कार्यशील जनसंख्या, व्यावसायिक संरचना, धार्मिक एवं भाषाई जनसांख्यिकी सामान्य ज्ञान

भाग - 6: कार्यशील जनसंख्या, व्यावसायिक संरचना, धार्मिक एवं भाषाई जनसांख्यिकी


विस्तृत विषय-सूची

खंड विषय परीक्षा में महत्व
6.1 कार्यशील जनसंख्या: समग्र प्रारूप एवं वर्गीकरण ★★★★★
6.2 श्रमिकों का 4-स्तरीय व्यावसायिक वर्गीकरण ★★★★★
6.3 कृषि पर निर्भरता एवं श्रमिकों का प्रादेशिक वितरण ★★★★★
6.4 धार्मिक जनसांख्यिकी: समुदायवार सांख्यिकीय परिदृश्य ★★★★★
6.5 धार्मिक चरम: लिंगानुपात, साक्षरता एवं स्थानिक संकेंद्रण ★★★★★
6.6 भाषाई जनसांख्यिकी: भाषाएं, मातृभाषाएं एवं क्षेत्रीय बोलियां ★★★★★
6.7 स्मरण सूत्र एवं एक-पंक्ति त्वरित पुनरावृत्ति तथ्य ★★★★
6.8 परीक्षा-उपयोगी मुख्य बिंदु एवं वर्णनात्मक प्रश्न संकेत ★★★★

6.1 कार्यशील जनसंख्या: समग्र प्रारूप एवं वर्गीकरण

जनगणना 2011 के आर्थिक सारणीयन के अनुसार राजस्थान की कार्य सहभागिता दर 43.60% दर्ज की गई। राज्य की कुल 6.85 करोड़ आबादी में से कुल कर्मकारों की संख्या 2,98,86,346 (लगभग 2.99 करोड़) है, जबकि गैर-कर्मकारों की संख्या 3,86,62,091 (56.40%) है।

                      [राजस्थान की कुल जनसंख्या: 6.85 करोड़ (100%)]
                                            │
                 ┌──────────────────────────┴──────────────────────────┐
                 ▼                                                     ▼
     [कुल श्रमिक: 2.99 करोड़ (43.60%)]                      [गैर-श्रमिक: 3.87 करोड़ (56.40%)]
                 │                                           • आश्रित, छात्र, गृहणियां, वृद्ध
                 ├─ मुख्य श्रमिक: 2,10,39,988 (70.40%)          एवं अनुत्पादक जनसंख्या
                 │   (वर्ष में 183 दिन या अधिक कार्य)
                 └─ सीमांत श्रमिक: 88,46,358 (29.60%)
                     (वर्ष में 183 दिन से कम कार्य)

प्रमुख आर्थिक एवं जनसांख्यिकीय संकेतक

जनसांख्यिकीय संकेतक आधिकारिक संख्या प्रतिशत (%) आर्थिक महत्व
कुल जनसंख्या 6,85,48,437 100.00% राज्य का समग्र आधार
कार्य सहभागिता दर 2,98,86,346 43.60% कुल आबादी में कार्यरत आबादी का हिस्सा
गैर-श्रमिक जनसंख्या 3,86,62,091 56.40% राज्य में उच्च आर्थिक निर्भरता अनुपात
मुख्य श्रमिक (183 दिन या अधिक) 2,10,39,988 कुल श्रमिकों का 70.40% वर्ष पर्यन्त स्थायी रोजगार युक्त कार्यबल
सीमांत श्रमिक (183 दिन से कम) 88,46,358 कुल श्रमिकों का 29.60% मौसमी खेतिहर मजदूर एवं अल्पकालिक दिहाड़ी श्रमिक


6.2 श्रमिकों का 4-स्तरीय व्यावसायिक वर्गीकरण

जनगणना 2011 में आर्थिक श्रमिकों को उनके प्राथमिक व्यवसाय के आधार पर 4 मानक श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:

श्रमिक श्रेणी कुल संख्या राज्य के श्रमिकों का % परिचालनात्मक परिभाषा एवं विशेषताएं
1. काश्तकार / कृषक 1,36,18,849 45.57% स्वयं की, परिवार की अथवा पट्टे की कृषि भूमि पर स्वयं खेती करने वाले किसान। पश्चिमी एवं दक्षिणी जिलों की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में प्रमुख।
2. खेतिहर मजदूर 49,42,473 16.54% भूमिहीन श्रमिक जो दूसरों के खेतों पर नकद, अनाज या फसल के अंश हेतु मजदूरी करते हैं। हाड़ौती व श्रीगंगानगर नहरी कमान क्षेत्र में प्रमुख।
3. पारिवारिक उद्योग श्रमिक 7,23,546 2.42% घर के भीतर परिवार के सदस्यों द्वारा संचालित कुटीर व हथकरघा उद्योग (हथकरघा, चमड़ा कार्य, मिट्टी के बर्तन, खादी, हस्तशिल्प)।
4. अन्य श्रमिक 1,06,01,478 35.47% सरकारी व निजी सेवा, व्यापार, वाणिज्य, विनिर्माण, निर्माण, परिवहन एवं औद्योगिक उपक्रमों में कार्यरत श्रमिक। जयपुर व कोटा में सर्वाधिक संकेंद्रण।
[श्रमिकों का श्रेणीवार वितरण क्रम]
  कृषक (45.57%) > अन्य श्रमिक (35.47%) > खेतिहर मजदूर (16.54%) > पारिवारिक उद्योग (2.42%)


6.3 कृषि पर निर्भरता एवं श्रमिकों का प्रादेशिक वितरण

कृषि पर समग्र निर्भरता का प्रारूप

राजस्थान की आजीविका संरचना में कृषि क्षेत्र रोजगार का सबसे बड़ा आधार बना हुआ है:

कृषि पर समग्र निर्भरता = काश्तकार (45.57%) + खेतिहर मजदूर (16.54%) = 62.11%
  • राज्य के कुल कार्यबल का लगभग दो-तिहाई हिस्सा (62.11%) प्रत्यक्ष रूप से कृषि और संबद्ध ग्रामीण गतिविधियों पर आश्रित है।
  • इसके विपरीत, गैर-कृषि सेवा व औद्योगिक गतिविधियों का प्रतिनिधित्व करने वाले 'अन्य श्रमिक' मात्र 35.47% हैं, जो राजधानी व संभागीय नगरों को छोड़कर शेष राज्य में सीमित औद्योगीकरण को दर्शाता है।
  • पारिवारिक कुटीर उद्योग श्रमिकों का संकुचित हिस्सा (2.42%) आधुनिक मशीनीकृत उत्पादों के मुकाबले पारंपरिक ग्रामीण कुटीर व हस्तशिल्प उद्योगों के समक्ष आजीविका संकट को उजागर करता है।

क्षेत्रीय व्यावसायिक संकेंद्रण

  1. कृषक प्रधान बेल्ट: बाड़मेर, जैसलमेर, बांसवाड़ा एवं डूंगरपुर जैसे जिलों में काश्तकारों का अनुपात सर्वाधिक है, जहाँ वर्षा आधारित निर्वाह कृषि रोजगार का मुख्य साधन है।
  2. खेतिहर मजदूर संकेंद्रण: हाड़ौती क्षेत्र (कोटा, बारां, बूँदी) एवं उत्तरी नहरी पट्टी (श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़) में नकदी फसलों (सोयाबीन, गेहूं, कपास) के कारण खेतिहर मजदूरों की सघन उपस्थिति है।
  3. औद्योगिक एवं सेवा केंद्र: जयपुर, कोटा, जोधपुर एवं अलवर (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) में 'अन्य श्रमिकों' का संकेंद्रण राज्य में सर्वाधिक है।


6.4 धार्मिक जनसांख्यिकी: समुदायवार सांख्यिकीय परिदृश्य

(स्रोत: जनगणना 2011 - सारणी सी-01: धार्मिक समुदायों के अनुसार जनसंख्या)

