मुख्यमंत्री, राज्य मंत्रिपरिषद एवं महाधिवक्ता: विस्तृत अध्ययन सामग्री


📚 द्विभाषी अध्ययन सामग्री (Bilingual Study Material)

Chief Minister, Council of Ministers & Advocate General of Rajasthan: Comprehensive Study Material

राजस्थान के मुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद एवं महाधिवक्ता: विस्तृत अध्ययन सामग्री


1. मुख्यमंत्री एवं मंत्रिपरिषद: संवैधानिक रूपरेखा (Constitutional Provisions)

भारतीय संविधान के भाग-6 (अनुच्छेद 163 से 167 तथा अनुच्छेद 177) में राज्य की मंत्रिपरिषद और मुख्यमंत्री की संवैधानिक स्थिति का विस्तृत उल्लेख है। भारत में ब्रिटेन की वेस्टमिंस्टर संसदीय प्रणाली के आधार पर राज्यपाल को राज्य का संवैधानिक प्रमुख (De-jure Head) तथा मुख्यमंत्री को वास्तविक कार्यपालक प्रमुख (De-facto Head) बनाया गया है।

प्रमुख अनुच्छेदों का विवरण

अनुच्छेद संवैधानिक प्रावधान एवं व्याख्या
अनुच्छेद 163(1) राज्यपाल को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद: उन कार्यों को छोड़कर जहाँ राज्यपाल को अपने विवेकानुसार (Discretion) कार्य करना अपेक्षित है, राज्यपाल को सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी, जिसका प्रधान मुख्यमंत्री होगा।
अनुच्छेद 163(2) यदि कोई प्रश्न उठता है कि कोई विषय राज्यपाल के विवेकानुसार है या नहीं, तो राज्यपाल का निर्णय अंतिम होगा।
अनुच्छेद 163(3) न्यायिक समीक्षा से सुरक्षा: मंत्रियों द्वारा राज्यपाल को दी गई सलाह की किसी भी न्यायालय में जाँच नहीं की जा सकती।
अनुच्छेद 164(1) मुख्यमंत्री की नियुक्ति: मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करेगा और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल, मुख्यमंत्री की सलाह पर करेगा। मंत्री, राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद धारण करेंगे।
अनुच्छेद 164(1A) मंत्रिपरिषद का आकार (91वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 2003): मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15% से अधिक नहीं होगी। राजस्थान में: 200 × 15% = 30 (अधिकतम), न्यूनतम 12।
अनुच्छेद 164(1B) दलबदल पर अयोग्यता: यदि कोई विधायक 10वीं अनुसूची के तहत अयोग्य घोषित होता है, तो वह मंत्री पद हेतु भी अयोग्य हो जाएगा।
अनुच्छेद 164(2) सामूहिक उत्तरदायित्व: मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से राज्य की विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होगी।
अनुच्छेद 164(3) शपथ: पद ग्रहण करने से पूर्व राज्यपाल तीसरी अनुसूची के प्रारूप अनुसार मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाता है।
अनुच्छेद 164(4) गैर-विधायक का मंत्री बनना: कोई मंत्री जो निरंतर 6 माह तक राज्य विधानमंडल के किसी सदन का सदस्य नहीं रहता, वह उस अवधि की समाप्ति पर मंत्री नहीं रहेगा।
अनुच्छेद 166 राज्य सरकार के कार्य संचालन: राज्य सरकार की समस्त कार्यपालिका कार्यवाही राज्यपाल के नाम से की जाएगी।
अनुच्छेद 167 मुख्यमंत्री के कर्तव्य: राज्यपाल को प्रशासनिक एवं विधायी मामलों की जानकारी देना।
अनुच्छेद 177 सदनों के संबंध में मंत्रियों के अधिकार: प्रत्येक मंत्री को विधानसभा की कार्यवाही में बोलने एवं भाग लेने का अधिकार होगा, किंतु मतदान उसी सदन में कर सकेगा जिसका वह सदस्य है

