राजस्थान में पशुपालन, पशु नस्लें एवं डेयरी विकास (Animal Husbandry, Livestock Breeds and Dairy Development in Rajasthan)
1. राजस्थान में पशुधन का आर्थिक महत्व एवं 20वीं पशुधन गणना (2019)
कृषि एवं राज्य अर्थव्यवस्था में योगदान
- **सकल राज्य मूल्य संवर्धन (GSVA):** राजस्थान की अर्थव्यवस्था में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र का योगदान प्रचलित मूल्यों पर लगभग 27% है, जिसमें **पशुधन उप-क्षेत्र (Livestock Sector) का योगदान लगभग 46.41%** है। अर्थात् राज्य में कृषि क्षेत्र के कुल सकल उत्पादन में फसल क्षेत्र से भी अधिक योगदान पशुधन क्षेत्र का रहता है। - **अकाल का सुरक्षा कवच:** पश्चिमी राजस्थान के शुष्क एवं अर्ध-शुष्क मरुस्थलीय क्षेत्रों (थार मरुस्थल) में अनिश्चित एवं अल्प वर्षा के कारण फसलें प्रायः विफल हो जाती हैं। ऐसी विपरीत प्राकृतिक परिस्थितियों में पशुपालन ग्रामीण परिवारों की आजीविका, खाद्य सुरक्षा एवं पोषण का मुख्य आधार बनता है। - **राष्ट्रीय उत्पादन में राजस्थान का हिस्सा:** - **दुग्ध उत्पादन (Milk Production):** भारत के कुल दुग्ध उत्पादन में राजस्थान का योगदान लगभग **14.64 से 15.05 प्रतिशत** रहता है (राजस्थान और उत्तर प्रदेश देश में प्रथम/द्वितीय स्थान पर प्रतिस्पर्धा करते हैं)। - **ऊन उत्पादन (Wool Production):** देश के कुल ऊन उत्पादन में राजस्थान **प्रथम स्थान (लगभग 45.91 प्रतिशत)** पर है। - **मांस उत्पादन (Meat Production):** देश के कुल मांस उत्पादन में राजस्थान का योगदान लगभग 6.01% है (11वां स्थान)। - **अंडा उत्पादन:** देश में लगभग 2.68% योगदान के साथ 13वां स्थान।20वीं पशुधन गणना (2019) के मुख्य निष्कर्ष
- **प्रक्रिया एवं डिजिटल गणना:** भारत सरकार के मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय (DAHD) तथा राजस्व मंडल अजमेर द्वारा यह गणना पहली बार पूर्णतः डिजिटल माध्यम (Tablet PC) से संचालित की गई। - **कुल पशुधन संपदा:** - 19वीं पशुगणना (2012): 577.32 लाख (57.73 मिलियन) - 20वीं पशुगणना (2019): **567.76 लाख (56.78 मिलियन)** - **शुद्ध कमी:** 1.66 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई (-1.66%)। - **राष्ट्रीय हिस्सेदारी:** देश के कुल पशुधन (535.78 मिलियन) का लगभग **10.60 प्रतिशत** पशुधन राजस्थान में पाया जाता है। कुल पशुधन संख्या की दृष्टि से राजस्थान देश में **द्वितीय स्थान** (प्रथम: उत्तर प्रदेश) पर है। - **पशु घनत्व (Livestock Density):** राजस्थान का औसत पशु घनत्व **166 पशु प्रति वर्ग किलोमीटर** है। - सर्वाधिक पशु घनत्व: राजसमंद (292) एवं दौसा (281) - न्यूनतम पशु घनत्व: जैसलमेर (62) एवं बीकानेर (102) - **प्रति हजार मानव जनसंख्या पर पशु:** लगभग 828 पशु।पशुधन प्रजाति-वार वितरण एवं राष्ट्रीय स्थान (20वीं पशुगणना 2019)
| पशु प्रजाति | राजस्थान में संख्या (लाख में) | देश में स्थान | देश के कुल का % | 2012 की तुलना में परिवर्तन (%) | सर्वाधिक जिले | न्यूनतम जिले |
