राजस्थान का राज्यपाल एवं राज्य कार्यपालिका


विस्तृत विषय-सूची

खंड विषय परीक्षा में महत्व
1 राज्य कार्यपालिका एवं राज्यपाल की संवैधानिक स्थिति ★★★★★
2 प्रमुख संवैधानिक अनुच्छेद ★★★★★
3 राज्यपाल की शक्तियाँ ★★★★★
4 राज्यपाल की भूमिका ★★★★
5 राजस्थान में राज्यपाल का इतिहास ★★★★★
6 राज्यपालों की पूरी सूची ★★★★★
7 त्वरित पुनरावृत्ति ★★★★★

1. राज्य कार्यपालिका एवं राज्यपाल की संवैधानिक स्थिति

संविधान के भाग-6 (अनुच्छेद 152 से 237) में राज्य शासन का उल्लेख है। इसमें अनुच्छेद 153 से 167 तक राज्य कार्यपालिका का विवरण दिया गया है।

राज्य कार्यपालिका में मुख्य रूप से चार घटक शामिल होते हैं:

  1. राज्यपाल – संवैधानिक/नाममात्र का प्रमुख
  2. मुख्यमंत्री – वास्तविक कार्यपालक प्रमुख
  3. मंत्रिपरिषद
  4. महाधिवक्ता (अनुच्छेद 165)

संवैधानिक स्थिति: भारत में केंद्र के समान राज्यों में भी संसदीय शासन प्रणाली अपनाई गई है। राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है, जबकि वास्तविक कार्यपालिका शक्तियाँ मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद में निहित होती हैं। राज्यपाल की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि वह केंद्र और राज्य के बीच एक सेतु का कार्य करता है तथा राज्य में संवैधानिक तंत्र की रक्षा का दायित्व निभाता है।


2. राज्यपाल से संबंधित प्रमुख संवैधानिक अनुच्छेद

अनुच्छेद विषय-वस्तु एवं संवैधानिक प्रावधान
अनुच्छेद 152 राज्य की परिभाषा।
अनुच्छेद 153 राज्यों के लिए राज्यपाल: प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होगा। (7वें संविधान संशोधन 1956 द्वारा यह जोड़ा गया कि एक ही व्यक्ति को दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया जा सकता है।)
अनुच्छेद 154 राज्य की कार्यपालिका शक्ति: राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित होगी।
अनुच्छेद 155 राज्यपाल की नियुक्ति: राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा।
अनुच्छेद 156 कार्यकाल: राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है। सामान्यतः 5 वर्ष।
अनुच्छेद 157 नियुक्ति की योग्यताएँ: 1. भारत का नागरिक हो। 2. 35 वर्ष की आयु पूर्ण कर ली हो।
अनुच्छेद 158 पद की शर्तें: संसद/विधानमंडल का सदस्य नहीं; लाभ का पद धारण नहीं।
अनुच्छेद 159 शपथ: उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा।
अनुच्छेद 161 क्षमादान की शक्ति: राज्य सूची एवं समवर्ती सूची के विषयों पर।
अनुच्छेद 163 राज्यपाल को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद
अनुच्छेद 164 मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करेगा।
अनुच्छेद 165 महाधिवक्ता की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा।
अनुच्छेद 166 राज्य सरकार के कार्यों का संचालन राज्यपाल के नाम से।
अनुच्छेद 174 विधानमंडल के सत्र को आहूत, सत्रावसान और विधानसभा को भंग करने की शक्ति।
अनुच्छेद 176 विशेष अभिभाषण: आम चुनाव के बाद प्रथम सत्र तथा प्रत्येक वर्ष के प्रथम सत्र में।
अनुच्छेद 200 विधेयकों पर अनुमति: अनुमति देना, रोकना, लौटाना, या राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित रखना
अनुच्छेद 213 अध्यादेश जारी करने की शक्ति।
अनुच्छेद 356 राष्ट्रपति शासन की सिफारिश।

3. राज्यपाल की शक्तियाँ एवं कार्य

राज्यपाल की शक्तियों को निम्नलिखित वर्गों में विभाजित किया जाता है:

                          [राज्यपाल की शक्तियाँ]
                                     │
      ┌──────────────┬───────────────┼───────────────┬──────────────┐
      ▼              ▼               ▼               ▼              ▼
कार्यपालिका शक्तियाँ  विधायी शक्तियाँ   वित्तीय शक्तियाँ  न्यायिक शक्तियाँ विवेकाधीन शक्तियाँ

