राज्य स्तरीय प्रशासनिक तंत्र, मुख्य सचिव एवं राजस्थान के मुख्य सचिव
📚 द्विभाषी अध्ययन सामग्री (Bilingual Study Material)#
1. राज्य स्तरीय प्रशासनिक तंत्र (State-Level Administrative Machinery)
संसदीय लोकतंत्र में राज्य प्रशासन का संचालन दोहरे तंत्र द्वारा होता है:
| तंत्र |
विवरण |
| राजनीतिक कार्यपालिका |
जनता द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधि (मुख्यमंत्री एवं मंत्रिपरिषद), जो नीतियां तय करते हैं और जनता के प्रति उत्तरदायी होते हैं। |
| स्थायी/प्रशासनिक कार्यपालिका |
योग्यता आधारित सिविल सेवक (मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख शासन सचिव एवं निदेशक), जो नीतियों के निर्माण में तकनीकी परामर्श देते हैं तथा उनका धरातलीय क्रियान्वयन करते हैं। |
[राज्य प्रशासन का शीर्ष प्रशासनिक ढाँचा]
│
┌────────────────────────────┴────────────────────────────┐
▼ ▼
[शासन सचिवालय (Secretariat)] [विभागीय निदेशालय (Directorates)]
• नीति-निर्माण एवं वित्तीय स्वीकृति • नीतियों का व्यावहारिक निष्पादन
• स्टाफ अभिकरण (Staff Agency) • लाइन अभिकरण (Line Agency)
• नेतृत्व: मुख्य सचिव / शासन सचिव • नेतृत्व: विभागाध्यक्ष / आयुक्त / निदेशक
1.1 शासन सचिवालय (State Secretariat)#
अर्थ एवं स्थिति: राज्य प्रशासन की शीर्ष नीति-निर्माता संस्था है। राजस्थान में इसका नाम 'राजस्थान शासन सचिवालय' है, जो जयपुर में स्थित है।
सचिवालय की संगठनात्मक संरचना (पदानुक्रम)#
| क्र.सं. |
पद |
विवरण |
| 1 |
मुख्य सचिव (Chief Secretary) |
सचिवालय एवं संपूर्ण प्रशासनिक तंत्र का सर्वोच्च प्रशासनिक प्रमुख। |
| 2 |
अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) |
महत्वपूर्ण विभागों (गृह, वित्त आदि) के प्रशासनिक मुखिया। |
| 3 |
प्रमुख शासन सचिव (Principal Secretary) |
विभागों के वरिष्ठ नीतिगत प्रभारी। |
| 4 |
शासन सचिव (Secretary) |
विभाग का वैधानिक एवं प्रशासनिक प्रभारी अधिकारी। |
| 5 |
विशिष्ट/संयुक्त सचिव (Special/Joint Secretary) |
नीतिगत मामलों में सचिव का सहयोग। |
| 6 |
उप-सचिव (Deputy Secretary) |
शाखाओं के पर्यवेक्षण अधिकारी। |
| 7 |
सहायक सचिव/अनुभाग अधिकारी (Section Officer) |
पत्रावलियों का परीक्षण और लिपिकीय स्टाफ का नियंत्रण। |
| 8 |
सहायक अनुभाग अधिकारी/कनिष्ठ सहायक |
फाइलों का प्रारंभिक संधारण। |
1.2 सचिवालय बनाम निदेशालय (Secretariat vs. Directorate)#
| तुलनात्मक आधार |
शासन सचिवालय |
कार्यकारी निदेशालय |
| प्रकृति |
स्टाफ अभिकरण — परामर्शदाता एवं नीति-निर्माता |
लाइन अभिकरण — कार्य निष्पादक |
| प्राथमिक कार्य |
नीतियों का निर्माण, बजट आवंटन, विधानसभा प्रश्नों के उत्तर तैयार करना, अंतर-विभागीय समन्वय |
सचिवालय द्वारा निर्मित नीतियों एवं योजनाओं का क्षेत्रीय/धरातलीय स्तर पर क्रियान्वयन |
| प्रशासनिक प्रमुख |