राजस्थान में हिंदू धर्म बहुसंख्यक है, जिसके पश्चात मुस्लिम, सिख, जैन, ईसाई एवं बौद्ध धर्म के समुदाय निवास करते हैं:

धार्मिक समुदाय कुल जनसंख्या राज्य जनसंख्या का % कुल लिंगानुपात साक्षरता दर (%) प्रमुख संकेंद्रण वाले जिले
हिंदू 6,07,25,832 88.49% 926 65.3% सम्पूर्ण राज्य में व्यापक; सर्वाधिक अनुपात दौसा (96.6%)
मुस्लिम 62,15,320 9.07% 946 58.4% जयपुर, मेवात (अलवर), जैसलमेर (25.1%), बाड़मेर, टोंक, नागौर
सिख 8,72,930 1.27% 887 69.8% श्रीगंगानगर (19.7%) एवं हनुमानगढ़ की नहरी पट्टी
जैन 6,22,023 0.91% 967 94.8% (सर्वोच्च) उदयपुर, जयपुर, भीलवाड़ा, जोधपुर, पाली (व्यापार व उद्योग में अग्रणी)
ईसाई 96,430 0.14% 980 (सर्वोच्च) 85.5% बांसवाड़ा (मिशनरी शैक्षणिक व स्वास्थ्य कार्य), अजमेर, जयपुर
बौद्ध 12,185 0.02% 895 73.8% अलवर, जयपुर
अन्य / निर्दिष्ट नहीं 1,03,717 0.10%
कुल राजस्थान 6,85,48,437 100.00% 928 66.11% राज्य का समग्र योग
[धार्मिक समुदायों का जनसंख्या आकार क्रम]
  हिंदू (88.49%) > मुस्लिम (9.07%) > सिख (1.27%) > जैन (0.91%) > ईसाई (0.14%) > बौद्ध (0.02%)


6.5 धार्मिक चरम: लिंगानुपात, साक्षरता एवं स्थानिक संकेंद्रण

धार्मिक समुदायों के सामाजिक चरम सांख्यिकी

  1. लिंगानुपात के चरम:
    • सर्वाधिक लिंगानुपात वाला धर्म: ईसाई समुदाय (980), तत्पश्चात जैन (967) एवं मुस्लिम (946)।
    • न्यूनतम लिंगानुपात वाला धर्म: सिख समुदाय (887), तत्पश्चात बौद्ध (895) एवं हिंदू (926)।
  2. साक्षरता दर के चरम:
    • सर्वाधिक साक्षरता वाला धर्म: जैन समुदाय (94.8%), तत्पश्चात ईसाई (85.5%) एवं बौद्ध (73.8%)। जैन समुदाय राज्य एवं देश भर में सर्वाधिक साक्षर धार्मिक समूह है।
    • न्यूनतम साक्षरता वाला धर्म: मुस्लिम समुदाय (58.4%), तत्पश्चात हिंदू (65.3%)।
  3. स्थानिक संकेंद्रण के चरम:
    • सर्वाधिक हिंदू अनुपात वाला जिला: दौसा (96.6%)
    • सर्वाधिक मुस्लिम अनुपात वाला जिला: जैसलमेर (25.1%)
    • सर्वाधिक सिख अनुपात वाला जिला: श्रीगंगानगर (19.7%)
    • सर्वाधिक ईसाई आबादी वाला जिला: बांसवाड़ा (जनजातीय क्षेत्रों में शैक्षणिक व सेवा संस्थाएं)
    • सर्वाधिक बौद्ध आबादी वाला जिला: अलवर


6.6 भाषाई जनसांख्यिकी: भाषाएं, मातृभाषाएं एवं क्षेत्रीय बोलियां

(स्रोत: जनगणना 2011 - सारणी सी-16: घोषित मातृभाषा के अनुसार जनसंख्या)

