राजस्थान की अर्थव्यवस्था एवं आर्थिक नियोजन (Economy of Rajasthan and Economic Planning)
1. राजस्थान की अर्थव्यवस्था का समग्र स्वरूप एवं मैक्रो संकेतक#
अर्थव्यवस्था की प्रकृति एवं संरचना#
- राजस्थान क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा राज्य है (3,42,239 वर्ग किमी; देश का 10.41%), जहाँ देश की लगभग 5.66% जनसंख्या निवास करती है।
- राज्य की अर्थव्यवस्था पारंपरिक रूप से कृषि और पशुपालन पर अत्यधिक निर्भर रही है, किंतु हाल के दशकों में सेवा क्षेत्र (Services Sector) और विनिर्माण/उद्योग क्षेत्र (Industry Sector) का योगदान निरंतर बढ़ा है।
- **आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय (DES, राजस्थान):** राज्य की अर्थव्यवस्था के प्रमुख समुच्चय (GSDP, GSVA, PCI, मुद्रास्फीति आदि) के अनुमान तैयार करने वाली राज्य की नोडल संस्था है।
- **आधार वर्ष (Base Year):** वर्तमान में राज्य घरेलू उत्पाद और प्रति व्यक्ति आय की स्थिर मूल्यों पर गणना हेतु आधार वर्ष **2011-12** है।
सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP)#
- **प्रचलित मूल्यों पर GSDP (At Current Prices):**
- वर्ष 2023-24 (अग्रिम अनुमान): **₹ 15.70 लाख करोड़** (लगभग 15,70,053 करोड़ रुपये)।
- वर्ष 2022-23 (संशोधित अनुमान): ₹ 14.14 लाख करोड़।
- वृद्धि दर (प्रचलित मूल्यों पर): लगभग **11.04%** (2023-24 AE)।
- **स्थिर (2011-12) मूल्यों पर GSDP (At Constant Prices):**
- वर्ष 2023-24 (अग्रिम अनुमान): **₹ 8.24 लाख करोड़** (लगभग 8,24,723 करोड़ रुपये)।
- वर्ष 2022-23 (संशोधित अनुमान): ₹ 7.79 लाख करोड़।
- वास्तविक आर्थिक वृद्धि दर (स्थिर मूल्यों पर): लगभग **5.79%** (2023-24 AE)।
शुद्ध राज्य घरेलू उत्पाद (NSDP)#
- सकल राज्य घरेलू उत्पाद में से स्थायी पूँजी उपभोग (मूल्यह्रास / Depreciation) घटाने पर शुद्ध राज्य घरेलू उत्पाद (NSDP) प्राप्त होता है।
- **प्रचलित मूल्यों पर NSDP:** वर्ष 2023-24 (AE) में लगभग **₹ 14.07 लाख करोड़**।
- **स्थिर (2011-12) मूल्यों पर NSDP:** वर्ष 2023-24 (AE) में लगभग **₹ 7.33 लाख करोड़**।
2. सकल राज्य मूल्य संवर्धन (GSVA) एवं क्षेत्रीय संरचना (Sectoral Composition)#
सकल राज्य मूल्य संवर्धन (GSVA) राज्य की अर्थव्यवस्था के तीनों प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों (कृषि, उद्योग और सेवा) के योगदान को दर्शाता है।
प्रचलित मूल्यों पर क्षेत्रीय योगदान (GSVA at Current Prices 2023-24 AE)#
1. **कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र (Agriculture & Allied):** लगभग **27.15%**
2. **उद्योग क्षेत्र (Industry Sector):** लगभग **27.76%**
3. **सेवा क्षेत्र (Services Sector):** लगभग **45.09%** (सर्वाधिक योगदान)
स्थिर (2011-12) मूल्यों पर क्षेत्रीय योगदान (GSVA at Constant Prices 2023-24 AE)#
1. **कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र:** लगभग **27.18%**
2. **उद्योग क्षेत्र:** लगभग **27.70%**
3. **सेवा क्षेत्र:** लगभग **45.12%**
क्षेत्रीय उप-घटकों की आंतरिक संरचना#
- **कृषि क्षेत्र (Agriculture Sector):**
- **पशुधन (Livestock):** लगभग **46.41%** (कृषि क्षेत्र में फसलों से भी बड़ा हिस्सा)।
- **फसलें (Crops):** लगभग 45.94%।
- **वानिकी एवं लट्ठे बनाना (Forestry & Logging):** लगभग 7.30%।
- **मत्स्य (Fishing):** लगभग 0.35%।
- **उद्योग क्षेत्र (Industry Sector):**
- **विनिर्माण (Manufacturing):** लगभग 41.26% (उद्योग क्षेत्र में सर्वाधिक)।
- **निर्माण (Construction):** लगभग 32.55%।
- **खनन एवं उत्खनन (Mining & Quarrying):** लगभग 12.60%।
