राजस्थान की प्रमुख सिंचाई परियोजनाएँ एवं नहरें (Major Irrigation Projects and Canals of Rajasthan)


1. राजस्थान में सिंचाई परिदृश्य एवं वर्गीकरण

1.1 जल संसाधन एवं सिंचाई का समग्र परिदृश्य

राजस्थान क्षेत्रफल की दृष्टि से देश का 10.41% भूभाग घेरता है, परंतु देश के कुल सतही जल का मात्र **1.16%** तथा भूजल का मात्र **1.72%** यहाँ उपलब्ध है। - **शुद्ध सिंचित क्षेत्र में साधनों की भागीदारी (Sources of Net Irrigated Area):** 1. **नलकूप (Tubewells):** लगभग **48% से 50%** (सर्वाधिक भागीदारी; जयपुर, अलवर, भरतपुर, दौसा अग्रणी)। 2. **कुएं (Open Wells):** लगभग **21% से 23%**। - *कुओं एवं नलकूपों की संयुक्त भागीदारी लगभग 70% से अधिक है।* 3. **नहरें (Canals):** लगभग **27% से 29%** (श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, कोटा, बूंदी, बीकानेर अग्रणी)। 4. **तालाब (Tanks/Ponds):** मात्र **0.7% से 1.0%** (भीलवाड़ा, उदयपुर, चित्तौड़गढ़ अग्रणी)। 5. **अन्य साधन:** लगभग 1%।

केंद्रीय जल आयोग (CWC) के अनुसार सिंचाई परियोजनाओं का वर्गीकरण:

1. **वृहद सिंचाई परियोजनाएँ (Major Irrigation Projects):** कमान क्षेत्र (CCA) **10,000 हेक्टेयर से अधिक** (जैसे IGNP, चंबल, माही, नर्मदा, बीसलपुर, गंग नहर)। 2. **मध्यम सिंचाई परियोजनाएँ (Medium Irrigation Projects):** कमान क्षेत्र **2,000 से 10,000 हेक्टेयर** के मध्य (जैसे सोम-कमला-अम्बा, जाखम, पांचना, मेजा, परवन)। 3. **लघु सिंचाई परियोजनाएँ (Minor Irrigation Projects):** कमान क्षेत्र **2,000 हेक्टेयर से कम** (एनिकट, चेकडैम, छोटी तलाइयाँ)।

2. इंदिरा गांधी नहर परियोजना - IGNP (मरुगंगा / राजस्थान की जीवनरेखा)

2.1 पृष्ठभूमि एवं इतिहास

- **प्रारंभिक परिकल्पना:** 1948 में बीकानेर रियासत के मुख्य सिंचाई अभियंता **कंवर सेन (Kanwar Sain)** ने अपनी ऐतिहासिक रिपोर्ट **"बीकानेर राज्य में पानी की आवश्यकता" (Water Requirements of Bikaner State)** में सतलज व व्यास के पानी को मरुस्थल तक लाने का प्रस्ताव रखा। - **शिलान्यास:** **31 मार्च 1958** को तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री **गोविंद बल्लभ पंत** द्वारा किया गया। - **प्रथम जल प्रवाह:** **11 अक्टूबर 1961** को तत्कालीन उपराष्ट्रपति **डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन** ने नौरंगदेसर वितरिका (हनुमानगढ़) में पानी छोड़कर नहर का उद्घाटन किया। - **नाम परिवर्तन:** पूर्व नाम 'राजस्थान नहर' (Rajasthan Canal) था; **2 नवंबर 1984** को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निधन के उपरांत इसका नाम **'इंदिरा गांधी नहर परियोजना' (IGNP)** किया गया।
        ┌────────────────────────────────────────────────────────────┐
        │  हरिके बैराज (सतलज + व्यास संगम, फिरोजपुर, पंजाब)          │
        └─────────────────────────────┬──────────────────────────────┘
                                      │
                         राजस्थान फीडर नहर (204 किमी)
                   (पंजाब व हरियाणा: 170 किमी + राजस्थान: 34 किमी)
                     [शून्य प्रत्यक्ष सिंचाई - केवल जल परिवहन]
                                      │
                                      ▼
                      मसीतांवाली हेड (हनुमानगढ़ - राजस्थान प्रवेश)
                                      │
                         मुख्य नहर प्रथम चरण (189 किमी)
                                      │
                                      ▼
                        पूगल हेड (छत्तरगढ़, बीकानेर)
                                      │
                         मुख्य नहर द्वितीय चरण (256 किमी)
                                      │
                                      ▼
                        मोहनगढ़ (जैसलमेर - मुख्य नहर का अंत)
                                      │
                          बाबा रामदेव उपशाखा (विस्तार)
                                      │
                                      ▼
                        गड़रा रोड (बाड़मेर - अंतिम टेल प्वॉइंट)