|---|---|---|---|---|---|---|
| बकरी (Goat) | 208.40 लाख (36.7%) | प्रथम (1st) | 14.00% | -3.81% (कमी) | बाड़मेर, जोधपुर | धौलपुर |
| गोवंश / गाय (Cattle) | 139.37 लाख (24.5%) | छठा (6th) | 7.23% | +4.41% (वृद्धि) | बीकानेर, जोधपुर | धौलपुर |
| भैंस (Buffalo) | 136.93 लाख (24.1%) | द्वितीय (2nd) | 12.47% | +5.53% (वृद्धि) | जयपुर, अलवर | जैसलमेर |
| भेड़ (Sheep) | 79.04 लाख (13.9%) | चौथा (4th) | 10.64% | -12.95% (कमी) | बाड़मेर, जैसलमेर | बांसवाड़ा |
| ऊँट (Camel) | 2.13 लाख (0.37%) | प्रथम (1st) | 84.43% | -34.69% (तीव्र कमी) | जैसलमेर, बाड़मेर | प्रतापगढ़ |
| घोड़े व टट्टू (Horses) | 0.34 लाख | तीसरा (3rd) | 9.80% | -10.85% (कमी) | बीकानेर, बाड़मेर | डूंगरपुर |
| गधे (Donkeys) | 0.23 लाख | प्रथम (1st) | 18.70% | -71.31% (भारी कमी) | बाड़मेर, जैसलमेर | टोंक |
| कुक्कुट / मुर्गी (Poultry) | 146.23 लाख | 17वां | 1.71% | +82.23% (प्रचंड वृद्धि) | अजमेर, झुंझुनूं | करौली |
2. गोवंश की प्रमुख नस्लें (Indigenous Cattle Breeds of Rajasthan)
राजस्थान में देश की श्रेष्ठतम दुधारू, भारवाही एवं द्विकाजी देशी गोवंश नस्लें पाई जाती हैं।
प्रमुख नस्लों की तुलनात्मक तालिका
| नस्ल | मूल / वितरण क्षेत्र | श्रेणी (Type) | शारीरिक पहचान एवं विशिष्ट लक्षण | प्रमुख प्रजनन केंद्र |
|---|---|---|---|---|
| थारपारकर (Tharparkar) | बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर (थार मरुस्थल) | दुधारू (Milch) / द्विकाजी | • मूल स्थान: सिंध (पाकिस्तान) का थारपारकर जिला। अन्य नाम: 'मालानी', 'थारी', 'सफेद सिंधी'। • पूर्णतः सफेद या हल्का धूसर रंग, मध्यम कद, चौड़ा माथा, तेज गर्मी व अकाल सहने की अद्भुत क्षमता। रोग प्रतिरोधी। |
चांदन (जैसलमेर), सूरतगढ़ (श्रीगंगानगर) |
| राठी (Rathi) | बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, अनुपगढ़ | सर्वश्रेष्ठ दुधारू ('राजस्थान की कामधेनु') | • लाल सिंधी, साहीवाल और थारपारकर का प्राकृतिक संकरण। • भूरे/लाल शरीर पर सफेद धब्बे (चितकबरा रंग), गलकंबल ढीला, मध्यम सींग। अत्यधिक दुग्ध उत्पादन क्षमता। |
नोहर (हनुमानगढ़), बीकानेर |
| गीर / रेंडा / अजमेरा (Gir) | अजमेर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, राजसमंद | दुधारू (Milch) | • मूल स्थान: सौराष्ट्र (गीर वन, गुजरात)। स्थानीय नाम: 'रेंडा' या 'अजमेरा'। • उत्तल (उभरा हुआ) माथा, पत्तीनुमा लंबे लटके हुए मुड़े हुए कान, पीछे मुड़े सींग, लाल-कत्थई रंग। |
डग (झालावाड़), अजमेर |
| सांचौरी (Sanchori) | जालोर, सांचौर, सिरोही, पाली | द्विकाजी (Dual purpose) | • कांकरेज नस्ल से मिलती-जुलती। भारी सुगठित शरीर, सफेद-धूसर रंग। • दूध उत्पादन के साथ-साथ बैल कृषि व भारवाही कार्य में दक्ष। |
सांचौर (जालोर) |