2. मंत्रिपरिषद का प्रशासनिक ढाँचा एवं कार्य (Administrative Framework of Council of Ministers)

2.1 मंत्रिपरिषद (Council of Ministers) बनाम मंत्रिमंडल (Cabinet)

मंत्रिपरिषद: यह एक विस्तृत संवैधानिक संस्था है जिसमें सभी श्रेणियों के मंत्री (कैबिनेट, राज्य मंत्री, उप-मंत्री) शामिल होते हैं।

मंत्रिमंडल: यह मंत्रिपरिषद का आंतरिक नीति-निर्माता केंद्र है। संविधान में मूलतः 'कैबिनेट' शब्द नहीं था; इसे 44वें संविधान संशोधन (1978) द्वारा अनुच्छेद 352 में औपचारिक रूप से उल्लिखित किया गया।

2.2 मंत्रियों की श्रेणियाँ (Categories of Ministers)

श्रेणी विवरण
कैबिनेट मंत्री (Cabinet Ministers) अपने-अपने विभागों (गृह, वित्त, राजस्व आदि) के सर्वोच्च प्रशासनिक प्रमुख। कैबिनेट की बैठकों में भाग लेते हैं।
राज्य मंत्री - स्वतंत्र प्रभार (Minister of State - Independent Charge) इन्हें किसी छोटे विभाग का स्वतंत्र दायित्व सौंपा जाता है। सीधे मुख्यमंत्री के प्रति उत्तरदायी।
राज्य मंत्री (Ministers of State) कैबिनेट मंत्रियों के अधीन कार्य करते हैं।
उप-मंत्री (Deputy Ministers) कनिष्ठ स्तर के मंत्री, जिन्हें प्रशासनिक, राजनीतिक और संसदीय कार्यों का प्रशिक्षण देने हेतु नियुक्त किया जाता है।

2.3 मंत्रिपरिषद के प्रमुख कार्य एवं शक्तियाँ

कार्य विवरण
नीति निर्धारण कृषि, उद्योग, स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा एवं रोजगार संबंधी राज्य की नीतियों का निर्माण व क्रियान्वयन।
विधायी समन्वय विधानसभा में सरकारी विधेयकों को तैयार करना, प्रस्तुत करना और पारित कराना।
वित्तीय नियंत्रण राज्य के वार्षिक बजट, पूरक माँगों और कराधान प्रस्तावों को अंतिम रूप देना।
उच्च पदों पर नियुक्तियाँ महाधिवक्ता, RPSC अध्यक्ष व सदस्य, राज्य चुनाव आयुक्त आदि की नियुक्ति हेतु राज्यपाल को अनुशंसा भेजना।
संकट प्रबंधन अकाल, सूखा, बाढ़ या कानून-व्यवस्था संकट के समय त्वरित कार्यकारी निर्णय लेना।

3. राजस्थान के मुख्यमंत्रियों का संपूर्ण इतिहास (Complete History of Rajasthan CMs)

3.1 मनोनीत मुख्यमंत्री काल (1949–1952)

क्र.सं. मुख्यमंत्री कार्यकाल विशेष तथ्य
1 पंडित हीरालाल शास्त्री 07 अप्रैल 1949 – 05 जनवरी 1951 राजस्थान के प्रथम मुख्यमंत्री (प्रधानमंत्री); वनस्थली विद्यापीठ के संस्थापक।
2 सी. एस. वेंकटाचारी 06 जनवरी 1951 – 25 अप्रैल 1951 राजस्थान के एकमात्र आईसीएस (ICS) / नौकरशाह मुख्यमंत्री
3 जयनारायण व्यास 26 अप्रैल 1951 – 03 मार्च 1952 'शेर-ए-राजस्थान', 'लोकनायक'; प्रथम आम चुनाव (1952) आयोजित करवाए।

3.2 निर्वाचित मुख्यमंत्री काल (1952 से वर्तमान)

