राजस्थान में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का विकास (Development of Science and Technology in Rajasthan)

1. प्रस्तावना, नीतिगत ढाँचा एवं संस्थागत आधार

राजस्थान में स्वतंत्रता के पश्चात और विशेष रूप से 21वीं सदी में वैज्ञानिक अनुसंधान, सुदूर संवेदन, सूचना प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी तथा डिजिटल नवाचारों के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। भौगोलिक विषमताओं, वृहद् थार मरुस्थल, जल संकट और शुष्क जलवायु जैसी चुनौतियों का सामना करने हेतु राज्य ने विशिष्ट मरुस्थलीय विज्ञान, सुदूर संवेदन तकनीक और उन्नत आईटी अवसंरचना को अपनी नीति का मुख्य आधार बनाया है।

प्रमुख नीतिगत एवं संस्थागत मील के पत्थर

* **विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST Rajasthan)**: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग, प्रसार और शोध को बढ़ावा देने हेतु राज्य में वर्ष 1983 में पृथक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की स्थापना की गई। * **सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग (DoIT&C)**: राज्य में ई-गवर्नेंस, डिजिटल अवसंरचना और नागरिक सेवाओं के कम्प्यूटरीकरण हेतु नोडल विभाग के रूप में कार्यरत। * **राजस्थान स्टार्टअप नीति 2022**: राज्य में स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को प्रोत्साहित करने हेतु 2015 की नीति को प्रतिस्थापित कर 'राजस्थान स्टार्टअप नीति 2022' लागू की गई, जिसमें महिलाओं, दिव्यांगों, ग्रामीण युवाओं और नवाचारों हेतु विशेष वित्तीय संबल का प्रावधान है। * **राजस्थान जैव प्रौद्योगिकी नीति**: राज्य में जैव प्रौद्योगिकी के औद्योगिक और कृषि अनुप्रयोगों को गति देने हेतु पहली नीति वर्ष 2004 में तथा अद्यतन रूपरेखा 2015 में घोषित की गई। * **पेटेंट सूचना केंद्र (PIC, जयपुर)**: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन स्थापित, जो राज्य के शोधकर्ताओं, उद्यमियों और कारीगरों को पेटेंट, ट्रेडमार्क और भौगोलिक उपदर्शन (GI टैग) संरक्षण में तकनीकी सहायता प्रदान करता है।

2. राजस्थान के प्रमुख वैज्ञानिक, तकनीकी एवं अनुसंधान संस्थान

राजस्थान में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख्याति के कई प्रमुख वैज्ञानिक संस्थान स्थित हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक्स, परमाणु ऊर्जा, शुष्क कृषि, मरुस्थलीय वानिकी और आयुर्विज्ञान में अग्रणी शोध कर रहे हैं:

(1) CSIR-CEERI (केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान, पिलानी)

* **स्थापना**: वर्ष 1953 (पिलानी, झुंझुनूँ)। * **शासी निकाय**: वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR)। * **प्रमुख शोध क्षेत्र**: सेमीकंडक्टर डिवाइसेज, माइक्रो-इलेक्ट्रो-मैकेनिकल सिस्टम्स (MEMS), साइबर फिजिकल सिस्टम्स, माइक्रोवेव ट्यूब्स, स्मार्ट सेंसर्स एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियाँ।

(2) ICAR-CAZRI (केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान, जोधपुर)

* **स्थापना**: वर्ष 1959 (पूर्ववर्ती मरू वनीकरण केंद्र 1952 का पुनर्गठन)। * **शासी निकाय**: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)। * **प्रमुख कार्य**: मरुस्थलीकरण नियंत्रण, रेत के टीलों का स्थिरीकरण (Sand Dune Stabilization), शुष्क क्षेत्रों के अनुकूल चारागाह विकास, सौर ऊर्जा आधारित कृषि उपकरण (सोलर ड्रायर, सोलर कुकर) तथा शुष्क फल-फसल अनुसंधान।

