राजस्थान विधानसभा: गठन, प्रक्रिया नियम, प्रमुख समितियाँ एवं अध्यक्ष


📚 द्विभाषी अध्ययन सामग्री (Bilingual Study Material)

अतिरिक्त जानकारी (Additional Information)

राजस्थान विधानसभा की कार्यप्रणाली को और गहराई से समझने के लिए कुछ महत्वपूर्ण अतिरिक्त बिंदु:

  1. विधानसभा का कार्यकाल और आपातकाल: सामान्य परिस्थितियों में विधानसभा का कार्यकाल 5 वर्ष होता है, लेकिन राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान संसद कानून बनाकर इसे एक बार में एक वर्ष के लिए बढ़ा सकती है। 1975-77 के आपातकाल के दौरान, पाँचवीं विधानसभा का कार्यकाल 5 वर्ष से अधिक (मार्च 1972 से अप्रैल 1977) तक बढ़ा दिया गया था।
  2. अध्यक्ष का निर्णायक मत: विधानसभा अध्यक्ष को आमतौर पर मतदान का अधिकार नहीं होता है, लेकिन जब किसी मुद्दे पर मत बराबर हो जाते हैं, तो वह अपने 'निर्णायक मत' (Casting Vote) का प्रयोग करके निर्णय करता है। यह शक्ति अध्यक्ष को दिया गया एक महत्वपूर्ण संवैधानिक अधिकार है।
  3. समिति प्रणाली का महत्व: विधानसभा की समितियाँ 'लघु विधानमंडल' (Mini Legislatures) की तरह काम करती हैं। ये सरकार के कामकाज की बारीकी से जाँच करती हैं और विधायी कार्यों को अधिक प्रभावी बनाती हैं। जनलेखा समिति (PAC) की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण होती है, जो सरकारी खर्चों की निगरानी करती है।
  4. दलबदल विरोधी कानून और अध्यक्ष: दसवीं अनुसूची के तहत, किसी विधायक को दलबदल के आधार पर अयोग्य ठहराने का फैसला विधानसभा अध्यक्ष करता है। यह अध्यक्ष की एक अत्यंत महत्वपूर्ण अर्द्ध-न्यायिक शक्ति है, जिसका राजनीतिक संतुलन पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
  5. प्रोटेम स्पीकर की भूमिका: नई विधानसभा के गठन के बाद, स्थायी अध्यक्ष के चुने जाने तक की अवधि में प्रोटेम स्पीकर सदन की कार्यवाही चलाता है। यह एक अस्थायी लेकिन महत्वपूर्ण भूमिका है, क्योंकि वह नए सदस्यों को शपथ दिलाता है और अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया को पूरा कराता है।

1. संवैधानिक ढाँचा एवं विधानसभा का ऐतिहासिक क्रमिक विकास

1.1 संवैधानिक प्रावधान (Constitutional Framework)

भारतीय संविधान के भाग-6 (अनुच्छेद 168 से 212) में राज्य विधानमंडल के गठन, संरचना, विशेषाधिकार एवं कार्यप्रणाली का प्रावधान है:

                      [राज्य विधानमंडल: संवैधानिक ढाँचा]
                                      │
        ┌─────────────────────────────┴─────────────────────────────┐
        ▼                                                           ▼
[अनुच्छेद 168: विधानमंडल का गठन]                           [अनुच्छेद 170: विधानसभा की संरचना]
 • राज्यपाल + सदन (विधानसभा)                                • न्यूनतम: 60 सदस्य | अधिकतम: 500 सदस्य
 • राजस्थान: 'एकसदनीय' (Unicameral)                         • राजस्थान में निर्धारित सदस्य संख्या: 200

