर:
- चौंवरी कर (1903 ई.): बिजौलिया के राव कृष्ण सिंह ने किसानों पर अपनी पुत्री के विवाह पर 5 रुपये का चौंवरी कर लगाया।
- तलवार बंधाई कर (1906 ई.): राव पृथ्वी सिंह ने नए सामंत की गद्दी-नशीनी पर लगने वाला नजराना किसानों पर मढ़ दिया।
- बेगार प्रथा: किसानों, दस्तकारों और अन्य ग्रामीणों से बिना कोई पारिश्रमिक दिए बेगार (शारीरिक श्रम, भार ढोना, लकड़ी काटना, हल चलाना) करवाई जाती थी।
- सामाजिक एवं राजनीतिक चेतना:
- विद्या प्रचारिणी सभा, राजस्थान सेवा संघ (1919), तथा समाचार पत्रों ('प्रताप', 'नवीन राजस्थान', 'राजस्थान केसरी') का प्रसार।
- रासबिहारी बोस और शचीन्द्रनाथ सान्याल के क्रांतिकारी आंदोलन से जुड़े विजय सिंह पथिक का राजस्थान आगमन।
3. जिला-वार एवं क्षेत्र-वार किसान आंदोलन मानचित्रण#
| जिला/क्षेत्र |
आंदोलन |
प्रमुख नेतृत्व |
प्रमुख स्थल |
समयावधि |
| भीलवाड़ा (मेवाड़) |
बिजौलिया किसान आंदोलन |
साधु सीताराम दास, विजय सिंह पथिक, माणिक्य लाल वर्मा |
बिजौलिया, गिरधारीपुरा, बरीसाल, ऊपरमाल |
1897–1941 (44 वर्ष) |
| चित्तौड़गढ़ (मेवाड़) |
बेगूं किसान आंदोलन |
रामनारायण चौधरी, विजय सिंह पथिक |
बेगूं, भैरव कुण्ड (मेनाल), गोविंदपुरा |
1921–1925 |
| बूंदी (हाड़ौती) |
बूंदी (बरड़) किसान आंदोलन |
पं. नयनूराम शर्मा, रामनारायण चौधरी |
बूंदी, बरड़ क्षेत्र, डाबी गांव |
1922–1927 |
| सीकर व झुंझुनूं |
शेखावाटी व सीकर किसान आंदोलन |
रामनारायण चौधरी, मास्टर प्यारेलाल गुप्ता, ठाकुर देशराज, किशोरी देवी |
सीकर, कटराथल, कूदन, जयसिंहपुरा |
1922–1935 |
| अलवर (मेवात) |
अलवर व नीमूचाणा किसान आंदोलन |
माधो सिंह, गोविंद सिंह, अमर सिंह |
अलवर, बानसूर, नीमूचाणा गांव |
1921–1925 |
| अलवर व भरतपुर |
मेव किसान आंदोलन |
डॉ. मोहम्मद अली, यासीन खान, सैयद भीखम नूर |
मेवात, किशनगढ़ बास, तिजारा, गोविंदगढ़ |
1932–1933 |
| बीकानेर |
दूधवा खारा व कांगड़ आंदोलन |
मघाराम वैद्य, हनुमान सिंह आर्य, बीरबल सिंह ढालीवाल |
दूधवा खारा (चूरू), कांगड़, रायसिंहनगर |
1944–1946 |
| नागौर व जोधपुर |
मारवाड़ व डाबड़ा किसान आंदोलन |
बलदेव राम मिर्धा, मोतीलाल चौधरी, मथुरादास माथुर |
मारवाड़, डीडवाना, डाबड़ा गांव |
1941–1947 |
| चित्तौड़गढ़ |
मातृकुण्डिया किसान जमावड़ा |
मेवाड़ के जाट किसान |
मातृकुण्डिया (राशमी परगना) |
1880 |
| भरतपुर |
भरतपुर किसान आंदोलन |
भोजी लम्बरदार |
भरतपुर |
1931 |
4. बिजौलिया किसान आंदोलन (1897–1941 ई.)#
4.1 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं जागीर#
- बिजौलिया (प्राचीन नाम *विंध्यवल्ली*) मेवाड़ रियासत का प्रथम श्रेणी (**सोलह**) का ठिकाना था, जो ऊपरमाल के पठार पर स्थित था।
- खानवा के युद्ध (1527 ई.) में **महाराणा संग्राम सिंह प्रथम (राणा सांगा)** ने जगनेर (भरतपुर के निकट) के **अशोक परमार** की वीरता से प्रसन्न होकर बिजौलिया की जागीर प्रदान की थी।
- यहाँ की अधिकांश कृषक आबादी परिश्रमी **धाकड़** जाति की थी (लगभग 60%)।
4.2 प्रथम चरण (1897–1915 ई.): स्वतःस्फूर्त स्थानीय नेतृत्व#
