राजस्थान के राज्यपाल: अद्यतन अध्ययन सामग्री
अद्यतन: 19 सितंबर 2026
1. वर्तमान राज्यपाल
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| राज्यपाल | श्री हरिभाऊ किसनराव बागडे |
| नियुक्ति की घोषणा | 27 जुलाई 2024, राष्ट्रपति भवन द्वारा |
| पदभार ग्रहण | 31 जुलाई 2024 |
| शपथ | राजस्थान उच्च न्यायालय के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनिन्द्र मोहन श्रीवास्तव ने दिलाई; शपथ हिंदी में ली गई |
| पूर्व प्रमुख पद | महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष |
परीक्षा संकेत: नियुक्ति की घोषणा और पदभार ग्रहण करने की तारीख अलग हैं। नियुक्ति विज्ञप्ति · शपथ प्रेस नोट · राज्यपाल परिचय
2. राजस्थान: राजप्रमुख से राज्यपाल
- 30 मार्च 1949: जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह राजप्रमुख बने।
- 1 नवंबर 1956: सातवें संविधान संशोधन के बाद राजप्रमुख पद समाप्त हुआ। सरदार गुरुमुख निहाल सिंह राजस्थान के प्रथम राज्यपाल बने।
- 2 दिसंबर 2025: राज्यपाल सचिवालय ने राजभवन का नाम लोकभवन करने की अधिसूचना की सूचना दी। संवैधानिक पद का नाम राज्यपाल ही है।
आधिकारिक ऐतिहासिक परिचय · 2025 की प्रेस नोट सूची
3. महत्वपूर्ण संवैधानिक भेद
| अनुच्छेद | याद रखने योग्य बात |
|---|---|
| 155 | राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं। |
| 156 | सामान्य कार्यकाल पाँच वर्ष है, किंतु राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद पर रहते हैं। |
| 159 | संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश शपथ दिलाते हैं; उनकी अनुपस्थिति में वरिष्ठतम उपलब्ध न्यायाधीश शपथ दिलाते हैं। |
मूल नोट्स में बागडे को 22वें पूर्णकालिक राज्यपाल के रूप में गिना गया है। क्रम संख्या गिनते समय कार्यवाहक और अतिरिक्त प्रभार वाले पदधारियों को अलग रखें। भारत का संविधान
4. त्वरित पुनरावृत्ति
- वर्तमान राज्यपाल: हरिभाऊ किसनराव बागडे।
- नियुक्ति की घोषणा: 27 जुलाई 2024।
- पदभार ग्रहण: 31 जुलाई 2024।
- शपथ दिलाने वाले: न्यायमूर्ति मनिन्द्र मोहन श्रीवास्तव।
- प्रथम राज्यपाल: सरदार गुरुमुख निहाल सिंह।
- राजभवन का नया नाम: लोकभवन।
5. अभ्यास प्रश्न
- वर्तमान राज्यपाल ने कब पदभार ग्रहण किया? 31 जुलाई 2024।
- राज्यपाल की नियुक्ति कौन करता है? भारत के राष्ट्रपति।
- राजस्थान के प्रथम राज्यपाल कौन थे? सरदार गुरुमुख निहाल सिंह।
- राजभवन का नया नाम क्या है? लोकभवन।
6. राज्य कार्यपालिका और संवैधानिक स्थिति
संविधान का भाग VI राज्यों से संबंधित है। अनुच्छेद 153–167 में राज्य कार्यपालिका के प्रावधान हैं। इसके प्रमुख घटक राज्यपाल, मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद और महाधिवक्ता हैं। राज्यपाल संवैधानिक प्रमुख हैं; कार्यपालिका शक्ति का प्रयोग सामान्यतः मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार होता है।
| अनुच्छेद | प्रावधान |
|---|---|
| 153 | प्रत्येक राज्य के लिए राज्यपाल; एक व्यक्ति दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल हो सकता है। |
| 154 | राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित है। |