मुख्य सचिव / शासन सचिव |
निदेशक / आयुक्त |
| अवस्थिति |
राज्य स्तर पर एक ही स्थान पर संकेंद्रित (जयपुर) |
संभागीय एवं जिला स्तर पर विकेंद्रित |
1.3 राजस्थान में प्रशासनिक सुधार हेतु गठित प्रमुख समितियाँ#
| समिति |
वर्ष |
मुख्य सिफारिशें |
| एस.डी. उज्जल समिति |
1954 |
राज्य सचिवालय के पुनर्गठन और कार्यकुशलता |
| हरिश्चंद्र माथुर प्रशासनिक सुधार समिति |
1963 |
जिला प्रशासन, पंचायती राज एवं प्रशासनिक विकेंद्रीकरण पर ऐतिहासिक सिफारिशें |
| मोहन मुखर्जी समिति |
1974 |
सचिवालय के कार्य नियमों, फाइल निस्तारण प्रणाली एवं स्टाफ सुधार |
| मंगल बिहारी समिति |
1981 |
सार्वजनिक उपक्रमों एवं बोर्डों में प्रशासनिक सुधार |
| शिवचरण माथुर प्रशासनिक सुधार आयोग |
1999 |
प्रशासनिक जवाबदेही, नागरिक अधिकार पत्र एवं सुशासन पर विस्तृत प्रतिवेदन |
2. मुख्य सचिव: उद्भव, संवैधानिक स्थिति, भूमिका एवं कार्य
2.1 पद का ऐतिहासिक उद्भव#
| तथ्य |
विवरण |
| प्रारंभ |
भारत में मुख्य सचिव के पद का सृजन 1799 में ब्रिटिश गवर्नर जनरल लॉर्ड वेलेजली द्वारा किया गया था। |
| प्रथम मुख्य सचिव |
फोर्ट विलियम (बंगाल) के जॉर्ज हिलेरियो बारलो को भारत का पहला मुख्य सचिव नियुक्त किया गया था। |
2.2 मुख्य सचिव की संवैधानिक स्थिति#
| पहलू |
विवरण |
| संवैधानिक स्थिति |
मुख्य सचिव का पद किसी विशिष्ट संवैधानिक अनुच्छेद द्वारा सृजित नहीं है; यह एक प्रशासनिक पद है। |
| उल्लेख |
इसका उल्लेख नियमों, कार्य आवंटन नियमावली तथा IAS के वेतन नियमों में वरिष्ठतम ग्रेड (Apex Scale) के रूप में मिलता है। |
| नियुक्ति |
मुख्यमंत्री के विवेकाधिकार पर वरिष्ठतम आईएएस अधिकारियों में से की जाती है (राज्यपाल के आदेश से औपचारिक अधिसूचना जारी होती है)। |
2.3 मुख्य सचिव की बहु-आयामी भूमिकाएँ (Roles of Chief Secretary)#
[मुख्य सचिव की बहु-आयामी भूमिकाएँ]
│
┌───────────────────────┬───────────────┼───────────────┬───────────────────────┐
▼ ▼ ▼ ▼ ▼
[मुख्यमंत्री का प्रधान] [मंत्रिमंडल का] [राज्य सिविल] [अवशिष्ट दायित्ववान] [संकट प्रशासक]
सलाहकार सचिव सेवा का प्रमुख (Residual Legatee) (Crisis Manager)
| भूमिका |
विवरण |
| मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार |
नीतिगत मामलों, कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक नियुक्तियों और वित्तीय प्राथमिकताओं पर मुख्यमंत्री को वस्तुनिष्ठ और गोपनीय सलाह देना। मुख्यमंत्री और नौकरशाही के बीच संवाद का मुख्य माध्यम। |
| मंत्रिमंडल के सचिव |
कैबिनेट बैठकों की कार्यसूची तैयार करना; बैठकों में उपस्थित रहकर कार्यवाहियों का आधिकारिक अभिलेखन करना; कैबिनेट के निर्णयों को सभी संबंधित विभागों को क्रियान्वयन हेतु संप्रेषित करना। |
| राज्य सिविल सेवा के प्रमुख |
