राजस्थान की जैव विविधता एवं पर्यावरण संरक्षण (Biodiversity and Environmental Conservation in Rajasthan)
1. विधिक एवं संस्थागत तंत्र (Statutory and Institutional Mechanism)#
1.1 जैविक विविधता अधिनियम, 2002 एवं राजस्थान राज्य जैव विविधता बोर्ड#
संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता अभिसमय (CBD 1992, रियो डी जनेरियो) की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने हेतु भारत सरकार द्वारा **जैविक विविधता अधिनियम, 2002 (Biological Diversity Act, 2002)** लागू किया गया।
राजस्थान राज्य जैव विविधता नियम, 2010 एवं बोर्ड का गठन:#
- **अधिसूचना:** राजस्थान सरकार द्वारा **2 मार्च 2010** को 'राजस्थान राज्य जैविक विविधता नियम, 2010' अधिसूचित किए गए।
- **बोर्ड का गठन:** नियमों के अंतर्गत **14 सितंबर 2010** को **राजस्थान राज्य जैव विविधता बोर्ड (Rajasthan State Biodiversity Board - RSBB)** की स्थापना जयपुर में की गई।
- **बोर्ड का अधिदेश (Mandate):**
1. जैविक संसाधनों का संरक्षण।
2. जैव संसाधनों के घटकों का सतत एवं विवेकपूर्ण उपयोग।
3. जैविक संसाधनों तथा पारंपरिक ज्ञान के वाणिज्यिक उपयोग से प्राप्त लाभों का निष्पक्ष एवं न्यायसंगत बंटवारा (Access and Benefit Sharing - ABS)।
त्रि-स्तरीय संस्थागत संरचना (Three-Tier Institutional Architecture):#
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राष्ट्रीय स्तर ──► राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA, चेन्नई)
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राज्य स्तर ──► राजस्थान राज्य जैव विविधता बोर्ड (RSBB, जयपुर)
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स्थानीय स्तर ──► जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ (BMCs - ग्राम पंचायत, ब्लॉक व शहरी स्तर)
```
जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ (BMCs) एवं लोक जैव विविधता रजिस्टर (PBR):#
- **BMC का गठन:** प्रत्येक ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद तथा नगर निकायों में 7-सदस्यीय जैव विविधता प्रबंधन समिति का गठन अनिवार्य है।
- **लोक जैव विविधता रजिस्टर (People's Biodiversity Register - PBR):**
- BMCs का प्राथमिक कार्य अपने क्षेत्र के समस्त जैविक संसाधनों (औषधीय पादप, जंगली फल, फसल किस्में, पालतू व जंगली पशु) तथा उनके पारंपरिक औषधीय/पारिस्थितिकीय ज्ञान का व्यापक दस्तावेजीकरण करना है।
- राजस्थान के सभी 11,000+ ग्राम पंचायतों में PBRs तैयार करने का लक्ष्य हासिल किया जा चुका है।
जैव विविधता विरासत स्थल (Biodiversity Heritage Sites - BHS):#
अधिनियम की धारा 37 के तहत अद्वितीय, नाजुक और समृद्ध पारिस्थितिक तंत्रों को 'जैव विविधता विरासत स्थल' घोषित किया जाता है:
- **आकल वुड फॉसिल पार्क (Akal Wood Fossil Park, जैसलमेर):** 18 करोड़ वर्ष पूर्व के जुरासिक काल के काष्ठ जीवाश्म (Petrified Wood Fossils)।
- **राम समीनगर ओरण (जोधपुर):** खेजड़ी का सघन पवित्र उपवन।
