संभागीय व्यवस्था, जिला प्रशासन, उपखंड/तहसील एवं पुलिस प्रशासन
📚 द्विभाषी अध्ययन सामग्री (Bilingual Study Material)#
वर्तमान प्रशासनिक अद्यतन (सितंबर 2026)#
वर्तमान संख्या: 7 संभाग और 41 जिले। नीचे दी गई 2023 की 10 संभाग और 50 जिलों वाली संरचना उस समय की ऐतिहासिक व्यवस्था है। 2023 में बने सीकर, पाली और बांसवाड़ा संभाग बाद में समाप्त किए गए। 2023 में बने नौ जिले भी समाप्त किए गए; इस प्रकार वर्तमान में 41 जिले हैं। वर्तमान सात संभाग हैं—जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, कोटा, उदयपुर, अजमेर और भरतपुर।
| समय |
संभाग |
जिले |
परीक्षा में उपयोग |
| 2023 का पुनर्गठन |
10 |
50 |
प्रश्न में स्पष्ट रूप से 2023 पूछा गया हो। |
| वर्तमान (सितंबर 2026) |
7 |
41 |
प्रश्न वर्तमान स्थिति के बारे में हो। |
प्रश्न पढ़ने का नियम: समय-संदर्भ अवश्य देखें। उदाहरण के लिए, बांसवाड़ा 2023 की दस-संभाग व्यवस्था में सबसे छोटा संभाग था; वह वर्तमान संभाग नहीं है। 2023 की तालिकाएँ ऐतिहासिक अध्ययन के लिए रखी गई हैं।
अवधारणा-क्रम: राज्य सचिवालय → संभागीय आयुक्त → जिला कलेक्टर/जिला मजिस्ट्रेट → उपखंड अधिकारी/उपखंड मजिस्ट्रेट → तहसीलदार → भू-अभिलेख कर्मचारी। पुलिस की कमान डीजीपी → वरिष्ठ क्षेत्रीय पुलिस अधिकारी → एसपी → थाना स्तर तक जाती है। लोक व्यवस्था में डीएम और एसपी अलग कानूनी शक्तियों के साथ समन्वय करते हैं।
कठिन प्रश्न हल करने की विधि: पहले वर्ष पहचानें। फिर राजस्व अपील, कार्यपालिक मजिस्ट्रेट की शक्ति, विकास समन्वय और पुलिस कमान में अंतर करें। संबंधित कार्य के लिए विधिक रूप से उत्तरदायी पद चुनें।
1. संभागीय व्यवस्था एवं संभागीय आयुक्त (Divisional System & Divisional Commissioner)
भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था में संभाग, राज्य मुख्यालय (सचिवालय) और जिला प्रशासन के मध्य एक महत्वपूर्ण मध्यवर्ती प्रशासनिक एवं पर्यवेक्षी कड़ी के रूप में कार्य करता है।
1.1 राजस्थान में संभागीय व्यवस्था की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि#
| घटना |
वर्ष |
विवरण |
| प्रारंभ |
1949 |
वृहत् राजस्थान के निर्माण के समय 5 संभाग बनाए गए: जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, कोटा और उदयपुर। |
| समाप्ति |
1962 |
तत्कालीन मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया ने संभागीय आयुक्त के पद को "सफेद हाथी" मानते हुए संभागीय व्यवस्था को समाप्त कर दिया। |
| पुनर्बहाली |
15 जनवरी 1987 |
25 वर्ष बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी ने संभागीय व्यवस्था को पुनः प्रारंभ किया। अजमेर को छठा संभाग बनाया गया। |
| 7वाँ संभाग |
04 जून 2005 |
तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भरतपुर को सातवाँ संभाग घोषित किया। |