राज्य के सभी अधिकारियों (IAS, RAS एवं अधीनस्थ सेवाएँ) का मनोबल, आचरण संहिता और सेवा शर्तों का संरक्षक। अधिकारियों के स्थानांतरण, पदस्थापन, पदोन्नति एवं अनुशासनात्मक कार्यवाहियों का अंतिम प्रशासनिक नियंत्रक (कार्मिक विभाग के माध्यम से)। |
| अंतर-विभागीय समन्वयक |
विभिन्न विभागों के मध्य क्षेत्राधिकार या बजट को लेकर उत्पन्न गतिरोधों को सुलझाने हेतु सचिवों की समिति की अध्यक्षता करना। |
| अवशिष्ट दायित्ववान |
वह समस्त प्रशासनिक विषय या कार्य जो स्पष्ट रूप से किसी विशिष्ट विभाग को आवंटित नहीं होते, स्वतः मुख्य सचिव के अधीन आते हैं। |
| संकटकालीन प्रशासक |
अकाल, बाढ़, चक्रवात, महामारी, दंगे या अन्य आपात स्थितियों में राज्य राहत समिति की अध्यक्षता करना और युद्धस्तर पर प्रशासनिक मशीनरी को सक्रिय करना। |
| केंद्र-राज्य एवं अंतर-राज्य संपर्क सूत्र |
केंद्र सरकार के कैबिनेट सचिव, नीति आयोग एवं विभिन्न मंत्रालयों के साथ राज्य के हितों का प्रतिनिधित्व करना। क्षेत्रीय परिषदों में राज्य के प्रतिनिधि के रूप में वार्ता करना। |
3. मुख्य सचिव पद संबंधी सुझाव एवं सुधार (Reforms & Recommendations)
3.1 प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग (ARC-I, 1969)#
| सिफारिश |
विवरण |
| चयन का आधार |
मुख्य सचिव की नियुक्ति केवल वरिष्ठता के आधार पर न होकर वरिष्ठता-सह-योग्यता तथा मुख्यमंत्री के प्रशासनिक विश्वास के आधार पर होनी चाहिए। |
| कार्यकाल |
मुख्य सचिव को अपना विजन लागू करने हेतु कम से कम 3 से 4 वर्ष का पर्याप्त समय मिलना चाहिए। |
3.2 द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (ARC-II, 2005-09: 'सुशासन' एवं 'सिविल सेवा सुधार')#
| सिफारिश |
विवरण |
| निश्चित कार्यकाल |
मुख्य सचिव का न्यूनतम कार्यकाल कम से कम 2 वर्ष नियत होना चाहिए, ताकि राजनीतिक बदलाव के साथ प्रशासनिक नेतृत्व में बार-बार अस्थिरता न आए (प्रकाश सिंह वाद के सिद्धांतों के अनुरूप)। |
| पारदर्शी चयन प्रक्रिया |
चयन हेतु एक उच्च स्तरीय समिति (Collegiate System) द्वारा वरिष्ठतम आईएएस अधिकारियों का पैनल तैयार किया जाना चाहिए, जिसमें से मुख्यमंत्री अंतिम चयन करें। |
| नागरिक-केंद्रित प्रशासन |
मुख्य सचिव को लोक सेवा गारंटी अधिनियम, सूचना का अधिकार एवं जन-अभाव अभियोग निवारण प्रणाली की प्रत्यक्ष समीक्षा करनी चाहिए। |
3.3 अन्य प्रमुख सुझाव#
| सिफारिश |
विवरण |
| विभागों के अतिरिक्त प्रभार से मुक्ति |
मुख्य सचिव पर अत्यधिक विभागों (जैसे खनन बोर्ड, रीको) के पदेन अध्यक्ष का भार नहीं लादा जाना चाहिए, ताकि वह नीति-निर्माण और समन्वय पर ध्यान केंद्रित कर सके। |
| ई-गवर्नेंस एवं डिजिटलीकरण |
राज्य प्रशासन में पेपरलेस वर्कफ़्लो, जन-कल्याणकारी योजनाओं के प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) और फाइलों के त्वरित ट्रैकिंग सिस्टम का नेतृत्व मुख्य सचिव के हाथों में होना चाहिए। |
4. राजस्थान के मुख्य सचिवों की सम्पूर्ण कालानुक्रमिक सूची (1949 से वर्तमान)
