राजस्थान थार्नथवेट जलवायु वर्गीकरण GK

PART - 12: थार्नथवेट का जलवायु वर्गीकरण


विषय सूची

खंड विषय परीक्षा में महत्व
12.1 दार्शनिक एवं वैज्ञानिक आधार ★★★★★
12.2 सांकेतिक अक्षरों की डिकोडिंग ★★★★★
12.3 राजस्थान के चार प्रदेश ★★★★★
12.4 प्रदेशवार विस्तृत विश्लेषण ★★★★★
12.5 कोपेन बनाम थार्नथवेट ★★★★★
12.6 परीक्षा-उपयोगी मुख्य बिंदु ★★★★★
12.7 तुलनात्मक अध्ययन ★★★★

📖 12.1 दार्शनिक एवं वैज्ञानिक आधार

📖 12.1 Conceptual & Scientific Foundation

अमेरिकी भूगोलवेत्ता एवं जलवायु विज्ञानी सी. डब्ल्यू. थार्नथवेट (C.W. Thornthwaite) ने 1931 में विश्व की जलवायु का वर्गीकरण प्रस्तुत किया, जिसे उन्होंने 1933 एवं 1948 में संशोधित किया।

जहाँ कोपेन का वर्गीकरण मुख्यतः 'अनुभवजन्य' (Empirical) और वनस्पति पर केंद्रित था, वहीं थार्नथवेट का वर्गीकरण जल-संतुलन (Water Balance) एवं गणितीय सूचकांकों पर आधारित होने के कारण अधिक तार्किक माना जाता है।

वर्गीकरण आधार वैज्ञानिक संकल्पना सूत्र
1. वर्षण प्रभाविकता सूचकांक (P-E Index) किसी क्षेत्र में प्राप्त कुल वर्षा और वहाँ होने वाले कुल वाष्पीकरण का आनुपातिक संबंध $P\text{-}E\text{ Ratio} = 115 \times \left(\frac{P}{T - 10}\right)^{\frac{10}{9}}$
2. तापीय दक्षता सूचकांक (T-E Index) पौधों की वृद्धि हेतु उपलब्ध तापीय ऊर्जा की मात्रा $T\text{-}E\text{ Ratio} = \frac{T - 32}{4}$
3. संभावित वाष्पोत्सर्जन (PET) 1948 के संशोधन में विभव वाष्पीकरण-वाष्पोत्सर्जन तथा नमी सूचकांक (Moisture Index - $I_m$) को मुख्य आधार बनाया $I_m = \frac{100s - 60d}{\text{PET}}$

थार्नथवेट ने राजस्थान की जलवायु को दर्शाने हेतु तीन स्तरों के सांकेतिक अक्षरों का संयोजन किया है:

अक्षर वैज्ञानिक नाम अर्थ एवं राजस्थान के संदर्भ में स्थिति
C Sub-Humid उप-आर्द्र प्रदेश (P-E Index: 32-63); दक्षिणी एवं दक्षिण-पूर्वी राजस्थान
D Semi-Arid अर्द्ध-शुष्क प्रदेश (P-E Index: 16-31); मध्य एवं उत्तरी राजस्थान
E Arid शुष्क मरुस्थलीय प्रदेश (P-E Index: <16); पश्चिमी थार मरुस्थल
A' Megathermal उष्ण कटिबंधीय तापीय दक्षता (T-E Index ≥ 128); अत्यधिक ग्रीष्म ताप
B' Mesothermal मध्य तापीय दक्षता (T-E Index: 64-127); उत्तरी राजस्थान
d Dry in all seasons वर्षभर वर्षा की कमी; जैसलमेर क्षेत्र
w Winter Dry शीतकाल शुष्क; मानसूनी वर्षा केवल ग्रीष्म/वर्षाकाल में

थार्नथवेट के अनुसार राजस्थान को 4 मुख्य जलवायु प्रदेशों में विभक्त किया गया है:

क्र.सं. जलवायु कोड प्रदेश का नाम प्रतिनिधि जिला औसत वर्षा प्रमुख जिले एवं विस्तार क्षेत्र
1. CA'w उप-आर्द्र डूंगरपुर 80-100 सेमी+ बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, झालावाड़, बारां, कोटा, माउंट आबू
2. DA'w उष्ण कटिबंधीय अर्द्ध-शुष्क प्रदेश अजमेर 50-80 सेमी (क्षेत्रफल में सबसे बड़ा) सिरोही, पाली, अजमेर, भीलवाड़ा, टोंक, जयपुर, दौसा, सवाई माधोपुर, करौली, बूंदी
3. DB'w मध्य तापीय अर्द्ध-शुष्क मिश्रित प्रदेश बीकानेर 20-40 सेमी श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, चूरू, उत्तरी झुंझुनूं
4. EA'd उष्ण कटिबंधीय अति-शुष्क मरुस्थलीय प्रदेश जैसलमेर 10-20 सेमी जैसलमेर, बाड़मेर, फलौदी, पश्चिमी बीकानेर, पश्चिमी जोधपुर