2.2 परियोजना का संरचनात्मक स्वरूप (Technical Engineering)

1. **राजस्थान फीडर नहर (Rajasthan Feeder):** - कुल लंबाई: **204 किमी** (पंजाब व हरियाणा में 170 किमी + राजस्थान में 34 किमी)। - आरंभ: हरिके बैराज (पंजाब); समापन: मसीतांवाली हेड (हनुमानगढ़)। - *विशेषता: फीडर नहर से किसी भी प्रकार की प्रत्यक्ष सिंचाई नहीं होती, यह केवल जल परिवहन का कार्य करती है।* 2. **मुख्य नहर (Main Canal):** - कुल लंबाई: **445 किमी** (प्रथम चरण: 189 किमी + द्वितीय चरण: 256 किमी)। - आरंभ: मसीतांवाली हेड (हनुमानगढ़); समापन: मोहनगढ़ (जैसलमेर)। - कुल नहरी प्रणाली (शाखाओं व वितरिकाओं सहित): **9,060 किमी से अधिक**। 3. **अंतिम विस्तार (Tail Point):** - मोहनगढ़ से आगे **'बाबा रामदेव उपशाखा' (बरकतुल्लाह खान उपशाखा)** निकाली गई है, जो बाड़मेर के **गड़रा रोड (स्वामी केशवानंद टेल)** तक जाती है।

2.3 IGNP की 7 लिफ्ट नहरें (The 7 Lift Canals Master Table)

IGNP के बांयी (पूर्वी) ओर धरातल ऊंचा होने के कारण पानी को लिफ्ट (पंप) करके नहरों में चढ़ाया जाता है। उत्तर से दक्षिण क्रम में सभी 7 लिफ्ट नहरें:
क्र.सं. नया नाम (वर्तमान नाम) पुराना नाम (मूल नाम) लाभान्वित जिले लंबाई एवं विशिष्ट पहचान
1. चौधरी कुंभाराम आर्य लिफ्ट नहर नोहर-साहवा / गंधेली लिफ्ट नहर हनुमानगढ़, चूरू, बीकानेर, झुंझुनूं 'आपणी योजना' (जर्मनी के KFW बैंक के सहयोग से पेयजल आपूर्ति) इसी पर आधारित है।
2. कंवर सेन लिफ्ट नहर बीकानेर-लूणकरणसर लिफ्ट नहर बीकानेर एवं श्रीगंगानगर IGNP की प्रथम एवं सबसे लंबी लिफ्ट नहर (151.6 किमी); 'बीकानेर की जीवनरेखा'।
3. पन्ना लाल बारूपाल लिफ्ट नहर गजनेर लिफ्ट नहर बीकानेर एवं नागौर नावां व डीडवाना तक पेयजल।
4. वीर तेजाजी लिफ्ट नहर बांगड़सर लिफ्ट नहर केवल बीकानेर IGNP की सबसे छोटी लिफ्ट नहर।
5. डॉ. करणी सिंह लिफ्ट नहर कोलायत लिफ्ट नहर बीकानेर एवं जोधपुर कोलायत झील व ग्रामीण जलापूर्ति।
6. गुरु जम्भेश्वर लिफ्ट नहर फलौदी लिफ्ट नहर बीकानेर, जोधपुर, जैसलमेर फलौदी क्षेत्र को जलापूर्ति।
7. जयनारायण व्यास लिफ्ट नहर पोकरण लिफ्ट नहर जैसलमेर एवं जोधपुर पश्चिमी छोर पर स्थित विशाल लिफ्ट नहर।

प्रस्तावित 8वीं लिफ्ट नहर: राजीव गांधी लिफ्ट नहर (जोधपुर शहर की पेयजल जीवनरेखा).