| कांकरेज (Kankrej) | जालोर, सांचौर, बाड़मेर, पाली, सिरोही | द्विकाजी (Dual purpose) | • देश की सबसे भारी गोवंश नस्ल। मूल: कच्छ-गुजरात। • लंबे, मोटे, वीणा के आकार (अर्धचंद्राकार) के सींग, सवाई चाल (गर्वयुक्त तेज चाल) के लिए विश्वविख्यात। |
चौहटन (बाड़मेर) |
| नागौरी (Nagauri) | नागौर, डीडवाना-कुचामन, जोधपुर, नोखा | सर्वश्रेष्ठ भारवाही (Draft) | • मूल स्थान: सुहालक प्रदेश (नागौर)। • सफेद रंग, लंबा पतला चेहरा, सुगठित मांसपेशियां। इसके बैल हल जोतने व तीव्र गति से बोझा खींचने के लिए देश भर में प्रसिद्ध। |
नागौर, बसई (भरतपुर) |
| मालवी (Malvi) | झालावाड़, कोटा, बारां, चित्तौड़गढ़ (हाड़ौती-मालवा) | भारवाही (Draft) | • मूल स्थान: मालवा का पठार (म.प्र.)। • धूसर-सफेद रंग, छोटा गठीला शरीर, मजबूत कंधे। भारी वजन ढोने में सक्षम। |
डग (झालावाड़) |
| मेवाती / कोठी (Mewati) | अलवर, भरतपुर, डीग (मेवात क्षेत्र) | द्विकाजी (Dual purpose) | • हरियाणा, गीर और नागौरी का मिश्रण। स्थानीय नाम: 'कोठी'। • सफेद रंग, सिर व गर्दन पर हल्का कालापन। शांत स्वभाव, कृषि कार्य में उत्तम। |
कुम्हेर (डीग/भरतपुर) |
| हरियाणवी (Hariana) | सीकर, झुंझुनूं, चूरू, अलवर, जयपुर ग्रामीण | द्विकाजी (Dual purpose) | • मूल: रोहतक, हिसार (हरियाणा)। • सफेद-हल्का स्लेटी रंग, लंबा संकरा चेहरा, माथे के बीच में उभार (क्राउन)। दूध व हल दोनों हेतु उपयोगी। |
कुम्हेर (डीग/भरतपुर) |
3. भैंस की प्रमुख नस्लें (Buffalo Breeds)
राजस्थान में भैंस कुल पशुधन का लगभग 24.1% है, किन्तु राज्य के कुल दुग्ध उत्पादन में भैंस का योगदान 50% से अधिक रहता है।
प्रमुख नस्लें
1. **मुर्रा (Murrah):** - **अन्य नाम:** 'खुंडी' (सींग जलेबी की तरह मुड़े होने के कारण), 'ब्लैक ब्यूटी'। - **वितरण:** जयपुर, अलवर, भरतपुर, दौसा, गंगानगर, हनुमानगढ़ (मूलतः रोहतक-हरियाणा)। - **पहचान:** गहरा जेट ब्लैक (काला) रंग, छोटे, कसकर मुड़े हुए सींग, छोटा मुख, भारी पूंछ के अंत में सफेद बालों का गुच्छा। - **महत्व:** विश्व की सर्वाधिक दुग्ध उत्पादक भैंस नस्ल। - **प्रजनन केंद्र:** **कुम्हेर (डीग/भरतपुर)**, **डग (झालावाड़)**। 2. **जाफराबादी (Jafrabadi):** - **वितरण:** उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, सिरोही (मूलतः काठियावाड़-गुजरात)। - **पहचान:** सबसे भारी-भरकम (मिनी हाथी) भैंस। माथा चौड़ा व भारी, सींग नीचे झुककर कानों के ऊपर घूमे हुए। 3. **सुरती (Surti):** - **वितरण:** उदयपुर, राजसमंद, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ (मूलतः सूरत-गुजरात)। - **पहचान:** मध्यम कद, चपटे दरांती (हंसिया) के आकार के सींग (Sickle shaped horns), पीठ सीधी, जबड़े और घुटनों के पास दो सफेद धारियां। - **प्रजनन केंद्र:** **वल्लभनगर (उदयपुर)**। 