राजस्थान का बजट एवं आर्थिक समीक्षा (Budget and Economic Review of Rajasthan)

परिचयात्मक संदर्भ एवं दस्तावेज विवरण

- **आर्थिक समीक्षा की अवधि:** वित्तीय वर्ष 2023-24 (समीक्षा वर्ष: 2023-24; तुलनात्मक आधार: 2022-23 एवं स्थिर आधार वर्ष 2011-12)। - **राज्य बजट संदर्भ:** वित्तीय वर्ष 2024-25 (संशोधित अनुमान 2023-24 RE एवं बजट अनुमान 2024-25 BE)। - **दस्तावेज स्रोत:** आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय (DES, योजना विभाग, राजस्थान) द्वारा प्रकाशित आधिकारिक 'आर्थिक समीक्षा' तथा वित्त विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा प्रस्तुत आधिकारिक 'बजट अध्ययन एवं वार्षिक वित्तीय विवरण'। - **अनुमानों का वर्गीकरण:** Actuals (वास्तविक आँकड़े), RE (संशोधित अनुमान - Revised Estimates), तथा BE (बजट अनुमान - Budget Estimates)।

1. बजट की संवैधानिक संरचना एवं विधायी प्रक्रिया

संवैधानिक प्रावधान

- **अनुच्छेद 202:** राज्य विधानमंडल के समक्ष प्रत्येक वित्तीय वर्ष के संबंध में राज्य के राज्यपाल द्वारा 'वार्षिक वित्तीय विवरण' (Annual Financial Statement) रखवाया जाता है। इसमें उस वर्ष के लिए राज्य सरकार की अनुमानित प्राप्तियों और व्यय का विवरण होता है। - **अनुच्छेद 203:** विधानमंडल में अनुदान की माँगों (Demands for Grants) पर मतदान की प्रक्रिया। - **अनुच्छेद 204:** विनियोग विधेयक (Appropriation Bill) जिसके बिना राज्य की संचित निधि से कोई धनराशि नहीं निकाली जा सकती। - **अनुच्छेद 205:** अनुपूरक, अतिरिक्त या अधिक अनुदान (Supplementary Grants)। - **अनुच्छेद 206:** लेखानुदान (Vote on Account) एवं प्रत्ययानुदान।

राज्य की तीन प्रमुख निधियाँ

1. **राज्य की संचित निधि (Consolidated Fund of the State - अनुच्छेद 266(1)):** सरकार द्वारा प्राप्त सभी राजस्व, लिए गए ऋण तथा ऋणों की अदायगी से प्राप्त धनराशि। 2. **राज्य का लोक लेखा (Public Account of the State - अनुच्छेद 266(2)):** भविष्य निधि, बचत बैंक जमा आदि राशियाँ जहाँ सरकार बैंकर/ट्रस्टी के रूप में कार्य करती है। 3. **राज्य की आकस्मिकता निधि (Contingency Fund of the State - अनुच्छेद 267(2)):** अप्रत्याशित व्यय हेतु राज्यपाल के अधीन रखी जाने वाली निधि।

2. राजस्व एवं पूँजीगत खाते का बजट ढाँचा

बजट का वर्गीकरण

राज्य बजट दो मुख्य भागों में विभाजित होता है: 1. **राजस्व खाता (Revenue Account):** - **राजस्व प्राप्तियाँ (Revenue Receipts):** वे प्राप्तियाँ जो न तो सरकार की कोई देनदारी बढ़ाती हैं और न ही परिसंपत्तियों को कम करती हैं। - स्वयं का कर राजस्व (SOTR): SGST, वैट/बिक्री कर (पेट्रोलियम), राज्य उत्पाद शुल्क, स्टाम्प एवं पंजीकरण शुल्क, वाहन कर, बिजली कर। - स्वयं का गैर-कर राजस्व (SONTR): खान एवं पेट्रोलियम रॉयल्टी, ब्याज प्राप्तियाँ, सामान्य सेवा शुल्क। - केंद्रीय करों में राज्यांश (Share in Central Taxes - 15वें वित्त आयोग के तहत 6.026%)। - केंद्र से सहायता अनुदान (Grants-in-Aid)। - **राजस्व व्यय (Revenue Expenditure):** सरकारी कामकाज का दैनिक परिचालन व्यय, कर्मचारियों के वेतन, पेंशन, ऋणों पर ब्याज भुगतान, रखरखाव तथा कल्याणकारी सब्सिडी। 2. **पूँजीगत खाता (Capital Account):** - **पूँजीगत प्राप्तियाँ (Capital Receipts):** वे प्राप्तियाँ जो देनदारियाँ उत्पन्न करती हैं (बाजार ऋण, केंद्र से ऋण) अथवा वित्तीय परिसंपत्तियों को कम करती हैं (ऋणों की वसूली, विनिवेश)। - **पूँजीगत व्यय (Capital Expenditure / Capital Outlay):** सड़कों, पुलों, बाँधों, स्कूलों, अस्पतालों, विद्युत संयंत्रों और जल परियोजनाओं के निर्माण जैसे भौतिक परिसंपत्ति निर्माण पर व्यय।