क्र.सं. मुख्यमंत्री कार्यकाल विशेष तथ्य
4 टीकाराम पालीवाल 03 मार्च 1952 – 31 अक्टूबर 1952 राजस्थान के प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री; बाद में राजस्थान के प्रथम उपमुख्यमंत्री बने।
5 जयनारायण व्यास 01 नवंबर 1952 – 13 नवंबर 1954 राजस्थान के एकमात्र ऐसे नेता जो मनोनीत एवं निर्वाचित दोनों प्रकार के मुख्यमंत्री रहे।
6 मोहनलाल सुखाड़िया 13 नवंबर 1954 – 09 जुलाई 1971 सर्वाधिक लंबा कार्यकाल (लगभग 17 वर्ष); "आधुनिक राजस्थान के निर्माता"; जागीरदारी उन्मूलन; त्रि-स्तरीय पंचायती राज का शुभारंभ (2 अक्टूबर 1959, नागौर); IGNP की शुरुआत।
7 बरकतउल्ला खान 09 जुलाई 1971 – 11 अक्टूबर 1973 राजस्थान के प्रथम एवं एकमात्र अल्पसंख्यक (मुस्लिम) मुख्यमंत्री; पद पर रहते हुए निधन (पद पर दिवंगत होने वाले प्रथम मुख्यमंत्री)।
8 हरिदेव जोशी 11 अक्टूबर 1973 – 29 अप्रैल 1977 (तथा 1985–88, 1989–90) 3 बार मुख्यमंत्री; द्वितीय राष्ट्रपति शासन (1977) इनके कार्यकाल में; संभागीय व्यवस्था की पुनर्बहाली (1987)
9 भैरोंसिंह शेखावत 22 जून 1977 – 16 फरवरी 1980 (तथा 1990–92, 1993–98) "राजस्थान का सिंह", "बाबोसा"; राजस्थान के प्रथम गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री; अंत्योदय योजना (1977); बाद में भारत के 11वें उपराष्ट्रपति (2002–2007) बने।
10 जगन्नाथ पहाड़िया 06 जून 1980 – 14 जुलाई 1981 राजस्थान के प्रथम अनुसूचित जाति (दलित) मुख्यमंत्री; पूर्ण शराबबंदी लागू की।
11 शिवचरण माथुर 14 जुलाई 1981 – 23 फरवरी 1985 (तथा 1988–89) डीग गोलीकांड (1985) के बाद नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए त्यागपत्र दिया।
12 हीरालाल देवपुरा 23 फरवरी 1985 – 10 मार्च 1985 सबसे कम अवधि (मात्र 16 दिन) तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड।
13 अशोक गहलोत 1998–2003, 2008–2013, 2018–2023 3 बार मुख्यमंत्री; स्वास्थ्य का अधिकार (RTH); मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना; ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS); 19 नए जिलों और 3 नए संभागों का गठन (2023); जयपुर मेट्रो
14 वसुंधरा राजे सिंधिया 2003–2008, 2013–2018 राजस्थान की प्रथम महिला मुख्यमंत्री; भामाशाह योजना; मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान (MJSA); गौरव पथ योजना; राजश्री योजना
15 भजनलाल शर्मा 15 दिसंबर 2023 से पदस्थ भरतपुर के मूल निवासी; सांगानेर (जयपुर) से प्रथम बार विधायक; PKC-ERCP त्रिपक्षीय MOU; पेपर लीक रोकथाम हेतु SIT

महत्वपूर्ण तथ्य (Important Facts)

तथ्य विवरण
सर्वाधिक बार मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया (4 बार)
सबसे युवा मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया (38 वर्ष की आयु में)
पद पर दिवंगत बरकतउल्ला खान (1973)
सबसे कम अवधि हीरालाल देवपुरा (16 दिन)
प्रथम महिला मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (2003)

4. विश्वास एवं अविश्वास प्रस्ताव: राजस्थान विधानसभा का इतिहास (Confidence & No-Confidence Motions)

4.1 अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion)

विधिक आधार: राजस्थान विधानसभा के नियम 143 के अंतर्गत विपक्ष का कोई भी सदस्य अविश्वास प्रस्ताव ला सकता है।

नियम व शर्तें:

  • प्रस्ताव प्रस्तुत करने हेतु कम से कम 1/10 सदस्यों (20 विधायकों) का समर्थन अनिवार्य है।
  • यदि प्रस्ताव बहुमत से पारित हो जाए, तो मंत्रिपरिषद को तत्काल त्यागपत्र देना पड़ता है।

राजस्थान विधानसभा में इतिहास:

  • राजस्थान में अब तक कुल 13 बार अविश्वास प्रस्ताव लाए जा चुके हैं।
  • सर्वप्रथम अविश्वास प्रस्ताव: 1952 (प्रथम विधानसभा) में टीकाराम पालीवाल सरकार के विरुद्ध इंद्रनाथ मोदी (निर्दलीय) द्वारा लाया गया था।
  • सर्वाधिक अविश्वास प्रस्ताव झेलने वाले मुख्यमंत्री: मोहनलाल सुखाड़िया (6 बार)।
  • परिणाम: राजस्थान के इतिहास में कोई भी अविश्वास प्रस्ताव पारित नहीं हो सका है

4.2 विश्वास प्रस्ताव (Confidence Motion)

प्रकृति: यह प्रस्ताव सरकार (मुख्यमंत्री) द्वारा यह साबित करने हेतु लाया जाता है कि उसे सदन का पूर्ण विश्वास/बहुमत प्राप्त है।

राजस्थान विधानसभा में इतिहास:

  • राजस्थान विधानसभा में अब तक कुल 5 बार विश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए हैं।
  • पाँचों बार विश्वास प्रस्ताव पारित हुआ
क्र.सं. विधानसभा मुख्यमंत्री तिथि परिणाम
1 9वीं भैरोंसिंह शेखावत 23 मार्च 1990 पारित (ध्वनि मत)
2 9वीं भैरोंसिंह शेखावत 08 नवम्बर 1990 पारित (पक्ष: 116, विपक्ष: 80)
3 10वीं भैरोंसिंह शेखावत 31 दिसम्बर 1993 पारित (पक्ष: 108, विपक्ष: 0)
4 13वीं अशोक गहलोत 2009 पारित (ध्वनि मत)
5 15वीं अशोक गहलोत 14 अगस्त 2020 पारित (ध्वनि मत)

महत्वपूर्ण तथ्य: भैरोंसिंह शेखावत राजस्थान के एकमात्र ऐसे मुख्यमंत्री रहे हैं जिन्होंने विधानसभा में 3 बार विश्वास मत प्राप्त किया।


5. मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO - Chief Minister's Office)

मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) राज्य प्रशासन का सर्वोच्च कार्यकारी तंत्र है, जो राज्य सचिवालय (जयपुर) में स्थित है।

CMO की संरचना

विंग घटक
प्रशासनिक विंग मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव / प्रमुख सचिव; संयुक्त सचिव, उप-सचिव, अनुभाग अधिकारी
विशेषज्ञ विंग आर्थिक सलाहकार; आईटी एवं नीति सलाहकार
लोक संपर्क विंग ओएसडी (प्रेस/मीडिया); जनसंवाद व जनसुनवाई प्रकोष्ठ

CMO के प्रमुख कार्य

कार्य विवरण
नीतिगत समन्वय अंतर्विभागीय गतिरोधों को सुलझाना तथा प्राथमिकताओं का निर्धारण।
सचिवालय से समन्वय मुख्य सचिव के माध्यम से कैबिनेट निर्णयों का क्रियान्वयन सुनिश्चित करना।
जन अभाव अभियोग निराकरण मुख्यमंत्री जनसुनवाई; राजस्थान संपर्क पोर्टल (181 हेल्पलाइन)
विधायी कार्य विधानसभा में वक्तव्यों, ध्यानाकर्षण प्रस्तावों की फाइलें तैयार करना।
प्रेस एवं जनसंपर्क मुख्यमंत्री के दौरे, प्रेस विज्ञप्तियों, भाषणों और मीडिया प्रबंधन।
मुख्यमंत्री सहायता कोष (CMRF) दुर्घटनाओं, आपदाओं और गंभीर बीमारियों हेतु वित्तीय सहायता।