अनुच्छेद विषय-वस्तु एवं संवैधानिक महत्व
अनुच्छेद 168 राज्यों में विधानमंडल का गठन: राजस्थान में विधानमंडल केवल राज्यपाल एवं विधानसभा से मिलकर बना है (यहाँ विधान परिषद अस्तित्व में नहीं है; अतः व्यवस्था 'एकसदनीय' है)।
अनुच्छेद 170 विधानसभाओं की संरचना: प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा चुने गए अधिकतम 500 तथा न्यूनतम 60 सदस्य। (राजस्थान में 200 सदस्य)।
अनुच्छेद 172 कार्यकाल: प्रथम बैठक की तिथि से 5 वर्ष (आपातकाल के दौरान संसद द्वारा विधि बनाकर इसे एक बार में 1 वर्ष हेतु बढ़ाया जा सकता है)।
अनुच्छेद 173 सदस्यता हेतु अर्हता (योग्यता): भारत का नागरिक हो तथा न्यूनतम आयु 25 वर्ष पूर्ण हो।
अनुच्छेद 174 सत्राहूत, सत्रावसान एवं विघटन: राज्यपाल समय-समय पर सदन का सत्र आहूत (Summon) करेगा, सत्रावसान (Prorogue) करेगा और मुख्यमंत्री की सलाह पर विधानसभा को भंग (Dissolve) कर सकेगा। (दो सत्रों के मध्य अधिकतम अंतराल 6 माह से अधिक नहीं हो सकता)
अनुच्छेद 178 विधानसभा अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष: प्रत्येक विधानसभा अपने सदस्यों में से एक अध्यक्ष (Speaker) तथा एक उपाध्यक्ष (Deputy Speaker) का चुनाव करेगी।
अनुच्छेद 179 अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का पद रिक्त होना, पदत्याग (अध्यक्ष उपाध्यक्ष को तथा उपाध्यक्ष अध्यक्ष को त्यागपत्र सौंपता है) तथा पद से हटाया जाना (14 दिन की पूर्व सूचना पर विधानसभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत द्वारा संकल्प पारित कर)।
अनुच्छेद 180 अध्यक्ष के पद के कर्तव्यों का निर्वहन या अध्यक्ष के रूप में कार्य करने की उपाध्यक्ष या अन्य व्यक्ति की शक्ति।
अनुच्छेद 181 जब अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को पद से हटाने का संकल्प विचाराधीन हो, तब उसका पीठासीन न होना।
अनुच्छेद 188 सदस्यों द्वारा शपथ: विधानसभा सदस्य राज्यपाल या उसके द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति (प्रोटेम स्पीकर) के समक्ष शपथ ग्रहण करते हैं।
अनुच्छेद 189 सदन में मतदान एवं गणपूर्ति (Quorum): निर्णय उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के बहुमत से; अध्यक्ष को निर्णायक मत (Casting Vote) देने का अधिकार। गणपूर्ति = कुल सदस्य संख्या का $1/10$ भाग या 10 सदस्य (जो भी अधिक हो) $\rightarrow$ राजस्थान हेतु 20 सदस्य
अनुच्छेद 194 विधानमंडलों और उनके सदस्यों की शक्तियाँ, विशेषाधिकार एवं उन्मुक्तियाँ।
अनुच्छेद 208 प्रक्रिया के नियम: राज्य विधानमंडल को अपनी प्रक्रिया और कार्य संचालन को विनियमित करने हेतु नियम बनाने की पूर्ण स्वायत्तता।

1.2 राजस्थान विधानसभा का गठन एवं सदस्य संख्या का क्रमिक विकास

राजस्थान के एकीकरण के पश्चात् प्रथम आम चुनाव जनवरी 1952 में संपन्न हुए।

[1952: प्रथम विधानसभा] ──(160 सीटें)──> [1956: अजमेर विलय] ──(190 सीटें)
                                                                    │
[1977: छठी विधानसभा से वर्तमान] ◄──(200 सीटें)── [1967: चौथी] ◄──(184 सीटें) ◄── [1957: दूसरी] (176 सीटें)

विधानसभा चुनाव वर्ष कुल सदस्य संख्या आरक्षित सीटें (SC / ST) महत्वपूर्ण जनसांख्यिकीय एवं प्रशासनिक घटनाक्रम
प्रथम 1952–1957 160 (प्रारंभ में)

$\rightarrow$ 190 (1956 में)
SC: 16

ST: 05
• प्रथम बैठक: 29 मार्च 1952 को सवाई मानसिंह टाउन हॉल (जयपुर) में।

1 नवंबर 1956 को राज्य पुनर्गठन के तहत अजमेर-मेरवाड़ा (30 सीटें), आबू दिलवाड़ा एवं सुनेल टप्पा के राजस्थान में विलय से सदस्य संख्या 160 से बढ़कर 190 हुई।
द्वितीय 1957–1962 176 SC: 28

ST: 20
नए परिसीमन के अनुसार सीटें 190 से घटाकर 176 की गईं।
तृतीय 1962–1967 176 SC: 28

ST: 20
सीटों की संख्या पूर्ववत 176 रही।
चतुर्थ 1967–1972 184 SC: 31

ST: 21
1961 की जनगणना के आधार पर सीटों में वृद्धि। प्रथम राष्ट्रपति शासन (1967) लागू।
पंचम 1972–1977 184 SC: 31

ST: 21
5 वर्ष से अधिक अवधि (आपातकाल के कारण मार्च 1972 से अप्रैल 1977 तक) चलने वाली एकमात्र विधानसभा।
छठी 1977–1980 200 SC: 33