| 157 | भारतीय नागरिकता और कम से कम 35 वर्ष की आयु आवश्यक है। |
| 158 | राज्यपाल संसद या राज्य विधानमंडल का सदस्य नहीं रह सकता और अन्य लाभ का पद नहीं रख सकता। |
| 161 | राज्य की कार्यपालिका शक्ति के दायरे वाले अपराधों में क्षमा, प्रविलंबन, विराम, परिहार तथा दंड का निलंबन, परिहार या लघुकरण। |
| 163 | जहाँ संविधान विवेकाधिकार निर्धारित न करे, वहाँ मंत्रिपरिषद राज्यपाल को सहायता और सलाह देती है। |
| 164 | मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं; अन्य मंत्रियों की नियुक्ति मुख्यमंत्री की सलाह पर होती है। |
| 165 | राज्य के महाधिवक्ता की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं। |
| 166–167 | सरकारी कार्य राज्यपाल के नाम से किए जाते हैं; मुख्यमंत्री राज्यपाल को जानकारी देते हैं। |
महत्वपूर्ण: राज्यपाल पर महाभियोग की संवैधानिक प्रक्रिया नहीं है। राज्यपाल त्यागपत्र राष्ट्रपति को संबोधित करते हैं। भारत का संविधान
7. राज्यपाल की शक्तियाँ और कार्य
कार्यपालिका
राज्यपाल मुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री की सलाह पर अन्य मंत्रियों तथा महाधिवक्ता की नियुक्ति करते हैं। राज्य सरकार के औपचारिक कार्य राज्यपाल के नाम से होते हैं। संवैधानिक तंत्र की विफलता पर वे अनुच्छेद 356 के अंतर्गत राष्ट्रपति को प्रतिवेदन भेज सकते हैं। राज्य आयोगों और विश्वविद्यालयों की नियुक्तियों का अधिकार संबंधित संवैधानिक प्रावधान या राज्य कानून पर निर्भर करता है; सभी नियुक्तियों के लिए एक समान नियम नहीं है।
विधायी
| अनुच्छेद | कार्य |
|---|---|
| 174 | विधानमंडल को आहूत करना, सत्रावसान करना और विधानसभा भंग करना। |
| 175–176 | सदन में अभिभाषण; चुनाव के बाद पहले सत्र और हर वर्ष के पहले सत्र में विशेष अभिभाषण। |
| 200 | विधेयक को अनुमति देना, अनुमति रोकना या राष्ट्रपति के विचारार्थ सुरक्षित रखना। गैर-धन विधेयक पुनर्विचार के लिए लौटाया जा सकता है। दोबारा पारित होने पर अनुमति रोकी नहीं जा सकती। |
| 201 | सुरक्षित विधेयक पर राष्ट्रपति का विचार। |
| 213 | विधानमंडल के सत्र में न होने पर संवैधानिक शर्तों के अनुसार अध्यादेश जारी करना। |
अध्यादेश विधानमंडल के समक्ष रखा जाता है और सामान्यतः पुनः बैठक के छह सप्ताह बाद प्रभावहीन हो जाता है, यदि उससे पहले अनुमोदन या वापसी न हो। अनुच्छेद 200 के अंतर्गत धन विधेयक पुनर्विचार के लिए नहीं लौटाया जा सकता।
वित्तीय और न्यायिक
राज्यपाल वार्षिक वित्तीय विवरण विधानमंडल के सामने रखवाते हैं (अनुच्छेद 202)। अनुदान की माँग के लिए राज्यपाल की सिफारिश आवश्यक है (अनुच्छेद 203)। क्षमादान संबंधी शक्ति अनुच्छेद 161 में है। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति में राष्ट्रपति राज्यपाल से परामर्श करते हैं (अनुच्छेद 217); जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति राज्यपाल उच्च न्यायालय से परामर्श करके करते हैं (अनुच्छेद 233)। ये कार्य संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया और जहाँ लागू हो, मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार होते हैं।
विवेक और संवैधानिक संकट