- **प्रारंभ (1897 ई.):** **गिरधारीपुरा** गाँव में गंगाराम धाकड़ के पिता के मृत्युभोज (*गंगोज*) के अवसर पर किसान एकत्र हुए। **साधु सीताराम दास** की सलाह पर दो वरिष्ठ किसानों—**नानजी पटेल** और **ठाकरी पटेल** को महाराणा फतेह सिंह से शिकायत करने उदयपुर भेजा गया।
- **जागीरदार का रुख:** महाराणा ने सहायक राजस्व अधिकारी हामिद हुसैन को जाँच के लिए भेजा। हुसैन ने शिकायतों को सही पाया, परंतु राव कृष्ण सिंह ने उल्टे नानजी व ठाकरी पटेल को ठिकाने से निष्कासित कर दिया और प्रशासनिक दबाव बढ़ा दिया।
- **चौंवरी कर (1903 ई.):** राव कृष्ण सिंह ने प्रत्येक लड़की के विवाह पर 5 रुपये का 'चौंवरी कर' लगा दिया। किसानों ने दो वर्षों तक कन्याओं का विवाह रोक दिया और ग्वालियर प्रवास की तैयारी की, जिससे विवश होकर राव को कर घटाना व स्थगित करना पड़ा।
- **तलवार बंधाई (1906 ई.):** कृष्ण सिंह के निधन के बाद नए राव पृथ्वी सिंह ने तलवार बंधाई (उत्तराधिकार शुल्क) का पूरा भार किसानों पर डाल दिया। साधु सीताराम दास, फतेहकरण चारण व ब्रह्मदेव ने इस अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाई।
4.3 द्वितीय चरण (1916–1923 ई.): विजय सिंह पथिक और संगठित जन-आंदोलन#
- **विजय सिंह पथिक का आगमन (1916 ई.):** पथिक का वास्तविक नाम **भूप सिंह** था (जन्म 1882 ई., गुठावली, बुलंदशहर, उप्र)। रासबिहारी बोस के क्रांतिकारी दल से जुड़े पथिक ओछड़ी गाँव में 'विजय सिंह' के छद्म नाम से रह रहे थे। साधु सीताराम दास के आग्रह पर उन्होंने बिजौलिया की कमान संभाली।
- **ऊपरमाल पंच बोर्ड की स्थापना (1917 ई.):**
- हरियाली अमावस्या (1917 ई.) को बरीसाल गाँव में पथिक जी ने **'ऊपरमाल पंच बोर्ड'** (किसान पंचायत) की स्थापना की।
- इसका प्रथम सरपंच **मन्ना पटेल** को बनाया गया।
- 'ऊपरमाल सेवा समिति' नामक स्वयंसेवक दल और 'विद्या प्रचारिणी सभा' के अंतर्गत पुस्तकालय व अखाड़े स्थापित किए गए।
- **'ऊपरमाल का डंका'** नाम से हस्तलिखित साप्ताहिक बुलेटिन निकाला गया।
- **राष्ट्रीय आयाम और साहित्यिक योगदान:**
- **माणिक्य लाल वर्मा** ने ठिकाने की नौकरी छोड़ दी और पथिक के सहयोगी बने। उन्होंने प्रसिद्ध देशभक्ति गीत **'पंछीड़ा'** रचा, जो आंदोलन का मुख्य प्रेरणा-स्रोत बना।
- कानपुर से प्रकाशित **गणेश शंकर विद्यार्थी** के साप्ताहिक समाचार पत्र **'प्रताप'** ने बिजौलिया आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाई। कृतज्ञता स्वरूप पथिक जी ने विद्यार्थी जी को चांदी की राखी भेजी थी।
- लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने अपने पत्र 'द मराठा' में बिजौलिया के किसानों की प्रशंसा की और महाराणा को पत्र लिखा।
- महात्मा गांधी ने अपने निजी सचिव **महादेव देसाई** को बिजौलिया भेजा और पथिक जी के संगठनात्मक कार्य की सराहना की।
- **आयोग व समझौते:**
- अप्रैल 1919 में मेवाड़ सरकार ने **बिंदूलाल भट्टाचार्य आयोग** गठित किया, जिसने कर घटाने और कैदियों को रिहा करने की सिफारिश की।