- **विद्युत, गैस, जलापूर्ति एवं अन्य उपयोगिताएँ:** लगभग 13.59%।
- **सेवा क्षेत्र (Services Sector):**
- **व्यापार, मरम्मत, होटल एवं जलपान गृह:** लगभग 27.69%।
- **स्थावर संपदा, आवास का स्वामित्व एवं व्यावसायिक सेवाएँ:** लगभग 24.23%।
- **परिवहन, भंडारण एवं संचार:** लगभग 12.52%।
- **वित्तीय सेवाएँ:** लगभग 10.45%।
- **लोक प्रशासन:** लगभग 9.92%।
- **अन्य सेवाएँ:** लगभग 15.19%।
3. प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income - PCI)#
- प्रति व्यक्ति आय राज्य के आर्थिक कल्याण और जीवन स्तर का प्रमुख संकेतक है। इसकी गणना शुद्ध राज्य घरेलू उत्पाद (NSDP) को कुल मध्यावधि जनसंख्या से विभाजित करके की जाती है।
- प्रचलित मूल्यों पर प्रति व्यक्ति आय (At Current Prices):
- वर्ष 2023-24 (AE): ₹ 1,56,149
- वर्ष 2022-23 (RE): ₹ 1,43,678
- वृद्धि दर: लगभग 8.68%
- स्थिर (2011-12) मूल्यों पर प्रति व्यक्ति आय (At Constant Prices):
- वर्ष 2023-24 (AE): ₹ 86,134
- वर्ष 2022-23 (RE): ₹ 82,318
- वास्तविक वृद्धि दर: लगभग 4.64%
- राष्ट्रीय औसत से तुलना: राजस्थान की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत (अखिल भारतीय स्तर: प्रचलित मूल्यों पर ₹ 1.85 लाख से अधिक) से कुछ कम है, किंतु पिछले दशक में अंतर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
4. मूल्य सांख्यिकी एवं मुद्रास्फीति (Price Statistics & Inflation)#
थोक मूल्य सूचकांक (Wholesale Price Index - WPI)#
- राजस्थान सरकार का आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय राज्य स्तर पर मासिक थोक मूल्य सूचकांक जारी करता है।
- **आधार वर्ष:** **1999-2000 = 100** (राज्य स्तर पर वर्तमान में यही आधार वर्ष लागू है)।
- **समूह एवं भार (Weights):**
- प्राथमिक वस्तु समूह (Primary Articles - 75 वस्तुएँ): भार **33.894**
- ईंधन, शक्ति, प्रकाश एवं उपस्नेहक समूह (Fuel & Power - 10 वस्तुएँ): भार **16.253**
- विनिर्मित उत्पाद समूह (Manufactured Products - 69 वस्तुएँ): भार **49.853** (सर्वाधिक भार)
- कुल वस्तुएँ: **154 वस्तुएँ** (कुल भार 100.000)।
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index - CPI)#
- **औद्योगिक श्रमिकों हेतु CPI (CPI-IW):** आधार वर्ष **2016 = 100**।
- राजस्थान में चयनित 3 केंद्र: **जयपुर, अलवर और भीलवाड़ा** (पूर्व में अजमेर केंद्र था, जिसे बदलकर सितंबर 2020 से अलवर किया गया)।
- **संयुक्त उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-Combined - ग्रामीण + शहरी):** आधार वर्ष **2012 = 100** (NSSO / NSO द्वारा जारी)।
5. रोजगार, श्रम बल एवं जनसांख्यिकी (Employment & Demographics)#
आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS - Periodic Labour Force Survey)#
- MoSPI द्वारा संचालित PLFS के अनुसार राजस्थान में श्रम बल सहभागिता दर (LFPR), कामगार जनसंख्या अनुपात (WPR) और बेरोजगारी दर (UR) की गणना की जाती है।
- **राजस्थान में कार्यशील जनसंख्या:** 2011 की जनगणना के अनुसार कुल जनसंख्या का **43.6%** हिस्सा कार्यशील (Workers) है।
- मुख्य कामगार (Main Workers): लगभग 70.46%
- सीमांत कामगार (Marginal Workers): लगभग 29.54%
- कृषक एवं कृषि मजदूर: राज्य के कुल कामगारों का लगभग 62.1% अभी भी कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र में कार्यरत है।
- **रोजगार संवर्धन कार्यक्रम:**
- **इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना (IRGY-Urban):** शहरी क्षेत्र में प्रति परिवार 125 दिवस का गारंटीकृत रोजगार (9 सितंबर 2022 से प्रारंभ)।