| 2023 का ऐतिहासिक पुनर्गठन |
2023 |
3 नए संभाग (सीकर, पाली, बांसवाड़ा) बनाकर संभागों की कुल संख्या 10 की गई। |
1.2 संभागीय आयुक्त की भूमिका, शक्तियाँ एवं कार्य#
संभागीय आयुक्त भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) का एक अति-वरिष्ठ अधिकारी होता है।
| कार्य |
विवरण |
| राजस्व शक्तियाँ |
संभाग स्तर पर राजस्व प्रशासन का सर्वोच्च अपीलीय व पर्यवेक्षी अधिकारी। राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 तथा राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955 के अंतर्गत जिला कलेक्टरों के निर्णयों के विरुद्ध अपील सुनना। राजस्व मंडल (अजमेर) और जिला कलेक्टर के मध्य सेतु। |
| समन्वय एवं पर्यवेक्षण |
संभाग के सभी जिलों के कलेक्टरों के कार्यों का पर्यवेक्षण। विभिन्न विभागों के संभाग-स्तरीय अधिकारियों के बीच अंतर्विभागीय समन्वय। |
| कानून एवं व्यवस्था |
संभाग के IGP के साथ मिलकर शांति व्यवस्था, सांप्रदायिक सौहार्द एवं वीआईपी सुरक्षा का निरीक्षण। |
| विकास प्रशासन |
राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं, बीस सूत्री कार्यक्रम एवं बजटीय घोषणाओं के क्रियान्वयन की जिलावार समीक्षा। |
| स्थानीय निकायों पर नियंत्रण |
नगर पालिकाओं, नगर परिषदों, नगर निगमों एवं पंचायती राज संस्थाओं के प्रशासन और वित्तीय अनुशासन का निरीक्षण। |
| वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट |
जिला कलेक्टरों एवं क्षेत्रीय विभागाध्यक्षों की ACR दर्ज करना। |
2. संभागों एवं जिलों का पुनर्गठन: 3 नए संभाग एवं 19 नए जिले
प्रशासनिक सुगमता, आमजन की जिला मुख्यालयों से अत्यधिक दूरी घटाने तथा विकेंद्रित सुशासन सुनिश्चित करने हेतु वर्ष 2023 में राजस्थान में प्रशासनिक इकाइयों का पुनर्गठन किया गया।
2.1 रामलुभाया समिति#
| पहलू |
विवरण |
| गठन |
21 मार्च 2022 को सेवानिवृत्त वरिष्ठ आईएएस अधिकारी श्री रामलुभाया की अध्यक्षता में |
| उद्देश्य |
बड़े जिलों की भौगोलिक जटिलताओं, जनसंख्या वृद्धि और आमजन की प्रशासनिक पहुँच का अध्ययन कर नए जिले/संभाग बनाने पर अनुशंसा |
| सिफारिश |
अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर 19 नए जिले और 3 नए संभाग बनाने की स्वीकृति |
2.2 तीन नए संभाग#
| नया संभाग |
कहाँ से बनाया |
सम्मिलित जिले |
विशेष पहचान |
| 1. सीकर |
जयपुर एवं बीकानेर संभाग से |
सीकर, झुंझुनूं, नीम का थाना, चूरू (4 जिले) |
शेखावाटी अंचल का स्वतंत्र प्रशासनिक संभाग; शिक्षा हब |
| 2. पाली |
जोधपुर संभाग से |
पाली, जालौर, सांचौर, सिरोही (4 जिले) |
गोडवाड़ अंचल का प्रशासनिक केंद्र |
| 3. बांसवाड़ा |
उदयपुर संभाग से |
बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ (3 जिले) |
2023 की व्यवस्था में सबसे छोटा संभाग (मात्र 3 जिले); पूर्णतः जनजातीय (TSP) बहुल संभाग |
