अध्याय 16: समाज के रंग — राजस्थान की जातियाँ एवं जनजातियाँ
SECTION 1: अध्याय 16: समाज के रंग — राजस्थान की जातियाँ एवं जनजातियाँ
परीक्षा: RPSC / RSSB / REET / Board Exam
SECTION 2: परीक्षा दृष्टि से महत्वपूर्ण
यह अध्याय समुदाय, क्षेत्र, संस्कृति और संवैधानिक पहचान को जोड़ता है। जनगणना के आँकड़ों के साथ वर्ष अवश्य याद करें। जाति, जनजाति, गोत्र और अनुसूचित क्षेत्र अलग अवधारणाएँ हैं। पारंपरिक पेशा किसी समुदाय के प्रत्येक व्यक्ति का वर्तमान पेशा नहीं है।
कीवर्ड: समुदाय, अनुसूचित जनजाति, जनगणना 2011 प्रश्नों की संख्या परीक्षा और वर्ष के अनुसार बदलती है; 3–5 प्रश्न का निश्चित औसत सत्यापित नहीं है।
SECTION 3: ज़िला-वार योगदान
| जिला / क्षेत्र | योगदान | व्यक्ति / समुदाय | वर्ष / काल | स्थान |
|---|---|---|---|---|
| उदयपुर | भील; कथौड़ी क्षेत्र | भील / कथौड़ी | जीवित परंपरा | कोटड़ा, झाड़ोल |
| डूंगरपुर | भील और डामोर | स्थानीय समुदाय | जीवित परंपरा | सीमलवाड़ा |
| बांसवाड़ा | भील संस्कृति, मानगढ़ | गोविंद गुरु | 1913 | मानगढ़ |
| प्रतापगढ़ | दक्षिणी जनजातीय क्षेत्र | भील समुदाय | जीवित परंपरा | दक्षिणी अरावली |
| जयपुर / दौसा | पूर्वी मीणा क्षेत्र | मीणा समुदाय | जनगणना 2011 | पूर्वी राजस्थान |
| अलवर / सवाई माधोपुर / करौली | मीणा आबादी | मीणा समुदाय | जनगणना 2011 | पूर्वी पट्टी |
| बारां | सहरिया बस्तियाँ | सहरिया | वर्तमान सांस्कृतिक क्षेत्र | शाहाबाद, किशनगंज |
| सिरोही / पाली | गरासिया क्षेत्र | गरासिया | जीवित परंपरा | आबूरोड, पिंडवाड़ा, बाली |
| राजसमंद / चित्तौड़गढ़ | अनुसूचित क्षेत्र के कुछ भाग | अधिसूचित क्षेत्र | 2018 अधिसूचना | ग्रामवार सीमा देखें |
| बीकानेर / जैसलमेर / जोधपुर | पशुपालक एवं लोक-कलाकार परंपराएँ | राइका, लोक कलाकार | जीवित परंपरा | पश्चिमी राजस्थान |
| कोटा | हाड़ौती का सामाजिक परिवेश | अनेक समुदाय | जीवित परंपरा | कोटा |
SECTION 4: मूल तथ्य एवं विषय-वार अध्ययन
पहचान और आँकड़े
मीणा — मीणा जनसंख्या में सबसे बड़ी अनुसूचित जनजाति है। भील को राजस्थान की सबसे बड़ी ST लिखना गलत है।
13.48 प्रतिशत — 13.48 प्रतिशत राजस्थान का 2011 आँकड़ा है। 8.61 प्रतिशत भारत का लगभग समकक्ष आँकड़ा है, राजस्थान का नहीं।
92,38,534 — 2011 की ST जनसंख्या 92,38,534 थी। यह पूरे राज्य की कुल जनसंख्या नहीं है।
12 — सूची में 12 मुख्य प्रविष्टियाँ हैं। एक प्रविष्टि के वैकल्पिक नाम और उपसमूह को अलग संख्या न गिनें।
ये अलग सामाजिक अवधारणाएँ हैं — जाति, जनजाति और गोत्र को समानार्थी न मानें। ST एक विशिष्ट संवैधानिक श्रेणी है।
भौगोलिक विस्तार
पूर्वी राजस्थान — जयपुर, दौसा, अलवर और सवाई माधोपुर प्रमुख क्षेत्र हैं। इससे अन्य जिलों में निवास का निषेध नहीं होता।
दक्षिणी राजस्थान — उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ महत्वपूर्ण हैं। अरावली और सीमावर्ती सांस्कृतिक संपर्क याद रखें।
शाहाबाद–किशनगंज, बारां — सहरिया बस्तियाँ बारां के शाहाबाद-किशनगंज में प्रमुख हैं। किशनगंज को किशनगढ़ न पढ़ें।