समग्र भाषाई संरचना

  • हिंदी (राजस्थानी मातृभाषाओं सहित): राज्य की लगभग 89.38% जनसंख्या की प्राथमिक भाषाई श्रेणी के रूप में दर्ज।
  • राजस्थानी (विशिष्ट घोषणा): लगभग 2.58 करोड़ नागरिकों ने अपनी मातृभाषा को विशिष्ट रूप से 'राजस्थानी' दर्ज करवाया।
  • पंजाबी वक्ता: कुल जनसंख्या का लगभग 2.0%, जो उत्तरी सीमावर्ती जिलों श्रीगंगानगर एवं हनुमानगढ़ में संकेंद्रित हैं।

प्रमुख बोलियों का प्रादेशिक वितरण

भाषा / बोली बोलने का प्रमुख क्षेत्र मुख्य संकेंद्रण वाले जिले
मारवाड़ी पश्चिमी राजस्थान (मरु प्रदेश) जोधपुर, बाड़मेर, नागौर, जैसलमेर, बीकानेर, पाली
मेवाड़ी दक्षिणी राजस्थान (मेवाड़ अंचल) उदयपुर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, राजसमंद
ढूँढाड़ी पूर्वी राजस्थान (ढूँढाड़ क्षेत्र) जयपुर, दौसा, टोंक
हाड़ौती दक्षिण-पूर्वी पठार (हाड़ौती) कोटा, बूँदी, बारां, झालावाड़
भीली / वागड़ी वागड़ अंचल बांसवाड़ा, डूंगरपुर
मेवाती उत्तर-पूर्वी सीमांत (मेवात) अलवर, भरतपुर
पंजाबी उत्तरी नहरी मैदान श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़
उर्दू नगरीय केंद्र जयपुर, टोंक, सीकर एवं नागौर के मुस्लिम बहुल कस्बे
सिंधी विस्थापित बस्तियां अजमेर, जयपुर, कोटा एवं जोधपुर


6.7 स्मरण सूत्र एवं एक-पंक्ति त्वरित पुनरावृत्ति तथ्य

त्वरित स्मरण सूत्र

  1. श्रमिकों की चारों श्रेणियों का घटता क्रम:
    • सूत्र: "कृ-अ-खे-पा" (कृषक 45.57% > अन्य श्रमिक 35.47% > खेतिहर मजदूर 16.54% > पारिवारिक उद्योग 2.42%)
  2. धार्मिक समुदायों का जनसंख्या आकार क्रम:
    • सूत्र: "हिं-मु-सि-जै-ई-बौ" (हिंदू 88.49% > मुस्लिम 9.07% > सिख 1.27% > जैन 0.91% > ईसाई 0.14% > बौद्ध 0.02%)
  3. धार्मिक चरम सांख्यिकी सूत्र:
    • सर्वाधिक लिंगानुपात: ईसाई (980) | न्यूनतम लिंगानुपात: सिख (887)
    • सर्वाधिक साक्षरता: जैन (94.8%) | न्यूनतम साक्षरता: मुस्लिम (58.4%)
  4. धार्मिक जिला संकेंद्रण सूत्र:
    • हिंदू: दौसा (96.6%) | मुस्लिम: जैसलमेर (25.1%) | सिख: श्रीगंगानगर (19.7%)