- फरवरी 1922 में एजीजी (AGG) **रॉबर्ट हॉलैंड**, दीवान प्रभाषचंद्र चटर्जी और हाकिम बिहारीलाल ने किसान पंचायत से वार्ता की और **35 लागतें (लाग-बाग) समाप्त** करने का ऐतिहासिक समझौता किया। किसान प्रतिनिधिमंडल में रामनारायण चौधरी, माणिक्य लाल वर्मा, मोती चंद और नारायण पटेल शामिल थे।
4.4 तृतीय चरण (1923–1941 ई.): अंतिम गतिरोध और विजय#
- 1927 ई. में पुनः लगान वृद्धि के विरोध में पथिक जी की सलाह पर किसानों ने अपनी बारानी (असिंचित) जमीनें छोड़ दीं। ठिकानेदार ने इन जमीनों को जब्त कर अन्य लोगों को नीलाम कर दिया।
- राजस्थान सेवा संघ और पथिक जी के मध्य मतभेद होने पर पथिक जी आंदोलन से अलग हो गए।
- इसके बाद नेतृत्व **जमनालाल बजाज**, **हरिभाऊ उपाध्याय** और **माणिक्य लाल वर्मा** के हाथों में आया।
- 1941 ई. में मेवाड़ के प्रधानमंत्री **सर टी. राघवाचारी** और राजस्व मंत्री **डॉ. मोहन सिंह मेहता** ने माणिक्य लाल वर्मा से वार्ता की और किसानों की जब्तशुदा जमीनें वापस लौटा दीं। इस प्रकार 44 वर्षों का लंबा अहिंसक संघर्ष समाप्त हुआ।
5. बेगूं, बूंदी और शेखावाटी किसान आंदोलन#
5.1 बेगूं किसान आंदोलन (1921–1925 ई.)#
- **आरंभ:** बिजौलिया की सफलता से प्रेरित होकर बेगूं ठिकाने के धाकड़ किसानों ने 1921 ई. में **भैरव कुण्ड (मेनाल)** पर एकत्र होकर आंदोलन छेड़ा।
- **नेतृत्व:** विजय सिंह पथिक के निर्देश पर **रामनारायण चौधरी** ने आंदोलन का नेतृत्व संभाला।
- **नारी शक्ति:** रामनारायण चौधरी की धर्मपत्नी **अंजना देवी चौधरी** ने महिला सत्याग्रहियों को संगठित किया और वे राजस्थान के किसान आंदोलन के इतिहास में **गिरफ्तार एवं निर्वासित होने वाली प्रथम महिला** बनीं।
- **बोल्शेविक समझौता:** किसानों के दबाव में बेगूं के रावत अनूप सिंह ने राजस्थान सेवा संघ से समझौता कर लिया। मेवाड़ सरकार और अंग्रेजों ने इसे सामंतवाद के विरुद्ध **'बोल्शेविक समझौता'** कहकर अस्वीकार कर दिया, अनूप सिंह को उदयपुर में नजरबंद कर दिया और ट्रेंच को प्रशासक बनाया।
- **गोविंदपुरा गोलीकांड (13 जुलाई 1923 ई.):** कमिश्नर ट्रेंच ने गोविंदपुरा गाँव में किसानों के शांत सम्मेलन को घेरकर गोलियाँ चलवा दीं। इसमें **रूपा जी धाकड़** और **कृपा जी धाकड़** शहीद हो गए।
- इसके बाद पथिक जी ने भूमिगत होकर आंदोलन संभाला, सितंबर 1923 में गिरफ्तार हुए और उन्हें 5 वर्ष की सजा हुई।
5.2 बूंदी (बरड़) किसान आंदोलन (1922–1927 ई.)#
- **कारण:** बूंदी रियासत के बरड़ क्षेत्र के गूजर और अन्य किसानों पर 25 प्रकार की लाग-बाग, बेगार और भ्रष्ट चुंगी व्यवस्था थोपी गई थी।
- **नेतृत्व:** राजस्थान सेवा संघ के सक्रिय सदस्य तथा हाड़ौती सेवा संघ के संस्थापक **पं. नयनूराम शर्मा** ने आंदोलन का नेतृत्व किया।
- **डाबी गोलीकांड (2 अप्रैल 1923 ई.):**
- डाबी गाँव में किसानों की शांतिपूर्ण सभा हो रही थी।
- पुलिस अधीक्षक **इकराम हुसैन** ने निहत्थी भीड़ पर अंधाधुंध गोलियाँ चलवाईं।
- हाथ में तिरंगा थामे और **'झंडा गीत'** गाते हुए **नानक जी भील** शहीद हो गए।
- उनके साथ वीर किसान **देवीराम गुर्जर (देवा गुर्जर)** भी वीरगति को प्राप्त हुए।
- नानक जी भील के बलिदान की स्मृति में माणिक्य लाल वर्मा ने अमर गीत **'अर्जी'** की रचना की।
