दिव्यांगता एवं कच्ची बस्ती जनसांख्यिकी, स्वास्थ्य सांख्यिकी एवं जनसंख्या नीति सामान्य ज्ञान
भाग - 7: दिव्यांगता एवं कच्ची बस्ती जनसांख्यिकी, स्वास्थ्य सांख्यिकी एवं जनसंख्या नीति#
विस्तृत विषय-सूची#
| खंड |
विषय |
परीक्षा में महत्व |
| 7.1 |
दिव्यांगजन जनसांख्यिकी: समग्र सांख्यिकीय परिदृश्य |
★★★★★ |
| 7.2 |
शहरीकरण एवं कच्ची बस्ती जनसांख्यिकी |
★★★★★ |
| 7.3 |
स्वास्थ्य एवं महत्वपूर्ण सांख्यिकी: एसआरएस 2023 एवं एनएफएचएस-5 |
★★★★★ |
| 7.4 |
नागरिक पंजीकरण प्रणाली (सीआरएस 2023) एवं विधिक सुधार |
★★★★★ |
| 7.5 |
जनसंख्या नीतियाँ एवं प्रमुख सरकारी कल्याणकारी योजनाएँ |
★★★★★ |
| 7.6 |
परीक्षा-उपयोगी तुलनात्मक सांख्यिकी कैप्सूल |
★★★★★ |
| 7.7 |
स्मरण सूत्र एवं एक-पंक्ति त्वरित पुनरावृत्ति तथ्य |
★★★★ |
| 7.8 |
परीक्षा-उपयोगी मुख्य बिंदु एवं वर्णनात्मक प्रश्न संकेत |
★★★★ |
7.1 दिव्यांगजन जनसांख्यिकी: समग्र सांख्यिकीय परिदृश्य#
जनगणना 2011 के अनुसार राजस्थान में कुल दिव्यांगजनों की संख्या 15,63,694 है, जो राज्य की कुल आबादी का 2.28% तथा देश के कुल दिव्यांगों का 5.83% है।
[राजस्थान में कुल दिव्यांगजन: 15,63,694 (2.28%)]
│
┌────────────────────────┴────────────────────────┐
▼ ▼
[पुरुष दिव्यांग: 8,48,284 (54.2%)] [महिला दिव्यांग: 7,15,410 (45.8%)]
दिव्यांगता के प्रमुख प्रकार (जनगणना 2011)#
| दिव्यांगता का प्रकार |
कुल संख्या |
कुल दिव्यांगों में प्रतिशत (%) |
राज्य स्तरीय स्थिति एवं निष्कर्ष |
| चलन / शारीरिक दिव्यांगता |
4.22 लाख |
27.0% |
सर्वाधिक (प्रथम स्थान): सर्वाधिक प्रचलित दिव्यांगता श्रेणी |
| दृष्टि बाधित |
3.12 लाख |
20.0% |
द्वितीय स्थान: वृद्ध व ग्रामीण आबादी में व्यापक प्रसार |
| श्रवण बाधित |
2.11 लाख |
13.5% |
तृतीय स्थान: विशेष ध्वनि एवं श्रवण पुनर्वास उपकरणों की आवश्यकता |
| बहु-दिव्यांगता |
2.10 लाख |
13.4% |
चतुर्थ स्थान: एक से अधिक गंभीर शारीरिक व मानसिक विकारों से ग्रस्त |
| मानसिक दिव्यांगता / मंदबुद्धि |
1.15 लाख |
7.3% |
पंचम स्थान: संस्थागत मनो-सामाजिक देखभाल व विशेष गृहों की जरूरत |
| वाणी / मूक दिव्यांगता |
69,484 |
4.4% |
न्यूनतम (अंतिम स्थान): दर्ज श्रेणियों में सबसे कम संख्या |
दिव्यांगजनों की साक्षरता स्थिति#
- समग्र साक्षरता दर: राज्य में दिव्यांगजनों की साक्षरता दर मात्र 40.16% दर्ज की गई।
- राष्ट्रीय परिदृश्य: दिव्यांगजनों की साक्षरता के मामले में राजस्थान का स्थान संपूर्ण देश में दूसरा सबसे निचला है, जो विशेष समावेशी शिक्षा व्यवस्था की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करता है।
7.2 शहरीकरण एवं कच्ची बस्ती जनसांख्यिकी#
जनगणना 2011 के अनुसार राजस्थान की कुल शहरी जनसंख्या 1,70,48,085 दर्ज की गई, जो राज्य की कुल आबादी का 24.87% है।