ST: 24
प्रथम बार सदस्य संख्या बढ़कर 200 हुई। 1971 की जनगणना के आधार पर परिसीमन। प्रथम गैर-कांग्रेसी सरकार (भैरोंसिंह शेखावत)।
सातवीं से पंद्रहवीं 1980–2023 200 SC: 34

ST: 25
84वें संविधान संशोधन (2001) द्वारा लोकसभा व विधानसभा सीटों की कुल संख्या को वर्ष 2026 के पश्चात की प्रथम जनगणना तक (200 पर) स्थिर (Freeze) किया गया। (2008 के परिसीमन के बाद SC: 34, ST: 25 निर्धारित)
सोलहवीं 2023–पदस्थ 200 SC: 34

ST: 25
दिसंबर 2023 में गठित। वर्तमान में कार्यशील विधानसभा।

1.3 राजस्थान विधानसभा भवन: पुराना बनाम नया भवन

घटक पुराना विधानसभा भवन (टाउन हॉल) नया विधानसभा भवन (ज्योति नगर)
अवस्थिति सवाई मानसिंह टाउन हॉल, हवामहल के समीप, बड़ी चौपड़, जयपुर। ज्योति नगर, लाल कोठी, जयपुर।
उपयोग अवधि 1952 से 2000 (लगभग 49 वर्ष)। वर्ष 2001 से वर्तमान तक।
लोकार्पण महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय के काल में निर्मित महल। 06 नवम्बर 2001 को तत्कालीन राष्ट्रपति के. आर. नारायणन द्वारा उद्घाटित।
स्थापत्य एवं विशेषताएँ पारंपरिक कछवाहा शैली की ऐतिहासिक इमारत; 200 सदस्यों हेतु स्थान का अभाव था। आधुनिक वास्तुकला एवं पारंपरिक राजस्थानी स्थापत्य (जोधपुर का छितर पत्थर, झरोखे, छतरियाँ, बारादरी) का संगम; 260 सदस्यों की क्षमता वाला सदन।

2. प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियम (Rules of Procedure & Legislative Devices)

संविधान के अनुच्छेद 208 के अंतर्गत राजस्थान विधानसभा ने अपने आंतरिक कार्य संचालन हेतु 'राजस्थान विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियम' बनाए हैं।

2.1 दैनिक सदन संचालन का कालक्रम (Daily Business of the House)

[11:00 AM से 12:00 PM] ────────> [12:00 PM से आगे] ────────> [भोजनोपरांत / मध्याह्न बाद]
    प्रश्नकाल (Question Hour)         शून्यकाल (Zero Hour)           विधायी एवं शासकीय कार्य
 (सरकार की जवाबदेही का घंटा)       (अविलंबनीय लोक महत्व मुद्दे)      (विधेयक, बजट, संकल्प, चर्चा)

1. प्रश्नकाल (Question Hour)

विधानसभा की बैठक का प्रथम घंटा (प्रातः 11:00 बजे से 12:00 बजे तक) प्रश्नकाल कहलाता है। इसके अंतर्गत सरकार से नीतिगत एवं प्रशासनिक प्रश्न पूछे जाते हैं:

  • तारांकित प्रश्न (Starred Questions): इन प्रश्नों पर प्रगणक तारा $(*)$ अंकित करता है। इनका मौखिक उत्तर सदन में दिया जाता है और उत्तर के उपरांत पूरक प्रश्न (Supplementary Questions) पूछे जा सकते हैं।
  • अतारांकित प्रश्न (Unstarred Questions): इनका उत्तर विभागीय मंत्री द्वारा लिखित रूप में पटल पर रखा जाता है। इन पर कोई अनुपूरक प्रश्न नहीं पूछा जा सकता।
  • अल्प-सूचना प्रश्न (Short Notice Questions): अविलंबनीय लोक महत्व के मामले पर सामान्य 21 दिन की पूर्व सूचना के स्थान पर कम से कम 10 दिन से कम की सूचना देकर मौखिक उत्तर हेतु पूछे जाने वाले प्रश्न।

2. शून्यकाल (Zero Hour)

  • प्रश्नकाल समाप्त होते ही और कार्यसूची के नियमित कार्य प्रारंभ होने के बीच का समय (दोपहर 12:00 बजे से प्रारंभ) 'शून्यकाल' कहलाता है।
  • यह भारतीय संसदीय व्यवस्था की मौलिक देन (1962 से प्रारंभ) है; नियमों में इसका औपचारिक उल्लेख नहीं है। इसमें सदस्य बिना पूर्व सूचना के तात्कालिक लोक महत्व के विषय उठाते हैं।