4. **भदावरी (Bhadawari):** - **वितरण:** भरतपुर, धौलपुर, करौली (मूलतः इटावा/ग्वालियर-यमुना चंबल बीहड़)। - **पहचान:** तांबे जैसा बादामी रंग (Copper color), शरीर आगे से संकरा व पीछे से चौड़ा (वेज शेप्ड)। - **दूध की विशेषता:** इसके **दूध में वसा (Fat) की मात्रा सर्वाधिक (12 से 14 प्रतिशत तक)** पाई जाती है। 5. **मेहसाणा (Mehsana):** - **वितरण:** जालोर, सांचौर, बाड़मेर, सिरोही (मुर्रा और सुरती का संकरण)। - **पहचान:** लंबे समय तक निरंतर दूध देने (Lactation length) के लिए जानी जाती है। 6. **नीली-रावी (Nili-Ravi):** - **वितरण:** सतलुज-रावी नदी कछार क्षेत्र, श्रीगंगानगर। - **पहचान:** 'पंचकल्याणी' (माथा, थूथन, चारों पैर और पूंछ का सिरा सफेद होना)।4. भेड़ की प्रमुख नस्लें (Sheep Breeds)
राजस्थान को 'ऊन का घर' कहा जाता है। 20वीं पशुगणना में 79.04 लाख भेड़ें दर्ज की गईं।
प्रमुख नस्लों का वितरण एवं ऊन की गुणवत्ता
| नस्ल का नाम | प्रमुख जिले (वितरण क्षेत्र) | ऊन की श्रेणी एवं विशेषताएं | उपनाम / मुख्य तथ्य |
|---|---|---|---|
| चोकला (Chokla) | सीकर, झुंझुनूं, चूरू, नागौर (शेखावाटी क्षेत्र) | सर्वोत्तम महीन परिधान ऊन (Apparel Wool) | • 'भारत की मेरिनो' (Merino of India) कहलाती है। • मुंह पर गहरा भूरा/काला धब्बा (छापर)। प्रजनन केंद्र: कोडमदेसर (बीकानेर)। |
| मगरा (Magra) | बीकानेर, नागौर, चूरू, जैसलमेर | विश्वस्तरीय कालीन ऊन (Carpet Wool) | • 'बीकानेरी चोकला' या 'चक्री' भी कहा जाता है। • आंख के चारों ओर भूरे रंग का घेरा। बीकानेर में कालीन उद्योग का आधार। |
| नाली (Nali) | हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, चूरू (घग्घर नदी बेसिन) | लंबे रेशे की पीली ऊन (Coarse Long Wool) | • घग्घर के पाट को 'नाली' कहते हैं, अतः नाम नाली पड़ा। • कान लंबे व लटके हुए। दरियां एवं मोटे कालीन बनाने में उपयुक्त। |
| पुगल (Pugal) | बीकानेर (पुगल तहसील), जैसलमेर, अनूपगढ़ | मध्यम श्रेणी की कालीन ऊन | • मुंह काला/भूरा, निचला होंठ भूरा, पूंछ छोटी। अकाल सहने में सक्षम। |
| जैसलमेरी (Jaisalmeri) | जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर | प्रति भेड़ सर्वाधिक ऊन उत्पादन | • सबसे लंबा कद, लंबा रोमन नाक, कान चौड़े व लटके हुए। अत्यधिक शुष्क जलवायु की सहनशील। |
| मारवाड़ी (Marwari) | जोधपुर, बाड़मेर, पाली, जालौर, नागौर | सर्वाधिक संख्या एवं अत्यधिक रोग प्रतिरोधी | • राजस्थान में कुल भेड़ों में सर्वाधिक संख्या (लगभग 45-50%)। • चेहरा पूर्णतः काला, लंबी दूरी तक पैदल चरने में माहिर। सफेद मोटी ऊन। |
| मालपुरा (Malpura) | टोंक, जयपुर, सवाई माधोपुर, दौसा | बहुत मोटी, खुरदरी ऊन (नमदे/गलीचे हेतु) | • मूल स्थान: मालपुरा (टोंक)। • मांस उत्पादन हेतु भी उपयुक्त। |
| सोनाड़ी / चनोथर (Sonadi) | उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़ (मेवाड़-वागड़) | मोटी खुरदरी ऊन, द्विकाजी (मांस व दूध) | • 'चनोथर' उपनाम (चरते समय इसके लंबे कान जमीन को छूते हैं)। भारी शरीर। |