3.1 कार्यपालिका शक्तियाँ

शक्ति विवरण
कार्य संचालन राज्य सरकार के सभी औपचारिक कार्य राज्यपाल के नाम से (अनु. 166)।
प्रमुख नियुक्तियाँ मुख्यमंत्री व अन्य मंत्री, महाधिवक्ता, RPSC अध्यक्ष व सदस्य, राज्य निर्वाचन आयुक्त, राज्य मानवाधिकार आयोग, लोकायुक्त।
कुलाधिपति राज्य-पोषित विश्वविद्यालयों के पदेन कुलाधिपति।
संवैधानिक तंत्र की रिपोर्ट अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति को प्रतिवेदन।

3.2 विधायी शक्तियाँ

शक्ति विवरण
सत्र संचालन आहूत, सत्रावसान, विधानसभा भंग (अनु. 174)।
विशेष अभिभाषण प्रत्येक नए चुनाव के बाद तथा प्रत्येक वर्ष के प्रथम सत्र में (अनु. 176)।
विधेयकों पर स्वीकृति (अनु. 200) 4 विकल्प: स्वीकृति, रोकना, पुनर्विचार हेतु लौटाना, राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित।
अध्यादेश (अनु. 213) सत्र न चलने पर; पुनः सत्र प्रारंभ होने से 6 सप्ताह के भीतर अनुमोदन अनिवार्य। अधिकतम अवधि: 6 माह + 6 सप्ताह।
विधान परिषद में मनोनयन कुल सदस्यों के 1/6 भाग को साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारिता, समाज सेवा से। (राजस्थान में विधान परिषद नहीं है)

3.3 वित्तीय शक्तियाँ

शक्ति विवरण
बजट प्रस्तुतीकरण वित्त मंत्री के माध्यम से (अनु. 202)।
धन विधेयक पर पूर्व सहमति पूर्व अनुशंसा के बिना पेश नहीं (अनु. 199/207)।
अनुदान की माँगें सिफारिश के बिना स्वीकृत नहीं।
राज्य आकस्मिकता निधि राज्यपाल के अधीन।
राज्य वित्त आयोग प्रत्येक 5 वर्ष पर गठन (अनु. 243-I व 243-Y)।

3.4 न्यायिक शक्तियाँ

शक्ति विवरण
क्षमादान (अनु. 161) क्षमा, प्रविलंबन, विराम, परिहार, लघुकरण। राष्ट्रपति से अंतर: राज्यपाल मृत्युदंड को पूर्ण क्षमा नहीं कर सकता; सैन्य अदालत के मामलों में कोई अधिकार नहीं।
न्यायाधीशों की नियुक्ति में परामर्श अनु. 217।
अधीनस्थ न्यायालय अनु. 233।

3.5 विवेकाधीन शक्तियाँ

अनुच्छेद 163(1) में राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियों का प्रावधान है। यदि प्रश्न उठे कि कोई मामला विवेकाधिकार में आता है या नहीं, तो राज्यपाल का निर्णय अंतिम होता है (अनु. 163(2))

A. संवैधानिक विवेकाधिकार

शक्ति विवरण
विधेयक राष्ट्रपति हेतु आरक्षित (अनु. 200) विशेषकर उच्च न्यायालय की शक्तियों को प्रभावित करने वाले।
राष्ट्रपति शासन की अनुशंसा (अनु. 356) संवैधानिक तंत्र विफल होने पर।
प्रशासनिक जानकारी माँगना (अनु. 167) मुख्यमंत्री से।

B. परिस्थितिजन्य विवेकाधिकार

शक्ति विवरण
त्रिशंकु विधानसभा में CM की नियुक्ति सबसे बड़े दल या गठबंधन के नेता को आमंत्रित करना।
विश्वास मत खोने पर बर्खास्तगी यदि मंत्रिपरिषद बहुमत खो चुकी हो।
विधानसभा भंग करना यदि अल्पमत में हो और वैकल्पिक सरकार संभव न हो।

4. राज्यपाल की भूमिका एवं स्थिति

राज्यपाल भारतीय संघीय व्यवस्था में दोहरी भूमिका निभाता है:

                       [राज्यपाल की दोहरी भूमिका]
                                   │
         ┌─────────────────────────┴─────────────────────────┐
         ▼                                                   ▼
[राज्य का संवैधानिक प्रमुख]                           [केंद्र का प्रतिनिधि / एजेंट]
 • राज्य के वास्तविक शासन से पृथक                     • राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद
 • मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य                      • केंद्र और राज्य के मध्य सेतु
 • लोकतांत्रिक संस्थाओं का संरक्षक                   • राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता का प्रहरी