20 अति-महत्वपूर्ण त्वरित पुनरावृत्ति तथ्य

  1. जनगणना 2011 के अनुसार राजस्थान की कार्य सहभागिता दर 43.60% है।
  2. राजस्थान में कुल कर्मकारों की संख्या 2,98,86,346 है।
  3. मुख्य श्रमिक (183 दिन या अधिक कार्य) कुल श्रमिकों का 70.40% हैं।
  4. सीमांत श्रमिक (183 दिन से कम कार्य) कुल श्रमिकों का 29.60% हैं।
  5. राजस्थान में गैर-श्रमिकों की कुल संख्या 3,86,62,091 (56.40%) है।
  6. काश्तकार सबसे बड़ी श्रमिक श्रेणी हैं, जिनका हिस्सा 45.57% (1,36,18,849) है।
  7. खेतिहर मजदूरों की संख्या 49,42,473 (16.54%) है।
  8. कृषि पर समग्र निर्भरता (काश्तकार + खेतिहर मजदूर) 62.11% है।
  9. पारिवारिक उद्योग श्रमिक सबसे छोटी श्रेणी हैं, जिनका हिस्सा 2.42% (7,23,546) है।
  10. अन्य श्रमिक (सेवाएं, विनिर्माण, व्यापार) 35.47% (1,06,01,478) हैं।
  11. हिंदू समुदाय राज्य की कुल जनसंख्या का 88.49% (6,07,25,832) है।
  12. मुस्लिम समुदाय राज्य की कुल जनसंख्या का 9.07% (62,15,320) है।
  13. सिख समुदाय राज्य की कुल जनसंख्या का 1.27% (8,72,930) है।
  14. जैन समुदाय राज्य की कुल जनसंख्या का 0.91% (6,22,023) है।
  15. ईसाई समुदाय 0.14% तथा बौद्ध समुदाय 0.02% है।
  16. ईसाई समुदाय का लिंगानुपात (980) सभी धर्मों में सर्वाधिक है।
  17. सिख समुदाय का लिंगानुपात (887) सभी धर्मों में सबसे कम है।
  18. जैन समुदाय की साक्षरता दर (94.8%) सभी धर्मों में सर्वोच्च है।
  19. मुस्लिम समुदाय की साक्षरता दर (58.4%) सभी धर्मों में सबसे कम है।
  20. जनगणना 2011 में 2.58 करोड़ नागरिकों ने स्पष्ट रूप से अपनी मातृभाषा राजस्थानी घोषित की।


6.8 परीक्षा-उपयोगी मुख्य बिंदु एवं वर्णनात्मक प्रश्न संकेत

प्रश्न 1: राजस्थान के कार्यबल की व्यावसायिक संरचना का विश्लेषण करते हुए कृषि पर उच्च निर्भरता (62.11%) के कारणों पर प्रकाश डालिए।

**उत्तर संकेत:** - **कार्यबल संरचना:** कृषक (45.57%) एवं खेतिहर मजदूर (16.54%) मिलकर कुल श्रमिकों का 62.11% हिस्सा बनाते हैं। - **संरचनात्मक कारण:** - जयपुर-भिवाड़ी औद्योगिक पट्टी को छोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों में द्वितीयक विनिर्माण का अभाव। - वर्षा आधारित निर्वाह कृषि की बहुलता। - सेवा एवं तकनीकी क्षेत्रों में ग्रामीण युवाओं के कौशल का अभाव। - **प्रभाव:** ग्रामीण क्षेत्रों में प्रच्छन्न बेरोजगारी (छिपी हुई बेरोजगारी), मौसमी बेरोजगारी तथा अकाल व सूखे के समय आजीविका संकट।

प्रश्न 2: जनगणना 2011 के आधार पर राजस्थान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के स्थानिक वितरण का परीक्षण कीजिए।

**उत्तर संकेत:** - **मुस्लिम समुदाय (9.07%):** पश्चिमी सीमावर्ती जिलों (जैसलमेर 25.1%, बाड़मेर), मेवात क्षेत्र (अलवर, भरतपुर) तथा ऐतिहासिक नगरीय केंद्रों (जयपुर, टोंक) में संकेंद्रण। - **सिख समुदाय (1.27%):** गंग नहर व भाखड़ा नहरी पट्टी के कारण उत्तरी जिलों (श्रीगंगानगर 19.7%, हनुमानगढ़) में संकेंद्रित। - **जैन समुदाय (0.91%):** दक्षिणी व मध्य व्यापारिक केंद्रों (उदयपुर, जयपुर, पाली, भीलवाड़ा) में संकेंद्रित; 94.8% साक्षरता के साथ व्यापार व वित्त में अग्रणी। - **ईसाई समुदाय (0.14%):** बांसवाड़ा के जनजातीय अंचल में स्वास्थ्य एवं शैक्षणिक मिशनरी संस्थाओं के माध्यम से संकेंद्रण।