| खेरी (Kheri) | जोधपुर, पाली, नागौर | सफेद चमकदार मध्यम ऊन | • घुमंतू रेवड़ों (प्रवासी भेड़ों) के लिए प्रसिद्ध। पैदल चलने में अत्यधिक सक्षम। |
5. बकरी की प्रमुख नस्लें (Goat Breeds)
बकरी को 'गरीब की गाय' (Poor Man's Cow), 'रेगिस्तान का चलता-फिरता फ्रिज' (Walking Fridge) तथा 'डबल एटीएम' कहा जाता है। राजस्थान बकरी संख्या में देश में प्रथम स्थान (208.40 लाख) पर है।
प्रमुख नस्लें
1. **मारवाड़ी (Marwari):** - **वितरण:** पश्चिमी राजस्थान (जोधपुर, बाड़मेर, पाली, जैसलमेर, बीकानेर)। - **पहचान:** संपूर्ण शरीर काला, लंबे कान, दाढ़ी पाई जाती है। - **विशेषता:** राजस्थान में सर्वाधिक पाई जाने वाली नस्ल। रोग प्रतिरोधी क्षमता सबसे अधिक। 2. **जखराना / बहरोड़ (Jakhrana):** - **वितरण:** कोटपूतली-बहरोड़, खैरथल-तिजारा, अलवर (जखराना गांव मूल)। - **पहचान:** चमकदार काला रंग, मुंह व कानों पर सफेद धब्बे। - **विशेषता:** **राजस्थान में सर्वाधिक दुग्ध देने वाली बकरी नस्ल** (प्रतिदिन 3 से 5 लीटर दूध)। 3. **सिरोही (Sirohi):** - **वितरण:** सिरोही, जालोर, पाली, राजसमंद, अजमेर। - **पहचान:** भूरे रंग के शरीर पर हल्के भूरे/सफेद धब्बे (चितकबरे)। पीठ में हल्का घुमाव (झोल)। - **विशेषता:** मांस उत्पादन (द्विकाजी) के लिए पूरे भारत में सबसे लोकप्रिय। प्रजनन केंद्र: **रामसर (अजमेर)**। 4. **शेखावाटी (Shekhawati):** - **वितरण:** सीकर, चूरू, झुंझुनूं। - **पहचान:** **पूर्णतः सींग-रहित (Polled / No horns)** नस्ल। - **विकास:** काजरी (CAZRI) के वैज्ञानिकों द्वारा चयनात्मक प्रजनन से विकसित। 5. **बारबरी (Barbari):** - **वितरण:** भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर। - **पहचान:** छोटे कान (हिरण जैसी आंखें), छोटा कद, सफेद शरीर पर कत्थई धब्बे। - **उपनाम:** **'सिटी गोट' (City Goat)** या 'स्टाल-फेड गोट' (घर में बांधकर पालने हेतु उपयुक्त)। वर्ष में दो बार और प्रायः जुड़वां बच्चे देती है। 6. **जमनापरी (Jamnapari):** - **वितरण:** हाड़ौती क्षेत्र (कोटा, झालावाड़, बारां)। - **पहचान:** सबसे बड़ी व ऊंची बकरी नस्ल। लंबा तोता जैसा मुख (तोतामुखी / रोमन नाक), लंबे लटके कान। 7. **पर्वतसरी (Parbatsari):** - **वितरण:** डीडवाना-कुचामन (परबतसर), नागौर, अजमेर। - **उत्पत्ति:** बारबरी और सिरोही नस्ल के संकरण से विकसित। दूध एवं मांस दोनों में उत्तम।6. ऊँट एवं घोड़े की प्रमुख नस्लें (Camels and Horses)
ऊँट: 'रेगिस्तान का जहाज' एवं राज्य पशु
- **राज्य पशु घोषणा:** राजस्थान सरकार द्वारा **30 जून 2014** को ऊँट को राजस्थान का **राज्य पशु (पशुधन श्रेणी)** घोषित किया गया (अधिसूचना: **19 सितंबर 2014**)। - **ऊँट संरक्षण अधिनियम:** 'राजस्थान ऊँट (वध का प्रतिषेध और अस्थायी प्रवासन या निर्यात का विनियमन) अधिनियम, 2015' लागू किया गया। - **ऊँटों की प्रमुख नस्लें:** 1. **नाचना (Nachna):** - **क्षेत्र:** जैसलमेर का नाचना गांव। - **विशेषता:** सुंदरता, तेज चाल और सवारी के लिए **विश्व का सर्वश्रेष्ठ ऊँट**। भारतीय सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों द्वारा गश्त हेतु उपयोग। 