राजस्थान में बागवानी एवं कृषि अनुसंधान (Horticulture and Agricultural Research in Rajasthan)
1. राजस्थान में उद्यानिकी (बागवानी) का परिदृश्य एवं आर्थिक महत्व
उद्यानिकी का उदय एवं विविधीकरण
- **पारंपरिक कृषि से वाणिज्यिक उद्यानिकी की ओर:** राजस्थान में कम वर्षा, भूजल स्तर में गिरावट और बारंबार सूखे के कारण पारंपरिक खाद्यान्न फसलों की तुलना में कम पानी में अधिक आय देने वाली बागवानी (Horticulture) फसलों का महत्व तेजी से बढ़ा है। - **राष्ट्रीय उद्यानिकी मिशन (NHM / MIDH):** राज्य के 24 चयनित जिलों में मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) क्रियाशील है, जिसके अंतर्गत फल, मसाले, फूल, संरक्षित खेती और पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन को प्रोत्साहित किया जाता है। - **राजस्थान उद्यानिकी विकास मिशन (Rajasthan Horticulture Development Mission):** राज्य कृषि बजट के अंतर्गत अलग से प्रारंभ किया गया मिशन, जिसका उद्देश्य फल बगीचों की स्थापना, पॉलीहाउस/शेडनेट निर्माण और सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा देना है। - **राष्ट्रीय उत्पादन में राजस्थान का स्थान:** - **बीजीय मसाले (Seed Spices):** जीरा (Cumin), धनिया (Coriander), मेथी (Fenugreek), सौंफ (Fennel) और अजवाइन में राजस्थान देश में **प्रथम स्थान** पर है। - **औषधीय फसलें (Medicinal Plants):** इसबगोल (Psyllium husk / Isabgol), मेहंदी (Henna) और अश्वगंधा (Ashwagandha) में राजस्थान देश का शीर्ष उत्पादक है। - **सरसों एवं ग्वार:** देश में प्रथम स्थान (कृषि फसलों में)। - **संतरा एवं किन्नू:** झालावाड़ (राजस्थान का नागपुर) और श्रीगंगानगर देश के प्रमुख खट्टे फल उत्पादक केंद्र हैं।2. प्रमुख फल एवं शुष्क क्षेत्र की बागवानी (Fruits & Arid Horticulture)
राजस्थान का लगभग 61% भूभाग मरुस्थलीय (शुष्क एवं अर्ध-शुष्क) है, जहाँ लवणता-रोधी, सूखा-सहनशील शुष्क फल (Arid Fruits) वरदान सिद्ध हुए हैं।
प्रमुख फल एवं उनके उत्पादन क्षेत्र
| फल (Fruit) | प्रमुख जिले / क्षेत्र | मुख्य किस्में (Varieties) | अनुसंधान व उत्कृष्टता केंद्र (CoE) | विशेष तथ्य |
|---|---|---|---|---|
| संतरा (Mandarin Orange) | झालावाड़, कोटा, बारां | नागपुरी संतरा, किन्नू | उद्यानिकी उत्कृष्टता केंद्र, झालावाड़ | झालावाड़ को प्रचुर संतरा उत्पादन के कारण 'राजस्थान का नागपुर' कहा जाता है। |
| किन्नू / माल्टा (Kinnow) | श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ | किन्नू, माल्टा, मौसमी | श्रीगंगानगर | नहरी सिंचित क्षेत्र 'राजस्थान का अन्नागार व फलोद्यान' कहलाता है। |
| अनार (Pomegranate) | बाड़मेर, जालोर, सांचौर, जोधपुर | सिंदूरी (Bhagwa / Sindhuri), जालौर सीडलेस, मृदुला, गणेश | अनार उत्कृष्टता केंद्र, ढिंढोल (बस्सी, जयपुर) | पश्चिमी मरुस्थल (बाड़मेर-जालोर) में अनार की सिंदूरी किस्म से 'रेगिस्तान में लाल क्रांति' आई है। |