2.3 वर्ष 2023 में राजस्थान के सभी 10 संभागों की संरचना#
| क्र.सं. |
संभाग का नाम |
जिलों की संख्या |
सम्मिलित जिले |
| 1. |
जयपुर |
7 |
जयपुर, जयपुर ग्रामीण, दूदू, कोटपूतली-बहरोड़, दौसा, खैरथल-तिजारा, अलवर |
| 2. |
अजमेर |
7 |
अजमेर, ब्यावर, केकड़ी, टोंक, नागौर, डीडवाना-कुचामन, शाहपुरा |
| 3. |
जोधपुर |
6 |
जोधपुर, जोधपुर ग्रामीण, फलौदी, जैसलमेर, बाड़मेर, बालोतरा |
| 4. |
उदयपुर |
5 |
उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, राजसमंद, सलूंबर |
| 5. |
बीकानेर |
4 |
बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, अनूपगढ़ |
| 6. |
कोटा |
4 |
कोटा, बूँदी, बारां, झालावाड़ (एकमात्र संभाग जिसके मूल 4 जिलों में कोई फेरबदल नहीं हुआ) |
| 7. |
भरतपुर |
6 |
भरतपुर, धौलपुर, करौली, डीग, सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी |
| 8. |
सीकर (नया) |
4 |
सीकर, झुंझुनूं, नीम का थाना, चूरू |
| 9. |
पाली (नया) |
4 |
पाली, जालौर, सांचौर, सिरोही |
| 10. |
बांसवाड़ा (नया) |
3 (न्यूनतम) |
बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ |
2.4 उन्नीस (19) नए जिले#
| क्र.सं. |
नए जिले का नाम |
किस पुराने जिले से बनाया |
प्रशासनिक मुख्यालय |
| 1. |
अनूपगढ़ |
श्रीगंगानगर एवं बीकानेर |
अनूपगढ़ |
| 2. |
बालोतरा |
बाड़मेर |
बालोतरा |
| 3. |
ब्यावर |
अजमेर, पाली, राजसमंद एवं भीलवाड़ा |
ब्यावर |
| 4. |
डीग |
भरतपुर |
डीग |
| 5. |
डीडवाना-कुचामन |
नागौर |
डीडवाना |
| 6. |
दूदू |
जयपुर |
दूदू |
| 7. |
गंगापुर सिटी |
सवाई माधोपुर एवं करौली |
गंगापुर सिटी |
| 8. |
जयपुर (शहर) |
पुराना जयपुर |
जयपुर |
| 9. |
जयपुर ग्रामीण |
पुराने जयपुर के ग्रामीण उपखंड |
जयपुर |
| 10. |
जोधपुर (शहर) |
पुराना जोधपुर |
जोधपुर |
| 11. |
जोधपुर ग्रामीण |
पुराने जोधपुर के ग्रामीण उपखंड |
जोधपुर |
| 12. |
केकड़ी |
अजमेर एवं टोंक |
केकड़ी |
| 13. |
कोटपूतली-बहरोड़ |
जयपुर एवं अलवर |
कोटपूतली |
| 14. |
खैरथल-तिजारा |
अलवर |
खैरथल |
| 15. |
नीम का थाना |
सीकर एवं झुंझुनूं |
नीम का थाना |
| 16. |
फलौदी |
जोधपुर |
फलौदी |
| 17. |
सलूंबर |
उदयपुर |
सलूंबर |
| 18. |
सांचौर |
जालौर |
सांचौर |
| 19. |
शाहपुरा |
भीलवाड़ा |
शाहपुरा |
2.5 नए जिलों की समीक्षा: ललित के. पंवार समिति (2024)#
भजनलाल शर्मा सरकार ने 2023 में गठित नए जिलों और संभागों की प्रशासनिक आवश्यकता, वित्तीय भार और व्यावहारिक व्यवहार्यता की समीक्षा हेतु पूर्व आईएएस अधिकारी डॉ. ललित के. पंवार की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समीक्षा समिति का गठन किया।
3. जिला प्रशासन एवं जिला कलेक्टर (District Administration & Collector)