2. **गोमठ (Gomath):** - **क्षेत्र:** फलौदी (जोधपुर)। - **विशेषता:** बोझा ढोने (भारवाही) और तीव्र दौड़ने के लिए प्रसिद्ध। 3. **बीकानेरी (Bikaneri):** - **क्षेत्र:** बीकानेर, चूरू, श्रीगंगानगर। - **विशेषता:** भारत के कुल ऊँटों में सर्वाधिक संख्या (लगभग 50%)। खोपड़ी पर एक विशिष्ट गड्ढा होता है जिसे **'जीहण' (Zihan)** कहते हैं। भारी बोझा ढोने में उत्तम। 4. **जैसलमेरी (Jaisalmeri):** - **क्षेत्र:** जैसलमेर, बाड़मेर। - **विशेषता:** रेतीले टीलों में मीलों तक बिना थके चलने व दौड़ने में दक्ष। 5. **कच्छी व जालोरी:** जालौर, सांचौर एवं बाड़मेर में पाई जाने वाली दुधारू नस्लें। - **ऊँट के रोग एवं आभूषण:** - **सर्रा रोग (Trypanosomiasis / तिबरसा):** ऊँटों का मुख्य घातक प्रोटोजोआ जनित रोग (3 वर्ष तक चलने के कारण तिबरसा कहलाता है)। - **गोरबंद (Gorbandh):** ऊँट के गले का प्रसिद्ध पारंपरिक आभूषण। - **काठी / पिलाण:** ऊँट की पीठ पर सवारी के लिए रखा जाने वाला जीन। - **गिरबाण:** ऊँट की नाक में पिरोई जाने वाली लकड़ी/कील। - **उस्ता कला (Usta Kala):** बीकानेर में ऊँट की खाल पर सोने की बारीक मीनाकारी (हिसामुद्दीन उस्ता)। - **रायका / रेबारी (Raika / Rebari):** ऊँट पालक पारंपरिक जाति। लोक देवता **पाबूजी** को ऊँटों के देवता के रूप में पूजा जाता है (राजस्थान में सर्वप्रथम ऊँट लाने का श्रेय पाबूजी को है)।घोड़े: प्रमुख नस्लें
1. **मारवाड़ी (Marwari Horse):** - **क्षेत्र:** जोधपुर, बाड़मेर, पाली, जालौर, नागौर। - **पहचान:** कान अंदर की ओर मुड़े हुए होते हैं जो आपस में शीर्ष पर छूते हैं। - **विशेषता:** स्वामीभक्ति, युद्धकला, सहनशीलता और राजसी शान के लिए विश्व प्रसिद्ध (महाराणा प्रताप का घोड़ा 'चेतक' मारवाड़ी/काठियावाड़ी नस्ल का प्रतीक)। 2. **काठियावाड़ी (Kathiawari Horse):** - **क्षेत्र:** जालोर, सिरोही, बाड़मेर (गुजरात सीमा)। - **विशेषता:** कद छोटा, तेज दौड़ने में दक्ष, कान अंदर मुड़े हुए। 3. **मालानी घोड़ा:** बाड़मेर के सिवाना एवं गुड़ामालानी क्षेत्र में पाया जाने वाला सर्वोत्तम काठियावाड़ी-मारवाड़ी मिश्रित घोड़ा।7. प्रमुख पशु अनुसंधान, प्रजनन एवं वीर्य बैंक संस्थान
राष्ट्रीय एवं केंद्रीय संस्थान (National / ICAR Institutes)
1. **केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान (CSWRI - Central Sheep and Wool Research Institute):** - **स्थान:** **अविकानगर, मालपुरा (टोंक)** (स्थापना: 1962)। - **प्रमुख कार्य:** भेड़ों की संकर नस्लों (अविस्त्र, अविकालीन, भारत मेरिनो) तथा खरगोश व मांस अनुसंधान। 2. **राष्ट्रीय ऊँट अनुसंधान केंद्र (NRCC - National Research Centre on Camel):** - **स्थान:** **जोहड़बीड़ (बीकानेर)** (स्थापना: 5 जुलाई 1984)। - **सुविधाएं:** ऊँटनी के दूध का प्रसंस्करण एवं आइसक्रीम प्लांट, ऊँट संग्रहालय। 