| खजूर (Date Palm) | जैसलमेर, बीकानेर, बाड़मेर, जोधपुर | हलावी (Halawy), बरही (Barhee), खदरावी, मेडजूल | खजूर उत्कृष्टता केंद्र, सगरा (भोजका, जैसलमेर) | • टिशू कल्चर तकनीक से पौधे तैयार करने हेतु प्रयोगशाला: चौपासनी (जोधपुर)। • खजूर की खेती इंडो-इजराइल सहयोग से शुरू की गई। |
| बेर (Ber / Desert Apple) | जयपुर, बीकानेर, जोधपुर, बाड़मेर | सेव (Seb), गोला (Gola), उमरान (Umran), कैथली | CIAH बीकानेर (केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान) | • उमरान किस्म राजस्थान के अलवर से विकसित देर से पकने वाली किस्म है। • बेर को 'शुष्क फलों का राजा' या 'मरुस्थल का सेब' कहते हैं। |
| आंवला (Aonla / Indian Gooseberry) | जयपुर (चौमूं), अजमेर, नागौर | चकईया, कंचन, कृष्णा, बनारसी, NA-7 | चौमूं (जयपुर) | चौमूं आंवला व बेर के व्यापार की प्रमुख मंडी है। |
| अमरूद (Guava) | सवाई माधोपुर, टोंक, बूंदी | लखनऊ-49 (सरदार अमरूद), इलाहाबादी सफेदा, ललित, श्वेता | अमरूद उत्कृष्टता केंद्र, देवड़ावास (टोंक) | सवाई माधोपुर अमरूद उत्पादन के लिए राज्य में शीर्ष स्थान रखता है। |
| अंजीर (Fig) | सिरोही, जालौर | डिनकर, पूना | सिरोही | सिरोही में अंजीर उत्कृष्टता केंद्र प्रस्तावित/स्थापित। |
| सीताफल (Custard Apple) | राजसमंद, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, बांसवाड़ा | बालानगर, एनबीआरआई सिलेक्शन | सीताफल उत्कृष्टता केंद्र, चित्तौड़गढ़ | टीएसपी क्षेत्र में प्राकृतिक वनों में प्रचुर उत्पादन। |
| ड्रैगन फ्रूट (कमलम) | बाड़मेर, जोधपुर, जयपुर | वियतनाम रेड | ढिंढोल (जयपुर) | कम पानी में उगने वाला विदेशी सुपर फ्रूट। |
| जैतून (Olive / ओलिया यूरोपिया) | बीकानेर, लूनकरणसर, झुंझुनूं, जयपुर | बारनिया, कोराटिना, फ्रोंटोयो | लूनकरणसर (बीकानेर) | • राजस्थान में जैतून की खेती इजराइल के सहयोग से प्रारंभ की गई। • भारत की प्रथम ऑलिव ऑयल रिफाइनरी: लूनकरणसर (बीकानेर - 2014)। • ब्रांड नाम: 'राज ऑलिव ऑयल' (Raj Olive Oil) तथा जैतून की चाय (Olive Tea)। |
| होहोबा / जोजोबा (Jojoba) | झुंझुनूं, जयपुर, बीकानेर | इजराइली क्लोन | ढंड (जयपुर) एवं फतेहपुर (सीकर) | • मूलतः मैक्सिको एवं एरिजोना का मरुस्थलीय पौधा। बीज से उच्च कोटि का औद्योगिक तेल (व्हेल मछली के तेल का विकल्प)। • एग्रो प्रोजेक्ट्स: एसोसिएशन ऑफ राजस्थान जोजोबा प्लांटेशन एंड रिसर्च प्रोजेक्ट (AJORP)। |
3. बीजीय मसाले एवं प्रमुख सब्जी उत्पादन (Seed Spices & Vegetables)
राजस्थान को भारत का 'मसाला कटोरा' (Spice Bowl of India - विशेषकर बीजीय मसालों में) कहा जाता है।
प्रमुख बीजीय मसाले (Seed Spices)