2. आर्द्रभूमियाँ एवं रामसर स्थल (Wetlands and Ramsar Sites in Rajasthan)#
2.1 रामसर अभिसमय एवं राजस्थान के 2 रामसर स्थल#
ईरान के **रामसर** शहर में **2 फरवरी 1971** को अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों के संरक्षण हेतु हुए समझौते (Ramsar Convention) के तहत राजस्थान में वर्तमान में **2 अधिसूचित रामसर स्थल** हैं:
| रामसर स्थल |
जिला |
अधिसूचना तिथि |
कुल क्षेत्रफल |
पारिस्थितिकीय विशेषताएं एवं वर्तमान स्थिति |
| 1. केवलादेव घाना राष्ट्रीय उद्यान |
भरतपुर |
1 अक्टूबर 1981 |
28.73 वर्ग किमी |
मीठे पानी का उथला दलदली पारिस्थितिकी तंत्र; साइबेरियन क्रेन सहित हजारों प्रवासी जलपक्षियों का शीतकालीन आवास। जल संकट व विदेशी खरपतवार (Prosopis juliflora) के कारण 1990 में 'मॉन्ट्रो रिकॉर्ड' (Montreux Record) में दर्ज। |
| 2. सांभर साल्ट लेक (Sambhar Lake) |
जयपुर, नागौर, अजमेर |
23 मार्च 1990 |
240 वर्ग किमी |
भारत की सबसे बड़ी अंतःस्थलीय खारे पानी की झील (Inland Salt Lake); ग्रेटर एवं लेसर फ्लेमिंगो (राजहंस) का शीतकालीन प्रजनन स्थल; 'स्पिरुलिना' नामक शैवाल। 2019 में 'एवियन बोटुलिज्म' (Avian Botulism) जीवाणु संक्रमण से 20,000+ प्रवासी पक्षियों की मृत्यु हुई थी। |
प्रस्तावित नए रामसर स्थल (Proposed Ramsar Sites in Rajasthan):#
राजस्थान राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण (State Wetland Authority) द्वारा 5 नई आर्द्रभूमियों को रामसर स्थल का दर्जा देने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है:
1. **मेनार तालाब (Menar 'Bird Village', उदयपुर):** प्रवासी पक्षियों का सामुदायिक संरक्षण मॉडल।
2. **खीचन (फलौदी):** कुरंजां (Demoiselle Crane) का विश्व प्रसिद्ध शीतकालीन प्रवास स्थल।
3. **चंदलाई बांध (जयपुर):** फ्लेमिंगो व अन्य जलपक्षियों का जमावड़ा।
4. **कनवास पक्षी विहार (कोटा):** हाड़ौती का समृद्ध जलीय क्षेत्र।
5. **बड़ोपल (हनुमानगढ़):** इंदिरा गांधी नहर का सेम (waterlogging) प्रभावित पक्षी शरणगाह।
3. मरुस्थलीकरण, भूमि क्षरण एवं अनुसंधान संस्थान (Desertification & Institutional Research)#
3.1 मरुस्थलीकरण की विभीषिका एवं इसरो का मरुस्थलीकरण एटलस#
- **मरुस्थलीकरण (Desertification):** शुष्क, अर्द्ध-शुष्क और शुष्क-उपार्द्र क्षेत्रों में जलवायुविक परिवर्तनों और मानवीय गतिविधियों (अति-चारण, वनों की कटाई, अवैज्ञानिक खनन, भूजल अति-दोहन) के कारण भूमि की जैविक व आर्थिक उत्पादकता का निरंतर ह्रास।
- **इसरो (ISRO) अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (SAC, अहमदाबाद) द्वारा जारी मरुस्थलीकरण एटलस (2021):**
- राजस्थान का **लगभग 62.90% भौगोलिक भूभाग** किसी न किसी रूप में **भूमि क्षरण (Land Degradation) एवं मरुस्थलीकरण** की चपेट में है।
- मरुस्थलीकरण का सबसे बड़ा कारक: **वायु अपरदन (Wind Erosion - 44.41%)**, इसके बाद **वनस्पति ह्रास (Vegetation Degradation - 8.91%)** तथा **जल अपरदन (Water Erosion - 1.12%)** हैं।