दस लाखी शहर (जनगणना 2011)#
जनगणना 2011 के समय राजस्थान में दस लाख (10 लाख) से अधिक आबादी वाले कुल 3 शहर थे:
| नगर |
कुल आधिकारिक जनसंख्या |
प्रमुख नगरीय एवं आर्थिक विशेषताएं |
| जयपुर |
30,73,350 |
राज्य की राजधानी; प्रमुख प्रशासनिक, वाणिज्यिक, औद्योगिक एवं शैक्षणिक महानगर |
| जोधपुर |
10,33,918 |
मारवाड़ का सांस्कृतिक केंद्र; हस्तशिल्प निर्यात, सौर ऊर्जा एवं सामरिक रक्षा प्रतिष्ठानों का केंद्र |
| कोटा |
10,01,365 |
चंबल घाटी का प्रमुख औद्योगिक केंद्र तथा देश की अग्रणी कोचिंग नगरी |
कच्ची बस्ती (स्लम) जनसांख्यिकी (2011)#
स्लम सेंसस 2011 के अनुसार राजस्थान के कस्बों व शहरों में कुल कच्ची बस्ती आबादी 20,34,355 दर्ज की गई, जो राज्य की कुल शहरी आबादी का 13.21% हिस्सा है।
[कुल नगरीय जनसंख्या: 1.70 करोड़] ──> [कच्ची बस्ती निवासी: 20.34 लाख (शहरी आबादी का 13.21%)]
सर्वाधिक स्लम आबादी वाले शीर्ष 5 शहर#
| क्रम |
नगर |
स्लम जनसंख्या |
नगरीय आजीविका स्वरूप |
| 1 |
जयपुर |
3,23,400 |
राजधानी में निर्माण, असंगठित सेवा एवं दिहाड़ी श्रमिकों का भारी आप्रवास |
| 2 |
कोटा |
3,19,309 |
औद्योगीकरण व कोचिंग संस्थानों से संबद्ध सहायक असंगठित कार्यबल |
| 3 |
जोधपुर |
2,54,096 |
पत्थर गढ़ाई, हस्तशिल्प व परिवहन श्रमिकों की सघन बस्तियां |
| 4 |
बीकानेर |
1,21,855 |
नमकीन, भुजिया एवं ऊन उद्योग से जुड़े असंगठित कामगार |
| 5 |
अजमेर |
1,10,675 |
तीर्थाटन, रेलवे मंडल एवं असंगठित व्यापारिक बस्तियां |
7.3 स्वास्थ्य एवं महत्वपूर्ण सांख्यिकी: एसआरएस 2023 एवं एनएफएचएस-5#
भारत के महारजिस्ट्रार कार्यालय द्वारा जारी नमूना पंजीकरण प्रणाली (एसआरएस) सांख्यिकी रिपोर्ट 2023 तथा केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (2019-21) के आधिकारिक जनसांख्यिकीय आंकड़े:
एसआरएस सांख्यिकी रिपोर्ट 2023 बनाम राष्ट्रीय औसत#
| महत्वपूर्ण संकेतक |
राजस्थान (एसआरएस 2023) |
भारत (राष्ट्रीय औसत) |
राष्ट्रीय स्थिति एवं तुलनात्मक विश्लेषण |
| अशोधित जन्म दर |
22.9 प्रति 1,000 |
18.4 प्रति 1,000 |
देश में तीसरा सबसे ऊँचा स्थान (बिहार 25.8 व उत्तर प्रदेश 23.6 के बाद)। ग्रामीण दर: 23.9, शहरी दर: 20.1 |
| अशोधित मृत्यु दर |
5.9 प्रति 1,000 |
6.4 प्रति 1,000 |
राष्ट्रीय औसत से बेहतर स्थिति। ग्रामीण दर: 6.0, शहरी दर: 5.6 |
| शिशु मृत्यु दर |
29 प्रति 1,000 |
25 प्रति 1,000 |
राष्ट्रीय औसत से अधिक (चिंता का विषय)। ग्रामीण दर: 31, शहरी दर: 23 (वर्ष 1971 में यह 129 थी) |
| कुल प्रजनन दर |
2.3 (एसआरएस) / 2.0 (एनएफएचएस-5) |
1.9 (एसआरएस) / 2.0 (एनएफएचएस-5) |
एनएफएचएस-5 में प्रतिस्थापन स्तर (2.1) से नीचे, जबकि एसआरएस में 2.3 पर स्थिर |