1. **जीरा (Cumin):** - **प्रमुख उत्पादक जिले:** बाड़मेर, जोधपुर, जालोर, नागौर, जैसलमेर। - **किस्में:** आरजेड-19 (RZ-19), आरजेड-209, आरजेड-223, गुजरात जीरा-4। - **प्रमुख मंडी:** जोधपुर (भगत की कोठी) एवं मेड़ता सिटी (नागौर)। - **विशेषता:** राजस्थान भारत का लगभग 50% से अधिक जीरा उत्पादित करता है। 2. **धनिया (Coriander):** - **प्रमुख उत्पादक जिले:** झालावाड़, बारां, कोटा (हाड़ौती क्षेत्र)। - **प्रमुख मंडी:** रामगंज मंडी (कोटा) - **एशिया की सबसे बड़ी धनिया मंडी**। - **किस्में:** आरसीआर-41, आरसीआर-436, कुंभराज। 3. **मेथी (Fenugreek):** - **प्रमुख उत्पादक जिले:** बीकानेर, सीकर, नागौर, जयपुर। - **नागौरी पान मेथी (कस्तूरी मेथी):** नागौर (ताऊसर गांव) की सुवासित हरी पान मेथी अपने अनूठे प्राकृतिक स्वाद और खुशबू के लिए विश्वविख्यात है। - **किस्में:** आरएमटी-1 (RMT-1), आरएमटी-143, आरएमटी-305। 4. **सौंफ (Fennel):** - **प्रमुख उत्पादक जिले:** नागौर, सिरोही, जोधपुर, टोंक। - **किस्में:** आरएफ-101, आरएफ-125, गुजरात सौंफ-11। 5. **अजवाइन (Ajwain):** - **प्रमुख उत्पादक जिले:** चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, राजसमंद। 6. **लहसुन (Garlic):** - **प्रमुख उत्पादक जिले:** बारां, कोटा, झालावाड़ (हाड़ौती)। - **उत्कृष्टता केंद्र:** **खट्टे फल एवं लहसुन उत्कृष्टता केंद्र (झालावाड़/बारां)**। - **छिपाबड़ौद (बारां):** राज्य की सबसे बड़ी लहसुन मंडी।4. औषधीय एवं सुगंधित पौधे (Medicinal and Aromatic Plants)
शुष्क जलवायु औषधीय पौधों में सक्रिय क्षारीय तत्वों (Active Alkaloids) के संचय के लिए आदर्श मानी जाती है।
- इसबगोल (Psyllium / Plantago ovata):
- उपनाम: 'घोड़ा जीरा' (आकार घोड़े के कान जैसा होने के कारण)।
- प्रमुख उत्पादक जिले: बाड़मेर, जालोर, सांचौर, जैसलमेर, जोधपुर।
- किस्में: जीआई-2 (GI-2), आरआई-89।
- महत्व: इसके बीज की भूसी (Husk) कब्ज और पाचन विकारों के लिए विश्व भर में निर्यात की जाती है। भारत के कुल उत्पादन का लगभग 80% राजस्थान में होता है।
- मंडी: भीनमाल (जालोर)।
- मेहंदी (Henna / Lawsonia inermis):
- प्रमुख क्षेत्र: सोजत (पाली)।
- भौगोलिक उपदर्शन (GI Tag): सोजत की मेहंदी को भारत सरकार द्वारा जीआई टैग (GI Tag) प्रदान किया गया है।
- मंडी: सोजत (पाली) एशिया की सबसे बड़ी मेहंदी मंडी है।
- अश्वगंधा (Ashwagandha / Indian Ginseng):
- प्रमुख उत्पादक जिले: झालावाड़, चित्तौड़गढ़, कोटा, नागौर।
- महत्व: रोग प्रतिरोधक क्षमता और तनाव निवारक औषधि।
- ग्वारपाठा / एलोवेरा (Aloe Vera):
- प्रमुख जिले: जोधपुर, बाड़मेर, चूरू, जयपुर।
- सोनामुखी / सनाय (Senna):
- प्रमुख जिले: जोधपुर, पाली, बाड़मेर (रेचक औषधि के रूप में व्यापक निर्यात)।
- गुलाब की खेती (Rose Cultivation):
- दमिश्क गुलाब (चेती गुलाब / Damask Rose): खमनोर (राजसमंद) में चैत्र मास में खिलने वाला विश्वप्रसिद्ध सुगंधित गुलाब। इसका उपयोग इत्र, गुलकंद और गुलाब जल में होता है।