(3) ICFRE-AFRI (शुष्क वन अनुसंधान संस्थान, जोधपुर)

* **स्थापना**: वर्ष 1987 (जोधपुर)। * **शासी निकाय**: भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय)। * **प्रमुख कार्य**: राजस्थान, गुजरात और दादरा-नगर हवेली के शुष्क व अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में वनस्पति संरक्षण, मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र की पुनर्बहाली, बायो-ड्रेनेज और रोहिड़ा व खेजड़ी जैसे देशज वृक्षों की आनुवंशिकी में सुधार।

(4) ICMR-NIIRNCD (पूर्व में DMRC - मरुस्थलीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान केंद्र, जोधपुर)

* **स्थापना व पुनर्गठन**: पूर्व में वर्ष 1984 में स्थापित 'डेजर्ट मेडिसिन रिसर्च सेंटर' (DMRC) को वर्ष 2019 में पुनर्गठित कर 'नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर इम्प्लीमेंटेशन रिसर्च ऑन नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज' (NIIRNCD) नाम दिया गया। * **शासी निकाय**: भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR)। * **प्रमुख कार्य**: मरुस्थलीय पर्यावरण में होने वाले रोग, सिलिकोसिस, फ्लोरोसिस, वेक्टर-जनित रोग (मलेरिया, डेंगू) तथा गैर-संचारी रोगों (मधुमेह, उच्च रक्तचाप) के समाधान हेतु व्यावहारिक अनुसंधान।

(5) परमाणु ऊर्जा अवसंरचना एवं BARC (रावतभाटा, चित्तौड़गढ़)

* **राजस्थान परमाणु विद्युत गृह (RAPS)**: भारत का पहला प्रेशराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर (PHWR), जिसकी स्थापना कनाडा के सहयोग से 1973 में प्रारंभ हुई। * **भारी जल संयंत्र (Heavy Water Plant)**: रावतभाटा में भारी जल बोर्ड (DAE) द्वारा संचालित। * **भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) इकाइयाँ**: गामा विकिरण तकनीक का उपयोग कर खाद्यान्न एवं मसालों के संरक्षण हेतु विकिरण प्रसंस्करण केंद्र तथा परमाणु अपशिष्ट प्रबंधन सुविधाएं।

(6) कृषि, पशु एवं मसाला अनुसंधान संस्थान

* **राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्र (NRCSS)**: तबीजी, अजमेर (स्थापना 2000; धनिया, जीरा, सौंफ, मेथी पर विशेष शोध)। * **राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र (NRCC)**: जोड़बीड़, बीकानेर (स्थापना 1984; ऊँट के दुग्ध उत्पाद, औषधीय गुण एवं संरक्षण)। * **केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान (CSWRI)**: अविकानगर, मालपुरा, टोंक (स्थापना 1962; भारत मेरिनो, अविकालीन, मालपुरा नस्ल विकास)। * **केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान (CIAH)**: बीकानेर (स्थापना 1993/2000; बेर, गोंदा, काचरी, मतीरा की उन्नत किस्में)। * **सरसों अनुसंधान निदेशालय (DRMR)**: सेवर, भरतपुर (स्थापना 1993; राई व सरसों की उन्नत किस्मों पर अखिल भारतीय शोध)।

(7) उच्च तकनीकी शिक्षा एवं उन्नत शोध संस्थान

* **आईआईटी जोधपुर (IIT Jodhpur)**: कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर-फिजिकल सिस्टम्स, हेरिटेज साइंस, स्मार्ट हेल्थकेयर और अक्षय ऊर्जा अनुसंधान में अग्रणी। * **बिट्स पिलानी (BITS Pilani)**: 1964 में डीम्ड विश्वविद्यालय; तकनीकी शिक्षा, सेमीकंडक्टर लैब और उद्यमिता संवर्धन में अंतरराष्ट्रीय ख्याति। * **एमबीएम विश्वविद्यालय (MBM University, जोधपुर)**: 1951 में स्थापित ऐतिहासिक इंजीनियरिंग कॉलेज (2021 में विश्वविद्यालय), खनन और सिविल इंजीनियरिंग का प्रमुख केंद्र।