- **महात्मा गांधी नरेगा (MGNREGA):** केंद्र सरकार के 100 दिवस के अतिरिक्त राजस्थान सरकार द्वारा विशेष श्रेणियों/कठोड़ी, सहरिया एवं विशेष योग्यजनों को 25 अतिरिक्त दिवस (कुल 125 दिन) का राज्य मद से रोजगार।
6. गरीबी एवं बहुआयामी निर्धनता (Poverty & Multidimensional Poverty)#
परंपरागत गरीबी अनुमान#
- **तेंदुलकर समिति (2011-12):** राजस्थान में गरीबी अनुपात **14.71%** (ग्रामीण 16.05%, शहरी 10.69%) आंका गया, जो राष्ट्रीय औसत (21.92%) से बेहतर था।
- **रंगराजन समिति (2011-12):** राजस्थान में गरीबी अनुपात **21.7%** आंका गया।
राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक (National MPI - NITI Aayog)#
- नीति आयोग द्वारा ऑक्सफोर्ड पॉवर्टी एंड ह्यूमन डेवलपमेंट इनिशिएटिव (OPHI) और UNDP की पद्धति पर आधारित राष्ट्रीय MPI जारी किया जाता है।
- **तीन आयाम (Dimensions) एवं 12 संकेतक:**
1. स्वास्थ्य (Health - 3 संकेतक: पोषण, बाल-किशोर मृत्यु दर, मातृ स्वास्थ्य)
2. शिक्षा (Education - 2 संकेतक: स्कूली शिक्षा के वर्ष, स्कूल उपस्थिति)
3. जीवन स्तर (Standard of Living - 7 संकेतक: खाना पकाने का ईंधन, स्वच्छता, पेयजल, बिजली, आवास, संपत्ति, बैंक खाते)
- **प्रगति:**
- NFHS-4 (2015-16) में राजस्थान में बहुआयामी गरीब: **28.86%**
- NFHS-5 (2019-21) में राजस्थान में बहुआयामी गरीब: घटकर **15.31%** रह गए (लगभग 13.55% अंकों की भारी कमी)।
- सर्वाधिक MPI गरीबी वाले जिले: बाड़मेर, जैसलमेर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़।
- न्यूनतम MPI गरीबी वाले जिले: झुंझुनूं, कोटा, जयपुर।
7. मानव विकास एवं लैंगिक संकेतक (Human Development & Gender)#
मानव विकास सूचकांक (HDI)#
- यूएनडीपी (UNDP) पद्धति के तीन घटक: जीवन प्रत्याशा (दीर्घ एवं स्वस्थ जीवन), ज्ञान (शिक्षा), तथा प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (सभ्य जीवन स्तर)।
- राजस्थान मध्यम मानव विकास श्रेणी में आता है। स्वास्थ्य एवं प्राथमिक शिक्षा के सार्वभौमीकरण के माध्यम से राज्य ने पिछले दो दशकों में अपने समग्र स्कोर में निरंतर सुधार किया है।
प्रमुख सामाजिक-आर्थिक संकेतक (SRS एवं NFHS-5)#
- **शिशु मृत्यु दर (IMR - Infant Mortality Rate):** प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर घटकर लगभग **32** (SRS बुलेटिन)।
- **मातृ मृत्यु अनुपात (MMR - Maternal Mortality Ratio):** प्रति 1,00,000 जीवित जन्मों पर घटकर **113** (SRS)।
- **जन्म के समय जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy at Birth):** लगभग 69.4 वर्ष।
- **बाल लिंगानुपात (0-6 वर्ष):** 2011 की जनगणना में 888 था, जो NFHS-5 में सुधरकर 891 दर्ज किया गया।
8. आर्थिक नियोजन का इतिहास एवं संस्थागत ढाँचा (Economic Planning & Decentralization)#
पंचवर्षीय योजनाओं का ऐतिहासिक परिदृश्य#
- **प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951-56):** मुख्य बल कृषि, सिंचाई एवं ऊर्जा पर। भाखड़ा नांगल और चंबल परियोजनाओं का विकास।
- **द्वितीय योजना (1956-61):** उद्योग, विद्युत और भारी बुनियादी ढाँचे पर ध्यान।
- **आठवीं योजना (1992-97):** विकास दर में ऐतिहासिक उछाल (लगभग 7.8% वार्षिक वृद्धि)।
- **बारहवीं पंचवर्षीय योजना (2012-17):** राजस्थान की अंतिम पंचवर्षीय योजना; मुख्य लक्ष्य 'तीव्र, अधिक समावेशी और धारणीय विकास' (लक्ष्य 7.7% विकास दर)।
- **नीति आयोग की स्थापना (1 जनवरी 2015):** पंचवर्षीय योजनाओं का समापन; 15-वर्षीय विजन, 7-वर्षीय रणनीति और 3-वर्षीय एक्शन एजेंडा अपनाया गया।
राज्य स्तरीय नियोजन संस्थाएँ#