डूंगरपुर — सीमलवाड़ा डूंगरपुर में है। डामोर को केवल थार का समुदाय कहना गलत है।
गरासिया — सिरोही का यह क्षेत्र गरासिया निवास के लिए महत्वपूर्ण है। उदयपुर और पाली में भी गरासिया क्षेत्र हैं।
अधिसूचित समुदाय
राजपूत गरासिया — आधिकारिक शब्दावली गरासिया को राजपूत गरासिया छोड़कर मानती है। परीक्षा में अपवाद महत्वपूर्ण है।
अलग प्रविष्टियाँ — मीणा और भील-मीणा अलग मुख्य प्रविष्टियाँ हैं। मिलते नामों से सूची न बदलें।
कत्था निष्कर्षण — नाम और परंपरा कत्था निष्कर्षण से जोड़े जाते हैं। सभी वर्तमान सदस्यों का पेशा इससे निर्धारित नहीं होता।
पटेलिया — पटेलिया सूची की एक मुख्य प्रविष्टि है। व्यापक जाति नामों को स्वतः ST न घोषित करें।
डामोर–डामरिया — डामोर और डामरिया एक प्रविष्टि में हैं। वैकल्पिक नाम और अलग समुदाय का भेद याद रखें।
संस्कृति और नृत्य
भील — गवरी मेवाड़ के भील समुदाय से जुड़ी है। इसे गरासिया के वालर का पर्याय न समझें।
गरासिया — वालर गरासिया सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा है। नृत्य का संबंध विधिक श्रेणी का प्रमाण नहीं है।
RPSC 2018 का आधिकारिक उत्तर — RAS 2018 प्रश्न 15 में लूर सही विकल्प है। गवरी और तेरहताली उससे अलग हैं।
2010 — कालबेलिया लोकगीत और नृत्य 2010 में अंकित हुए। यह अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची है।
क्षेत्रीय विविधता और बदलते जीवन को मानना — जीवित संस्कृति में स्थानीय विविधता होती है। किसी समुदाय के लिए मनगढ़ंत संस्थापक या स्थापना-वर्ष न जोड़ें।
पशुपालक और शिल्पी समाज
पशुपालन — राइका / रैबारी पशुपालक परंपराओं से जुड़े हैं। इससे सभी सदस्यों का वर्तमान काम तय नहीं होता।
लौह-कार्य — गाडिया लोहार लौह-शिल्प से जुड़े हैं। सांस्कृतिक समुदाय और संवैधानिक सूची अलग विषय हैं।
पश्चिमी राजस्थान — थार के लोक-संगीत में इन समुदायों का बड़ा योगदान है। कलाकार समुदाय को स्वतः ST न मानें।
इसे वर्तमान सभी सदस्यों पर लागू न करें — शिक्षा, शहरीकरण और रोजगार से जीवनयापन बदलते हैं। ऐतिहासिक पेशे को अनिवार्य पहचान न बनाएँ।
राज्य की विधिक ST सूची — सामाजिक इतिहास में अनेक समुदाय आते हैं। किसी समुदाय की विधिक श्रेणी अलग आधिकारिक जाँच मांगती है।
संवैधानिक आधार
अनुच्छेद 342 — अनुच्छेद 342 अनुसूचित जनजातियों से संबंधित है। सूची राज्य या संघ-राज्य क्षेत्र के संदर्भ में होती है।
संसद — संसद विधि द्वारा समावेशन या बहिष्करण कर सकती है। स्थानीय प्रथा सूची को स्वयं नहीं बदलती।
पाँचवीं अनुसूची — अनुच्छेद 244(1) और पाँचवीं अनुसूची प्रासंगिक हैं। राजस्थान को छठी अनुसूची का राज्य न लिखें।
अनुच्छेद 338A — 338A राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग से जुड़ा है। 338 और 338A का अंतर याद रखें।
दुर्बल वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हित — अनुच्छेद 46 विशेषतः SC और ST सहित दुर्बल वर्गों के हित बढ़ाने का निर्देश देता है। यह राज्य के नीति-निदेशक तत्वों में है।
क्षेत्र और विकास नीति
19 मई 2018 — C.O.270 दिनांक 19 मई 2018 महत्वपूर्ण है। 2018 की सीमाओं को वर्तमान जिला-संख्या से न मिलाएँ।
बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ — इन तीन जिलों के साथ अन्य पाँच तत्कालीन जिलों के कुछ भाग शामिल थे। सभी आठ को पूर्ण जिला न समझें।
1996 — PESA 1996 अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायत प्रावधानों का विस्तार करता है। इसे पूरे भारत की हर ग्राम सभा पर समान विशेष कानून न मानें।
2006 — संक्षिप्त शीर्षक में 2006 है। अधिनियम संख्या 2, 2007 होने से शीर्षक वर्ष नहीं बदलता।
ST निवासी अनुसूचित क्षेत्र के बाहर भी रहते हैं — अनुसूचित क्षेत्र क्षेत्रीय अधिसूचना है। ST व्यक्ति की विधिक पहचान अलग आधार पर होती है।
सुधार और आंदोलन
गोविंद गुरु — गोविंद गुरु जनजातीय समाज-सुधार से जुड़े थे। मानगढ़ 1913 उनकी स्मृति का प्रमुख स्थल है।
मोतीलाल तेजावत — मोतीलाल तेजावत एकी संगठन से जुड़े हैं। गोविंद गुरु के भगत आंदोलन से उन्हें न मिलाएँ।
17 नवंबर 1913 — मानगढ़ गोलीकांड 17 नवंबर 1913 को हुआ। 7 मार्च 1922 दढ़वाव से संबंधित है।
गुजरात — दढ़वाव एकी आंदोलन के इतिहास से जुड़ा है। इसे राजस्थान के जिले में न रखें।
एकी — मातृकुंडिया चित्तौड़गढ़ में है। 1921 का जन-जुटान तेजावत के एकी आंदोलन से जोड़ा जाता है।
PVTG और योजनाएँ
सहरिया — राजस्थान की PVTG सहरिया है। PVTG सभी ST समुदायों का समानार्थी नहीं है।
विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह — यह विकास नीति की एक विशिष्ट श्रेणी है। सम्मानजनक आधुनिक शब्दावली PVTG है।
15 नवंबर 2023 — PM-JANMAN 15 नवंबर 2023 को आरंभ हुआ। इसका केंद्र PVTG समुदायों की विकास जरूरतें हैं।
पाँचवीं योजना — TSP रणनीति 1974–75 में पाँचवीं योजना के दौरान अपनाई गई। इसे प्रथम योजना से न जोड़ें।
उदयपुर — संस्थान उदयपुर में है। बिना सत्यापन इसका स्थापना-वर्ष न लिखें।
मिलान और क्रम
सहरिया–बारां — सहरिया का प्रमुख क्षेत्र बारां है। डामोर-डूंगरपुर और गरासिया-सिरोही भी याद रखें।
दोनों सही; कारण कथन समझाता है — अनुच्छेद 342 राज्य या संघ-राज्य क्षेत्र के संदर्भ में है। इसलिए एक राज्य का दर्जा स्वतः हर राज्य पर लागू न मानें।
मानगढ़–एकी जन-जुटान–PESA–PM-JANMAN — क्रम 1913, 1921, 1996 और 2023 है। आंदोलन और नीति की अलग समयरेखाएँ जोड़कर पढ़ें।
गरासिया–सभी राजपूत गरासिया ST — आधिकारिक गरासिया प्रविष्टि राजपूत गरासिया को बाहर रखती है। शेष जोड़े प्रमुख सांस्कृतिक या भौगोलिक संबंध हैं।
राजस्थान ST: 13.48 प्रतिशत, जनगणना 2011 — आँकड़े के साथ क्षेत्र और वर्ष दोनों लिखें। राज्य औसत हर जिले का प्रतिशत नहीं है।
आधिकारिक सूची: 12 मुख्य प्रविष्टियाँ
भील (उपसमूह सहित); भील-मीणा; डामोर/डामरिया; धनका (तड़वी, तेतरिया, वालवी सहित); गरासिया (राजपूत गरासिया को छोड़कर); कथौड़ी/कातकरी (सूचीबद्ध उपसमूह सहित); कोकना/कोकनी/कुकना; कोली ढोर/टोकरे कोली/कोलचा/कोलघा; मीणा; नायकड़ा/नायका (सूचीबद्ध उपसमूह सहित); पटेलिया; सहरिया।
भाषा, बोली, मौखिक परंपरा और जनगणना अलग साक्ष्य हैं। उत्पत्ति की लोककथाओं को संवैधानिक दर्जे का प्रमाण न मानें।
SECTION 5: प्रमुख व्यक्ति एवं वर्ष
| व्यक्ति | जन्म वर्ष | कार्य | प्रमुख योगदान | योगदान वर्ष |