3. दूरसंवेदी तकनीक, अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी (GIS)

सुदूर संवेदन (Remote Sensing) और उपग्रह प्रौद्योगिकी के उपयोग में राजस्थान भारत के अग्रणी राज्यों में शुमार है:

(1) राज्य दूरसंवेदी अनुप्रयोग केंद्र (SRSAC, जोधपुर)

* **स्थापना**: वर्ष 1985 (जोधपुर में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन)। * **उद्देश्य**: प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन हेतु सैटेलाइट डेटा का विश्लेषण। * **अनुप्रयोग**: भूजल संभाव्यता मानचित्रण (Groundwater Prospect Maps), भू-उपयोग/भू-आवरण वर्गीकरण, बंजर भूमि एटलस, सूखा निगरानी तथा फसल क्षेत्र आकलन।

(2) इसरो क्षेत्रीय दूरसंवेदी केंद्र - पश्चिम (RRSC-West, जोधपुर)

* **संस्था**: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO / NRSC)। * **स्थान**: जोधपुर। * **कार्य**: पश्चिमी भारत (राजस्थान, गुजरात आदि) के लिए डिजिटल इमेज प्रोसेसिंग, उपग्रह डेटा संग्रह, मरुस्थलीकरण की गति का मापन तथा प्राकृतिक आपदा प्रबंधन।

(3) राज-धरा (Raj-Dhara): राजस्थान स्थानिक डेटा अवसंरचना (State SDI)

* **अवधारणा**: राज्य का एकीकृत, बहु-स्तरीय भू-स्थानिक (Geospatial) पोर्टल, जिसे DoIT&C द्वारा विकसित किया गया है। * **विशेषताएँ**: - सभी सरकारी विभागों की संपत्तियों, सड़कों, जल निकायों और सीमाओं का एकल जीआईएस प्लेटफॉर्म पर मैपिंग। - राज्य के 4 प्रमुख शहरों (जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर) का अत्याधुनिक **3D सिटी मॉडल (3D City Modeling)** तैयार करना, जिससे शहरी नियोजन, आपदा प्रबंधन और बुनियादी ढांचे के विकास में 3D दृश्यता प्राप्त होती है। * **राज-जीआईएस (Raj-GIS)**: विभिन्न विभागीय सेवाओं (राजस्व कैडस्ट्रल मानचित्र, वन सीमाएं, खनिज पट्टे) का सैटेलाइट इमेजरी के साथ एकीकरण।

(4) उपग्रह आधारित संचार एवं शिक्षा

* **एड्यूसैट (Edusat) नेटवर्क**: राज्य के दूरदराज के विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में इसरो के उपग्रह आधारित डिजिटल व्याख्यान का प्रसारण। * **ग्रामसैट (GramSAT)**: पंचायती राज संस्थाओं, ग्रामीण विकास प्रशिक्षण तथा ई-स्वास्थ्य परामर्श हेतु उपग्रह आधारित संचार तंत्र।

4. डिजिटल शासन एवं ई-गवर्नेंस अवसंरचना (Digital Governance)

राजस्थान देश में ई-गवर्नेंस और पारदर्शी डिजिटल प्रशासन को धरातल पर उतारने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल है:

(1) स्टेट डेटा सेंटर (State Data Centre - SDC, जयपुर)

* **दर्जा**: देश के सबसे बड़े और उन्नत डेटा सेंटरों में से एक (टियर-4 / अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित क्लाउड अवसंरचना)। * **कार्य**: राज्य सरकार के सभी विभागों, पोर्टलों, डीबीटी योजनाओं और नागरिक डेटाबेस की सुरक्षित होस्टिंग तथा 24x7 साइबर सुरक्षा निगरानी। आपदा रिकवरी केंद्र (Disaster Recovery Centre - DRC) जोधपुर में स्थापित।