3. **राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र (NRCE - अश्व परिसर):** - **स्थान:** **बीकानेर** (स्थापना: 1989)। 4. **केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (CIRG) का क्षेत्रीय केंद्र:** - **स्थान:** अविकानगर (टोंक)। 5. **राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (ICAR-NBAGR):** - मुख्यालय करनाल में है, जो देश की सभी स्वदेशी पशु नस्लों का पंजीकरण करता है।राजस्थान राज्य स्तरीय पशु प्रजनन एवं वीर्य केंद्र
| संस्थान / केंद्र का नाम | स्थान | जिला |
|---|---|---|
| केंद्रीय पशु प्रजनन फार्म (Central Cattle Breeding Farm) | सूरतगढ़ | श्रीगंगानगर (थारपारकर नस्ल) |
| राज्य पशुधन अनुसंधान केंद्र (LRS) | चांदन | जैसलमेर (थारपारकर नस्ल) |
| राठी गोवंश प्रजनन केंद्र | नोहर | हनुमानगढ़ |
| गीर गोवंश प्रजनन केंद्र | डग | झालावाड़ |
| नागौरी गोवंश प्रजनन केंद्र | नागौर | नागौर |
| मुर्रा भैंस प्रजनन केंद्र | कुम्हेर | डीग (भरतपुर) |
| सुरती भैंस प्रजनन केंद्र | वल्लभनगर | उदयपुर |
| केंद्रीय फ्रोजन सीमन बैंक (Frozen Semen Bank) | बस्सी | जयपुर |
| राज्य वीर्य बैंक (State Semen Bank) | मंडोर | जोधपुर |
| अश्व प्रजनन केंद्र (Horse Breeding Farms) | बिलाड़ा (जोधपुर), सिवाना (बालोतरा), मनोहरथाना (झालावाड़), बाली (पाली), बीकानेर | विभिन्न जिले |
| सूकर (Pig) प्रजनन फार्म | अलवर | अलवर |
| पोल्ट्री फार्म / कुक्कुट प्रशिक्षण संस्थान | अजमेर | अजमेर |
8. डेयरी विकास, RCDF एवं श्वेत क्रांति (Operation Flood)
राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (RCDF)
- **स्थापना:** **1977** में राजस्थान राज्य सहकारी डेयरी फेडरेशन (RCDF) की स्थापना कंपनी अधिनियम के तहत हुई (1975 में डेयरी विकास हेतु अलग विभाग बना था)। - **आनंद पैटर्न (आनंद मॉडल):** राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB - वर्गीज कुरियन) के मार्गदर्शन में राज्य में त्रि-स्तरीय (Three-Tier) सहकारी ढाँचा लागू किया गया: 1. **ग्राम स्तर:** प्राथमिक दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियां (DCS)। 2. **जिला स्तर:** जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ (वर्तमान में 21-24 जिला दुग्ध संघ)। 3. **राज्य स्तर:** शीर्ष संस्था राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (RCDF)। - **ब्रांड नाम:** RCDF अपने सभी दुग्ध एवं दुग्ध उत्पादों (दूध, घी, मक्खन, पनीर, छाछ, आइसक्रीम, गुलाब जामुन) का विपणन **'सरस' (Saras)** ब्रांड नाम से करता है। - **सरस डेयरी प्लांट:** - राजस्थान का सबसे बड़ा और आधुनिक डेयरी संयंत्र: **जयपुर (गांधी नगर/जगतपुरा)**। - राज्य की प्रथम डेयरी: **पद्मा डेयरी (अजमेर - 1932)**।प्रमुख विशिष्ट डेयरी संयंत्र एवं इकाइयां