6. राज्य का महाधिवक्ता (Advocate General of Rajasthan)

6.1 संवैधानिक प्रावधान एवं नियुक्तियाँ (Constitutional Provisions & Appointments)

विषय संवैधानिक स्थिति एवं विवरण
संबद्ध अनुच्छेद अनुच्छेद 165 (पद, योग्यता व कार्य) तथा अनुच्छेद 177 (सदन में विशेषाधिकार)।
नियुक्ति प्राधिकारी राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री एवं मंत्रिपरिषद की सलाह पर।
योग्यताएँ वह व्यक्ति उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने की योग्यता रखता हो: 1. भारत का नागरिक हो। 2. भारत के राज्यक्षेत्र में कम से कम 10 वर्ष तक न्यायिक पद धारण कर चुका हो, अथवा किसी उच्च न्यायालय में लगातार कम से कम 10 वर्ष तक अधिवक्ता रहा हो।
कार्यकाल संविधान द्वारा कोई निश्चित कार्यकाल निर्धारित नहीं है। वह राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है।
वेतन एवं पारिश्रमिक संविधान में निश्चित वेतन का उल्लेख नहीं है; उसे वह पारिश्रमिक मिलता है जो राज्यपाल निर्धारित करे

6.2 महाधिवक्ता के कार्य एवं कर्तव्य (Functions & Duties)

कार्य विवरण
विधिक सलाह ऐसे कानूनी विषयों पर राज्य सरकार को सलाह देना जो राज्यपाल द्वारा उसे सौंपे जाएँ।
अदालतों में प्रतिनिधित्व राजस्थान उच्च न्यायालय (जोधपुर मुख्यपीठ एवं जयपुर खंडपीठ) तथा उच्चतम न्यायालय में राज्य सरकार की ओर से उपस्थित होना।
संवैधानिक दायित्व संविधान या किसी अन्य कानून द्वारा दिए गए विधिक कृत्यों का निर्वहन करना।

6.3 विशेषाधिकार एवं सीमाएँ (Privileges & Limitations)

पहलू विवरण
सदन में भागीदारी (अनुच्छेद 177) महाधिवक्ता को राज्य विधानमंडल के सदन में बोलने, उसकी कार्यवाही में भाग लेने तथा किसी भी संसदीय समिति में बैठने का अधिकार है।
महत्वपूर्ण अपवाद उसे सदन में मतदान करने का अधिकार नहीं है
विधायकों जैसी उन्मुक्तियाँ उसे राज्य विधानमंडल के सदस्यों के समान सभी उन्मुक्तियाँ और विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं।
निजी वकालत वह सरकारी कर्मचारी नहीं होता; अतः वह निजी वकालत कर सकता है, बशर्ते वह राज्य सरकार के विरुद्ध किसी मामले की पैरवी न करे।

6.4 राजस्थान के महाधिवक्ता: महत्वपूर्ण तथ्य (Important Facts)

तथ्य विवरण
प्रथम महाधिवक्ता गुलाबचंद कासलीवाल — 1956 के राज्य पुनर्गठन के बाद 1957 में राजस्थान के प्रथम महाधिवक्ता बने।
सर्वाधिक लंबा कार्यकाल जी.सी. कासलीवाल (1957 से 1972 तक — लगभग 15 वर्ष)।
प्रसिद्ध व्यक्तित्व प्रख्यात न्यायविद एवं पद्मभूषण से सम्मानित डॉ. लक्ष्मीमल्ल सिंघवी भी 1972 में राजस्थान के महाधिवक्ता रहे।
वर्तमान महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद गुप्ता (03 फरवरी 2024 को पदभार ग्रहण किया) ।
मुख्यालय महाधिवक्ता का मुख्य कार्यालय जोधपुर (राजस्थान उच्च न्यायालय की मुख्य पीठ) में तथा एक कार्यालय जयपुर पीठ में।

