राजस्थान कोपेन जलवायु वर्गीकरण GK

PART - 11: कोपेन का जलवायु वर्गीकरण


विषय सूची

खंड विषय परीक्षा में महत्व
11.1 वर्गीकरण का दार्शनिक आधार ★★★★
11.2 संकेताक्षरों की डिकोडिंग ★★★★★
11.3 राजस्थान के चार प्रदेश ★★★★★
11.4 प्रदेशवार विस्तृत विश्लेषण ★★★★★
11.5 सीमाएँ एवं आलोचना ★★★
11.6 परीक्षा-उपयोगी मुख्य बिंदु ★★★★★
11.7 तुलनात्मक अध्ययन ★★★★

📖 11.1 वर्गीकरण का दार्शनिक आधार एवं सिद्धांत

📖 11.1 Conceptual Framework & Theory

जर्मन-रूसी मौसम विज्ञानी एवं भूगोलवेत्ता डॉ. व्लादिमीर कोपेन (Wladimir Köppen) ने विश्व जलवायु का प्रथम व्यवस्थित वर्गीकरण वर्ष 1900 में प्रस्तुत किया था (जिसमें बाद में 1918 एवं 1936 में संशोधन किए गए)।

वर्गीकरण आधार वैज्ञानिक विवरण
प्राथमिक आधार प्राकृतिक वनस्पति (Natural Vegetation): कोपेन का मानना था कि किसी क्षेत्र की वनस्पति वहाँ की दीर्घकालिक जलवायु दशाओं की सर्वोत्तम प्राकृतिक सूचक होती है। यह सिद्धांत फ्रांसीसी वनस्पतिशास्त्री डी कैंडोल (De Candolle) के वनस्पति कटिबंधों पर आधारित है।
सहायक आधार मासिक एवं वार्षिक औसत तापमान तथा औसत मासिक वर्षा (Precipitation)
पद्धति अनुभवजन्य (Empirical) एवं वर्णनात्मक वर्गीकरण, जिसमें विशिष्ट अंग्रेज़ी वर्णमाला के अक्षरों (Letter Codes) का कूटबद्ध प्रयोग किया गया है।

कोपेन ने राजस्थान की मौसमी दशाओं को प्रदर्शित करने हेतु बड़े (Capital) और छोटे (Small) अक्षरों का संयोजन प्रयुक्त किया है:

अक्षर जर्मन वैज्ञानिक अर्थ राजस्थान के संदर्भ में
A Tropical उष्णकटिबंधीय आर्द्र जलवायु (सबसे ठंडे महीने का औसत तापमान > 18°C) दक्षिणी राजस्थान (बांसवाड़ा, डूंगरपुर, झालावाड़)
B Dry Climates शुष्क जलवायु (जहाँ वार्षिक वर्षा, PET से कम होती है) अरावली के पश्चिम का लगभग 60% मरुस्थलीय भू-भाग
C Warm Temperate उपोष्ण पूर्वी एवं दक्षिण-पूर्वी मैदानी राजस्थान
W Wüste (जर्मन) वास्तविक मरुस्थल (Desert) — अत्यंत न्यून वर्षा (< 20 सेमी) जैसलमेर, फलौदी, बीकानेर का पश्चिमी भाग
S Steppe (जर्मन) अर्द्ध-शुष्क घास का मैदान (Semi-Arid Steppe) — वर्षा 20-40 सेमी शेखावाटी, लूनी बेसिन, बांगर प्रदेश
h heiss (जर्मन) उष्ण राज्य के सभी शुष्क प्रदेशों पर लागू
w wintertrocken शीतकाल शुष्क (Dry Winter) — अधिकांश वर्षा ग्रीष्मकालीन मानसून से सम्पूर्ण राजस्थान में शीत ऋतु प्रायः शुष्क रहती है
g Gangetic गंगा तुल्य तापीय प्रारूप (सबसे गर्म महीना वर्षा ऋतु से ठीक पूर्व यानी मई-जून में) पूर्वी राजस्थान का मैदानी भाग

कोपेन ने राजस्थान को मुख्य रूप से 4 जलवायु प्रदेशों में विभक्त किया है:

क्र.सं. जलवायु कोड कोपेन के अनुसार नाम प्रतिनिधि जिला औसत वर्षा प्राकृतिक वनस्पति प्रमुख विस्तार क्षेत्र
1. BWhw उष्ण कटिबंधीय शुष्क मरुस्थलीय बीकानेर 10-20 सेमी मरुद्भिद जैसलमेर, बीकानेर, फलौदी, अनूपगढ़, पश्चिमी बाड़मेर
2. BShw अर्द्ध-शुष्क नागौर 20-40 सेमी स्टेपी तुल्य सीकर, झुंझुनूं, चूरू, नागौर, जालौर, पाली
3. Cwg उप-आर्द्र मानसूनी टोंक 60-80 सेमी मिश्रित पर्णपाती जयपुर, दौसा, अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली
4. Aw उष्ण कटिबंधीय आर्द्र डूंगरपुर 80-150 सेमी सवाना बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, झालावाड़, माउंट आबू

1️⃣ BWhw प्रदेश — उष्ण कटिबंधीय शुष्क मरुस्थलीय जलवायु प्रदेश

यह राजस्थान का धुर पश्चिमी क्षेत्र है, जहाँ की मौसमी दशाएँ अत्यधिक शुष्क एवं कठोर हैं:

पहलू विवरण
सांकेतिक अर्थ B = शुष्क, W = मरुस्थल, h = गर्म (>18°C), w = शीतकाल शुष्क
प्रतिनिधि जिला बीकानेर
विस्तार क्षेत्र जैसलमेर, बीकानेर, फलौदी, अनूपगढ़, जोधपुर ग्रामीण (प.), बाड़मेर (उ.प.), श्रीगंगानगर (द.)
वर्षा 10-20 सेमी (अनियमित, न्यून, अनिश्चित)
तापमान ग्रीष्म: 45°C-50°C; शीत: 0°C-5°C
वनस्पति मरुद्भिद (Xerophytes)
मुख्य प्रजातियाँ फोग, कैर, लानी, थूहर, आकड़ा, खेजड़ी, सेवण घास

2️⃣ BShw प्रदेश — अर्द्ध-शुष्क

यह मरुस्थल और अरावली के मध्य स्थित एक संक्रमणकालीन जलवायु पेटी है।

पहलू विवरण
सांकेतिक अर्थ B = शुष्क, S = स्टेपी, h = गर्म, w = शीतकाल शुष्क
प्रतिनिधि जिला नागौर
क्षेत्रफल राजस्थान का सबसे बड़ा जलवायु प्रदेश
विस्तार क्षेत्र सीकर, झुंझुनूं, चूरू, नागौर, डीडवाना-कुचामन, पाली, जालौर, सांचौर, जोधपुर
वर्षा 20-40 सेमी
तापमान ग्रीष्म: 38°C-42°C; शीत: 0°C से नीचे (फतेहपुर)
वनस्पति स्टेपी प्रकार
मुख्य प्रजातियाँ रोहिड़ा, खेजड़ी, बेर, बबूल, धामण, करड़ घास

3️⃣ Cwg प्रदेश — उप-आर्द्र मानसूनी

यह अरावली के पूर्व में स्थित राज्य का सर्वाधिक कृषि-उत्पादक एवं सघन आबादी वाला भाग है।

पहलू विवरण
सांकेतिक अर्थ C = उपोष्ण, w = शीतकाल शुष्क, g = गंगा तुल्य
प्रतिनिधि जिला टोंक
विस्तार क्षेत्र जयपुर, दौसा, अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, टोंक, अजमेर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़
वर्षा 60-80 सेमी (पुरवइया द्वारा)
तापमान ग्रीष्म: 34°C-40°C; शीत: 10°C-16°C
वनस्पति उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती
मुख्य प्रजातियाँ धौकड़ा, सालर, खैर, ढाक/पलाश, शीशम, नीम, बहेड़ा

4️⃣ Aw प्रदेश — उष्ण कटिबंधीय आर्द्र

यह राजस्थान का धुर दक्षिणी तथा दक्षिण-पूर्वी भाग है, जहाँ राज्य की सर्वाधिक वर्षा दर्ज की जाती है।

पहलू विवरण
सांकेतिक अर्थ A = उष्ण कटिबंधीय आर्द्र, w = शीत ऋतु शुष्क
प्रतिनिधि जिला डूंगरपुर
विस्तार क्षेत्र वागड़ (बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़), हाड़ौती (झालावाड़, बारां, कोटा द.), माउंट आबू
वर्षा 80-100 सेमी+ (माउंट आबू: 150 सेमी)
तापमान ग्रीष्म: 30°C-35°C; शीत: 14°C-18°C
वनस्पति सवाना एवं शुष्क सागवान वन
मुख्य प्रजातियाँ सागवान, बाँस, महुआ, तेंदू, आम, जामुन
सीमा विवरण
अत्यधिक वनस्पति-केंद्रित कोपेन ने वनस्पति को जलवायु का एकमात्र निर्णायक कारक मान लिया, जबकि स्थानीय उच्चावच, मृदा संरचना तथा मानव-प्रेरित वनों की कटाई से भी वनस्पति का प्रारूप बदल जाता है।
माउंट आबू का संकुचन माउंट आबू (शीतल पर्वतीय जलवायु) को भी 'Aw' वर्ग में रखा, जो तापीय दृष्टि से विसंगतिपूर्ण है।
विशाल क्षेत्र का सरलीकरण राजस्थान के ~60% मरुस्थलीय भू-भाग को केवल दो संवर्गों (BWhw और BShw) में समेट दिया।
तथ्य विवरण
प्रतिनिधि जिले BWhw → बीकानेर, BShw → नागौर, Cwg → टोंक, Aw → डूंगरपुर
सबसे बड़ा प्रदेश BShw (अर्द्ध-शुष्क
कर्क रेखा एवं Aw बांसवाड़ा एवं डूंगरपुर (कर्क रेखा) → Aw प्रदेश
'g' का अर्थ गंगा तुल्य तापीय प्रारूप (Gangetic type)
सागवान वन केवल Aw प्रदेश में
मरुद्भिद वनस्पति केवल BWhw प्रदेश में
पहलू BWhw BShw Cwg Aw
वर्षा 10-20 सेमी 20-40 सेमी 60-80 सेमी 80-150 सेमी
प्रतिनिधि जिला बीकानेर नागौर टोंक डूंगरपुर
वनस्पति मरुद्भिद स्टेपी पर्णपाती सवाना/सागवान
तापमान 45-50°C 38-42°C 34-40°C 30-35°C
क्षेत्रफल मध्यम सबसे बड़ा मध्यम मध्यम

परीक्षा पुनरावृत्ति

प्राकृतिक वनस्पति -> तापमान और वर्षा -> कोपेन संकेताक्षर -> BWhw, BShw, Cwg, Aw -> प्रतिनिधि जिले -> परीक्षा तुलना

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