जिला राज्य प्रशासन की सबसे महत्वपूर्ण आधारभूत क्षेत्रीय इकाई है। हेरोल्ड लास्की के शब्दों में: "जिला प्रशासन वह धुरी है जिस पर राज्य सरकार का संपूर्ण चक्र घूमता है।"
3.1 पद का उद्भव#
| तथ्य |
विवरण |
| सृजन |
भारत में 'कलेक्टर' के पद का सृजन 1772 में वॉरेन हेस्टिंग्स द्वारा किया गया। |
| मूल उद्देश्य |
ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए भू-राजस्व का संग्रहण करना, इसीलिए इसका नाम 'कलेक्टर' पड़ा। |
| विकास |
1787 में कलेक्टर को न्यायिक व दंडाधिकारीय शक्तियाँ भी सौंप दी गईं, जिससे यह 'जिला मजिस्ट्रेट' (DM) भी बन गया। |
3.2 जिला कलेक्टर की प्रमुख भूमिकाएँ एवं कार्य#
1. जिला कलेक्टर के रूप में (राजस्व प्रशासन)#
| कार्य |
विवरण |
| राजस्व संग्रहण |
जिले में भू-राजस्व, उपकर एवं सरकारी देयों की वसूली का सर्वोच्च प्रभारी। |
| भूमि रूपांतरण |
राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 के अंतर्गत भूमि रूपांतरण, भूमि आवंटन और भू-अधिग्रहण के आदेश जारी करना। |
| भू-अभिलेख |
जिले के संपूर्ण भू-अभिलेखों (खसरा-खतौनी, जमाबंदी) के संधारण का पर्यवेक्षण। |
| कोषागार |
राजकोष एवं उप-कोषागारों का सामान्य नियंत्रण। |
2. जिला मजिस्ट्रेट के रूप में (कानून व्यवस्था)#
| कार्य |
विवरण |
| सार्वजनिक शांति |
BNSS/CrPC के अंतर्गत जिले में सार्वजनिक शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने हेतु उत्तरदायी। |
| निषेधाज्ञा |
धारा 144 / BNSS 163 लागू करना तथा आवश्यकता पड़ने पर पुलिस को बल प्रयोग के आदेश देना। |
| SP पर नियंत्रण |
जिला पुलिस अधीक्षक (SP) पर सामान्य प्रशासनिक अधीक्षण एवं नियंत्रण। |
| जेल निरीक्षण |
जेलों एवं पुलिस थानों का वार्षिक निरीक्षण तथा बंदियों के पैरोल मामलों का निस्तारण। |
| लाइसेंसिंग |
आर्म्स एक्ट, विस्फोटक अधिनियम तथा सिनेमा/होटल लाइसेंस जारी व निरस्त करना। |
3. जिला निर्वाचन अधिकारी के रूप में (DEO)#
| कार्य |
विवरण |
| चुनाव संचालन |
भारत निर्वाचन आयोग के अधीन जिले में लोकसभा एवं विधानसभा चुनावों का मुख्य संचालक। |
| मतदाता सूची |
मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण (SSR), मतदान केंद्रों के गठन, चुनाव सामग्री वितरण एवं मतगणना का निष्पक्ष संचालन। |
| रिटर्निंग ऑफिसर |
जिले के लोकसभा क्षेत्र का रिटर्निंग ऑफिसर (RO) जिला कलेक्टर ही होता है। |
4. जिला विकास अधिकारी एवं समन्वयक के रूप में#
| कार्य |
विवरण |
| अंतर्विभागीय समन्वय |
जिले के विभिन्न तकनीकी विभागों के मध्य समन्वय स्थापित करना। |
| जिला आयोजना समिति |
District Planning Committee (DPC) के समन्वय में भूमिका। |
| योजना समीक्षा |
केंद्र एवं राज्य प्रायोजित फ्लैगशिप योजनाओं की प्रगति की समीक्षा। |
5. जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) के अध्यक्ष के रूप में#
| कार्य |
विवरण |
| विधिक आधार |
आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 25 के तहत जिला कलेक्टर DDMA का पदेन अध्यक्ष होता है। |
| राहत कार्य |
बाढ़, सूखा, ओलावृष्टि, टिड्डी दल आक्रमण या महामारी के समय जिले में त्वरित राहत एवं पुनर्वास कार्यों का संचालन। |
4. उपखंड प्रशासन एवं उपखंड अधिकारी (Sub-Divisional Administration & SDO/SDM)
जिले को प्रशासनिक दृष्टि से कई उपखंडों में विभाजित किया जाता है।
4.1 उपखंड अधिकारी (SDO / SDM)#
| पहलू |
विवरण |
| पद की प्रकृति |
भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS कनिष्ठ संवर्ग) या राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS वरिष्ठ/कनिष्ठ संवर्ग) का अधिकारी। |
| उपनाम |
उपखंड अधिकारी को "जिले में कलेक्टर का लघु प्रतिरूप" कहा जाता है। |
4.2 SDO / SDM के कार्य एवं शक्तियाँ#
| कार्य |
विवरण |
| उपखंड मजिस्ट्रेट के रूप में |
उपखंड क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखना। शांति भंग की आशंका होने पर पाबंद करना (CrPC 107/116)। अवैध अतिक्रमण हटाना, सार्वजनिक उपद्रव रोकना (CrPC 133)। अस्वाभाविक मृत्यु के मामलों में मजिस्ट्रियल जाँच। |
| उपखंड अधिकारी के रूप में |
राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955 के अंतर्गत सहायक कलेक्टर के रूप में राजस्व मुकदमों की मूल सुनवाई। |
| निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी |
विधानसभा चुनावों में संबंधित विधानसभा क्षेत्र का रिटर्निंग ऑफिसर (RO) सामान्यतः एसडीएम ही होता है। |
| प्रोटोकॉल एवं समन्वय |
उपखंड क्षेत्र में वीआईपी दौरों का प्रबंधन तथा तहसील, पंचायत समिति व थानों के कार्यों का निरीक्षण। |
5. तहसील प्रशासन एवं तहसीलदार (Tehsil Administration & Tehsildar)
तहसील राज्य प्रशासन की वह आधारभूत धरातलीय इकाई है जहाँ शासन और आम नागरिक (विशेषकर ग्रामीण किसान) का प्रत्यक्ष संपर्क होता है।
5.1 तहसीलदार की भूमिका एवं कार्य#
| कार्य |
विवरण |
| राजस्व अधिकारी के रूप में |
तहसील क्षेत्र में भू-राजस्व, जल प्रभार व अन्य सरकारी देयों का संग्रहण। नामांतरण, सीमा ज्ञान और भूमि विवादों के प्राथमिक निस्तारण का कार्य। तहसीलदार का राजस्व न्यायालय: राजस्थान काश्तकारी अधिनियम के अंतर्गत नाम-शुद्धि, गैर-खातेदारी से खातेदारी, नामांतरण अपीलों की सुनवाई। |
| कार्यपालक मजिस्ट्रेट के रूप में |
तहसील स्तर पर कानून-व्यवस्था में उपखंड मजिस्ट्रेट का सहयोग करना; धरना-प्रदर्शनों में कार्यपालक मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात होना। |
| प्रमाण पत्र जारीकर्ता |
मूल निवास, जाति प्रमाण पत्र, हैसियत प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र जारी करना या उनका अंतिम सत्यापन। |
| पटवार तंत्र का नियंत्रण |