- बाद में सरकार द्वारा लाग-बाग में कमी और बेगार पर रोक लगाने पर आंदोलन शांत हुआ।
5.3 सीकर एवं शेखावाटी किसान आंदोलन (1922–1935 ई.)#
- **मूल कारण:** 1922 ई. में सीकर के राव राजा कल्याण सिंह ने गद्दी-नशीनी पर भू-राजस्व 25% से बढ़ाकर 50% कर दिया और अकाल में छूट का झूठा वादा किया।
- **प्रमुख नेता:** रामनारायण चौधरी, मास्टर प्यारेलाल गुप्ता ('चिड़ावा के गांधी', अमर सेवा समिति 1918), ठाकुर देशराज, कुंवर हरलाल सिंह, ताड़केश्वर शर्मा, पं. घासीराम।
- **जाट प्रजापति महायज्ञ (1934 ई.):** ठाकुर देशराज के प्रयास से बसंत पंचमी 1934 को सीकर में महायज्ञ आयोजित हुआ, जिसके सभापति कुंवर हरलाल सिंह थे।
- **कटराथल महिला सम्मेलन (25 अप्रैल 1934 ई.):**
- सीहोट के ठाकुर मानसिंह द्वारा सोतिया का बास गाँव में किसान महिलाओं के साथ किए गए दुर्व्यवहार के विरोध में कटराथल में **10,000 से अधिक किसान महिलाओं** का विशाल सम्मेलन आयोजित हुआ।
- इस ऐतिहासिक सम्मेलन की अध्यक्षता **किशोरी देवी** (कुंवर हरलाल सिंह की पत्नी) ने की तथा मुख्य ओजस्वी भाषण **उत्तमा देवी** (ठाकुर देशराज की पत्नी) ने दिया। दुर्गा देवी शर्मा, फूलादेवी आदि ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई।
- **जयसिंहपुरा कांड (1934 ई.):** ढूंढलोद के ठाकुर के भाई ईश्वर सिंह ने खेतों में काम कर रहे किसानों पर गोलियाँ चलवाईं। शेखावाटी किसान सभा के व्यापक आंदोलन व कानूनी संघर्ष के बाद जयपुर राज्य न्यायालय ने उसे दोषी ठहराकर कारावास की सजा सुनाई, जिसे सामंत को किसानों पर हिंसा के लिए कानूनी रूप से दंडित किए जाने का एक ऐतिहासिक उदाहरण माना जाता है।
- **कूदन गोलीकांड (25 अप्रैल 1935 ई.):** कैप्टन वेब के आदेश पर पुलिस ने लगान न देने वाले किसानों पर गोलियाँ चलाईं। इसमें **चेलाराम**, **टीकूराम**, **आसाराम** व **तुलसीराम** शहीद हुए। बुजुर्ग वीरांगना **धापी दादी** ने लगान देने से साफ मना कर दिया और ग्रामीणों को प्रेरित किया।
- **ब्रिटिश संसद में गूँज:** 3 जून 1935 को **ब्रिटिश संसद के 'हाउस ऑफ कॉमन्स'** में ब्रिटिश सांसदों (टी. स्मिथ व पालिंग) ने कूदन में किसानों पर हुई पुलिस गोलीबारी पर भारत सचिव सर सैमुअल होर से प्रश्न पूछे।
6. अलवर, नीमूचाणा, मेव, बीकानेर एवं मारवाड़ किसान आंदोलन#
6.1 अलवर किसान आंदोलन एवं नीमूचाणा हत्याकांड#
- **सुअर विरोधी आंदोलन (1921 ई.):** महाराजा जयसिंह ने जंगली सुअरों को मारने पर प्रतिबंध लगा रखा था, जो किसानों की खड़ी फसलें नष्ट करते थे। किसानों के उग्र विरोध पर राज्य को सुअर मारने की अनुमति देनी पड़ी।
- **नीमूचाणा हत्याकांड (14 मई 1925 ई.):**
- 1923–24 ई. के नए भूमि बंदोबस्त में राज्य द्वारा लगान दरों में भारी वृद्धि और किसानों के अधिकारों पर आघात के विरोध में आंदोलन भड़का।
- 14 मई 1925 को बानसूर तहसील के **नीमूचाणा** गाँव में 800 से अधिक किसान सभा कर रहे थे।
- राज्य सेना के कमांडर **छज्जू सिंह** ने पूरे गाँव को घेरकर मशीनगनों से गोलियाँ चलवाईं और घरों में आग लगा दी, जिससे अनेक किसान हताहत हुए।