2.4 IGNP की 9 मुख्य शाखाएँ (The 9 Canal Branches)

मुख्य नहर के दांयी (पश्चिमी) ओर सामान्य ढलान होने के कारण 8 शाखाएँ गुरुत्वाकर्षण (Gravity Flow) से बहती हैं, जबकि केवल 1 शाखा बांयी ओर है:
शाखा का नाम स्थिति (किनारा) लाभान्वित जिला
1. रावतसर शाखा (Rawatsar Branch) बांया किनारा (Left Bank - एकमात्र) हनुमानगढ़
2. सूरतगढ़ शाखा दांया किनारा (Right Bank) श्रीगंगानगर
3. अनूपगढ़ शाखा दांया किनारा श्रीगंगानगर, अनूपगढ़
4. पूगल शाखा दांया किनारा बीकानेर
5. दांताैर शाखा दांया किनारा बीकानेर
6. बीरसालपुर शाखा दांया किनारा बीकानेर
7. चारणवाली शाखा दांया किनारा बीकानेर एवं जैसलमेर
8. शहीद बीरबल शाखा दांया किनारा जैसलमेर
9. सागरमल गोपा शाखा दांया किनारा जैसलमेर

3. गंग नहर - विश्व की प्रथम कंक्रीट-लाइन नहर (Gang Canal)

3.1 निर्माण, इतिहास एवं तकनीकी आयाम

- **निर्माता:** बीकानेर के दूरदर्शी महाराजा **गंगा सिंह (आधुनिक भारत के भागीरथ)**। - **समझौता:** 4 सितंबर 1920 को सतलज जल समझौते के आधार पर। - **उद्घाटन:** **26 अक्टूबर 1927** को तत्कालीन वायसराय **लॉर्ड इरविन** ने शिवपुर हेड पर पानी छोड़कर उद्घाटन किया। - **उद्गम:** पंजाब के फिरोजपुर जिले में सतलज नदी पर स्थित **हुसैनीवाला हेडवर्क्स (Hussainiwala Headworks)**। - **लंबाई:** कुल लंबाई **129 किमी** (पंजाब में 112 किमी + राजस्थान में 17 किमी)। - **राजस्थान में प्रवेश:** श्रीगंगानगर जिले के **खक्खां गाँव** के पास। - **विश्व रिकॉर्ड:** यह विश्व की पहली नहर थी जिसे रिसाव रोकने के लिए **चूने और कंक्रीट (Kankar-Lime Concrete Lining)** से पक्का किया गया था। - **गंग नहर लिंक चैनल (Link Channel):** गंग नहर के जर्जर होने पर पानी की निर्बाध आपूर्ति हेतु हरियाणा के लोहगढ़ (हरियाणा) से साधुवाली (श्रीगंगानगर) तक 80 किमी लंबी लिंक चैनल नहर बनाई गई।

4. चंबल घाटी बहुउद्देशीय परियोजना (Chambal Valley Project)

4.1 अंतरराज्यीय साझेदारी एवं चरणबद्ध निर्माण

- **भागीदार राज्य:** **राजस्थान एवं मध्य प्रदेश** (लागत, जल तथा उत्पादित विद्युत में **50:50 की समान साझेदारी**)। - **प्रारंभ:** 1953-54 में प्रारंभ। - **कुल विद्युत उत्पादन क्षमता:** **386 मेगावाट** (जिसमें से राजस्थान का हिस्सा **193 मेगावाट** है)। - **बांधों की श्रृंखला (3 चरणों में 4 बांध):**
बांध का नाम स्थान एवं जिला निर्माण चरण जलभराव क्षमता एवं जलविद्युत उत्पादन विशेष लक्षण
1. गांधी सागर बांध भानपुरा, मंदसौर (मध्य प्रदेश) प्रथम चरण (1960) कुल क्षमता 6,920 MCM; 115 MW (23 MW की 5 टरबाइन) चंबल परियोजना का सबसे बड़ा बांध; मध्य प्रदेश में स्थित।
2. कोटा बैराज कोटा शहर (राजस्थान) प्रथम चरण (1960) केवल सिंचाई जल नियंत्रण; विद्युत उत्पादन: 0 MW (शून्य) यहाँ से दांयी व बांयी दो मुख्य सिंचाई नहरें निकाली गई हैं।
3. राणा प्रताप सागर बांध रावतभाटा, चित्तौड़गढ़ (राजस्थान) द्वितीय चरण (1970) कुल क्षमता 2,898 MCM; 172 MW (43 MW की 4 टरबाइन) राजस्थान का सर्वाधिक जलभराव क्षमता वाला बांध; रावतभाटा परमाणु बिजली घर (RAPS) को कूलिंग वाटर देता है।
4. जवाहर सागर बांध बोराबास, कोटा (राजस्थान) तृतीय चरण (1972) पिक-अप बांध; 99 MW (33 MW की 3 टरबाइन) कोटा बैराज से 26 किमी अपस्ट्रीम में स्थित जलविद्युत पिक-अप बांध।

कोटा बैराज की नहर प्रणालियाँ:

- **बांयी मुख्य नहर (Left Main Canal - LMC):** 258 किमी लंबी; केवल राजस्थान (कोटा और बूंदी जिलों) में सिंचाई करती है। - **दांयी मुख्य नहर (Right Main Canal - RMC):** कुल 372 किमी (राजस्थान में 124 किमी + मध्य प्रदेश में 248 किमी)। पार्वती नदी को एक विशाल साइफन (Aqueduct) द्वारा पार कर मध्य प्रदेश में प्रवेश करती है। कोटा, बारां और मध्य प्रदेश के श्योपुर, मुरैना, ग्वालियर जिलों को सींचती है।

5. माही बजाज सागर, बीसलपुर एवं नर्मदा नहर परियोजना

5.1 माही बजाज सागर परियोजना (Mahi Bajaj Sagar)

- **भागीदार राज्य:** **राजस्थान और गुजरात** (1966 के ऐतिहासिक द्विपक्षीय समझौते के आधार पर)। - **लागत व्यय एवं विद्युत का अनुपात:** - बांध निर्माण लागत: **राजस्थान 45% : गुजरात 55%** - उत्पादित जलविद्युत (Hydro-power): **शत-प्रतिशत 100% (140 MW) राजस्थान को**। - **मुख्य बांध (माही बांध):** बांसवाड़ा के **बोरखेड़ा गाँव** के पास माही नदी पर निर्मित। कुल लंबाई **3,109 मीटर** होने के कारण यह **राजस्थान का सबसे लंबा बांध** है। - **कागदी पिक-अप वियर (Kagdi Pick-up Weir):** मुख्य बांध से 8 किमी नीचे बांसवाड़ा शहर के पास स्थित, जहाँ से दांयी व बांयी नहरें निकाली गई हैं। - **कडाणा बांध (Kadana Dam):** गुजरात के महीसागर (पंचमहल) जिले में पूर्णतः गुजरात के खर्च पर बनाया गया ताकि राजस्थान से छोड़े गए पानी का उपयोग किया जा सके। - **लाभान्वित क्षेत्र:** दक्षिणी राजस्थान के आदिवासी बाहुल्य जिले—**बांसवाड़ा एवं डूंगरपुर** (आनंदपुरी व सागवाड़ा नहरें)।

5.2 बीसलपुर बांध परियोजना (Bisalpur Project)

- **नदी एवं स्थान:** टोंक जिले की टोडाटोडा (Todaraisingh) तहसील में **बनास नदी** पर निर्मित। - **बांध का प्रकार:** कंक्रीट एवं चिनाई से बना **विशाल गुरुत्व बांध (Gravity Masonry Dam)**। - **पूर्ण जलस्तर एवं क्षमता:** FRL आरएल 315.50 मीटर; सकल जल भंडारण क्षमता **38.70 टीएमसी (1095 मिलियन घन मीटर)**। - **पेयजल की जीवनरेखा:** **जयपुर महानगर, अजमेर, किशनगढ़, ब्यावर, टोंक और दौसा** के लिए शुद्ध पेयजल का सर्वोच्च स्रोत। - **सिंचाई कमान:** टोंक और सवाई माधोपुर जिलों की लगभग **81,800 हेक्टेयर** भूमि को सिंचाई जल। - **ब्राह्मणी-बनास लिंक:** बीसलपुर के घटते जलस्तर को देखते हुए चंबल की सहायक ब्राह्मणी नदी के अधिशेष जल को सुरंग द्वारा बनास में डालने की योजना।

5.3 नर्मदा नहर परियोजना (Narmada Canal - सूक्ष्म सिंचाई क्रांति)

- **उद्गम:** गुजरात के केवड़िया में नर्मदा नदी पर बने **सरदार सरोवर बांध** से। - **राजस्थान का जल हिस्सा:** 1979 के नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण (NWDT) के फैसले के अनुसार **0.50 MAF (मिलियन एकड़ फीट)**। - **राजस्थान में प्रवेश:** **27 मार्च 2008** को सांचौर (तत्कालीन जालोर) के **सीलू गाँव (Silu Village)** में। - **लंबाई:** कुल 532 किमी में से **राजस्थान में लंबाई 74 किमी** (गुड़ा मालानी, बाड़मेर तक)। - **भारत की पहली अनूठी नीति:** **शत-प्रतिशत अनिवार्य फव्वारा (स्प्रिंकलर) सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली**। खुले पानी बहाकर (Flood irrigation) खेती करने पर कानूनी प्रतिबंध है। - **लिफ्ट नहरें:** सांचौर लिफ्ट, भद्रेश लिफ्ट और पनोरिया लिफ्ट नहरें। - **केनाल-टॉप सोलर:** सांचौर के पनोरिया में नर्मदा नहर पर राज्य का पहला कैनाल-टॉप सौर ऊर्जा संयंत्र।