(2) राजनेट (RajNET)

* **अवधारणा**: राज्यव्यापी एकीकृत संचार नेटवर्क। * **प्रौद्योगिकी**: हाइब्रिड नेटवर्क (VSAT उपग्रह संचार + स्थलीय फाइबर ऑप्टिक केबल - OFC)। * **पहुँच**: राज्य सचिवालय से लेकर ग्राम पंचायत और भारत निर्माण राजीव गांधी सेवा केंद्रों (Atal Seva Kendra) तक उच्च गति इंटरनेट कनेक्टिविटी।

(3) राज-स्वान (Raj-SWAN)

* **पूर्ण रूप**: Rajasthan State Wide Area Network. * **कार्य**: राज्य मुख्यालय को सभी जिला मुख्यालयों, उपखंडों और तहसील कार्यालयों से सुरक्षित वॉयस, डेटा और वीडियो संचार से जोड़ना।

(4) ई-मित्र एवं ई-मित्र प्लस (e-Mitra & e-Mitra Plus)

* **ई-मित्र (e-Mitra)**: वर्ष 2004 से संचालित एकीकृत जनसेवा केंद्र (G2C एवं B2C सेवाओं हेतु 80,000+ कियोस्क नेटवर्क)। * **ई-मित्र प्लस (e-Mitra Plus)**: मानव-रहित स्वचालित सेल्फ-सर्विस कियोस्क (ATM की भाँति टच-स्क्रीन कियोस्क), जिसमें बिना किसी मध्यस्थ के सरकारी प्रमाण पत्र प्रिंट, बिल भुगतान, और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग संभव है।

(5) प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म

* **राज-काज (Raj-Kaj)**: राज्य का एकीकृत ई-ऑफिस सॉफ्टवेयर, जिसके माध्यम से सरकारी फाइलों का इलेक्ट्रॉनिक निस्तारण, अवकाश, अचल संपत्ति विवरण और वार्षिक कार्य मूल्यांकन (APAR) पेपरलेस किया जाता है। * **राज-ई-वॉल्ट (Raj-e-Vault)**: नागरिकों और अधिकारियों हेतु सुरक्षित डिजिटल दस्तावेज़ रिपॉजिटरी (Digital Document Management System), जिसमें डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित दस्तावेज कानूनी रूप से मान्य होते हैं। * **राजएसएसओ (RajSSO - Single Sign-On)**: नागरिकों, कर्मचारियों और उद्योगों हेतु एकल आईडी व पासवर्ड से 100+ विभागीय सेवाओं तक पहुँच का सुरक्षित प्रवेश द्वार। * **अभय कमांड एवं कंट्रोल सेंटर (ACCC)**: राज्य के सभी संभागीय व जिला मुख्यालयों पर स्थापित एकीकृत कमान केंद्र; शहर निगरानी (CCTV), यातायात प्रबंधन, 112 आपातकालीन सेवा और स्मार्ट पुलिसिंग हेतु वीडियो एनालिटिक्स का उपयोग। * **जन सूचना पोर्टल**: आरटीआई अधिनियम, 2005 की धारा 4(2) के तहत नागरिकों को बिना मांगे सार्वजनिक योजनाओं की जानकारी देने वाला देश का पहला पारदर्शी मंच (सितंबर 2019)। * **राजस्थान संपर्क (181)**: टोल-फ्री जन-शिकायत निवारण प्रणाली, जो 5-स्तरीय निस्तारण तंत्र पर कार्य करती है।

5. अत्याधुनिक एवं उभरती प्रौद्योगिकियाँ (Emerging Technologies & CoE)

राज्य सरकार ने चौथी औद्योगिक क्रांति (Industry 4.0) की मांग को देखते हुए अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों में विशेष निवेश किया है:

(1) राजीव गांधी सेंटर ऑफ एडवांस टेक्नोलॉजी (R-CAT, जयपुर)