- **राज्य योजना बोर्ड (State Planning Board):** 1953 में स्थापित; मुख्यमंत्री इसके पदेन अध्यक्ष होते हैं।
- **मुख्यमंत्री राजस्थान आर्थिक सुधार सलाहकार परिषद (CMETAC):** आर्थिक सुधारों और नीतिगत सलाह हेतु विशेषज्ञ परिषद।
- **जिला योजना समिति (DPC - District Planning Committee):** 74वें संविधान संशोधन (अनुच्छेद 243-ZD) के तहत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम के अंतर्गत गठित।
- अध्यक्ष: संबंधित जिले का **जिला प्रमुख**।
- सदस्य सचिव: मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO, जिला परिषद)।
- कार्य: जिले की ग्रामीण पंचायतों और नगरीय पालिकाओं की विकास योजनाओं का समेकन।
9. सतत विकास लक्ष्य (SDGs - Sustainable Development Goals)#
SDG विजन 2030 ढाँचा#
- संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2015 में स्वीकृत **17 लक्ष्य, 169 उप-लक्ष्य (Targets)** और संबंधित संकेतक। समयावधि: 2016 से 2030।
- राजस्थान में नोडल विभाग: **आयोजना विभाग (Planning Department, Rajasthan)**।
- कार्यान्वयन एवं समीक्षा सेल: **SDG क्रियान्वयन केंद्र (SDG Implementation Centre)** आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय (DES) में स्थापित।
नीति आयोग SDG इंडिया इंडेक्स#
- राज्यों को 4 श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है:
1. आकांक्षी (Aspirant): 0-49
2. अच्छा प्रदर्शन (Performer): 50-64
3. अग्रणी (Front Runner): 65-99
4. लक्ष्य प्राप्तकर्ता (Achiever): 100
- राजस्थान नीति आयोग के SDG इंडेक्स में **अग्रणी (Front Runner)** श्रेणी में शामिल है (स्कोर 60 से बढ़कर 67+ तक पहुँचा)।
राजस्थान राज्य SDG इंडेक्स (जिला रैंकिंग)#
- राजस्थान देश का अग्रणी राज्य है जो जिला स्तर पर राज्य SDG इंडेक्स (संस्करण 1.0, 2.0, 3.0, 4.0) जारी करता है।
- **सर्वोच्च प्रदर्शन करने वाले जिले (शीर्ष रैंक):** **सीकर, झुंझुनूं, जयपुर, कोटा**।
- **निम्नतम प्रदर्शन करने वाले जिले (तली में):** **जैसलमेर, बाड़मेर, प्रतापगढ़, जालोर**।
10. क्षेत्रीय असमानता, बजट एवं वित्तीय प्रबंधन (Fiscal Management & Policies)#
क्षेत्रीय विषमताएँ (Regional Disparities)#
- **पश्चिमी राजस्थान:** मरुस्थलीय भूभाग, विरल जनसंख्या, जल अभाव, पशुधन एवं सौर ऊर्जा आधारित अर्थव्यवस्था।
- **दक्षिणी राजस्थान (जनजातीय उप-योजना - TSP क्षेत्र):** बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, उदयपुर का वनाच्छादित क्षेत्र; लघु जोतें, निम्न साक्षरता, वनोपज आधारित निर्वाह।
- **पूर्वी एवं उत्तर-पूर्वी राजस्थान:** उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी, दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा (DMIC), सघन औद्योगिकीकरण और कृषि समृद्धि।
राज्य की राजकोषीय स्थिति एवं FRBM अधिनियम#
- **राजस्थान राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम (FRBM Act, 2005):**
- राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit): GSDP के 3% से 3.5% की सीमा के भीतर रखने का लक्ष्य।
- राजस्व घाटा (Revenue Deficit): समाप्त कर राजस्व अधिशेष प्राप्त करने का लक्ष्य।
- **राज्य के राजस्व स्रोत:**
- स्वयं का कर राजस्व (Own Tax Revenue - SOTR): राज्य GST (SGST), वैट/बिक्री कर (पेट्रोलियम), राज्य उत्पाद शुल्क (State Excise), स्टांप एवं पंजीकरण शुल्क, वाहन कर।
- गैर-कर राजस्व (Non-Tax Revenue): खान एवं खनिज रॉयल्टी (अत्यंत महत्वपूर्ण स्रोत)।
- केंद्रीय करों में हिस्सेदारी (Devolution of Central Taxes) एवं केंद्र से सहायता अनुदान (Grants-in-aid)।