2.2 विधानसभा के प्रमुख विधायी प्रस्ताव (Parliamentary Motions)

                                [विधानसभा के प्रमुख प्रस्ताव]
                                              │
    ┌───────────────────────┬─────────────────┼─────────────────┬───────────────────────┐
    ▼                       ▼                 ▼                 ▼                       ▼
[स्थगन प्रस्ताव - नियम 50] [ध्यानाकर्षण - नियम 131] [अविश्वास - नियम 143] [विशेषाधिकार - नियम 157] [कटौती प्रस्ताव]
 • अविलंबनीय लोक महत्व     • मंत्री का ध्यान खींचना  • सरकार गिराने हेतु     • सदन की अवमानना पर   • बजट अनुदानों में कमी
 • सदन का कार्य रोकना      • संक्षिप्त वक्तव्य      • कम से कम 20 सदस्य    • विशेषाधिकार समिति     • नीतिगत/मितव्ययिता

प्रस्ताव का नाम विधानसभा नियम न्यूनतम समर्थक सदस्य उद्देश्य एवं प्रक्रियात्मक प्रभाव
स्थगन / काम रोको प्रस्ताव (Adjournment Motion) नियम 50 सदन के कुल सदस्यों का $1/10$ भाग (20 सदस्य) सदन की पूर्व-निर्धारित कार्यसूची को रोककर हाल ही में घटित किसी अविलंबनीय लोक महत्व के गंभीर निश्चित विषय पर चर्चा कराना। इसे सरकार के विरुद्ध एक कठोर कदम माना जाता है।
ध्यानाकर्षण प्रस्ताव (Calling Attention Motion) नियम 131 1 सदस्य (अध्यक्ष की अनुमति से) किसी अत्यावश्यक सार्वजनिक महत्व के मामले पर संबंधित विभागीय मंत्री का ध्यान आकृष्ट करना तथा उनसे आधिकारिक वक्तव्य प्राप्त करना। (यह भी भारतीय संसदीय प्रणाली की नवाचारी देन है)।
अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) नियम 143 कम से कम 20 सदस्य (1/10 भाग) केवल विपक्ष द्वारा संपूर्ण मंत्रिपरिषद के विरुद्ध लाया जा सकता है। इसके लिए कोई कारण बताना आवश्यक नहीं है। पारित होने पर सरकार को तत्काल त्यागपत्र देना पड़ता है।
विश्वास प्रस्ताव (Confidence Motion) प्रक्रिया नियम सत्तारूढ़ दल/मुख्यमंत्री द्वारा यह सिद्ध करने हेतु प्रस्तुत किया जाता है कि सरकार को विधानसभा का विश्वास प्राप्त है।
विशेषाधिकार प्रस्ताव (Privilege Motion) नियम 157 1 सदस्य जब किसी मंत्री या अधिकारी द्वारा सदन या उसके सदस्यों को गलत या भ्रामक तथ्य देकर उनके संसदीय विशेषाधिकारों का हनन किया गया हो। इसे 'विशेषाधिकार समिति' को भेजा जाता है।
कटौती प्रस्ताव (Cut Motions) बजट नियम बजट में विभिन्न विभागों की अनुदान मांगों (Demands for Grants) पर चर्चा के दौरान विपक्ष द्वारा राशि कम करने हेतु प्रस्तुत:

1. नीति अनुमोदन कटौती (Disapproval of Policy Cut): माँग की राशि घटाकर ₹1 कर दी जाए।

2. मितव्ययिता कटौती (Economy Cut): माँग में से कोई निश्चित राशि कम कर दी जाए।

3. सांकेतिक कटौती (Token Cut): माँग में से ₹100 की सांकेतिक कमी की जाए।

3. राजस्थान विधानसभा की प्रमुख संसदीय समितियाँ (Assembly Committees)

विधानसभा वर्ष भर सत्र में नहीं रहती और विधायी कार्यों की जटिलता अत्यधिक होती है, अतः सदन के कार्यों को सूक्ष्मता से जाँचने हेतु समिति प्रणाली (Committee System) कार्य करती है।

विधानसभा नियम समिति एवं कार्य संचालन नियमों के तहत राजस्थान में वर्तमान में 4 वित्तीय समितियों सहित लगभग 20 से अधिक स्थायी समितियाँ (Standing Committees) गठित की जाती हैं:

                         [राजस्थान विधानसभा की समितियाँ]
                                        │
        ┌───────────────────────────────┴───────────────────────────────┐
        ▼                                                               ▼
[वित्तीय समितियाँ (Financial Committees - कुल 4)]            [अन्य प्रमुख स्थायी / प्रक्रिया समितियाँ]
 1. जनलेखा समिति (PAC)                                        • कार्य मंत्रणा समिति (BAC)
 2. प्राक्कलन समिति 'क' (Estimates Committee 'A')             • नियम समिति (Rules Committee)
 3. प्राक्कलन समिति 'ख' (Estimates Committee 'B')             • विशेषाधिकार समिति (Privileges)
 4. राजकीय उपक्रम समिति (PUC)                                • महिला एवं बाल कल्याण समिति


3.1 वित्तीय समितियाँ (The 4 Financial Committees)

राजस्थान विधानसभा की चारों वित्तीय समितियों में प्रत्येक में 15 सदस्य होते हैं, जिनका निर्वाचन विधानसभा सदस्यों द्वारा एकल संक्रमणीय मत प्रणाली (आनुपातिक प्रतिनिधित्व) द्वारा प्रतिवर्ष किया जाता है। इनका कार्यकाल 1 वर्ष होता है तथा कोई भी मंत्री इनका सदस्य नहीं बन सकता

समिति का नाम सदस्य संख्या समिति का मुख्य कार्य एवं कार्यक्षेत्र अध्यक्ष चयन की परंपरा / विशिष्टता
1. जनलेखा समिति (Public Accounts Committee - PAC) 15 नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के वार्षिक लेखा परीक्षा प्रतिवेदन की संवीक्षा करना; यह सुनिश्चित करना कि सरकारी धन उसी मद में खर्च हुआ जिसके लिए विधानसभा ने स्वीकृति दी थी। इसे 'संसद/सदन की वित्तीय आँख व कान' तथा 'प्राक्कलन समिति की जुड़वां बहन' कहते हैं। संसदीय परंपरा के अनुसार इसका अध्यक्ष अनिवार्य रूप से विपक्ष के वरिष्ठ नेता को बनाया जाता है।
2. प्राक्कलन समिति 'क' (Estimates Committee 'A') 15 शासन के बजट अनुमानों (Estimates), व्यय में मितव्ययिता, प्रशासनिक सुधार तथा नीतियों के वित्तीय औचित्य की जाँच करना। (विभाग: गृह, सामान्य प्रशासन, वित्त, राजस्व, पुलिस आदि)। अध्यक्ष का मनोनयन विधानसभा अध्यक्ष द्वारा सत्तापक्ष या वरिष्ठ सदस्य में से।
3. प्राक्कलन समिति 'ख' (Estimates Committee 'B') 15 शेष विभागों (चिकित्सा, शिक्षा, सिंचाई, कृषि, निर्माण, समाज कल्याण आदि) के बजट प्राक्कलनों और विकासात्मक परियोजनाओं के व्यय का परीक्षण। अध्यक्ष का मनोनयन विधानसभा अध्यक्ष द्वारा।
4. राजकीय उपक्रम समिति (Committee on Public Undertakings - PUC) 15 राज्य सरकार के सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs जैसे RSRTC, डिस्कॉम्स, RIICO, RSMM आदि) के वित्तीय लेखों, वाणिज्यिक लाभ-हानि तथा CAG रिपोर्टों की संवीक्षा करना। अध्यक्ष का मनोनयन विधानसभा अध्यक्ष द्वारा।

3.2 अन्य महत्वपूर्ण स्थायी समितियाँ

  • कार्य मंत्रणा समिति (Business Advisory Committee - BAC):

  • संरचना: विधानसभा अध्यक्ष सहित अधिकतम 15 सदस्य

  • अध्यक्ष: विधानसभा अध्यक्ष इसके पदेन अध्यक्ष (Ex-officio Chairman) होते हैं।

  • कार्य: सदन के विधायी और अन्य सरकारी कार्यों के लिए समय-सारणी (टाइम-टेबल) का निर्धारण करना।

  • नियम समिति (Rules Committee):

  • संरचना: विधानसभा अध्यक्ष सहित 15 सदस्य

  • अध्यक्ष: विधानसभा अध्यक्ष पदेन अध्यक्ष होते हैं।

  • कार्य: सदन की प्रक्रिया और कार्य संचालन संबंधी नियमों में संशोधन, परिवर्धन या सुधार की सिफारिश करना।

  • विशेषाधिकार समिति (Committee on Privileges):

  • संरचना: 15 सदस्य।

  • कार्य: सदन या उसके सदस्यों के विशेषाधिकार हनन के मामलों की अर्द्ध-न्यायिक जाँच करना और दंड की अनुशंसा करना।

  • सदाचार समिति (Ethics Committee):

  • सदस्यों के नैतिक एवं आचरण संबंधी मानकों की निगरानी करना।

  • अधीनस्थ विधान संबंधी समिति (Committee on Subordinate Legislation):