- थार मरुस्थल की पूर्वी अरावली की संकरी घाटियों (Wind Gaps / अरावली के दर्रे) से होकर मरुस्थल का पूर्व की ओर प्रसार (Desert Expansion towards Haryana/Delhi) हो रहा है।
3.2 प्रमुख मरुस्थलीय अनुसंधान संस्थान (Jodhpur Research Hub)#
1. काजरी - केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (CAZRI):#
- **स्थापना:** **1959** में (मूल रूप से 1952 में 'मरु वनीकरण केंद्र' के रूप में स्थापित; 1959 में पुनर्गठित)।
- **मुख्यालय:** **जोधपुर** (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद - ICAR के अधीन)।
- **प्रमुख कार्य:** शुष्क भूमि कृषि, रेत के टीलों का स्थिरीकरण (Sand Dune Stabilization), मरुस्थलीय चरागाह विकास, सौर ऊर्जा अनुप्रयोग, और गैर-पारंपरिक फसलों (जोजोबा/होहोबा, ग्वारपाठा) का अनुसंधान।
2. आफरी - शुष्क वन अनुसंधान संस्थान (AFRI):#
- **स्थापना:** **1987-1988** में (भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद - ICFRE, देहरादून के अधीन)।
- **मुख्यालय:** **जोधपुर**।
- **प्रमुख कार्य:** मरुस्थलीय वानिकी, ऊतक संवर्धन (Tissue Culture) द्वारा रोहिड़ा व खेजड़ी का क्लोनल प्रसार, और लवण-सहिष्णु पादप प्रजातियों का विकास।
4. पवित्र उपवन (ओरण) एवं लोक जैव विविधता संरक्षण (Sacred Groves / Orans)#
4.1 ओरण एवं देववन की पारिस्थितिकीय भूमिका#
राजस्थान की सदियों पुरानी ग्रामीण संस्कृति में **ओरण (Oran)** और **देववन (Devvans)** सामुदायिक जैव विविधता संरक्षण के सबसे सशक्त प्रतीक हैं:
- **धार्मिक संरक्षण:** लोक देवताओं (बाबा रामदेवजी, गोगाजी, पाबूजी, तेजाजी, करणी माता) या कुलदेवियों के नाम पर गांव की साझा भूमि को ओरण घोषित किया जाता है।
- **नियम:** ओरण में कुल्हाड़ी चलाना, पेड़ काटना, फल तोड़ना या शिकार करना धार्मिक पाप माना जाता है; केवल गिरे हुए सूखे पत्ते-लकड़ी और औषधियाँ बीनने की छूट होती है।
- **पारिस्थितिकीय लाभ:**
- ये मरुस्थलीय क्षेत्रों में स्थानीय वनस्पतियों (खेजड़ी, रोहिड़ा, जाल, कैर, कुमट) के प्राकृतिक **जीन बैंक (Gene Banks)** के रूप में कार्य करते हैं।
- गांव के तालाबों व नाड़ियों का **अगोर (Catchment Area)** स्वच्छ और हरित बनाए रखते हैं।
- चिंकारा, मोर, गोडावण और दुर्लभ मरुस्थलीय सरीसृपों के सुरक्षित प्रजनन स्थल हैं।
- **सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक हस्तक्षेप:** उच्चतम न्यायालय ने 2018-2021 के निर्णयों में राजस्थान सरकार को सभी ओरणों को **'डीम्ड फॉरेस्ट' (Deemed Forests)** के रूप में राजस्व अभिलेखों में दर्ज करने के निर्देश दिए हैं ताकि सौर ऊर्जा परियोजनाओं के नाम पर इनके विनाश को रोका जा सके।
5. राजस्थान की संकटग्रस्त प्रजातियाँ एवं संरक्षण परियोजनाएँ#
5.1 संकटापन्न वन्यजीव प्रजातियाँ (Threatened Fauna of Rajasthan)#
1. **गोडावण (Great Indian Bustard - Ardeotis nigriceps):**
- स्थिति: **Critically Endangered (CR)**।