| मातृ मृत्यु अनुपात |
113 प्रति 1 लाख जीवित जन्म |
97 प्रति 1 लाख जीवित जन्म |
वर्ष 2017-19 के 141 की तुलना में 28 अंकों का महत्वपूर्ण सुधार |
| जन्म के समय जीवन प्रत्याशा |
69.0 वर्ष (पुरुष: 66.8, महिला: 71.3) |
70.0 वर्ष (पुरुष: 68.5, महिला: 72.5) |
राष्ट्रीय औसत के करीब; महिलाओं की जीवन प्रत्याशा पुरुषों से 4.5 वर्ष अधिक |
एनएफएचएस-4 (2015-16) बनाम एनएफएचएस-5 (2019-21) स्वास्थ्य प्रगति#
| स्वास्थ्य एवं जनसांख्यिकीय प्राचल |
एनएफएचएस-4 (2015-16) |
एनएफएचएस-5 (2019-21) |
जनसांख्यिकीय निष्कर्ष |
| समग्र लिंगानुपात |
973 |
1,009 |
सर्वेक्षण के इतिहास में पहली बार 1,000 का आंकड़ा पार |
| जन्म के समय लिंगानुपात |
887 |
891 |
सुधार अत्यंत धीमा; 952 के प्राकृतिक जैविक मानक से काफी पीछे |
| संस्थागत प्रसव |
84.0% |
94.9% |
जननी सुरक्षा योजना एवं 108 एम्बुलेंस सेवा का सीधा सकारात्मक परिणाम |
| पूर्ण प्रतिरक्षण / टीकाकरण (12-23 माह) |
54.8% |
80.4% |
मिशन इंद्रधनुष के माध्यम से 25.6% की ऐतिहासिक छलांग |
| पाँच वर्ष से कम आयु के ठिगने बच्चे |
39.1% |
31.8% |
दीर्घकालिक कुपोषण में 7.3% की प्रभावी कमी |
| 15-49 वर्ष की रक्ताल्पता / एनीमिक महिलाएं |
46.8% |
54.4% |
गंभीर चिंता का विषय: 7.6% की वृद्धि, जो पोषण सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न लगाती है |
| कम उम्र में विवाह (20-24 वर्ष की महिलाएं) |
35.4% |
25.4% |
बाल विवाह की कुप्रथा में 10.0% की उल्लेखनीय गिरावट |
7.4 नागरिक पंजीकरण प्रणाली (सीआरएस 2023) एवं विधिक सुधार#
नागरिक पंजीकरण प्रणाली (सीआरएस) राज्य में जन्म एवं मृत्यु की घटनाओं का अनिवार्य, निरंतर एवं स्थायी विधिक अभिलेखन सुनिश्चित करती है:
जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2023#
केंद्र सरकार द्वारा 11 अगस्त 2023 को अधिसूचित तथा 1 अक्टूबर 2023 से लागू किए गए इस ऐतिहासिक अधिनियम ने विधिक प्रक्रियाओं में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं:
- एकल अनिवार्य दस्तावेज: 1 अक्टूबर 2023 को या उसके बाद जन्म लेने वाले नागरिकों के लिए शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश, ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने, मतदाता सूची में नाम जुड़वाने, आधार कार्ड पंजीकरण, विवाह पंजीयन तथा पासपोर्ट जारी करवाने हेतु डिजिटल जन्म प्रमाण पत्र एकमात्र अनिवार्य एवं वैध दस्तावेज घोषित किया गया है।
- केंद्रीकृत डेटाबेस एकीकरण: राज्यों के जन्म-मृत्यु पंजीकरण तंत्र को राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर, मतदाता पहचान पत्र, राशन कार्ड एवं भूमि पंजीकरण से रीयल-टाइम जोड़ने का विधिक प्रावधान।