  • कार्यपालिका द्वारा बनाए जा रहे नियमों, उप-नियमों (बाय-लॉज) की जाँच करना कि वे मूल अधिनियम की सीमाओं में हैं या नहीं।


4. विधानसभा के पीठासीन अधिकारी: अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं प्रोटेम स्पीकर

                     [विधानसभा पीठासीन अधिकारी पदानुक्रम]
                                      │
        ┌─────────────────────────────┼─────────────────────────────┐
        ▼                             ▼                             ▼
[विधानसभा अध्यक्ष (Speaker)]    [उपाध्यक्ष (Deputy Speaker)]   [प्रोटेम स्पीकर (सामयिक अध्यक्ष)]
 • सदन का सर्वोच्च प्राधिकारी    • अध्यक्ष की अनुपस्थिति में    • नव-निर्वाचित सदन की प्रथम बैठक
 • सदन का निष्पक्ष नियामक        पीठासीन अधिकारी               • विधायकों को शपथ दिलाना
 • निर्णायक मत (Casting Vote)    • अध्यक्ष को त्यागपत्र         • नए अध्यक्ष का चुनाव कराना

4.1 विधानसभा अध्यक्ष (Speaker) की संवैधानिक स्थिति एवं शक्तियाँ

विधानसभा अध्यक्ष सदन का मुख्य प्रवक्ता और उसका लोकतांत्रिक प्रहरी होता है:

  1. सदन की कार्यवाही का संचालन: सदन में शांति, व्यवस्था एवं अनुशासन बनाए रखना; नियमों की व्याख्या करने का उसका अधिकार अंतिम एवं सर्वोच्च है।
  2. धन विधेयक का प्रमाणीकरण: कोई विधेयक 'धन विधेयक' (Money Bill) है या नहीं, इसका निर्णय केवल अध्यक्ष करता है (अनुच्छेद 199(3))। उसका यह निर्णय अंतिम होता है।
  3. दलबदल पर अयोग्यता का निर्णय: 10वीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के तहत किसी सदस्य की अयोग्यता पर निर्णय विधानसभा अध्यक्ष द्वारा किया जाता है (किहोटो होलोहन बनाम जाचिल्हू वाद, 1992 के अनुसार अध्यक्ष का यह निर्णय न्यायिक समीक्षा के अधीन है)
  4. निर्णायक मत (Casting Vote): सामान्य परिस्थितियों में अध्यक्ष मतदान नहीं करता, किंतु किसी प्रस्ताव पर पक्ष और विपक्ष के मत बराबर (Tie) होने की स्थिति में वह अनुच्छेद 189(1) के तहत अपना निर्णायक मत देता है।
  5. संयुक्त बैठक एवं समितियों का नियंत्रण: सभी संसदीय समितियों का गठन व पर्यवेक्षण अध्यक्ष द्वारा किया जाता है। कार्य मंत्रणा समिति व नियम समिति की अध्यक्षता वह स्वयं करता है।

4.2 प्रोटेम स्पीकर (सामयिक अध्यक्ष - Pro-tem Speaker)

  • संवैधानिक आधार: संविधान के अनुच्छेद 180(1) तथा अनुच्छेद 188 की व्यवस्था के तहत नव-निर्वाचित विधानसभा की प्रथम बैठक के संचालन हेतु राज्यपाल द्वारा प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति की जाती है।
  • चयन की परंपरा: परंपरा अनुसार नवनिर्वाचित सदन के वरिष्ठतम सदस्य (Senior-most MLA) को इस पद पर नियुक्त किया जाता है।
  • शपथ: प्रोटेम स्पीकर को शपथ राज्यपाल दिलाते हैं।
  • दो मुख्य कार्य:
  1. विधानसभा के सभी नव-निर्वाचित विधायकों को सदस्यता की शपथ दिलाना।
  2. नए स्थायी विधानसभा अध्यक्ष का विधिवत चुनाव संपन्न कराना। (स्थायी अध्यक्ष के चुनते ही प्रोटेम स्पीकर का पद स्वतः समाप्त हो जाता है)।
  • राजस्थान के प्रथम प्रोटेम स्पीकर: संग्राम सिंह (1952)।
  • 16वीं विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर: कालीचरण सराफ (दिसंबर 2023)।

5. राजस्थान विधानसभा अध्यक्षों की सम्पूर्ण ऐतिहासिक सूची (1952 से वर्तमान)

(1952 से लेकर वर्तमान 16वीं विधानसभा तक सभी अध्यक्षों का कालक्रमानुसार विवरण)