स्पष्ट बहुमत न होने पर मुख्यमंत्री चयन अथवा विधेयक को राष्ट्रपति के लिए सुरक्षित रखने जैसी स्थितियों में विवेकाधिकार का प्रश्न उठ सकता है। बहुमत का परीक्षण सामान्यतः विधानसभा के पटल पर होना चाहिए। अनुच्छेद 356 के अंतर्गत राज्यपाल के प्रतिवेदन पर राष्ट्रपति शासन का विचार हो सकता है; उद्घोषणा राष्ट्रपति जारी करते हैं, जिसका संसदीय अनुमोदन आवश्यक है। भारत का संविधान
8. राजस्थान के ऐतिहासिक परीक्षा तथ्य
| तथ्य | उत्तर |
|---|---|
| 1956 से प्रथम राज्यपाल | सरदार गुरुमुख निहाल सिंह |
| प्रथम महिला राज्यपाल | प्रतिभा पाटिल |
| अन्य नियमित महिला राज्यपाल | प्रभा राव और मार्गरेट अल्वा |
| बाद में भारत की प्रथम महिला राष्ट्रपति बनीं | प्रतिभा पाटिल |
| मूल नोट्स में पद पर निधन वाले राज्यपाल | दरबारा सिंह, निर्मल चंद्र जैन, एस. के. सिंह, प्रभा राव |
| राजस्थान में राष्ट्रपति शासन | चार अवधियाँ: 1967, 1977, 1980 और 1992–93 |
प्रथम राज्यपाल की नियुक्ति 25 अक्टूबर 1956 को हुई और राज्यपाल व्यवस्था 1 नवंबर 1956 से शुरू हुई। दोनों तारीखें अलग हैं। राजस्थान का आधिकारिक इतिहास
9. नियमित राज्यपाल: कालक्रम पुनरावृत्ति
यह क्रम उपयोगकर्ता द्वारा दिए गए मूल नोट्स की पूर्णकालिक राज्यपाल गणना पर आधारित है। कार्यवाहक और अतिरिक्त प्रभार वाले पदधारी क्रम संख्या में शामिल नहीं हैं।
| क्रम | राज्यपाल | अवधि |
|---|---|---|
| 1 | गुरुमुख निहाल सिंह | 1956–1962 |
| 2 | संपूर्णानंद | 1962–1967 |
| 3 | हुकुम सिंह | 1967–1972 |
| 4 | जोगिंदर सिंह | 1972–1977 |
| 5 | रघुकुल तिलक | 1977–1981 |
| 6 | ओ. पी. मेहरा | 1982–1985 |
| 7 | वसंतराव पाटिल | 1985–1987 |
| 8 | सुखदेव प्रसाद | 1988–1990 |
| 9 | देवी प्रसाद चट्टोपाध्याय | 1990–1991 |
| 10 | एम. चेन्ना रेड्डी | 1992–1993 |
| 11 | बलिराम भगत | 1993–1998 |
| 12 | दरबारा सिंह | 1998 |
| 13 | अंशुमान सिंह | 1999–2003 |
| 14 | निर्मल चंद्र जैन | 2003 |
| 15 | मदन लाल खुराना | 2004 |
| 16 | प्रतिभा पाटिल | 2004–2007 |
| 17 | एस. के. सिंह | 2007–2009 |
| 18 | प्रभा राव | 2010 |
| 19 | मार्गरेट अल्वा | 2012–2014 |
| 20 | कल्याण सिंह | 2014–2019 |
| 21 | कलराज मिश्र | 2019–2024 |
| 22 | हरिभाऊ किसनराव बागडे | 2024–वर्तमान |
सटीक दिनांक और कार्यवाहक नियुक्तियों के लिए राज्यपाल सचिवालय की पूर्व राज्यपाल सूची देखें। उस सूची में प्रत्येक कार्यकाल और अतिरिक्त प्रभार अलग पंक्ति में हो सकते हैं; उसकी पंक्ति संख्या को नियमित राज्यपाल की क्रम संख्या न मानें।
10. अतिरिक्त अभ्यास प्रश्न
- राज्यपाल की नियुक्ति किस अनुच्छेद में है? अनुच्छेद 155।
- राज्यपाल की न्यूनतम आयु कितनी है? 35 वर्ष।
- अन्य मंत्रियों की नियुक्ति कौन करता है? राज्यपाल, मुख्यमंत्री की सलाह पर।
- राज्य विधेयक पर अनुमति से संबंधित अनुच्छेद कौन-सा है? अनुच्छेद 200।
- क्या धन विधेयक पुनर्विचार के लिए लौटाया जा सकता है? नहीं।
- राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा कौन जारी करता है? राष्ट्रपति।
- मूल नोट्स के अनुसार राजस्थान में राष्ट्रपति शासन कितनी बार लगा? चार बार।