- वैश्विक आबादी: 150 से भी कम (जिसमें से 90% से अधिक राजस्थान के जैसलमेर मरु उद्यान में)।
- मुख्य संकट: हाई-टेंशन बिजली लाइनों से टकराना, 'हैबिटेट लॉस' तथा आवारा कुत्तों द्वारा अंडों का विनाश।
- संरक्षण: सुप्रीम कोर्ट द्वारा भूमिगत केबलिंग का आदेश; सैम व रामदेवरा में 'कैप्टिव ब्रीडिंग सेंटर'।
2. **सियार / कैराकल (Caracal - स्थानीय नाम 'सियागोश'):**
- स्थिति: अत्यधिक दुर्लभ बिल्ली प्रजाति; केवल रणथंभौर, सरिस्का और कैलादेवी के बीहड़ों में बची है।
3. **भारतीय पैंगोलिन (Indian Pangolin - Manis crassicaudata):**
- स्थिति: Endangered (EN); शल्कों (Scales) के अवैध अंतरराष्ट्रीय व्यापार के कारण संकट में।
4. **मरु बिल्ली (Desert Cat - Felis lybica ornata):**
- थार के रेतीले टीलों में रहने वाली विशिष्ट चित्तीदार बिल्ली।
5. **सांडा / स्पाइनी-टेल्ड लिजार्ड (Spiny-tailed Lizard - Saara hardwickii):**
- शाकाहारी मरुस्थलीय छिपकली; चूरू, बीकानेर व बाड़मेर के रेतीले मैदानों में; तेल व मांस हेतु अवैध शिकार से संकटग्रस्त।
6. प्रदूषण नियंत्रण मंडल एवं जलवायु परिवर्तन कार्ययोजना#
6.1 राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल (RSPCB)#
- **स्थापना:** **7 फरवरी 1975** को 'जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974' की धारा 4 के अंतर्गत गठित।
- **मुख्यालय:** जयपुर।
- **अधिनियम जिनका प्रवर्तन करता है:**
1. जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974
2. वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981
3. पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 एवं प्लास्टिक अपशिष्ट/ई-कचरा/बायोमेडिकल कचरा नियम।
6.2 औद्योगिक प्रदूषण एवं संयुक्त अपशिष्ट उपचार संयंत्र (CETPs)#
राजस्थान में वस्त्र रंगाई-छपाई (Textile Dyeing & Printing) उद्योग के कारण बांडी (पाली), लूनी (बालोतरा), जोजरी (जोधपुर) और द्रव्यवती/अमानीशाह (जयपुर) नदियाँ गंभीर रूप से प्रदूषित हुई हैं:
- **CETP (Common Effluent Treatment Plants):** औद्योगिक इकाइयों के रासायनिक अपशिष्ट जल के सामूहिक शोधन हेतु **पाली, बालोतरा, जसोल, सांगानेर तथा भिवाड़ी** में स्थापित किए गए हैं।
- **ZLD (Zero Liquid Discharge):** राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के आदेशानुसार टेक्सटाइल इकाइयों को शत-प्रतिशत पानी को रीसायकल करने वाली ZLD तकनीक अपनाना अनिवार्य किया गया है।
6.3 राजस्थान राज्य जलवायु परिवर्तन कार्ययोजना (SAPCC)#
- राजस्थान सरकार द्वारा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों (तापमान वृद्धि, वर्षा की अनिश्चितता, भूजल ह्रास) से निपटने हेतु **राजस्थान राज्य जलवायु परिवर्तन कार्ययोजना (State Action Plan on Climate Change - SAPCC)** का द्वितीय संस्करण (SAPCC 2.0) तैयार किया गया है।
- **प्राथमिक क्षेत्र:** जल संसाधन, कृषि व पशुपालन, वानिकी व जैव विविधता, मानव स्वास्थ्य, और नवीकरणीय ऊर्जा (सौर व पवन)।