राज्यपाल पद से जुड़ी समितियाँ एवं आयोग

आयोग मुख्य सिफारिशें
प्रशासनिक सुधार आयोग (ARC - 1966) लंबे और निष्पक्ष सार्वजनिक जीवन वाले व्यक्ति की नियुक्ति।
सरकारिया आयोग (1983-87) राज्यपाल राज्य के बाहर का हो; स्थानीय राजनीति में सक्रिय न हो; नियुक्ति से पूर्व CM से परामर्श; अनु. 356 अंतिम विकल्प।
वेंकटचलैया आयोग (2000-02) 5 वर्ष का कार्यकाल सुरक्षित; ठोस आधार के बिना स्थानांतरण/बर्खास्तगी न हो।
पुंछी आयोग (2007-10) राज्य विधानमंडल को महाभियोग का प्रावधान; कुलाधिपति पद के सांविधिक दायित्वों से मुक्ति।

5. राजस्थान में राज्यपाल पद: ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

5.1 राजप्रमुख से राज्यपाल तक का सफर

घटना विवरण
राजप्रमुख का पद स्वतंत्रता के समय और राजस्थान के एकीकरण के विभिन्न चरणों में राज्य का प्रमुख 'राजप्रमुख' कहलाता था।
30 मार्च 1949 राजस्थान संघ के निर्माण पर जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय को आजीवन राजप्रमुख बनाया गया (31 अक्टूबर 1956 तक)।
7वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1956 राज्यों की श्रेणियों को समाप्त किया। 'राजप्रमुख' पद समाप्त कर 'राज्यपाल' पद सृजित किया।
1 नवंबर 1956 प्रथम राज्यपाल सरदार गुरुमुख निहाल सिंह ने पदभार ग्रहण किया।

5.2 राजस्थान के राज्यपालों से जुड़े विशिष्ट तथ्य

तथ्य विवरण
सर्वाधिक लंबा कार्यकाल सरदार गुरुमुख निहाल सिंह (1 नवंबर 1956 से 16 अप्रैल 1962 - 5 वर्ष 5 माह)। प्रथम राज्यपाल।
सबसे छोटा कार्यकाल दरबारा सिंह (1 मई 1998 से 24 मई 1998 - मात्र 24 दिन; पद पर रहते हुए निधन)।
पद पर रहते हुए दिवंगत होने वाले राज्यपाल (कुल 4) 1. दरबारा सिंह (मई 1998) 2. निर्मल चंद्र जैन (सितंबर 2003) 3. शैलेंद्र कुमार सिंह (दिसंबर 2009) 4. श्रीमती प्रभा राव (अप्रैल 2010)
पद से त्यागपत्र देने वाले मदन लाल खुराना (2004); श्रीमती प्रतिभा पाटिल (2007)
पद से बर्खास्त रघुकुल तिलक (1981)। राजस्थान के एकमात्र बर्खास्त राज्यपाल।
महिला राज्यपाल (कुल 3) 1. श्रीमती प्रतिभा पाटिल (प्रथम महिला राज्यपाल: 2004-2007) 2. श्रीमती प्रभा राव (2010; निधन) 3. श्रीमती मार्गरेट अल्वा (2012-2014)
पूर्ण 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा करने वाले 1. सरदार गुरुमुख निहाल सिंह (1956-1962) 2. डॉ. संपूर्णानंद (1962-1967) 3. कल्याण सिंह (2014-2019)

5.3 राजस्थान में राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356)

राजस्थान में अब तक कुल 4 बार राष्ट्रपति शासन लागू किया गया है:

क्रम अवधि तत्कालीन राज्यपाल तत्कालीन मुख्यमंत्री विशेष परिस्थिति
1. 13 मार्च 1967 – 26 अप्रैल 1967 (सबसे कम - 44 दिन) डॉ. संपूर्णानंद / सरदार हुकुम सिंह मोहनलाल सुखाड़िया त्रिशंकु विधानसभा।
2. 29 अप्रैल 1977 – 22 जून 1977 (54 दिन) वेदपाल त्यागी / रघुकुल तिलक हरिदेव जोशी केंद्र में जनता पार्टी द्वारा विधानसभा भंग।
3. 16 फरवरी 1980 – 6 जून 1980 (111 दिन) रघुकुल तिलक भैरोंसिंह शेखावत केंद्र में कांग्रेस द्वारा गैर-कांग्रेसी सरकारों की बर्खास्तगी।
4. 15 दिसंबर 1992 – 3 दिसंबर 1993 (सबसे लंबी - ~1 वर्ष) डॉ. एम. चेन्ना रेड्डी / बलिराम भगत भैरोंसिंह शेखावत बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद बर्खास्तगी।