- राजस्थान का 'पहचान' पोर्टल: राजस्थान राज्य में जन्म, मृत्यु एवं विवाह का शत-प्रतिशत (100%) डिजिटल पंजीकरण राज्य सरकार के समर्पित 'पहचान' वेब पोर्टल के माध्यम से संपन्न किया जाता है।
नागरिक पंजीकरण रिपोर्ट 2023 के प्रमुख संकेतक#
| नागरिक पंजीकरण संकेतक |
राजस्थान की उपलब्धि |
राष्ट्रीय स्तर पर स्थिति |
| जन्म पंजीकरण का स्तर |
98.4% |
98.4% |
| मृत्यु पंजीकरण का स्तर |
97.2% |
97.2% |
| जन्म के समय पंजीकृत लिंगानुपात |
911 |
वर्ष 2006 के 855 की तुलना में 56 अंकों की मजबूत वृद्धि |
7.5 जनसंख्या नीतियाँ एवं प्रमुख सरकारी कल्याणकारी योजनाएँ#
सांविधिक एवं नीतिगत ढाँचा#
- राजस्थान राज्य जनसंख्या नीति (दिसंबर 2000):
- परिवार कल्याण एवं जनसंख्या स्थिरीकरण हेतु घोषित नीति।
- मुख्य लक्ष्य: वर्ष 2011 तक कुल प्रजनन दर को 2.1 (प्रतिस्थापन स्तर) पर लाना।
- पंचायती राज अधिनियम में 'दो-संतान नियम':
- राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 19(l) के तहत: 27 नवंबर 1995 के बाद जिस व्यक्ति के दो से अधिक जीवित संतानें हों, वह पंचायती राज संस्थाओं (वार्ड पंच, सरपंच, प्रधान, जिला प्रमुख) तथा नगर निकायों के चुनाव लड़ने हेतु अयोग्य घोषित होता है।
- गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम (1994) का सख्त क्रियान्वयन:
- जीपीएस एक्टिव ट्रैकर: कन्या भ्रूण लिंग परीक्षण पर पूर्ण रोक लगाने हेतु सभी पंजीकृत सोनोग्राफी मशीनों पर एक्टिव ट्रैकर लगाने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य बना।
- इम्पैक्ट सॉफ्टवेयर: सोनोग्राफी क्लिनिकों द्वारा विधिक फॉर्म-एफ को ऑनलाइन भरने हेतु डिजिटल पोर्टल।
- मुखबिर योजना: कन्या भ्रूण लिंग जांच की गुप्त सूचना देने वाले मुखबिर, गर्भवती डिकॉय महिला एवं सहायक को सफल कानूनी कार्यवाही पर तीन किश्तों में कुल ₹3,00,000 (3 लाख रुपये) की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
प्रमुख फ्लैगशिप जनसांख्यिकीय एवं मातृत्व योजनाएँ#
| योजना का नाम |
प्रारंभ तिथि / वर्ष |
नोडल विभाग |
मुख्य उद्देश्य एवं वित्तीय स्वरूप |
| मिशन परिवार विकास |
2016-17 |
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग |
उच्च प्रजनन दर (3 या अधिक) वाले राज्य के 14 उच्च प्राथमिकता वाले जिलों में अंतरा (इंजेक्शन) व छाया (गोली) का निःशुल्क वितरण। |
| इंदिरा गांधी मातृत्व पोषण योजना |
19 नवम्बर 2020 |
महिला एवं बाल विकास विभाग |
दूसरी संतान के जन्म पर गर्भवती एवं धात्री माताओं को पोषण सुधार हेतु 5 चरणों में कुल ₹6,000 की प्रत्यक्ष बैंक अंतरण सहायता। (प्रारंभ में 5 टीएसपी जिलों में, वर्ष 2022 से पूरे राज्य में लागू)। |
| मुख्यमंत्री राजश्री योजना |
1 जून 2016 |
महिला एवं बाल विकास विभाग |
संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने, कन्या भ्रूण हत्या रोकने तथा बालिका शिक्षा हेतु जन्म से कक्षा 12 उत्तीर्ण करने तक 6 किस्तों में कुल ₹50,000 की वित्तीय सहायता। |
| प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना |
1 जनवरी 2017 |
महिला एवं बाल विकास विभाग |
प्रथम जीवित संतान के जन्म पर ₹5,000 का मातृत्व लाभ (संशोधित नियमों के तहत दूसरी संतान बालिका होने पर ₹6,000 की अतिरिक्त सहायता)। |
| आँचल अभियान |
2022 |
जिला प्रशासन, करौली |
गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की रोकथाम, नियमित हीमोग्लोबिन जांच तथा शत-प्रतिशत सुरक्षित संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने हेतु राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित पहल। |
7.6 परीक्षा-उपयोगी तुलनात्मक सांख्यिकी कैप्सूल#
राष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान का जनसांख्यिकीय स्थान (जनगणना 2011)#
- भौगोलिक क्षेत्रफल में हिस्सा: देश का 10.41% (देश में प्रथम स्थान)
- कुल जनसंख्या में हिस्सा: देश का 5.66% (जनगणना 2011 में आठवाँ स्थान; वर्तमान में तेलंगाना गठन के पश्चात सातवाँ स्थान)
दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर के चरम जिले (2001-2011)#
* **सर्वाधिक वृद्धि दर वाले जिले:** बाड़मेर (**32.5%**), जैसलमेर (**31.8%**)
* **न्यूनतम वृद्धि दर वाले जिले:** श्रीगंगानगर (**10.0%**), झुंझुनूं (**11.7%**)
जनसंख्या घनत्व के चरम जिले#
* **सर्वाधिक घनत्व वाले जिले:** जयपुर (**595** व्यक्ति प्रति वर्ग किमी), भरतपुर (**503** व्यक्ति प्रति वर्ग किमी)
* **न्यूनतम घनत्व वाले जिले:** जैसलमेर (**17** व्यक्ति प्रति वर्ग किमी), बीकानेर (**78** व्यक्ति प्रति वर्ग किमी)
लिंगानुपात के चरम जिले#
* **सामान्य लिंगानुपात में शीर्ष जिले:** डूंगरपुर (**994**), राजसमंद (**990**)
* **सामान्य लिंगानुपात में न्यूनतम जिले:** धौलपुर (**846**), जैसलमेर (**852**)
* **शिशु लिंगानुपात (0-6 आयु वर्ग) में शीर्ष जिले:** बांसवाड़ा (**934**), प्रतापगढ़ (**933**)
* **शिशु लिंगानुपात (0-6 आयु वर्ग) में न्यूनतम जिले:** झुंझुनूं (**837**), सीकर (**848**)
* **ग्रामीण लिंगानुपात में 1000 पार जिला:** पाली (**1,003**)
साक्षरता दर के चरम जिले#
* **कुल साक्षरता में शीर्ष:** कोटा (**76.6%**) | **न्यूनतम:** जालौर (**54.9%**)
* **पुरुष साक्षरता में शीर्ष:** झुंझुनूं (**86.9%**) | **न्यूनतम:** प्रतापगढ़ एवं बांसवाड़ा (**69.5%**)
* **महिला साक्षरता में शीर्ष:** कोटा (**65.9%**) | **न्यूनतम:** जालौर (**38.5%**)
सामाजिक वर्ग एवं नगरीकरण के चरम जिले#
* **अनुसूचित जाति (एससी) का सर्वाधिक प्रतिशत:** श्रीगंगानगर (**36.58%**) | **न्यूनतम:** डूंगरपुर (**3.76%**)