Complete Chronological List of Chief Secretaries of Rajasthan#
| क्र.सं. |
मुख्य सचिव का नाम |
पदभार ग्रहण |
पदमुक्ति |
परीक्षा-उपयोगी विशिष्टता |
| 1. |
के. राधाकृष्णन |
13 अप्रैल 1949 |
02 मई 1950 |
राजस्थान के प्रथम मुख्य सचिव; राज्य के प्रारंभिक प्रशासनिक ढाँचे के निर्माता। |
| 2. |
वी. नारायणन |
02 मई 1950 |
01 सितम्बर 1950 |
अल्पकालिक कार्यकाल। |
| (1) |
के. राधाकृष्णन |
01 सितम्बर 1950 |
31 जनवरी 1951 |
द्वितीय कार्यकाल। |
| 3. |
एस. डब्ल्यू. शिवेशवरकर |
08 फरवरी 1951 |
16 फरवरी 1953 |
प्रथम आम चुनाव (1952) के दौरान पदस्थ। |
| 4. |
बी. जी. राव |
16 फरवरी 1953 |
30 दिसम्बर 1954 |
जागीरदारी उन्मूलन प्रक्रिया के समय पदस्थ। |
| 5. |
कृष्ण पुरी |
30 दिसम्बर 1954 |
12 जनवरी 1957 |
1 नवंबर 1956 को राज्य पुनर्गठन के समय पदस्थ। |
| 6. |
के. एन. सुब्रमण्यम |
11 मार्च 1957 |
06 मई 1958 |
द्वितीय विधानसभा के समय। |
| 7. |
भगवंत सिंह मेहता |
09 मई 1958 |
26 सितम्बर 1964 |
राजस्थान के प्रथम राजस्थानी मूल के मुख्य सचिव; पंचायती राज की शुरुआत (1959) में मुख्य भूमिका। |
| 8. |
सांवल दान उज्ज्वल |
26 सितम्बर 1964 |
16 जनवरी 1965 |
कार्यवाहक/अल्पकालिक। |
| (7) |
भगवंत सिंह मेहता |
16 जनवरी 1965 |
29 अक्टूबर 1966 |
सर्वाधिक लंबा कार्यकाल (दोनों कार्यकाल मिलाकर लगभग 8 वर्ष)। |
| 9. |
के. पी. यू. मेनन |
29 अक्टूबर 1966 |
22 अक्टूबर 1968 |
1967 में प्रथम राष्ट्रपति शासन के समय पदस्थ। |
| 10. |
आर. डी. माथुर |
22 अक्टूबर 1968 |
16 मई 1969 |
— |
| 11. |
जोरावर सिंह झाला |
17 मई 1969 |
09 अगस्त 1971 |
— |
| 12. |
सुंदर लाल खुराना |
09 अगस्त 1971 |
23 जून 1975 |
1971 भारत-पाक युद्ध एवं आपातकाल से पूर्व पदस्थ। |
| 13. |
मोहन मुखर्जी |
07 जुलाई 1975 |
01 मई 1977 |
आपातकाल के दौरान पदस्थ; प्रशासनिक सुधार समिति के अध्यक्ष रहे। |
| 14. |
आर. डी. थापर |
04 मई 1977 |
22 जून 1977 |
1977 के राष्ट्रपति शासन के दौरान। |
| (13) |
मोहन मुखर्जी |
22 जून 1977 |
31 अक्टूबर 1977 |
भैरोंसिंह शेखावत की प्रथम गैर-कांग्रेसी सरकार में पदभार। |
| 15. |
गोपाल कृष्ण भानोत |
28 नवम्बर 1977 |
29 दिसम्बर 1980 |
अंत्योदय योजना के सफल क्रियान्वयन में भूमिका। |
| 16. |
मदन मोहन किशन वली |
29 दिसम्बर 1980 |
20 फरवरी 1984 |
बाद में भारत के गृह सचिव बने। |
| 17. |
आनंद मोहन लाल |
21 फरवरी 1984 |
21 जुलाई 1985 |
— |
| 18. |
नरेश चंद्र |
22 जुलाई 1985 |
09 मार्च 1986 |
बाद में भारत के कैबिनेट सचिव तथा अमेरिका में भारत के राजदूत बने। |
| 19. |
विपिन बिहारी लाल माथुर |
10 मार्च 1986 |
31 जनवरी 1992 |
लगातार दूसरा सबसे लंबा कार्यकाल (लगभग 6 वर्ष); 4 मुख्यमंत्रियों के साथ कार्य किया। |
| 20. |
टी. वी. रमणन |
31 जनवरी 1992 |
31 अगस्त 1993 |