6. राजस्थान के राज्यपालों की सम्पूर्ण सूची (1956 से वर्तमान)

क्र.सं. राज्यपाल का नाम कार्यकाल प्रारंभ कार्यकाल समाप्ति पद की प्रकृति / महत्वपूर्ण विवरण
1. सरदार गुरुमुख निहाल सिंह 01-11-1956 16-04-1962 राजस्थान के प्रथम राज्यपाल; सर्वाधिक लंबा कार्यकाल।
2. डॉ. संपूर्णानंद 16-04-1962 16-04-1967 प्रथम राष्ट्रपति शासन (1967) इन्हीं के समय।
3. सरदार हुकुम सिंह 16-04-1967 19-11-1970 पूर्व लोकसभा अध्यक्ष।
जस्टिस जगत नारायण 20-11-1970 23-12-1970 कार्यवाहक।
(3) सरदार हुकुम सिंह 24-12-1970 30-06-1972 द्वितीय कार्यकाल।
4. सरदार जोगिंदर सिंह 01-07-1972 15-02-1977 त्यागपत्र दिया।
जस्टिस वेदपाल त्यागी 15-02-1977 11-05-1977 कार्यवाहक; द्वितीय राष्ट्रपति शासन (1977)।
5. रघुकुल तिलक 12-05-1977 08-08-1981 राष्ट्रपति द्वारा बर्खास्त किए जाने वाले एकमात्र राज्यपाल।
जस्टिस के.डी. शर्मा 08-08-1981 05-03-1982 कार्यवाहक।
6. एयर चीफ मार्शल ओ.पी. मेहरा 06-03-1982 04-01-1985 पूर्व वायुसेना प्रमुख।
जस्टिस पी.के. बनर्जी 05-01-1985 31-01-1985 कार्यवाहक।
(6) एयर चीफ मार्शल ओ.पी. मेहरा 01-02-1985 03-11-1985 पुनः पदभार।
जस्टिस डी.पी. गुप्ता 04-11-1985 19-11-1985 कार्यवाहक।
7. वसंतराव पाटिल 20-11-1985 14-10-1987 महाराष्ट्र के पूर्व CM; त्यागपत्र।
जस्टिस जे.एस. वर्मा 15-10-1987 19-02-1988 कार्यवाहक (बाद में भारत के CJI)।
8. डॉ. सुखदेव प्रसाद 20-02-1988 02-02-1990
जस्टिस जे.एस. वर्मा 14-10-1988 18-11-1988 कार्यवाहक।
जस्टिस मिलाप चंद जैन 03-02-1990 13-02-1990 कार्यवाहक।
9. प्रो. देवी प्रसाद चट्टोपाध्याय 14-02-1990 25-08-1991 प्रसिद्ध दार्शनिक एवं राजनेता।
स्वरूप सिंह 26-08-1991 04-02-1992 अतिरिक्त प्रभार (गुजरात के राज्यपाल)।
10. डॉ. एम. चेन्ना रेड्डी 05-02-1992 31-05-1993 चतुर्थ राष्ट्रपति शासन (1992)।
धनिक लाल मंडल 31-05-1993 29-06-1993 अतिरिक्त प्रभार (हरियाणा के राज्यपाल)।
11. बलिराम भगत 30-06-1993 01-05-1998 पूर्व लोकसभा अध्यक्ष।
12. दरबारा सिंह 01-05-1998 24-05-1998 पद पर रहते हुए निधन होने वाले प्रथम राज्यपाल; न्यूनतम कार्यकाल (24 दिन)।
जस्टिस नवरंग लाल टिबरेवाल 25-05-1998 15-01-1999 कार्यवाहक।
13. न्यायमूर्ति अंशुमान सिंह 16-01-1999 13-05-2003 गुजरात उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश।
14. निर्मल चंद्र जैन 14-05-2003 22-09-2003 पद पर रहते हुए निधन
कैलाशपति मिश्र 22-09-2003 13-01-2004 अतिरिक्त प्रभार (गुजरात के राज्यपाल)।
15. मदन लाल खुराना 14-01-2004 01-11-2004 दिल्ली के पूर्व CM; त्यागपत्र।
टी.वी. राजेश्वर 01-11-2004 08-11-2004 अतिरिक्त प्रभार (UP के राज्यपाल)।
16. श्रीमती प्रतिभा पाटिल 08-11-2004 21-06-2007 राजस्थान की प्रथम महिला राज्यपाल; राष्ट्रपति चुने जाने पर त्यागपत्र।
डॉ. ए.आर. किदवई 21-06-2007 06-09-2007 अतिरिक्त प्रभार (हरियाणा के राज्यपाल)।
17. शैलेंद्र कुमार सिंह 06-09-2007 01-12-2009 पूर्व विदेश सचिव; पद पर निधन
श्रीमती प्रभा राव 02-12-2009 24-01-2010 अतिरिक्त प्रभार (हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल)।
18. श्रीमती प्रभा राव 25-01-2010 26-04-2010 राजस्थान की दूसरी महिला राज्यपाल; पद पर निधन
शिवराज पाटिल 26-04-2010 12-05-2012 अतिरिक्त प्रभार (पंजाब के राज्यपाल)।
19. श्रीमती मार्गरेट अल्वा 12-05-2012 07-08-2014 राजस्थान की तीसरी महिला राज्यपाल।
राम नाईक 08-08-2014 03-09-2014 अतिरिक्त प्रभार (UP के राज्यपाल)।
20. कल्याण सिंह 04-09-2014 08-09-2019 UP के पूर्व CM; 1967 के बाद पूर्ण 5 वर्ष पूरा करने वाले।
21. कलराज मिश्र 09-09-2019 30-07-2024 पूर्व केंद्रीय मंत्री; पूर्ण कार्यकाल।
22. हरिभाऊ किसनराव बागडे 31-07-2024 वर्तमान महाराष्ट्र विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष; 22वें पूर्णकालिक राज्यपाल।