* **अनुसूचित जनजाति (एसटी) का सर्वाधिक प्रतिशत:** बांसवाड़ा (**76.38%**) | **न्यूनतम:** नागौर (**0.31%**), बीकानेर (**0.33%**)
* **सर्वाधिक नगरीकृत जिला:** कोटा (**60.31%**) | **न्यूनतम नगरीकृत जिला:** डूंगरपुर (**6.39%**)
नमूना पंजीकरण प्रणाली 2023 संक्षिप्त झलक#
* अशोधित जन्म दर: **22.9** प्रति 1,000 (देश में तीसरा स्थान)
* अशोधित मृत्यु दर: **5.9** प्रति 1,000
* शिशु मृत्यु दर: **29** प्रति 1,000 जीवित जन्म
7.7 स्मरण सूत्र एवं एक-पंक्ति त्वरित पुनरावृत्ति तथ्य#
परीक्षा स्मृति सूत्र#
- दिव्यांगता क्रम सूत्र: चलन (27.0%) > दृष्टि (20.0%) > श्रवण (13.5%) > बहु-दिव्यांगता (13.4%) > मानसिक (7.3%) > वाणी (4.4%)
- दस लाखी शहर त्रयी: जयपुर (30.73 लाख) > जोधपुर (10.34 लाख) > कोटा (10.01 लाख)
- शीर्ष स्लम नगर युग्म: जयपुर (3.23 लाख) एवं कोटा (3.19 लाख) राज्य के दो सबसे बड़े कच्ची बस्ती केंद्र हैं।
- एसआरएस 2023 मुख्य सांख्यिकी: जन्म दर = 22.9, मृत्यु दर = 5.9, शिशु मृत्यु दर = 29।
- एनएफएचएस-5 ऐतिहासिक उपलब्धि: सर्वेक्षण में समग्र लिंगानुपात पहली बार 1000 पार (1009) पहुंचा; संस्थागत प्रसव 94.9% रहा।
20 अति-महत्वपूर्ण त्वरित पुनरावृत्ति तथ्य#
- जनगणना 2011 के अनुसार राजस्थान में कुल दिव्यांगजन 15,63,694 (कुल आबादी का 2.28%) हैं।
- राजस्थान में पुरुष दिव्यांग 8,48,284 (54.2%) तथा महिला दिव्यांग 7,15,410 (45.8%) हैं।
- राज्य में सर्वाधिक प्रचलित दिव्यांगता शारीरिक/चलन संबंधी है (27.0% अथवा 4.22 लाख)।
- राज्य में सबसे कम दर्ज दिव्यांगता श्रेणी वाणी/मूक विकार है (4.4% अथवा 69,484)।
- राजस्थान में दिव्यांगजनों की साक्षरता दर 40.16% है, जो देश में दूसरा सबसे निचला स्तर है।
- राजस्थान की शहरी जनसंख्या 1,70,48,085 है, जो कुल जनसंख्या का 24.87% है।
- जनगणना 2011 में राजस्थान के तीन शहर दस लाखी श्रेणी में शामिल थे: जयपुर, जोधपुर और कोटा।
- जयपुर राज्य का सबसे बड़ा शहर है, जिसकी कुल नगरीय जनसंख्या 30,73,350 दर्ज की गई।
- राजस्थान में कुल कच्ची बस्ती (स्लम) आबादी 20,34,355 है, जो नगरीय आबादी का 13.21% है।
- जयपुर में सर्वाधिक 3,23,400 स्लम आबादी निवास करती है; दूसरे स्थान पर कोटा (3,19,309) है।
- एसआरएस 2023 के अनुसार राजस्थान की अशोधित जन्म दर 22.9 प्रति 1,000 है (देश में तीसरा स्थान)।
- एसआरएस 2023 के अनुसार राजस्थान की अशोधित मृत्यु दर 5.9 प्रति 1,000 है (राष्ट्रीय औसत 6.4 से बेहतर)।
- राजस्थान में शिशु मृत्यु दर 29 प्रति 1,000 जीवित जन्म है (वर्ष 1971 में यह 129 थी)।
- एसआरएस 2023 में राजस्थान का मातृ मृत्यु अनुपात घटकर 113 प्रति 1 लाख जीवित जन्म रह गया है।
- एनएफएचएस-5 (2019-21) में राजस्थान का समग्र लिंगानुपात पहली बार 1,000 पार कर 1,009 दर्ज हुआ।