तहसील के सभी गिरदावरों और पटवारियों के कार्यों की गिरदावरी की पड़ताल करना। प्राकृतिक आपदा के समय खराबे की गिरदावरी रिपोर्ट तैयार करना। |
| उप-पंजीयक |
तहसील क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-बिक्री के पंजीयन हेतु उप-पंजीयक का दायित्व। |
6. राजस्थान में पुलिस प्रशासन (Police Administration in Rajasthan)
राजस्थान पुलिस का गठन राजस्थान पुलिस अध्यादेश, 1949 के तहत विभिन्न रियासतों की पुलिस सेनाओं का एकीकरण करके किया गया था।
| तथ्य |
विवरण |
| आधिकारिक ध्येय वाक्य |
"सेवार्थ कटिबद्धता" |
| मुख्यालय |
जयपुर |
6.1 पुलिस का संगठनात्मक पदानुक्रम#
[राज्य स्तर] ──> पुलिस महानिदेशक (DGP)
│
[संभाग / रेंज] ──> अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक / महानिरीक्षक (ADGP / IGP)
│
[जिला स्तर] ──> जिला पुलिस अधीक्षक (SP / SSP)
│
[अतिरिक्त जिला] ──> अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (Addl. SP)
│
[वृत्त / सब-डिवीजन]──> पुलिस उप-अधीक्षक / वृत्ताधिकारी (Dy.SP / CO)
│
[थाना स्तर] ──> थानाधिकारी (SHO - Inspector / Sub-Inspector)
│
[चौकी स्तर] ──> पुलिस चौकी प्रभारी (ASI / Head Constable)
│
[मूल फील्ड सिपाही]──> आरक्षी (Constable)
6.2 क्षेत्रीय एवं कार्यात्मक विभाजन#
| प्रशासनिक इकाई |
प्रभारी अधिकारी |
मुख्य उत्तरदायित्व |
| राज्य पुलिस मुख्यालय |
पुलिस महानिदेशक (DGP) |
संपूर्ण राज्य पुलिस बल का नियंत्रण, प्रशिक्षण, नीति-निर्माण एवं अनुशासन। |
| पुलिस रेंज |
पुलिस महानिरीक्षक (IGP / ADGP) |
संभाग के कई जिलों के अपराध नियंत्रण व कानून व्यवस्था का समग्र पर्यवेक्षण। |
| पुलिस जिला |
पुलिस अधीक्षक (SP - IPS) |
जिले में अपराध नियंत्रण, थानों का निरीक्षण, पुलिस बल का अनुशासनात्मक नियंत्रण। |
| पुलिस वृत्त |
वृत्ताधिकारी (CO / Dy.SP - RPS) |
4 से 6 थानों के गंभीर अपराधों का प्रत्यक्ष अनुसंधान एवं पर्यवेक्षण। |
| पुलिस थाना |
थानाधिकारी (SHO) |
प्राथमिकी (FIR) दर्ज करना, गश्त, विवेचना, न्यायालय में आरोप-पत्र पेश करना। |
| पुलिस चौकी |
सहायक उप-निरीक्षक (ASI) |
थाने की दूरस्थ बीटों में शांति बनाए रखना व सूचना एकत्र करना। |
6.3 पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली#
| पहलू |
विवरण |
| राजस्थान में प्रारंभ |
01 जनवरी 2011 से जयपुर एवं जोधपुर में लागू। |
| शीर्ष अधिकारी |
पुलिस आयुक्त (CP), जो ADGP या IGP रैंक का वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी होता है। |
6.4 डीएम एवं एसपी का संबंध#
| पहलू |
विवरण |
| सामान्य जिलों में |
पुलिस अधिनियम, 1861 की धारा 4 के अनुसार जिला पुलिस बल जिला मजिस्ट्रेट (DM) के सामान्य नियंत्रण में कार्य करता है। |
| कमिश्नरेट क्षेत्रों में |
पुलिस कमिश्नर को सीधे कार्यपालक मजिस्ट्रेट की शक्तियाँ प्राप्त होती हैं। |