3. प्रमुख राजकोषीय घाटे एवं वित्तीय संकेतक

घाटों की अवधारणाएँ

1. **राजस्व घाटा (Revenue Deficit - RD):** $$\text{RD} = \text{राजस्व व्यय} - \text{राजस्व प्राप्तियाँ}$$ यह दर्शाता है कि सरकार अपने नियमित प्रशासनिक खर्चों को पूरा करने के लिए भी उधार ले रही है। 2. **राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit - FD):** $$\text{FD} = \text{कुल व्यय} - (\text{राजस्व प्राप्तियाँ} + \text{गैर-ऋण पूँजीगत प्राप्तियाँ})$$ यह सरकार की कुल उधार आवश्यकताओं (Borrowing Requirements) को मापता है। 3. **प्राथमिक घाटा (Primary Deficit - PD):** $$\text{PD} = \text{राजकोषीय घाटा} - \text{ब्याज भुगतान}$$ यह दर्शाता है कि वर्तमान वर्ष की राजकोषीय नीतियों का घाटे में कितना योगदान है, पिछले ऋणों के ब्याज भार को अलग करके।

FRBM अधिनियम एवं 15वें वित्त आयोग के मानक

- **राजकोषीय घाटा सीमा:** सामान्य सीमा राज्य के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) का **3.0%**, जो विद्युत क्षेत्र में सुधार करने पर **0.5% अतिरिक्त** छूट के साथ अधिकतम **3.5%** तक अनुमत है। - **राजस्व घाटा लक्ष्य:** राजस्व घाटे को समाप्त कर राजस्व अधिशेष (Revenue Surplus) प्राप्त करना। - **ऋण-GSDP अनुपात (Debt to GSDP):** राजस्थान का ऋण भार GSDP के लगभग **36% से 39%** के दायरे में है, जिसे 15वें वित्त आयोग ने दीर्घावधि में 20% तक लाने की सिफारिश की है।

4. आर्थिक समीक्षा के प्रमुख मैक्रो समुच्चय

राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP)

- **प्रचलित मूल्यों पर GSDP (2023-24 AE):** ₹ 15,70,053 करोड़ (₹ 15.70 लाख करोड़), वृद्धि दर: 11.04%। - **स्थिर (2011-12) मूल्यों पर GSDP (2023-24 AE):** ₹ 8,24,723 करोड़ (₹ 8.24 लाख करोड़), वास्तविक वृद्धि दर: 5.79%। - **शुद्ध राज्य घरेलू उत्पाद (NSDP 2023-24 AE):** - प्रचलित मूल्यों पर: ₹ 14,07,314 करोड़। - स्थिर मूल्यों पर: ₹ 7,33,017 करोड़।

सकल राज्य मूल्य संवर्धन (GSVA) क्षेत्रीय वितरण

- **प्रचलित मूल्यों पर क्षेत्रीय योगदान (2023-24 AE):** - कृषि क्षेत्र: **27.15%** - उद्योग क्षेत्र: **27.76%** - सेवा क्षेत्र: **45.09%** - **स्थिर (2011-12) मूल्यों पर क्षेत्रीय योगदान (2023-24 AE):** - कृषि क्षेत्र: **27.18%** - उद्योग क्षेत्र: **27.70%** - सेवा क्षेत्र: **45.12%** - **कृषि उप-क्षेत्र में पशुधन का वर्चस्व:** पशुधन (46.41%) फसलों (45.94%) से अधिक योगदान देता है। - **उद्योग उप-क्षेत्र में विनिर्माण का वर्चस्व:** विनिर्माण (41.26%) और निर्माण (32.55%)।

प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income - PCI)