|---|---|---|---|---|
| गोविंद गुरु | 1858 | समाज सुधार | भगत आंदोलन, मानगढ़ | 1913 |
| मोतीलाल तेजावत | 1886 | जनजातीय संगठन | एकी आंदोलन | 1921 जन-जुटान |
| माणिक्यलाल वर्मा | 1897 | लोकसेवा | मेवाड़ प्रजामंडल | 1938 |
SECTION 6: प्रमुख स्थल एवं संस्थान
| स्थल / संस्थान | स्थिति | महत्व |
|---|---|---|
| मानगढ़ धाम | बांसवाड़ा; राजस्थान-गुजरात सीमा | 1913 के बलिदान और गोविंद गुरु की स्मृति |
| मातृकुंडिया | चित्तौड़गढ़ | एकी आंदोलन का जन-जुटान |
| दढ़वाव | गुजरात | 1922 की गोलीबारी; राजस्थान में न रखें |
| MLV जनजाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान | उदयपुर | जनजातीय शोध और प्रशिक्षण |
| शाहाबाद–किशनगंज | बारां | सहरिया क्षेत्र; किशनगढ़ से अलग |
SECTION 7: महत्वपूर्ण तिथियाँ
| वर्ष / तिथि | घटना | महत्व |
|---|---|---|
| 1858 | गोविंद गुरु का जन्म | भगत आंदोलन के नेता |
| 1886 | मोतीलाल तेजावत का जन्म | एकी आंदोलन के नेता |
| 1913 | मानगढ़ गोलीकांड | 17 नवंबर |
| 1921 | एकी जन-जुटान | मातृकुंडिया |
| 1922 | दढ़वाव गोलीकांड | 7 मार्च; गुजरात |
| 1950 | संविधान लागू | अनुसूचित जनजातियों का ढाँचा |
| 1974–75 | TSP अपनाया गया | पाँचवीं पंचवर्षीय योजना |
| 1981 | पूर्व अनुसूचित क्षेत्र आदेश | बाद में 2018 आदेश ने बदला |
| 1996 | PESA अधिनियम | अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायत प्रावधान |
| 2006 | वन अधिकार अधिनियम का शीर्षक वर्ष | अधिनियम संख्या 2, 2007 से अलग |
| 2011 | जनगणना आधार | ST 13.48 प्रतिशत |
| 2018 | राजस्थान अनुसूचित क्षेत्र आदेश | 19 मई; C.O.270 |
| 2023 | PM-JANMAN आरंभ | 15 नवंबर; PVTGs पर केंद्रित |
SECTION 9: एक पंक्ति में सारांश और पुनरावृत्ति
व्यक्ति, स्थान और काल को एक साथ जोड़ें; समान नामों और प्रशासनिक श्रेणियों का अंतर याद रखें।
| विषय | स्मरण बिंदु |
|---|---|
| पहचान और आँकड़े | मीणा |
| भौगोलिक विस्तार | पूर्वी राजस्थान |
| अधिसूचित समुदाय | राजपूत गरासिया |
| संस्कृति और नृत्य | भील |
| पशुपालक और शिल्पी समाज | पशुपालन |
| संवैधानिक आधार | अनुच्छेद 342 |
| क्षेत्र और विकास नीति | 19 मई 2018 |
| सुधार और आंदोलन | गोविंद गुरु |
| PVTG और योजनाएँ | सहरिया |
| मिलान और क्रम | सहरिया–बारां |
SECTION 10: ट्रिक, भ्रम और मानचित्र
ट्रिक: पूरब–मीणा; दक्षिण–भील; बारां–सहरिया। यह प्रमुख क्षेत्र का स्मरण है, अनन्य निवास का दावा नहीं।
भ्रम दूर करें: मीणा और भील-मीणा अलग अधिसूचित प्रविष्टियाँ हैं। गरासिया प्रविष्टि में राजपूत गरासिया बाहर हैं। राइका / रैबारी, गाडिया लोहार, जाट, गुर्जर, ब्राह्मण, वैश्य और राजपूत को केवल सांस्कृतिक वर्णन से ST न मानें। विधिक श्रेणी राज्यवार आधिकारिक सूची से तय होती है। कोटा को बारां के शाहाबाद-किशनगंज का स्थानापन्न न लिखें।
मानचित्र: पूर्व में जयपुर-दौसा-अलवर; दक्षिण में उदयपुर-डूंगरपुर-बांसवाड़ा-प्रतापगढ़; दक्षिण-पश्चिम में सिरोही-पाली; दक्षिण-पूर्व में बारां। 2018 की सीमा में आठ तत्कालीन जिलों का उल्लेख है; इसे वर्तमान जिले-गणना न समझें।