1992 के चतुर्थ राष्ट्रपति शासन के समय पदस्थ। |
| 21. |
गोविंदजी मिश्र |
31 अगस्त 1993 |
28 जनवरी 1994 |
— |
| 22. |
एच. एम. माथुर |
28 जनवरी 1994 |
02 फरवरी 1994 |
राजस्थान में न्यूनतम कार्यकाल वाले मुख्य सचिव (मात्र 6 दिन)। |
| 23. |
मीठा लाल मेहता |
02 फरवरी 1994 |
31 दिसम्बर 1997 |
राजस्थान में प्रशासनिक नवाचारों (पद्मश्री से सम्मानित); 'अपना गाँव अपना काम' योजना। |
| 24. |
अरुण कुमार |
01 जनवरी 1998 |
31 दिसम्बर 1999 |
— |
| 25. |
इंद्रजीत खन्ना |
01 जनवरी 2000 |
26 दिसम्बर 2002 |
बाद में राज्य निर्वाचन आयुक्त रहे। |
| 26. |
आर. के. नायर |
26 दिसम्बर 2002 |
28 फरवरी 2005 |
— |
| 27. |
अनिल वैश्य |
28 फरवरी 2005 |
30 जून 2007 |
भामाशाह योजना की प्रारंभिक संकल्पना के समय पदस्थ। |
| 28. |
डी. सी. सामंत |
30 जून 2007 |
27 फरवरी 2009 |
सामंत वेतन आयोग के अध्यक्ष रहे। |
| 29. |
श्रीमती कुशल सिंह |
27 फरवरी 2009 |
31 अक्टूबर 2009 |
राजस्थान की प्रथम महिला मुख्य सचिव (अशोक गहलोत के कार्यकाल में)। |
| 30. |
टी. श्रीनिवासन |
01 नवम्बर 2009 |
31 अगस्त 2010 |
— |
| 31. |
सलाहुद्दीन अहमद |
31 अगस्त 2010 |
28 फरवरी 2012 |
राजस्थान के प्रथम मुस्लिम मुख्य सचिव। |
| 32. |
सी. के. मैथ्यू |
28 फरवरी 2012 |
13 दिसम्बर 2013 |
लोक सेवा गारंटी अधिनियम एवं नि:शुल्क दवा योजना का प्रभावी प्रबंधन। |
| 33. |
राजीव महर्षि |
22 दिसम्बर 2013 |
28 अक्टूबर 2014 |
श्रम सुधारों के सूत्रधार; बाद में भारत के गृह सचिव एवं भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) बने। |
| 34. |
सी. एस. राजन |
31 अक्टूबर 2014 |
30 जून 2016 |
रीसर्जेंट राजस्थान समिट का आयोजन। |
| 35. |
ओ. पी. मीना |
30 जून 2016 |
30 जून 2017 |
प्रथम अनुसूचित जनजाति (ST) मुख्य सचिव। |
| 36. |
अशोक जैन |
30 जून 2017 |
30 दिसम्बर 2017 |
— |
| 37. |
एन. सी. गोयल |
30 दिसम्बर 2017 |
30 अप्रैल 2018 |
जयपुर मेट्रो के पूर्व सीएमडी; रेरा (RERA) के प्रथम चेयरमैन बने। |
| 38. |
डी. बी. गुप्ता |
30 अप्रैल 2018 |
02 जुलाई 2020 |
बाद में राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त (CIC) बने। |
| 39. |
राजीव स्वरूप |
02 जुलाई 2020 |
31 अक्टूबर 2020 |
कोविड-19 महामारी प्रबंधन के दौरान पदस्थ। |
| 40. |
निरंजन कुमार आर्य |
01 नवम्बर 2020 |
31 जनवरी 2022 |
राजस्थान के प्रथम अनुसूचित जाति (SC) मुख्य सचिव। |
| 41. |
श्रीमती उषा शर्मा |
01 फरवरी 2022 |
31 दिसम्बर 2023 |
राजस्थान की दूसरी महिला मुख्य सचिव; 6 माह का सेवा विस्तार मिला। |
| 42. |
सुधांश पंत |
01 जनवरी 2024 |
16 नवम्बर 2025 |
केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से आकर पदभार संभाला; औचक निरीक्षण एवं फाइलों के त्वरित निस्तारण मॉडल। |
| 43. |
वी. श्रीनिवास |
17 नवम्बर 2025 |
पदस्थ |