क्रम विधानसभा अध्यक्ष का नाम कार्यकाल प्रारंभ कार्यकाल समाप्ति संबंधित दल / विशिष्ट विवरण
1. 1st नरोत्तम लाल जोशी 31-03-1952 25-04-1957 राजस्थान के प्रथम विधानसभा अध्यक्ष (झुंझुनूं से विधायक; स्वतंत्रता सेनानी)।
2. 2nd रामनिवास मिर्धा 25-04-1957 02-03-1962 सबसे कम आयु (33 वर्ष) में अध्यक्ष बनने का रिकॉर्ड।
3. 3rd रामनिवास मिर्धा 03-03-1962 03-05-1967 सर्वाधिक लंबा कार्यकाल (लगातार 10 वर्ष - 1957 से 1967); बाद में केंद्रीय मंत्री रहे।
4. 4th निरंजन नाथ आचार्य 03-05-1967 20-03-1972 मेवाड़ अंचल के प्रख्यात विद्वान व स्वतंत्रता सेनानी।
5. 5th रामकिशोर व्यास 20-03-1972 18-07-1977 आपातकाल के दौरान अध्यक्ष रहे।
6. 6th महारावल लक्ष्मण सिंह 18-07-1977 20-06-1979 प्रथम गैर-कांग्रेसी विधानसभा अध्यक्ष (डूंगरपुर के पूर्व शासक; जनता पार्टी सरकार)।
7. 6th गोपाल सिंह 25-09-1979 07-07-1980 जनता पार्टी शासनकाल।
8. 7th पूनमचंद विश्नोई 07-07-1980 20-03-1985 पूर्व में विधानसभा उपाध्यक्ष (1967-71) एवं प्रोटेम स्पीकर भी रहे।
9. 8th हीरालाल देवपुरा 20-03-1985 16-10-1985 एकमात्र व्यक्ति जो मुख्यमंत्री (16 दिन) तथा विधानसभा अध्यक्ष दोनों रहे
10. 8th गिरिराज प्रसाद तिवारी 31-01-1986 11-03-1990 बयाना (भरतपुर) से वरिष्ठ विधायक।
11. 9th हरिशंकर भाभड़ा 16-03-1990 21-12-1993 भाजपा के वरिष्ठ नेता; 9वीं विधानसभा के अध्यक्ष।
12. 10th हरिशंकर भाभड़ा 30-12-1993 05-10-1994 त्यागपत्र देकर राज्य के उपमुख्यमंत्री (1994–1998) बने।
13. 10th शांतिलाल चपलोत 07-04-1995 18-03-1998 मावली (उदयपुर) से विधायक; राष्ट्रमंडल संसदीय संघ में सक्रिय रहे।
14. 10th समरथ लाल मीणा 24-07-1998 04-01-1999 राजगढ़ (अलवर) से विधायक; अल्पकालिक कार्यकाल।
15. 11th परसराम मदेरणा 06-01-1999 15-01-2004 मारवाड़ के कद्दावर किसान नेता; पूर्व राजस्व व गृह मंत्री।
16. 12th श्रीमती सुमित्रा सिंह 16-01-2004 01-01-2009 राजस्थान की प्रथम महिला विधानसभा अध्यक्ष (झुंझुनूं से 9 बार विधायक)।
17. 13th दीपेंद्र सिंह शेखावत 02-01-2009 21-01-2014 श्रीमाधोपुर (सीकर) से विधायक।
18. 14th कैलाश चंद्र मेघवाल 22-01-2014 15-01-2019 सर्वाधिक आयु (80 वर्ष+) में अध्यक्ष; प्रथम अनुसूचित जाति (SC) अध्यक्ष।
19. 15th डॉ. सी. पी. जोशी 16-01-2019 20-12-2023 पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री; नाथद्वारा से विधायक; डिजिटल बाल मेला नवाचार।
20. 16th वासुदेव देवनानी 21-12-2023 वर्तमान अजमेर उत्तर से विधायक; पूर्व शिक्षा मंत्री; 16वीं विधानसभा के अध्यक्ष।

5.2 विधानसभा उपाध्यक्ष (Deputy Speakers) से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य

  • प्रथम विधानसभा उपाध्यक्ष: लालसिंह शक्तावत (1952–1957)।
  • प्रथम महिला विधानसभा उपाध्यक्ष: श्रीमती तारा भंडारी (12वीं विधानसभा - सिरोही से विधायक)।
  • अन्य प्रमुख उपाध्यक्ष: निरंजन नाथ आचार्य, पूनमचंद विश्नोई, रामचंद्र, राव राजेंद्र सिंह (14वीं विधानसभा)।