- **राष्ट्रीय प्रतिक्रिया:** महात्मा गांधी ने अपने पत्र 'यंग इंडिया' में इस घटना को **"दोहरी डायरशाही"** (*Dyerism double distilled*) की संज्ञा दी और लिखा कि यदि ये रिपोर्टें सत्य हैं, तो यह जलियांवाला बाग से भी अधिक दुखद है। 'रियासत' समाचार पत्र ने भी इसे जलियांवाला बाग के समान बताया।
6.2 मेव किसान आंदोलन (1932–1933 ई.)#
- मेवात क्षेत्र (अलवर, भरतपुर, गुड़गांव) में **डॉ. मोहम्मद अली**, गुड़गांव के **यासीन खान**, तथा **सैयद भीखम नूर** के नेतृत्व में मेव किसानों ने आंदोलन किया।
- *अंजुमन खादिम-उल-इस्लाम* संस्था के माध्यम से लगान न देने का अभियान चलाया गया, जिसके बाद सरकार ने कई रियायतें दीं।
6.3 बीकानेर किसान आंदोलन#
- **दूधवा खारा आंदोलन (1944–1945 ई.):** बीकानेर राज्य के चूरू क्षेत्र में स्थित दूधवा खारा गाँव में ठाकुर सूरजमल के अत्याचारों और बेदखली के विरुद्ध **मघाराम वैद्य** तथा **हनुमान सिंह आर्य** के नेतृत्व में आंदोलन चला। हनुमान सिंह ने बीकानेर जेल में 65 दिन की ऐतिहासिक भूख हड़ताल की।
- **कांगड़ कांड (1946 ई.):** भयंकर अकाल के बावजूद कांगड़ के जागीरदार द्वारा किसानों पर अमानवीय अत्याचार किए गए।
- **महाजन ठिकाना आंदोलन (1937 ई.):** बीकानेर राज्य के प्रथम श्रेणी ठिकाने महाजन में **जीवन राम चौधरी** के नेतृत्व में किसानों ने 37 प्रकार की लाग-बाग के विरुद्ध आंदोलन किया।
- **रायसिंहनगर कांड (1 जुलाई 1946 ई.):** बीकानेर प्रजा परिषद के जुलूस में तिरंगा हाथ में लिए **बीरबल सिंह ढालीवाल** पुलिस गोलीबारी में शहीद हुए। उनकी स्मृति में 17 जुलाई 1946 को पूरे बीकानेर राज्य में **'बीरबल दिवस'** मनाया गया।
6.4 मारवाड़ किसान आंदोलन एवं डाबड़ा हत्याकांड#
- मारवाड़ हितकारिणी सभा (1923 ई.) और 1941 ई. में **बलदेव राम मिर्धा**, नाथूराम मिर्धा व मोतीलाल चौधरी द्वारा गठित **मारवाड़ किसान सभा** ने जागीरदारों की मनमानी के विरुद्ध आंदोलन किया।
- **डाबड़ा हत्याकांड (13 मार्च 1947 ई.):**
- डीडवाना के निकट डाबड़ा गाँव में मोतीराम के घर किसान सम्मेलन आयोजित हुआ।
- जागीरदार के सशस्त्र लठैतों ने सम्मेलन पर बर्बर हमला बोला।
- इसमें **चुन्नीलाल शर्मा**, **रूघाराम** तथा **रामूराम** शहीद हो गए।
- मथुरादास माथुर, द्वारकादास पुरोहित व राधाकृष्ण तात गंभीर रूप से घायल हुए।
6.5 भरतपुर किसान आंदोलन (1931 ई.)#
- **पृष्ठभूमि एवं नेतृत्व:** राज्य द्वारा लागू किए गए नए भूमि बंदोबस्त एवं लगान वृद्धि के विरोध में किसानों ने आंदोलन छेड़ा।
- **भोजी लम्बरदार का योगदान:** 1931 ई. में **भोजी लम्बरदार** ने किसानों को संगठित किया और राज्य के विरुद्ध संघर्ष का बिगुल फूंका। नवंबर 1931 ई. में उनकी गिरफ्तारी के बाद आंदोलन शांत हुआ।
7. प्रमुख घटनाएं, शहीद एवं जांच: तुलनात्मक सारणी#
| Movement (आंदोलन) |
Firing/Event Date (गोलीकांड तिथि) |
Official (अधिकारी) |
Martyrs (शहीद) |
National Response (राष्ट्रीय प्रतिक्रिया) |
| बिजौलिया |
1897–1941 ई. (वार्ता-आधारित संघर्ष) |
राव कृष्ण सिंह, राव पृथ्वी सिंह |
आर्थिक उत्पीड़न, गिरफ्तारियाँ |
हॉलैंड समझौता (1922); 1941 में भूमि वापसी |
| बेगूं |
गोविंदपुरा (13 जुलाई 1923 ई.) |