- देसी लाल गुलाब: पुष्कर (अजमेर) - पुष्कर को 'गुलाब नगरी' कहा जाता है।
5. संरक्षित खेती एवं सूक्ष्म सिंचाई (Protected Cultivation & Micro-Irrigation)
जल की सीमित उपलब्धता और भीषण तापमान उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए राजस्थान संरक्षित खेती का अग्रणी राज्य बना है।
संरक्षित खेती की संरचनाएं
- **पॉलीहाउस (Greenhouse / Polyhouse):** खीरा, शिमला मिर्च (रंगीन बेल पेपर्स), टमाटर की ऑफ-सीजन एवं नियंत्रित जलवायु खेती। - **शेडनेट हाउस (Shade Net House):** अत्यधिक धूप और कीटों से सुरक्षा। - **लो-टनल एवं प्लास्टिक मल्चिंग:** खरपतवार नियंत्रण, नमी संरक्षण एवं वाष्पीकरण में 60% तक कमी। - **सौर कृषि आजीविका योजना एवं फार्म पौंड:** खेत में डिग्गी और फार्म पौंड बनाकर वर्षा जल संचयन के साथ ड्रिप सिंचाई को अनिवार्य किया गया है।सूक्ष्म सिंचाई (Micro-Irrigation)
- **ड्रिप सिंचाई (Drip / Trickle Irrigation):** जल उपयोग दक्षता 80-90% तक। राजस्थान में स्प्रिंकलर और ड्रिप पर 70-75% तक सरकारी अनुदान (सब्सिडी) देय है। - **नर्मदा नहर परियोजना:** भारत की प्रथम सिंचाई परियोजना जिसमें **ड्रिप एवं स्प्रिंकलर (फव्वारा) सिंचाई पद्धति को कानूनी रूप से अनिवार्य** किया गया है।6. सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (उद्यानिकी उत्कृष्टता केंद्र - Indo-Israel Collaboration)
इंडो-इजराइल एग्रीकल्चर प्रोजेक्ट (IIAP) के तहत राजस्थान में विभिन्न फसलों के लिए अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी एवं पौध सामग्री प्रसार केंद्र स्थापित किए गए हैं।
| क्र.सं. | उत्कृष्टता केंद्र (Center of Excellence) | स्थान | जिला |
|---|---|---|---|
| 1 | सिट्रस (खट्टे फल) उत्कृष्टता केंद्र | नांता | कोटा |
| 2 | अनार उत्कृष्टता केंद्र | ढिंढोल (बस्सी) | जयपुर |
| 3 | खजूर उत्कृष्टता केंद्र | सगरा (भोजका) | जैसलमेर |
| 4 | अमरूद उत्कृष्टता केंद्र | देवड़ावास | टोंक |
| 5 | संतरा एवं मसाला उत्कृष्टता केंद्र | झालरापाटन | झालावाड़ |
| 6 | सब्जी उत्कृष्टता केंद्र (Vegetables CoE) | बूंदी | बूंदी |
| 7 | फूल (Floriculture) उत्कृष्टता केंद्र | सवाई माधोपुर | सवाई माधोपुर |
| 8 | सीताफल (Custard Apple) उत्कृष्टता केंद्र | चित्तौड़गढ़ | चित्तौड़गढ़ |
| 9 | औषधीय एवं सुगंधित पौधे उत्कृष्टता केंद्र | खेमली (मावली) | उदयपुर |
| 10 | अंजीर (Fig) उत्कृष्टता केंद्र | सिरोही | सिरोही |
| 11 | आम (Mango) उत्कृष्टता केंद्र | खेमरी | धौलपुर |
| 12 | ड्रैगन फ्रूट एवं हाइड्रोपोनिक्स केंद्र | ढिंढोल | जयपुर |
7. प्रमुख कृषि एवं उद्यानिकी अनुसंधान संस्थान (ICAR & National Institutes)
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के प्रमुख संस्थान