- संस्थागत प्रसव का प्रतिशत एनएफएचएस-4 के 84.0% से बढ़कर एनएफएचएस-5 में 94.9% हो गया।
- मिशन इंद्रधनुष के तहत 12-23 माह के बच्चों का पूर्ण टीकाकरण 54.8% से बढ़कर 80.4% पहुंच गया।
- पीसीपीएनडीटी अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु सोनोग्राफी मशीनों पर जीपीएस लगाने वाला राजस्थान पहला राज्य है।
- भ्रूण लिंग परीक्षण रोकने हेतु संचालित मुखबिर योजना में सफल डिकॉय पर कुल 3 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
- राजस्थान राज्य जनसंख्या नीति दिसंबर 2000 में घोषित की गई थी, जिसका लक्ष्य 2011 तक टीएफआर 2.1 करना था।
7.8 परीक्षा-उपयोगी मुख्य बिंदु एवं वर्णनात्मक प्रश्न संकेत#
प्रश्न 1: एसआरएस 2023 एवं एनएफएचएस-5 के आंकड़ों के आलोक में राजस्थान में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों की उपलब्धियों तथा चुनौतियों का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।#
**उत्तर संकेत:**
* **शिशु स्वास्थ्य एवं उत्तरजीविता स्थिति:**
- वर्ष 1971 के 129 की तुलना में एसआरएस 2023 में शिशु मृत्यु दर घटकर 29 पर आ जाना उल्लेखनीय उपलब्धि है।
- ग्रामीण व शहरी विषमता अब भी बरकरार (ग्रामीण दर: 31, शहरी दर: 23)।
- बच्चों में ठिगनापन (31.8%) तथा जन्म दर का ऊँचा स्तर (22.9) बाल स्वास्थ्य पर निरंतर दबाव बनाए हुए है।
* **मातृ स्वास्थ्य में सुधार:**
- मातृ मृत्यु अनुपात 141 (2017-19) से घटकर 113 पर आना संस्थागत प्रयासों की सफलता है।
- जननी सुरक्षा योजना व 108 सेवा के कारण संस्थागत प्रसव 94.9% तक पहुँच चुका है।
* **प्रमुख चुनौतियां:**
- 15-49 वर्ष की महिलाओं में रक्ताल्पता (एनीमिया) 46.8% से बढ़कर 54.4% हो जाना गंभीर पोषण संकट है।
- जन्म के समय लिंगानुपात (891) प्राकृतिक स्तर (952) से काफी कम है।
प्रश्न 2: राजस्थान में जनसंख्या स्थिरीकरण तथा कन्या भ्रूण हत्या की रोकथाम हेतु किए गए विधिक एवं नीतिगत नवाचारों की विवेचना कीजिए।#
**उत्तर संकेत:**
* **नीतिगत एवं सांविधिक प्रावधान:**
- राज्य जनसंख्या नीति (दिसंबर 2000) के तहत टीएफआर 2.1 लाने का लक्ष्य।
- पंचायती राज अधिनियम की धारा 19(l) के तहत 27 नवंबर 1995 के बाद दो से अधिक संतान होने पर चुनाव लड़ने पर विधिक अयोग्यता।
* **पीसीपीएनडीटी अधिनियम के प्रभावी नवाचार:**
- सभी पंजीकृत सोनोग्राफी मशीनों पर जीपीएस एक्टिव ट्रैकर लगाने वाला देश का पहला राज्य।
- इम्पैक्ट पोर्टल द्वारा फॉर्म-एफ का शत-प्रतिशत ऑनलाइन संधारण।
- मुखबिर योजना के तहत सफल डिकॉय ऑपरेशन पर 3 लाख रुपये का नगद प्रोत्साहन।
* **प्रोत्साहनकारी मातृत्व कल्याण योजनाएँ:**
- इंदिरा गांधी मातृत्व पोषण योजना द्वारा दूसरी संतान पर ₹6,000 का डीबीटी लाभ।
- मुख्यमंत्री राजश्री योजना के तहत जन्म से 12वीं कक्षा तक ₹50,000 की वित्तीय सहायता।