1989 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी; पूर्व सचिव (प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग, भारत सरकार)। |
5. परीक्षा-उपयोगी मुख्य बिंदु (Key Exam Pointers for RAS / RPSC)
| बिंदु |
विवरण |
| पद का जनक |
भारत में मुख्य सचिव पद के जनक लॉर्ड वेलेजली (1799) थे। |
| राजस्थान के प्रथम मुख्य सचिव |
के. राधाकृष्णन (13 अप्रैल 1949) |
| प्रथम राजस्थानी मूल के मुख्य सचिव |
भगवंत सिंह मेहता (1958) |
| सर्वाधिक कार्यकाल |
भगवंत सिंह मेहता (लगभग 8 वर्ष) |
| न्यूनतम कार्यकाल |
एच. एम. माथुर (मात्र 6 दिन: 28 जनवरी 1994 से 2 फरवरी 1994) |
| प्रथम महिला मुख्य सचिव |
श्रीमती कुशल सिंह (2009 - अशोक गहलोत सरकार) |
| दूसरी महिला मुख्य सचिव |
श्रीमती उषा शर्मा (2022 - अशोक गहलोत सरकार) |
| प्रथम अनुसूचित जाति (SC) मुख्य सचिव |
निरंजन कुमार आर्य (2020) |
| प्रथम अनुसूचित जनजाति (ST) मुख्य सचिव |
ओ. पी. मीना (2016) |
| प्रथम मुस्लिम मुख्य सचिव |
सलाहुद्दीन अहमद (2010) |
| मुख्य सचिव जो भारत के CAG बने |
राजीव महर्षि |
| मुख्य सचिव जो भारत के कैबिनेट सचिव बने |
नरेश चंद्र |
| अवशिष्ट दायित्ववान |
प्रशासन में यह पद मुख्य सचिव को दर्शाता है, जिसका अर्थ है कि जो कार्य किसी विशिष्ट विभाग को आवंटित नहीं है, वह स्वतः मुख्य सचिव का दायित्व होता है। |
अंतिम पुनरावृत्ति तालिका#
| विषय |
मुख्य बिंदु |
परीक्षा में महत्व |
| मुख्य सचिव पद की स्थापना |
1799 में लॉर्ड वेलेजली द्वारा |
★★★★★ |
| भारत के प्रथम मुख्य सचिव |
जॉर्ज हिलारो बार्लो |
★★★★★ |
| राजस्थान के प्रथम मुख्य सचिव |
के. राधाकृष्णन (1949) |
★★★★★ |
| प्रथम राजस्थानी मूल के मुख्य सचिव |
भगवंत सिंह मेहता (1958) |
★★★★★ |
| सबसे लंबा कार्यकाल |
भगवंत सिंह मेहता (लगभग 8 वर्ष) |
★★★★★ |
| सबसे छोटा कार्यकाल |
एच. एम. माथुर (6 दिन) |
★★★★★ |
| प्रथम महिला मुख्य सचिव |
कुशल सिंह (2009) |
★★★★★ |
| दूसरी महिला मुख्य सचिव |
उषा शर्मा (2022) |
★★★★★ |
| प्रथम मुस्लिम मुख्य सचिव |
सलाहुद्दीन अहमद (2010) |
★★★★★ |
| प्रथम अनुसूचित जनजाति मुख्य सचिव |
ओ. पी. मीना (2016) |
★★★★★ |
| प्रथम अनुसूचित जाति मुख्य सचिव |
निरंजन कुमार आर्य (2020) |
★★★★★ |
| बाद में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक बने |
राजीव महर्षि |
★★★★★ |
| बाद में भारत के कैबिनेट सचिव बने |
नरेश चंद्र |
★★★★★ |
| अवशिष्ट उत्तरदायित्व वाला पद |
मुख्य सचिव |
★★★★★ |
| सचिवालय |
स्टाफ अभिकरण |
★★★★★ |
| निदेशालय |
लाइन अभिकरण |
★★★★★ |
| वर्तमान मुख्य सचिव |
वी. श्रीनिवास (2025 से) |
★★★★★ |
यह सामग्री RAS, RPSC, REET, SSC, UPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए है। इसमें चार स्तरों के 80 द्विभाषी बहुविकल्पीय प्रश्न हैं।
यह AI द्वारा तैयार की गई जानकारी है। महत्वपूर्ण तथ्यों को उपयोग से पहले सत्यापित करें।