1. **केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (CAZRI - Central Arid Zone Research Institute):** - **स्थान:** **जोधपुर** (स्थापना: 1959, पूर्व में 1952 में मरु वनीकरण केंद्र)। - **कार्य:** मरुस्थलीकरण नियंत्रण, रेत के टीलों का स्थिरीकरण, खेजड़ी व बेर सुधार, शुष्क चारागाह विकास। 2. **केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान (CIAH - Central Institute for Arid Horticulture):** - **स्थान:** **बीछवाल (बीकानेर)** (स्थापना: 1993, 2000 में पूर्ण संस्थान)। - **कार्य:** शुष्क फलों (बेर, अनार, आंवला, गोंदा, मतीरा, ककड़ी, काचरी) की उन्नत किस्में विकसित करना। - **विकसित किस्में:** 'गोला', 'सेव' बेर; 'थार शोभा' खेजड़ी; 'थार मरुधरा' बेर; 'थार सिंदूरी' अनार; 'थार मानक' तरबूज। 3. **राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्र (NRCSS - National Research Centre on Seed Spices):** - **स्थान:** **तबिजी (अजमेर)** (स्थापना: 2000)। - **कार्य:** जीरा, धनिया, मेथी, सौंफ, अजवाइन, कलौंजी, सुवा आदि के आनुवंशिक सुधार पर देश का सर्वोच्च अनुसंधान संस्थान। 4. **सरसों अनुसंधान निदेशालय (DRMR - Directorate of Rapeseed-Mustard Research):** - **स्थान:** **सेवर (भरतपुर)** (स्थापना: 20 अक्टूबर 1993)। - **कार्य:** राई एवं तोरिया-सरसों की उच्च तेल प्रतिशत व रोग-रोधी किस्में (एनआरसीएचबी-101, डीआरएमआर 150-35) विकसित करना। 5. **केंद्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र / दुर्गापुरा अनुसंधान केंद्र (RARI):** - **स्थान:** **दुर्गापुरा (जयपुर)** (SKNAU जोबनेर के अधीन)।8. राजस्थान के राज्य कृषि विश्वविद्यालय (State Agriculture Universities)
राजस्थान में कृषि शिक्षा, अनुसंधान और प्रसार हेतु 5 राजकीय कृषि विश्वविद्यालय कार्यरत हैं:
| विश्वविद्यालय का नाम | मुख्यालय | स्थापना वर्ष | अधिकार क्षेत्र (संभाग/क्षेत्र) |
|---|---|---|---|
| 1. स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय (SKRAU) | बीकानेर | 1987 (मूलतः राजस्थान कृषि वि.वि.) | बीकानेर संभाग (बीकानेर, चूरू, अनूपगढ़) |
| 2. महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MPUAT) | उदयपुर | 1999 (नवंबर 1999) | दक्षिणी राजस्थान (उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, राजसमंद, बांसवाड़ा, डूंगरपुर) |
| 3. श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय (SKNAU) | जोबनेर (जयपुर ग्रामीण) | 2013 | जयपुर, अजमेर, दौसा, सीकर, झुंझुनूं |
| 4. कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर (AU Jodhpur) | मंडोर (जोधपुर) | 2013 | पश्चिमी राजस्थान (जोधपुर, बाड़मेर, जालोर, पाली, जैसलमेर, सिरोही) |
| 5. कृषि विश्वविद्यालय, कोटा (AU Kota) | उम्मेदगंज (कोटा) | 2013 | हाड़ौती संभाग (कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़) |