- **प्रचलित मूल्यों पर:** वर्ष 2023-24 (AE) में **₹ 1,56,149** (2022-23 RE के ₹ 1,43,678 की तुलना में 8.68% वृद्धि)। - **स्थिर (2011-12) मूल्यों पर:** वर्ष 2023-24 (AE) में **₹ 86,134** (2022-23 RE के ₹ 82,318 की तुलना में 4.64% वास्तविक वृद्धि)।

5. मूल्य सांख्यिकी एवं थोक-उपभोक्ता मूल्य सूचकांक

थोक मूल्य सूचकांक (WPI - Rajasthan)

- आधार वर्ष: **1999-2000 = 100**। - वस्तु टोकरी: कुल **154 वस्तुएँ**। - भार वितरण: 1. विनिर्मित उत्पाद समूह (69 वस्तुएँ): भार **49.853** 2. प्राथमिक वस्तु समूह (75 वस्तुएँ): भार **33.894** 3. ईंधन, शक्ति, प्रकाश एवं उपस्नेहक (10 वस्तुएँ): भार **16.253**

औद्योगिक श्रमिकों हेतु उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW)

- नया आधार वर्ष: **2016 = 100**। - राजस्थान के 3 केंद्र: **जयपुर, अलवर, भीलवाड़ा** (सितंबर 2020 से अजमेर के स्थान पर अलवर केंद्र)।

6. बजट व्यय की क्षेत्रीय प्राथमिकताएँ एवं सामाजिक क्षेत्र

बजट व्यय का क्षेत्रीय वितरण

- **सामाजिक एवं सामुदायिक सेवाएँ (Social & Community Services):** बजट आवंटन का सबसे बड़ा हिस्सा (लगभग 45% से 48%), जिसमें शिक्षा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, पेयजल, जल आपूर्ति, तथा सामाजिक सुरक्षा पेंशन शामिल हैं। - **ऊर्जा एवं विद्युत क्षेत्र (Energy Sector):** लगभग 13% से 15% आवंटन। - **कृषि एवं संबद्ध गतिविधियाँ (Agriculture & Allied):** लगभग 6% से 8% आवंटन। - **परिवहन (सड़क एवं पुल):** लगभग 5% से 7% आवंटन। - **सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण:** लगभग 3% से 5% आवंटन।

प्रतिबद्ध देनदारियाँ (Committed Liabilities)

- राज्य के राजस्व का एक बड़ा हिस्सा तीन अनिवार्य मदों पर खर्च होता है: 1. कर्मचारियों के वेतन एवं भत्ते (Salaries) 2. सेवानिवृत्त कार्मिकों की पेंशन (Pensions) 3. संचित ऋणों पर ब्याज भुगतान (Interest Payments) - ये तीनों मिलकर राज्य के स्वयं के कर राजस्व का 50% से अधिक हिस्सा उपभोग कर लेते हैं, जिससे पूँजीगत परिसंपत्ति निर्माण हेतु वित्तीय गुंजाइश सीमित हो जाती है।

7. प्रमुख बजट सुधार एवं नवाचार

पृथक कृषि बजट (Separate Agriculture Budget)

- राजस्थान देश का अग्रणी राज्य बना जिसने वित्तीय वर्ष **2022-23** से मुख्य बजट के साथ 'पृथक कृषि बजट' प्रस्तुत किया। - इसमें 11 प्राथमिक मिशन (राजस्थान सूक्ष्म सिंचाई मिशन, जैविक खेती मिशन, बीज उत्पादन एवं वितरण मिशन, मिलेट्स प्रोत्साहन मिशन, संरक्षित खेती आदि) घोषित किए गए।

जेंडर बजटिंग एवं ग्रीन बजटिंग

- **जेंडर बजट (Gender Budget):** वित्तीय वर्ष 2011-12 से प्रारंभ। इसमें महिलाओं हेतु 100% योजनाएँ (भाग क) तथा 30% से अधिक लाभ वाली योजनाएँ (भाग ख) शामिल की जाती हैं। - **ग्रीन बजट (Green Budget):** वित्तीय वर्ष 2021-22 से प्रारंभ। जलवायु परिवर्तन, वनीकरण, प्रदूषण नियंत्रण और अक्षय ऊर्जा पर व्यय को ट्रैक करने हेतु। - **योजनागत/गैर-योजनागत वर्गीकरण की समाप्ति:** वित्तीय वर्ष 2017-18 से बजट केवल राजस्व और पूँजीगत व्यय के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।