* **उद्घाटन**: 20 अगस्त 2022 (जयपुर में मुख्य केंद्र; संभाग स्तर पर भी उप-केंद्र)। * **उद्देश्य**: राज्य के युवाओं, इंजीनियरिंग स्नातकों और तकनीकी प्रतिभाओं को वैश्विक उद्योग की मांग के अनुरूप उन्नत फिनिशिंग प्रशिक्षण प्रदान करना। * **साझेदार बहुराष्ट्रीय कंपनियां**: Oracle, Cisco, Microsoft, AWS, SAS, RedHat, VMware आदि। * **प्रशिक्षण क्षेत्र**: AI, मशीन लर्निंग, क्लाउड कंप्यूटिंग, बिग डेटा एनालिटिक्स, ऑगमेंटेड रियलिटी/वर्चुअल रियलिटी (AR/VR), रोबोटिक्स और साइबर सुरक्षा।

(2) राजीव गांधी फिनटेक डिजिटल संस्थान (Jodhpur)

* **स्वरूप**: जोधपुर में स्थापित राज्य का पहला विशिष्ट वित्तीय प्रौद्योगिकी (FinTech) डिजिटल विश्वविद्यालय/स्वायत्त संस्थान। * **संबंधित कानून**: 'राजीव गांधी फिनटेक डिजिटल संस्थान अधिनियम, 2023'। * **लागत व उद्देश्य**: लगभग ₹ 672 करोड़ की लागत से फिनटेक, डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा और वित्तीय विश्लेषिकी में स्नातक, परास्नातक व शोध कार्यक्रम।

(3) राजस्थान फिनटेक पार्क (जयपुर)

* **स्थान**: मानसरोवर, जयपुर (रीको द्वारा लगभग 65 एकड़ भूमि पर विकसित)। * **लक्ष्य**: वैश्विक वित्तीय, आईटी और बैंक-संबद्ध कॉर्पोरेट कंपनियों को प्लग-एंड-प्ले सुविधाएं उपलब्ध कराना।

(4) उत्कृष्टता केंद्र (Centres of Excellence - CoE)

* **ब्लॉकचेन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस**: भूमि अभिलेखों के अभेद्य डिजिटलीकरण, शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के सत्यापन और स्वास्थ्य रिकॉर्ड की सुरक्षा हेतु जयपुर में स्थापित। * **आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं रोबोटिक्स CoE**: उद्योग 4.0 के अनुप्रयोगों, ड्रोन डेटा प्रोसेसिंग और स्मार्ट सिटी समाधानों हेतु स्थापित। * **साइबर सुरक्षा उत्कृष्टता केंद्र**: सरदार पटेल पुलिस, सुरक्षा एवं दाण्डिक न्याय विश्वविद्यालय (जोधपुर) में अत्याधुनिक साइबर फोरेंसिक और सुरक्षा अनुसंधान प्रयोगशाला। * **ड्रोन प्रौद्योगिकी संवर्धन**: राज्य में कृषि छिड़काव, भूमि सर्वेक्षण और निगरानी हेतु ड्रोन नीति का कार्यान्वयन और राजकीय आईटीआई संस्थानों में ड्रोन पायलट प्रशिक्षण।

6. नवाचार, स्टार्टअप पारिस्थितिकी एवं इन्क्यूबेशन (Startup Ecosystem)

राजस्थान ने नवाचार और युवा उद्यमिता के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष स्थान प्राप्त किया है:

(1) आई-स्टार्ट राजस्थान (iStart Rajasthan)

* **स्वरूप**: DoIT&C द्वारा संचालित राजस्थान का प्रमुख फ्लैगशिप स्टार्टअप कार्यक्रम। * **सिंगल विंडो पोर्टल**: आइडिया से लेकर फंडिंग, मेंटरशिप और इन्क्यूबेशन तक संपूर्ण सहायता। * **क्यू-रेट (QRate) प्रणाली**: स्टार्टअप्स के मूल्यांकन और उनकी परिपक्वता (Maturity) को मापने का स्वचालित रेटिंग तंत्र (Bronze, Silver, Gold, Platinum, Signature)। * **वित्तीय सहायता**: सीड फंडिंग (Seed Grant), मासिक निर्वाह भत्ता (Sustenance Allowance), विपणन सहायता और बौद्धिक संपदा (IPR) प्रतिपूर्ति।