कमिश्नर ट्रेंच |
रूपा जी धाकड़ व कृपा जी धाकड़ |
पथिक जी को जेल; रावत नजरबंद; आंशिक राहत |
| बूंदी |
डाबी (2 अप्रैल 1923 ई.) |
एसपी इकराम हुसैन |
नानक जी भील व देवीराम गुर्जर |
माणिक्य लाल वर्मा का 'अर्जी' गीत; बेगार पर रोक |
| अलवर |
नीमूचाणा (14 मई 1925 ई.) |
कमांडर छज्जू सिंह |
अनेक किसान हताहत |
गांधीजी द्वारा 'दोहरी डायरशाही' (Dyerism double distilled) |
| शेखावाटी |
कूदन (25 अप्रैल 1935 ई.) |
कैप्टन वेब |
चेलाराम, टीकूराम, आसाराम, तुलसीराम |
ब्रिटिश संसद के हाउस ऑफ कॉमन्स में बहस |
| बीकानेर |
रायसिंहनगर (1 जुलाई 1946 ई.) |
राज्य पुलिस |
बीरबल सिंह ढालीवाल |
17 जुलाई 1946 ई. को बीकानेर राज्य में 'बीरबल दिवस' |
| मारवाड़ |
डाबड़ा (13 मार्च 1947 ई.) |
डाबड़ा का जागीरदार |
चुन्नीलाल शर्मा, रूघाराम, रामूराम |
मारवाड़ में सामंती व्यवस्था का अंत निकट आया |
8. किसान आंदोलनों में महिलाओं का ऐतिहासिक योगदान#
- अंजना देवी चौधरी:
- रामनारायण चौधरी की पत्नी; बिजौलिया व बेगूं में महिलाओं को संगठित किया।
- राजस्थान के किसान आंदोलन के इतिहास में गिरफ्तार एवं निर्वासित होने वाली प्रथम महिला।
- किशोरी देवी:
- शेखावाटी किसान नेता कुंवर हरलाल सिंह की धर्मपत्नी।
- 25 अप्रैल 1934 को ऐतिहासिक कटराथल महिला सम्मेलन की अध्यक्षता की (10,000+ किसान महिलाएँ)।
- उत्तमा देवी:
- ठाकुर देशराज की पत्नी; 1934 के कटराथल सम्मेलन में मुख्य ओजस्वी भाषण दिया और किसान महिलाओं में चेतना जगाई।
- दुर्गा देवी शर्मा:
- ताड़केश्वर शर्मा की पत्नी; कटराथल सम्मेलन में सक्रिय भागीदारी निभाई और शेखावाटी में महिलाओं को संगठित किया।
- नारायणी देवी वर्मा एवं रमा देवी:
- बिजौलिया आंदोलन में सक्रिय रहीं, पुलिस लाठियों का सामना किया और जेल यातनाएँ सहीं।
- धापी दादी:
- कूदन (सीकर) गाँव की बुजुर्ग वीरांगना जिन्होंने कैप्टन वेब के सामने निडरता से लगान देने से इनकार कर दिया।
9. प्रमुख संस्थाएँ, समाचार पत्र एवं देशभक्ति साहित्य#
9.1 प्रमुख संस्थाएँ#
- **विद्या प्रचारिणी सभा (बिजौलिया शाखा):** मूल रूप से चित्तौड़गढ़ में हरिभाई किंकर द्वारा स्थापित, जिसकी बिजौलिया शाखा 1915 ई. में साधु सीताराम दास द्वारा खोली गई और आगे चलकर विजय सिंह पथिक ने इसे जन-जागृति व शिक्षण का केंद्र बनाया।
- **ऊपरमाल पंच बोर्ड (1917 ई.):** बरीसाल गाँव में स्थापित किसान पंचायत; प्रथम सरपंच मन्ना पटेल।
- **राजस्थान सेवा संघ (1919 ई.):**
- स्थापना 1919 में वर्धा (महाराष्ट्र) में विजय सिंह पथिक, रामनारायण चौधरी व हरिभाई किंकर द्वारा (जमनालाल बजाज के आर्थिक सहयोग से)।
- 1920 में इसका मुख्यालय अजमेर स्थानांतरित किया गया।
- इसने बेगूं, बूंदी और सिरोही आंदोलनों का प्रत्यक्ष मार्गदर्शन किया।
- **हाड़ौती सेवा संघ:** पं. नयनूराम शर्मा द्वारा स्थापित।
- **शेखावाटी किसान पंचायत:** पंचपाना के किसानों को जागीरदारों के विरुद्ध संगठित करने हेतु 1931–32 ई. में स्थापित।
- **मारवाड़ किसान सभा (1941 ई.):** बलदेव राम मिर्धा के संरक्षण में स्थापित।
9.2 समाचार पत्र एवं साहित्य#