6. परीक्षा-उपयोगी क्विक रिवीजन टेबल (High-Yield Exam Points)

प्रश्न / विषय प्रामाणिक तथ्य / उत्तर
राजस्थान विधानसभा का स्वरूप एकसदनीय (Unicameral)
वर्तमान सदस्य संख्या कब से निर्धारित है? 1977 (छठी विधानसभा से 200 सीटें)
आरक्षित सीटों का विवरण (कुल 200 में से) SC = 34 सीटें, ST = 25 सीटें (कुल आरक्षित = 59 सीटें; सामान्य = 141)
सदन की गणपूर्ति (Quorum - अनु. 189) कुल सदस्य संख्या का $1/10$ भाग अर्थात 20 सदस्य
प्रथम विधानसभा की पहली बैठक 29 मार्च 1952 (सवाई मानसिंह टाउन हॉल, जयपुर)
नए विधानसभा भवन का लोकार्पण 06 नवम्बर 2001 (राष्ट्रपति के. आर. नारायणन द्वारा)
राजस्थान के प्रथम विधानसभा अध्यक्ष नरोत्तम लाल जोशी (झुंझुनूं)
सर्वाधिक समय तक अध्यक्ष रहने वाले रामनिवास मिर्धा (लगातार 10 वर्ष: 1957 से 1967)
प्रथम गैर-कांग्रेसी विधानसभा अध्यक्ष महारावल लक्ष्मण सिंह (1977 - डूंगरपुर)
राजस्थान की प्रथम महिला विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा सिंह (2004 - 12वीं विधानसभा)
प्रथम महिला विधानसभा उपाध्यक्ष श्रीमती तारा भंडारी
अध्यक्ष जो मुख्यमंत्री भी रहे हीरालाल देवपुरा (16 दिन सीएम रहे, बाद में अध्यक्ष बने)
अध्यक्ष जो उपमुख्यमंत्री बने हरिशंकर भाभड़ा (1994 में भैरोंसिंह शेखावत सरकार में डिप्टी सीएम)
राजस्थान के प्रथम प्रोटेम स्पीकर संग्राम सिंह (1952)
16वीं विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर कालीचरण सराफ (दिसंबर 2023)
वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष (16वीं) वासुदेव देवनानी
स्थगन प्रस्ताव एवं अविश्वास प्रस्ताव हेतु न्यूनतम सदस्य सदन के कम से कम 20 सदस्य का समर्थन आवश्यक
जनलेखा समिति (PAC) के अध्यक्ष की परंपरा अनिवार्य रूप से विपक्ष के नेता/सदस्य को बनाया जाता है
कार्य मंत्रणा व नियम समिति का पदेन अध्यक्ष विधानसभा अध्यक्ष (Speaker)

अंतिम पुनरावृत्ति तालिका

विषय मुख्य बिंदु परीक्षा में महत्व
विधानसभा का स्वरूप एकसदनीय ★★★★★
कुल सदस्य 200 ★★★★★
आरक्षित सीटें अनुसूचित जाति 34, अनुसूचित जनजाति 25 ★★★★★
पहली बैठक 29 मार्च 1952 ★★★★★
नए भवन का उद्घाटन 6 नवंबर 2001 ★★★★★
प्रथम अध्यक्ष नरोत्तम लाल जोशी ★★★★★
सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष रामनिवास मिर्धा ★★★★★
प्रथम महिला अध्यक्ष सुमित्रा सिंह ★★★★★
प्रथम गैर-कांग्रेसी अध्यक्ष महारावल लक्ष्मण सिंह ★★★★★
मुख्यमंत्री और अध्यक्ष दोनों रहे हीरालाल देवपुरा ★★★★★
अध्यक्ष से उपमुख्यमंत्री बने हरिशंकर भाभड़ा ★★★★★
वित्तीय समितियाँ चार ★★★★★
अविश्वास प्रस्ताव का नियम नियम 143 ★★★★★
स्थगन प्रस्ताव का नियम नियम 50 ★★★★★
ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का नियम नियम 131 ★★★★★
विशेषाधिकार प्रस्ताव का नियम नियम 157 ★★★★★
गणपूर्ति 20 सदस्य ★★★★★
कार्य मंत्रणा समिति के पदेन अध्यक्ष विधानसभा अध्यक्ष ★★★★★
वर्तमान अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ★★★★★

यह सामग्री RAS, RPSC, REET, SSC, UPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए है। इसमें चार स्तरों के 100 द्विभाषी बहुविकल्पीय प्रश्न हैं।

यह AI द्वारा तैयार की गई जानकारी है। महत्वपूर्ण तथ्यों को उपयोग से पहले सत्यापित करें।