(2) भामाशाह टेक्नो हब (Bhamashah Techno Hub, जयपुर)

* **स्थान**: झालाना डूंगरी, जयपुर। * **महत्व**: 1 लाख वर्ग फीट से अधिक क्षेत्र में फैला देश का सबसे बड़ा राज्य-संचालित इन्क्यूबेशन केंद्र। * **क्षमता**: 700 से अधिक कार्यस्थान (Seats), अत्याधुनिक टिंकरिंग लैब, 3D प्रिंटिंग सुविधाएं, मीटिंग पॉड्स और वीसी रूम्स, जहाँ चयनित स्टार्टअप्स को पूर्णतः निःशुल्क स्थान और इंटरनेट उपलब्ध कराया जाता है।

(3) आई-स्टार्ट नेस्ट (iStart Nest) इन्क्यूबेटर्स

* जयपुर के अलावा जोधपुर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर, अजमेर, भरतपुर और चुरू में संभाग/जिला स्तरीय अत्याधुनिक इन्क्यूबेशन केंद्र स्थापित।

(4) राजस्थान वेंचर कैपिटल फंड (RVCF)

* **स्वरूप**: राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित देश का पहला राज्य-स्तरीय वेंचर कैपिटल फंड (1995 से सक्रिय)। * **कार्य**: प्रौद्योगिकी आधारित प्रारंभिक एवं विकास चरण (Early-stage) के स्टार्टअप्स को इक्विटी निवेश उपलब्ध कराना।

(5) चैलेंज फॉर चेंज (Challenge for Change)

* **उद्देश्य**: राज्य सरकार की जटिल प्रशासनिक और नागरिक समस्याओं के समाधान हेतु युवा स्टार्टअप्स को सीधे आमंत्रित करना और चयनित स्टार्टअप्स को ₹ 1 करोड़ तक के सरकारी कार्य आदेश (Work Orders) सीधे प्रदान करना।

7. जैव प्रौद्योगिकी, मरुस्थलीय विज्ञान एवं कृषि-पर्यावरण नवाचार

(1) जैव प्रौद्योगिकी पार्क (Biotechnology Parks)

* **चोपानकी (भिवाड़ी, अलवर)**: रीको द्वारा विकसित जैव प्रौद्योगिकी पार्क, जहाँ बायो-फार्मास्युटिकल, बायो-केमिकल्स और ऊतक संवर्धन इकाइयां स्थापित हैं। * **सीतापुरा (जयपुर)**: जैव प्रौद्योगिकी पार्क एवं बायो-इन्क्यूबेटर।

(2) मरुस्थलीय पादप ऊतक संवर्धन (Tissue Culture)

* **खजूर (Date Palm) ऊतक संवर्धन प्रयोगशाला**: चौपासनी (जोधपुर) में स्थापित, जिसके माध्यम से इजराइल से आयातित 'बरही', 'खलास' और 'मेdomain' किस्मों के रोगमुक्त खजूर पौधों का बड़े पैमाने पर क्लोनिंग व वितरण किया गया। * **खेजड़ी एवं रोहिड़ा माइक्रो-प्रोपेगेशन**: CAZRI और AFRI द्वारा थार के कल्पवृक्ष (खेजड़ी) तथा मरु-टीक (रोहिड़ा) की उन्नत क्लोन तैयार करने की तकनीक विकसित। * **गूगल (Commiphora wightii) संरक्षण**: औषधीय महत्व के गूगल पौधे के अति-दोहन को रोकने हेतु टिशू कल्चर से संवर्धन।