7. त्वरित परीक्षा पुनरीक्षण बिंदु

बिंदु विवरण
संवैधानिक प्रावधान भाग 6, अनुच्छेद 153 से 167 राज्य कार्यपालिका से संबंधित।
शपथ vs नियुक्ति नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा (अनु. 155), शपथ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा (अनु. 159)।
हटाने की प्रक्रिया संविधान में महाभियोग का प्रावधान नहीं; राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत।
अध्यादेश की अधिकतम अवधि सत्र शुरू होने से 6 सप्ताह; यदि सत्र न बुलाया जाए तो 6 माह + 6 सप्ताह।
राष्ट्रपति शासन रिकॉर्ड 4 बार (1967, 1977, 1980, 1992); सबसे छोटा पहला (44 दिन), सबसे लंबा चौथा (~1 वर्ष)।
पद पर निधन 4 राज्यपाल—दरबारा सिंह, निर्मल चंद्र जैन, एस.के. सिंह, प्रभा राव।
महिला राज्यपाल 3—प्रतिभा पाटिल, प्रभा राव, मार्गरेट अल्वा।

अंतिम पुनरावृत्ति तालिका

विषय मुख्य बिंदु परीक्षा में महत्व
राज्य कार्यपालिका संविधान का भाग VI, अनुच्छेद 153–167 ★★★★★
राज्यपाल की नियुक्ति अनुच्छेद 155; राष्ट्रपति द्वारा ★★★★★
राज्यपाल की शपथ अनुच्छेद 159; उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा ★★★★★
राज्यपाल का कार्यकाल अनुच्छेद 156; सामान्यतः पाँच वर्ष, राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत ★★★★★
राज्यपाल की योग्यता अनुच्छेद 157; भारतीय नागरिक और कम से कम 35 वर्ष ★★★★★
अध्यादेश की शक्ति अनुच्छेद 213; विधानमंडल के फिर बैठने के छह सप्ताह बाद तक ★★★★★
क्षमादान की शक्ति अनुच्छेद 161; मृत्युदंड को पूर्णतः क्षमा नहीं कर सकते ★★★★★
प्रथम राज्यपाल सरदार गुरुमुख निहाल सिंह ★★★★★
प्रथम महिला राज्यपाल प्रतिभा पाटिल ★★★★★
वर्तमान राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे ★★★★★
राष्ट्रपति शासन राजस्थान में चार बार: 1967, 1977, 1980, 1992 ★★★★★
सबसे लंबा कार्यकाल सरदार गुरुमुख निहाल सिंह ★★★★★
सबसे छोटा कार्यकाल दरबारा सिंह, 24 दिन ★★★★★
पद पर निधन चार राज्यपाल ★★★★★
महिला राज्यपाल प्रतिभा पाटिल, प्रभा राव और मार्गरेट अल्वा ★★★★★
पद से हटाए गए राज्यपाल रघुकुल तिलक, 1981 ★★★★★
पूरा पाँच वर्षीय कार्यकाल गुरुमुख निहाल सिंह, संपूर्णानंद, कल्याण सिंह और कलराज मिश्र ★★★★★

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