- **प्रताप (कानपुर):** गणेश शंकर विद्यार्थी द्वारा संपादित; बिजौलिया आंदोलन को राष्ट्रीय पहचान दी।
- **राजस्थान केसरी (वर्धा, 1920):** जमनालाल बजाज द्वारा वित्तपोषित, विजय सिंह पथिक एवं रामनारायण चौधरी द्वारा संपादित।
- **नवीन राजस्थान / तरुण राजस्थान (अजमेर):** राजस्थान सेवा संघ का मुख्य पत्र; कई बार प्रतिबंधित हुआ।
- **ऊपरमाल का डंका:** बिजौलिया का हस्तलिखित बुलेटिन।
- **पंछीड़ा:** माणिक्य लाल वर्मा द्वारा रचित अमर लोकगीत, जिसने किसानों में अभूतपूर्व जोश भरा।
- **अर्जी:** माणिक्य लाल वर्मा द्वारा नानक जी भील के बलिदान पर लिखा गया मार्मिक गीत।
10. कालक्रमानुसार तिथियाँ, स्मरण-सूत्र (Mnemonics) एवं परीक्षा सारणी#
10.1 प्रमुख घटनाओं का कालक्रम#
- **1880 ई.:** मातृकुण्डिया (राशमी) में नई लगान व्यवस्था के विरुद्ध किसान जमावड़ा।
- **1897 ई.:** गिरधारीपुरा गाँव से बिजौलिया किसान आंदोलन का शुभारंभ।
- **1903 ई.:** राव कृष्ण सिंह द्वारा चौंवरी कर (5 रुपये) लगाया जाना।
- **1906 ई.:** राव पृथ्वी सिंह द्वारा तलवार बंधाई कर लगाया जाना।
- **1915 ई.:** साधु सीताराम दास द्वारा बिजौलिया में विद्या प्रचारिणी सभा की शाखा की स्थापना।
- **1916 ई.:** साधु सीताराम दास के आग्रह पर विजय सिंह पथिक का बिजौलिया आगमन।
- **1917 ई.:** बरीसाल में ऊपरमाल पंच बोर्ड की स्थापना (मन्ना पटेल सरपंच)।
- **1919 ई.:** वर्धा में राजस्थान सेवा संघ की स्थापना; बिंदूलाल भट्टाचार्य आयोग।
- **1921 ई.:** भैरव कुण्ड (मेनाल) से बेगूं किसान आंदोलन का प्रारंभ; अलवर सुअर विरोधी आंदोलन।
- **1922 ई.:** बिजौलिया में हॉलैंड समझौता (35 लागतें समाप्त); बूंदी (बरड़) आंदोलन का प्रारंभ; सीकर आंदोलन का आरंभ।
- **1923 ई.:** बूंदी में डाबी गोलीकांड (2 अप्रैल, नानक जी भील शहीद); बेगूं में गोविंदपुरा गोलीकांड (13 जुलाई, रूपा जी-कृपा जी शहीद)।
- **1925 ई.:** अलवर में नीमूचाणा हत्याकांड (14 मई, गांधीजी द्वारा 'दोहरी डायरशाही' / *Dyerism double distilled* कहा गया)।
- **1934 ई.:** जाट प्रजापति महायज्ञ (सीकर); कटराथल महिला सम्मेलन (25 अप्रैल, किशोरी देवी); जयसिंहपुरा कांड।
- **1935 ई.:** सीकर में कूदन गोलीकांड (25 अप्रैल, ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स में बहस)।
- **1941 ई.:** मेवाड़ के प्रधानमंत्री टी. राघवाचारी व माणिक्य लाल वर्मा के बीच समझौते से बिजौलिया आंदोलन का सफल समापन।
- **1944–45 ई.:** बीकानेर में दूधवा खारा आंदोलन (हनुमान सिंह आर्य की भूख हड़ताल)।
- **1946 ई.:** रायसिंहनगर गोलीकांड (1 जुलाई 1946 ई., बीरबल सिंह ढालीवाल शहीद)।
- **1947 ई.:** मारवाड़ में डाबड़ा हत्याकांड (13 मार्च, चुन्नीलाल शर्मा, रूघाराम व रामूराम शहीद)।
10.2 याद रखने के सूत्र (Mnemonics)#
- **प्रमुख किसान आंदोलनों व घटनाओं का कालक्रम सूत्र:**
- सूत्र: **"बि-बे-बू-नी-सी-डा"**
- क्रम: **बि**जौलिया (1897) -> **बे**गूं (1921) -> **बू**ंदी (1922) -> **नी**मूचाणा (1925) -> **सी**कर प्रमुख घटनाएँ (1934–35) -> **डा**बड़ा (1947)।
- *विशेष:* सीकर में किसान असंतोष 1922 में प्रारंभ हुआ तथा 1934 (कटराथल) व 1935 (कूदन) में अपने चरम पर पहुँचा।