(3) जोजोबा एवं जैतून (Olive) वैज्ञानिक प्रयोग

* **जोजोबा (Hobaroma)**: इजराइल की सहायता से शुष्क मरुस्थलीय क्षेत्रों में 'पीला सोना' कहे जाने वाले जोजोबा (Simmondsia chinensis) के वृक्षारोपण हेतु फतेहपुर (सीकर) और ढंड (जयपुर) में परियोजनाएं। इसका तेल उच्च तापमान वाले स्नेहक (Lubricant) एवं सौंदर्य प्रसाधन में काम आता है। * **जैतून (Olive) की खेती एवं ओलिव टी**: राजस्थान जैतून संवर्धन सोसाइटी (ROCS) द्वारा बस्सी (जयपुर), लूणकरणसर (बीकानेर) में जैतून के बगीचे तथा देश का पहला 'ओलिव टी' (जैतून चाय) प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किया गया।

8. सौर एवं नवीकरणीय ऊर्जा अनुसंधान (Renewable Energy Research)

  • सौर विकिरण संसाधन आकलन स्टेशन: नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) और राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (NISE) द्वारा जोधपुर, जैसलमेर और बीकानेर में स्थापित।
  • राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान (NIWE) केंद्र: जैसलमेर और फलोदी में पवन एवं सौर हाइब्रिड मापन तकनीक का संचालन।
  • एग्री-वोल्टेइक प्रणाली (Agri-voltaics): CAZRI जोधपुर द्वारा विकसित तकनीक, जिसमें सौर पैनलों के नीचे छाया-सहिष्णु फसलों (मूंग, मोठ, ईसबगोल) की खेती और वर्षा जल संचयन का एकीकृत मॉडल प्रस्तुत किया गया है।

9. विज्ञान प्रसार, विज्ञान पार्क, तारामंडल एवं बौद्धिक संपदा

(1) विज्ञान पार्क (Science Parks)

* **विज्ञान पार्क, जयपुर**: शास्त्री नगर, जयपुर (1998; बी.एम. बिड़ला तारामंडल के अलावा राज्य सरकार का प्रमुख इंटरैक्टिव विज्ञान केंद्र)। * **विज्ञान पार्क, जोधपुर एवं नवलगढ़ (झुंझुनूँ)**: ग्रामीण और अर्ध-शहरी विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने हेतु स्थापित। * **क्षेत्रीय विज्ञान केंद्र एवं तारामंडल, कोटा**: कोटा के ऑक्सिजोन सिटी पार्क परिसर में स्थापित अत्याधुनिक डिजिटल तारामंडल (Planetarium) और विज्ञान केंद्र।

(2) पेटेंट सूचना केंद्र (PIC, जयपुर) एवं भौगोलिक उपदर्शन (GI Tag)

* विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) का पेटेंट सूचना केंद्र राज्य के पारंपरिक ज्ञान, कला और वैज्ञानिक आविष्कारों के बौद्धिक संपदा संरक्षण हेतु कार्य करता है। * इसने राजस्थान के कई विश्वप्रसिद्ध हस्तशिल्पों और उत्पादों को जीआई (GI) पंजीकरण दिलाने में तकनीकी मार्गदर्शन दिया है (जैसे— सांगानेरी प्रिंट, बगरू प्रिंट, ब्लू पॉटरी, मोलेला मिट्टी कार्य, थेवा कला, पोकरण पॉटरी, नाथद्वारा पिछवाई, जोधपुरी बंधेज आदि)।

(3) विज्ञान संचार एवं पुरस्कार

* **रमन पुरस्कार एवं छात्र विज्ञान संगोष्ठी**: विद्यार्थियों में मूलभूत विज्ञान के प्रति रुचि जगाने हेतु वार्षिक प्रतियोगिताएं। * **राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (28 फरवरी)**: राज्यभर में नोबेल पुरस्कार विजेता सी.वी. रमन के 'रमन प्रभाव' की खोज के उपलक्ष्य में वैज्ञानिक जागरूकता उत्सव।