- **ऊँटनी के दूध की प्रथम मिनी डेयरी:** **जयपुर** में स्थापित (RCDF द्वारा)। - **ऊँटनी के दूध का राष्ट्रीय प्रसंस्करण संयंत्र:** **जोहड़बीड़ (बीकानेर)**। - **बकरी के दूध की डेयरी एवं प्रसंस्करण संयंत्र:** **रामसर (अजमेर)**। - **पशु आहार संयंत्र (Cattle Feed Plants):** RCDF द्वारा झोटवाड़ा (जयपुर), नादबई (भरतपुर), तबिजी (अजमेर), कालडेरा, लामिया (पाली) में संचालित। - **सरस सुरक्षा कवच बीमा योजना:** दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों के सदस्यों के लिए व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना।9. राज्य में प्रमुख पशु मेले (State Livestock Fairs)
राजस्थान पशुपालन विभाग द्वारा प्रतिवर्ष 10 राज्य स्तरीय पशु मेलों का आधिकारिक आयोजन किया जाता है। ये मेले नस्ल सुधार, पशु व्यापार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के बड़े केंद्र हैं।
| पशु मेले का नाम | स्थल (स्थान) | जिला | आयोजन तिथि (हिंदी मास) | मुख्य पशु नस्ल व विशेषता |
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| श्री वीर तेजाजी पशु मेला | परबतसर | डीडवाना-कुचामन (पूर्व नागौर) | श्रावण पूर्णिमा से भाद्रपद अमावस्या | • आय की दृष्टि से राज्य का सबसे बड़ा पशु मेला। • नागौरी बैल व बीकानेरी ऊँट का भारी क्रय-विक्रय। |
| श्री मल्लीनाथ पशु मेला | तिलवाड़ा (लूणी नदी तट) | बालोतरा (पूर्व बाड़मेर) | चैत्र कृष्ण एकादशी से चैत्र शुक्ल एकादशी | • राजस्थान का सबसे प्राचीन पशु मेला। • थारपारकर गोवंश, मालानी घोड़े व सांचौरी गाय हेतु प्रसिद्ध। |
| श्री रामदेव पशु मेला | मानासर | नागौर | माघ शुक्ल एकम से माघ पूर्णिमा | • नागौरी बैलों के लिए प्रसिद्ध। |
| श्री जसवंत प्रदर्शनी एवं पशु मेला | भरतपुर | भरतपुर | आश्विन शुक्ल पंचमी से चतुर्दशी | • हरियाणवी गोवंश व मुर्रा भैंस के लिए। |
| गोमती सागर पशु मेला | झालरापाटन | झालावाड़ | वैशाख पूर्णिमा | • मालवी नस्ल के गोवंश का मुख्य व्यापार केंद्र। हाड़ौती का सबसे बड़ा मेला। |
| चंद्रभागा पशु मेला | झालरापाटन | झालावाड़ | कार्तिक पूर्णिमा | • मालवी गोवंश व भैंसों के क्रय-विक्रय हेतु। |
| कार्तिक पशु मेला (पुष्कर मेला) | पुष्कर | अजमेर | कार्तिक शुक्ल अष्टमी से मार्गशीर्ष कृष्णा द्वितीया | • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध 'रंगीला मेला'। • विदेशी पर्यटकों का आकर्षण, गीर गोवंश व ऊँट। |
| श्री महाशिवरात्रि पशु मेला | करौली | करौली | फाल्गुन कृष्ण सप्तमी से चतुर्दशी | • मेवाती/हरियाणवी नस्ल का व्यापार। |
| श्री गोगामेड़ी पशु मेला | गोगामेड़ी (नोहर) | हनुमानगढ़ | श्रावण पूर्णिमा से भाद्रपद पूर्णिमा | • राज्य का सर्वाधिक अवधि (लगभग 1 माह) तक चलने वाला मेला। राठी व हरियाणवी नस्ल। |
| श्री बलदेव पशु मेला | मेड़ता सिटी | नागौर | चैत्र शुक्ल एकम से चैत्र पूर्णिमा | • किसान नेता बलदेव राम मिर्धा की स्मृति में। नागौरी बैल। |