- **प्रमुख हत्याकांड व शहीद युग्म:**
- **बेगूं (गोविंदपुरा):** **रूपा जी व कृपा जी धाकड़** (1923)।
- **बूंदी (डाबी):** **नानक जी भील व देवीराम गुर्जर** (1923)।
- **बीकानेर (रायसिंहनगर):** **बीरबल सिंह ढालीवाल** (1946)।
- **मारवाड़ (डाबड़ा):** **चुन्नीलाल शर्मा** (1947)।
11. परीक्षा अभ्यास और विषय संरचना#
11.1 विषय संरचना एवं अभ्यास परीक्षाएँ#
- इस अध्याय के संपूर्ण अभ्यास हेतु **90 उच्च-स्तरीय द्विभाषी प्रश्नों** को नौ केंद्रित अभ्यास परीक्षाओं में विभाजित किया गया है:
- **सेट 1: बिजौलिया किसान आंदोलन - चरण, नेतृत्व एवं कर (15 प्रश्न)**
- **सेट 2: बेगूं किसान आंदोलन एवं बूंदी (बरड़) आंदोलन (10 प्रश्न)**
- **सेट 3: शेखावाटी एवं सीकर किसान आंदोलन (10 प्रश्न)**
- **सेट 4: अलवर, नीमूचाणा एवं मेव किसान आंदोलन (10 प्रश्न)**
- **सेट 5: बीकानेर, मारवाड़ (डाबड़ा) एवं अन्य क्षेत्रीय आंदोलन (5 प्रश्न)**
- **सेट 6: समग्र किसान आंदोलन पुनरावृत्ति एवं विश्लेषणात्मक अभ्यास (10 प्रश्न)**
- **सेट 7: क्षेत्रीय आंदोलन, संस्थाएँ एवं समाचार पत्र (10 प्रश्न)**
- **सेट 8: महिला नेतृत्व एवं महत्वपूर्ण कालक्रम (10 प्रश्न)**
- **सेट 9: शहीद, सुमेलन एवं कथन-कारण (10 प्रश्न)**
| परीक्षा सेट |
केंद्र बिंदु |
प्रश्न संख्या |
समय |
| सेट 1 - बिजौलिया किसान आंदोलन |
साधु सीताराम दास, विजय सिंह पथिक, ऊपरमाल पंच बोर्ड, चौंवरी, तलवार बंधाई, हॉलैंड समझौता, वर्मा |
15 |
15 Min |
| सेट 2 - बेगूं व बूंदी आंदोलन |
भैरव कुण्ड, रामनारायण चौधरी, रूपा जी-कृपा जी, बोल्शेविक समझौता, डाबी, नानक जी भील, नयनूराम |
10 |
10 Min |
| सेट 3 - शेखावाटी व सीकर आंदोलन |
राव राजा कल्याण सिंह, कटराथल सम्मेलन, किशोरी देवी, जयसिंहपुरा कांड, कूदन गोलीकांड, हैंसर्ड |
10 |
10 Min |
| सेट 4 - अलवर व नीमूचाणा आंदोलन |
सुअर आंदोलन, 1923 बंदोबस्त, नीमूचाणा गोलीकांड (14 मई 1925), गांधीजी की दोहरी डायरशाही, मेव |
10 |
10 Min |
| सेट 5 - बीकानेर, मारवाड़ व क्षेत्रीय |
दूधवा खारा, हनुमान सिंह, बीरबल सिंह ढालीवाल, कांगड़, डाबड़ा हत्याकांड (13 मार्च 1947), मातृकुण्डिया |
5 |
5 Min |
| सेट 6 - समग्र विश्लेषणात्मक अभ्यास |
कालानुक्रम, सुमेलन, बहु-कथनीय प्रश्न, लाटा-कूंता, समाचार पत्र, संस्थाएँ एवं साहित्य |
10 |
10 Min |
| सेट 7 - क्षेत्रीय आंदोलन, संस्थाएँ व पत्र |
भरतपुर (भोजी लम्बरदार), मातृकुण्डिया, सेवा संघ (वर्धा), प्रताप (गणेश शंकर विद्यार्थी), ऊपरमाल का डंका |
10 |
10 Min |
| सेट 8 - महिला नेतृत्व व कालक्रम |
अंजना देवी चौधरी, कटराथल (किशोरी देवी, उत्तमा देवी, दुर्गा देवी शर्मा), धापी दादी, प्रमुख प्रारंभिक वर्ष व तिथियाँ |
10 |
10 Min |
| सेट 9 - शहीद, सुमेलन व कथन-कारण |
गोविंदपुरा, डाबी, कूदन, डाबड़ा, रायसिंहनगर शहीद; सुमेलन मैट्रिक्स व RPSC कथन-कारण प्रश्न |
10 |
10 Min |
ℹ️ अस्वीकरण: यह सामग्री मानक राजस्थान सामान्य ज्ञान स्रोतों से संकलित की गई है। परीक्षा तैयारी हेतु आधिकारिक पाठ्यपुस्तकों से सत्यापन करें।