7. परीक्षा-उपयोगी क्विक रिवीजन टेबल (Exam Capsule)

तथ्य / प्रश्न सटीक उत्तर / संवैधानिक स्थिति
राजस्थान में मंत्रियों की अधिकतम व न्यूनतम संख्या अधिकतम = 30 (200 × 15%), न्यूनतम = 12 (अनुच्छेद 164(1A))
मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से उत्तरदायी है राज्य विधानसभा के प्रति (अनुच्छेद 164(2))
मंत्री व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होते हैं राज्यपाल के प्रति (अनुच्छेद 164(1))
राजस्थान के प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री टीकाराम पालीवाल (मार्च 1952)
मनोनीत एवं निर्वाचित दोनों रहने वाले मुख्यमंत्री जयनारायण व्यास
राजस्थान के प्रथम उपमुख्यमंत्री टीकाराम पालीवाल
सर्वाधिक समय तक मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया (लगभग 17 वर्ष)
न्यूनतम समय तक मुख्यमंत्री हीरालाल देवपुरा (मात्र 16 दिन)
प्रथम अनुसूचित जाति (SC) मुख्यमंत्री जगन्नाथ पहाड़िया (1980)
प्रथम गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत (1977 - जनता पार्टी)
प्रथम महिला मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (2003)
पद पर रहते हुए दिवंगत होने वाले मुख्यमंत्री बरकतउल्ला खान (1973)
कुल अविश्वास प्रस्ताव 13 बार (सर्वाधिक 6 बार मोहनलाल सुखाड़िया के विरुद्ध; पारित एक भी नहीं)
कुल विश्वास प्रस्ताव 5 बार (भैरोंसिंह शेखावत - 3, अशोक गहलोत - 2; सभी पारित)
विधानसभा में बिना मतदान अधिकार के भाग लेने वाला पदाधिकारी महाधिवक्ता (अनुच्छेद 177)
प्रथम महाधिवक्ता जी.सी. कासलीवाल (1957)
वर्तमान महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद गुप्ता (फरवरी 2024)

अंतिम पुनरावृत्ति तालिका

विषय मुख्य बिंदु परीक्षा में महत्व
मंत्रिपरिषद अनुच्छेद 163–164 ★★★★★
राजस्थान में अधिकतम मंत्री 30, विधानसभा के 200 सदस्यों का 15 प्रतिशत ★★★★★
न्यूनतम मंत्री 12 ★★★★★
सामूहिक उत्तरदायित्व विधानसभा के प्रति ★★★★★
प्रथम मुख्यमंत्री हीरालाल शास्त्री ★★★★★
प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री टीकाराम पालीवाल ★★★★★
सबसे लंबा कार्यकाल मोहनलाल सुखाड़िया, लगभग 17 वर्ष ★★★★★
सबसे छोटा कार्यकाल हीरालाल देवपुरा, 16 दिन ★★★★★
प्रथम महिला मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ★★★★★
प्रथम गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत ★★★★★
प्रथम अनुसूचित जाति मुख्यमंत्री जगन्नाथ पहाड़िया ★★★★★
प्रथम मुस्लिम मुख्यमंत्री बरकतउल्ला खान ★★★★★
पद पर निधन बरकतउल्ला खान ★★★★★
अविश्वास प्रस्ताव 13; कोई पारित नहीं हुआ ★★★★★
विश्वास प्रस्ताव पाँच; सभी पारित हुए ★★★★★
महाधिवक्ता अनुच्छेद 165 ★★★★★
महाधिवक्ता का मतदान अधिकार नहीं ★★★★★
प्रथम महाधिवक्ता जी. सी. कासलीवाल ★★★★★
वर्तमान महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद गुप्ता ★★★★★
वर्तमान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ★★★★★

यह सामग्री RAS, RPSC, REET, SSC, UPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए है। इसमें चार स्तरों के 80 द्विभाषी बहुविकल्पीय प्रश्न हैं।

यह AI द्वारा तैयार की गई जानकारी है। महत्वपूर्ण तथ्यों को उपयोग से पहले सत्यापित करें।