6. मध्यम एवं अन्य महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाएँ

परियोजना का नाम नदी जिला प्रमुख विशेषताएं एवं उद्देश्य
जाखम परियोजना जाखम (माही की सहायक) प्रतापगढ़ राजस्थान का सबसे ऊंचा बांध (ऊंचाई: 81 मीटर); सीता माता अभयारण्य के भीतर अनूपपुरा गाँव में स्थित; जनजातीय उप-योजना (TSP) के तहत सिंचाई।
पांचना बांध भद्रावती, बरखेड़ा, अटा, माची, भैंसावट करौली राजस्थान में मिट्टी का सबसे बड़ा बांध (Earthen Dam); अमेरिकी आर्थिक सहयोग (USAID) से निर्मित; करौली, बयाना व भरतपुर क्षेत्र को लाभ।
सोम-कमला-अम्बा सोम नदी डूंगरपुर डूंगरपुर जिले की आसपुर तहसील तथा सलूम्बर/उदयपुर के आदिवासी क्षेत्रों को सिंचाई।
सोम कागदर सोम नदी उदयपुर (खेरवाड़ा) खेरवाड़ा तहसील में मध्यम सिंचाई परियोजना।
मेजा बांध कोठारी नदी भीलवाड़ा भीलवाड़ा शहर को पेयजल व मांडल क्षेत्र में सिंचाई; पाल पर आकर्षक 'ग्रीन माउंट पार्क' विकसित।
ईसरदा बांध परियोजना बनास नदी सवाई माधोपुर / दौसा दौसा व सवाई माधोपुर के सूखाग्रस्त क्षेत्रों को पेयजल व सिंचाई।
परवन बहुउद्देशीय परियोजना परवन नदी झालावाड़ (अकावद कलां) झालावाड़, बारां और कोटा को लाभ; 2 लाख हे. सिंचाई के साथ छाबड़ा व कालीसिंध थर्मल पावर स्टेशनों को कूलिंग वाटर।
जवाई बांध जवाई नदी (लूणी की सहायक) सुमेरपुर (पाली) "मारवाड़ का अमृत सरोवर"; जोधपुर महाराजा उम्मेद सिंह द्वारा 1946-1957 में निर्मित; उदयपुर की सेई सुरंग (6.7 किमी) द्वारा जल आपूर्ति।

7. पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) एवं जल प्रबंधन नीतियाँ

7.1 ERCP एवं संशोधित PKC-ERCP राष्ट्रीय परियोजना

- **मूल उद्देश्य:** दक्षिणी राजस्थान के चंबल बेसिन (कुन्नू, कुल, पार्वती, कालीसिंध, मेज) के अतिरिक्त मानसूनी जल को जल-अभावग्रस्त बनास, मोरेल, बाणगंगा, गंभीरी बेसिनों में मोड़ना। - **मूल कवरेज:** 13 जिले (झालावाड़, बारां, कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, अजमेर, टोंक, जयपुर, दौसा, करौली, अलवर, भरतपुर, धौलपुर)। - **संशोधित PKC-ERCP त्रिपक्षीय समझौता (MoU):** - **28 जनवरी 2024** को केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय, राजस्थान सरकार और मध्य प्रदेश सरकार के मध्य त्रिपक्षीय समझौता हस्ताक्षरित हुआ। - इसे राष्ट्रीय प्राथमिकता परियोजना घोषित किया गया, जिसमें **90% वित्तीय व्यय केंद्र सरकार** द्वारा वहन किया जाएगा।

7.2 वाराबंदी प्रणाली एवं सहभागी सिंचाई प्रबंधन

1. **वाराबंदी प्रणाली (Warabandi System):** कमान क्षेत्र में जल के न्यायसंगत वितरण हेतु समय-आधारित साप्ताहिक चक्र (Roster)। प्रत्येक किसान को उसके भूमि जोत के अनुपात में प्रति सप्ताह निश्चित घंटे-मिनट नहरी पानी का अधिकार मिलता है। 2. **PIM Act 2000:** 'राजस्थान सिंचाई प्रणाली प्रबंधन में कृषकों की सहभागिता अधिनियम, 2000' द्वारा किसानों के 'जल उपभोक्ता संगम' (WUAs) गठित किए गए।