7. परीक्षा-उपयोगी स्मरणीय तथ्य (High-Yield Exam Pointers)
| तथ्य |
विवरण |
| संभागीय व्यवस्था की पुनर्बहाली |
15 जनवरी 1987 (मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी द्वारा; अजमेर छठा संभाग बना) |
| संभागीय व्यवस्था की समाप्ति |
1962 (मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया द्वारा) |
| नवीनतम 3 संभाग |
बांसवाड़ा, सीकर, पाली (07 अगस्त 2023 से प्रभावी) |
| सबसे कम जिलों वाला संभाग |
बांसवाड़ा (मात्र 3 जिले: बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़) |
| सर्वाधिक जिलों वाले संभाग |
जयपुर एवं अजमेर (7-7 जिले) |
| अपरिवर्तित संभाग |
कोटा संभाग (इसके चारों मूल जिलों में कोई बदलाव नहीं हुआ) |
| नए जिलों हेतु समितियाँ |
गठन समिति = रामलुभाया समिति (2022); समीक्षा समिति = ललित के. पंवार समिति (2024) |
| सीधे ग्राम पंचायत से जिला बनने वाला क्षेत्र |
दूदू |
| कलेक्टर पद का जनक |
वॉरेन हेस्टिंग्स (1772) |
| राजस्थान पुलिस का गठन |
1949 (मुख्यालय: जयपुर; ध्येय वाक्य: सेवार्थ कटिबद्धता) |
| राजस्थान में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली |
01 जनवरी 2011 से (जयपुर एवं जोधपुर में) |
| SDO की दोहरी हैसियत |
राजस्व मामलों में सहायक कलेक्टर तथा कानून व्यवस्था में उपखंड मजिस्ट्रेट (SDM) |
| DDMA का अध्यक्ष |
जिला कलेक्टर (आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत) |
अंतिम पुनरावृत्ति तालिका#
| विषय |
मुख्य बिंदु |
| संभागीय व्यवस्था समाप्त |
1962, मोहनलाल सुखाड़िया |
| संभागीय व्यवस्था पुनः शुरू |
15 जनवरी 1987, हरिदेव जोशी |
| छठा संभाग |
अजमेर |
| सातवाँ संभाग |
भरतपुर, 4 जून 2005 |
| 2023 के नए संभाग |
सीकर, पाली, बांसवाड़ा; बाद में समाप्त |
| 2023 का सबसे छोटा संभाग |
बांसवाड़ा, 3 जिले |
| 2023 में सर्वाधिक जिले |
जयपुर और अजमेर, 7-7 |
| 2023 में अपरिवर्तित संभाग |
कोटा |
| रामलुभाया समिति |
21 मार्च 2022 |
| ललित के. पंवार समीक्षा |
2024 |
| 2023 में जिले |
50 |
| वर्तमान जिले और संभाग |
41 जिले, 7 संभाग |
| कलेक्टर पद का सृजन |
1772, वॉरेन हेस्टिंग्स |
| डीडीएमए अध्यक्ष |
जिला कलेक्टर |
| पुलिस अधिनियम धारा 4 |
दिए गए नोट्स के अनुसार एसपी पर डीएम का नियंत्रण |
| राजस्थान पुलिस का गठन |
1949 |
| पुलिस ध्येय वाक्य |
सेवार्थ कटिबद्धता |
| पुलिस कमिश्नरेट |
जयपुर और जोधपुर, 1 जनवरी 2011 |
| एसडीओ की दोहरी भूमिका |
सहायक कलेक्टर और एसडीएम |
| पटवारी |
राजस्व प्रशासन का प्रथम सिपाही |
| राजस्व मंडल |
अजमेर |
यह सामग्री और 80 अभ्यास MCQ, RAS, RPSC, REET, SSC, UPSC तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में उपयोगी हैं।
यह AI द्वारा तैयार की गई जानकारी है। महत्वपूर्ण तथ्यों को उपयोग से पहले सत्यापित करें।