राज्य का एकमात्र उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय
- **उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय (College of Horticulture and Forestry):** **झालावाड़** (MPUAT उदयपुर के संगठक महाविद्यालय के रूप में 2004 में स्थापित)।9. कृषि जलवायु खंड एवं अनुसंधान केंद्र (Agro-Climatic Zones of Rajasthan)
आईसीएआर की योजनानुसार राजस्थान को 10 कृषि-जलवायु खंडों (Agro-Climatic Zones) में विभाजित किया गया है:
- Zone I-A (शुष्क पश्चिमी मैदानी खंड): बाड़मेर, जोधपुर। मुख्य अनुसंधान केंद्र: मंडोर (जोधपुर)।
- Zone I-B (सिंचित उत्तर-पश्चिमी मैदानी खंड): श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़। अनुसंधान केंद्र: श्रीगंगानगर।
- Zone I-C (अति शुष्क आंशिक सिंचित पश्चिमी खंड - क्षेत्रफल में सबसे बड़ा): बीकानेर, जैसलमेर, चूरू। अनुसंधान केंद्र: बीछवाल (बीकानेर)।
- Zone II-A (अन्तर्वर्ती जलोत्सारण अंतःस्थली खंड - शेखावाटी): सीकर, झुंझुनूं, नागौर। अनुसंधान केंद्र: फतेहपुर (सीकर)।
- Zone II-B (लूणी बेसिन का संक्रांति मैदान): पाली, जालोर, सिरोही। अनुसंधान केंद्र: केशवाना (जालोर)।
- Zone III-A (अर्ध-शुष्क पूर्वी मैदानी खंड): जयपुर, अजमेर, टोंक, दौसा। अनुसंधान केंद्र: दुर्गापुरा (जयपुर)।
- Zone III-B (बाढ़ संभावित पूर्वी मैदानी खंड): अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर। अनुसंधान केंद्र: कुम्हेर (डीग/भरतपुर), नवगांव (अलवर)।
- Zone IV-A (उपोष्ण आर्द्र दक्षिणी मैदानी व अरावली पहाड़ी खंड): भीलवाड़ा, राजसमंद, चित्तौड़गढ़। अनुसंधान केंद्र: उदयपुर।
- Zone IV-B (आर्द्र दक्षिणी मैदानी खंड - क्षेत्रफल में सबसे छोटा): डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़। अनुसंधान केंद्र: बोरवट फार्म (बांसवाड़ा)।
- Zone V (आर्द्र दक्षिण-पूर्वी मैदानी खंड - हाड़ौती): कोटा, झालावाड़, बारां, बूंदी। अनुसंधान केंद्र: उम्मेदगंज (कोटा)।
10. कृषि नवाचार, पुरस्कार एवं राज्य नीतियां
- कृषि बजट (Separate Agriculture Budget): राजस्थान देश का दूसरा राज्य है जिसने वर्ष 2022-23 से अलग कृषि बजट प्रस्तुत करना प्रारंभ किया (प्रथम: तमिलनाडु)।
- राजस्थान मिलेट्स प्रोत्साहन मिशन: बाजरा, ज्वार, रागी आदि मोटे अनाजों के मूल्य संवर्धन और अनुसंधान हेतु मिलेट्स उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence for Millets): जोधपुर में स्थापित।
- जैविक खेती उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence for Organic Farming): झालावाड़ में स्थापित।
- एपीपीओ (FPO) एवं कस्टम हायरिंग केंद्र: छोटे व सीमांत किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र किराए पर उपलब्ध कराना।
- किसान कलेवा योजना: कृषि उपज मंडियों में किसानों को नाममात्र दर पर गुणवत्तापूर्ण भोजन।