1️⃣ EA'd प्रदेश — उष्ण कटिबंधीय अति-शुष्क मरुस्थलीय जलवायु

पहलू विवरण
सांकेतिक अर्थ E = शुष्क, A' = उष्ण कटिबंधीय, d = वर्षभर वर्षा का अभाव
प्रतिनिधि जिला जैसलमेर
विस्तार संपूर्ण जैसलमेर, बाड़मेर, पश्चिमी फलौदी, पश्चिमी बीकानेर, पश्चिमी जोधपुर
वर्षा 10-20 सेमी (अत्यंत अनिश्चित)
तापमान ग्रीष्म: 45-48°C; शीत: 0-5°C
वनस्पति मरुद्भिद — फोग, कैर, लानी, सेवण घास

2️⃣ DB'w प्रदेश — मध्य तापीय अर्द्ध-शुष्क जलवायु

पहलू विवरण
सांकेतिक अर्थ D = अर्द्ध-शुष्क, B' = मध्य तापीय, w = शीतकाल शुष्क
प्रतिनिधि जिला बीकानेर
विस्तार श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, चूरू, उत्तरी झुंझुनूं
वर्षा 20-40 सेमी
तापमान शीत में हिमांक तक; ग्रीष्म में तीव्र ताप
वनस्पति/कृषि बबूल, खेजड़ी; नहरी सिंचाई से गेहूँ, कपास, किन्नू

3️⃣ DA'w प्रदेश — उष्ण कटिबंधीय अर्द्ध-शुष्क

पहलू विवरण
सांकेतिक अर्थ D = अर्द्ध-शुष्क, A' = उच्च तापीय दक्षता, w = शीतकाल शुष्क
प्रतिनिधि जिला अजमेर
विस्तार सिरोही, जालोर, पाली, जोधपुर पूर्वी, नागौर, अजमेर, टोंक, भीलवाड़ा, जयपुर, दौसा, अलवर, सवाई माधोपुर, करौली
वर्षा 50-80 सेमी
वनस्पति स्टेपी एवं शुष्क पर्णपाती — खेजड़ी, रोहिड़ा, धौकड़ा, नीम, बेर
विशेष क्षेत्रफल में सबसे बड़ा प्रदेश

4️⃣ CA'w प्रदेश — उप-आर्द्र

पहलू विवरण
सांकेतिक अर्थ C = उप-आर्द्र, A' = उष्ण कटिबंधीय, w = शीतकाल शुष्क
प्रतिनिधि जिला डूंगरपुर
विस्तार वागड़ (बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़), हाड़ौती (झालावाड़, बारां, कोटा द.), माउंट आबू
वर्षा 80-100 सेमी+ (माउंट आबू 150 सेमी)
वनस्पति सवाना, बाँस, आम, महुआ, शुष्क सागवान
विशेष जल अधिशेष की स्थिति; न्यूनतम वार्षिक तापांतर
थार्नथवेट कोड (P-E आधार) कोपेन कोड (वनस्पति आधार) क्षेत्र मुख्य अंतर
EA'd BWhw पश्चिमी मरुस्थल (जैसलमेर) कोपेन ने शीतकालीन शुष्कता (w) पर बल दिया, जबकि थार्नथवेट ने वर्षभर शुष्कता (d) को रेखांकित किया
DB'w BWhw उत्तरी राजस्थान (गंगानगर, बीकानेर) कोपेन ने इसे उष्ण माना (h), जबकि थार्नथवेट ने कम तापमान के कारण मध्य तापीय (B') माना
DA'w BShw + Cwg मध्य व पूर्वी राजस्थान (अजमेर) थार्नथवेट का यह प्रदेश कोपेन के दो अलग-अलग प्रदेशों के बड़े भू-भाग को समाहित करता है
CA'w Aw दक्षिणी व दक्षिण-पूर्वी भाग (डूंगरपुर) दोनों वर्गीकरण यहाँ लगभग समान सीमांकन प्रस्तुत करते हैं
तथ्य विवरण
प्रतिनिधि जिले CA'w → डूंगरपुर, DA'w → अजमेर, DB'w → बीकानेर, EA'd → जैसलमेर
सबसे बड़ा प्रदेश DA'w (अजमेर) — थार्नथवेट के अनुसार
'd' का अर्थ सभी ऋतुओं में वर्षा की कमी (Deficiency of rainfall in all seasons)
'B' का अर्थ मध्य तापीय (Mesothermal) दक्षता
'A' का अर्थ उष्ण कटिबंधीय (Megathermal) दक्षता
1931 का मुख्य आधार वर्षण प्रभाविकता (P-E Ratio) एवं तापीय दक्षता (T-E Ratio)
1948 का मुख्य आधार संभावित वाष्पोत्सर्जन (PET)
पहलू EA'd DB'w DA'w CA'w
वर्षा 10-20 सेमी 20-40 सेमी 50-80 सेमी 80-100+ सेमी
प्रतिनिधि जिला जैसलमेर बीकानेर अजमेर डूंगरपुर
वनस्पति मरुद्भिद स्टेपी स्टेपी/पर्णपाती सवाना/सागवान
तापमान 45-48°C 40-45°C 35-40°C 30-35°C
क्षेत्रफल मध्यम मध्यम सबसे बड़ा मध्यम

परीक्षा पुनरावृत्ति

जल-संतुलन -> P-E Index और T-E Index -> PET -> थार्नथवेट संकेताक्षर -> CA'w, DA'w, DB'w, EA'd -> प्रतिनिधि जिले -> कोपेन से तुलना

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