राजस्थान के खनिज संसाधन एवं खनन (Mineral Resources and Mining in Rajasthan)
विषय प्रवेश एवं अध्याय का महत्व
राजस्थान को भारतीय भूविज्ञान और आर्थिक भूगोल में **'खनिजों का अजायबघर' (Museum of Minerals)** कहा जाता है। राज्य की विशिष्ट भूगर्भीय संरचना—जिसमें प्राचीनतम प्री-कैम्ब्रियन अरावली पर्वतमाला, धारवाड़ शैल समूह, विंध्यन बेसिन तथा पश्चिमी थार मरुस्थल के तृतीयक (Tertiary) एवं जुरैसिक अवसादी शैल समूह शामिल हैं—इसे विविध खनिज भंडारों से समृद्ध बनाती है।प्रतियोगी परीक्षाओं (RPSC RAS, सहायक प्रोफेसर, शिक्षक भर्ती, कनिष्ठ अभियंता, पटवार, CET आदि) में राजस्थान के खनिज संसाधनों पर हर वर्ष 4 से 6 प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं। इस अध्याय में धात्विक व अधात्विक खनिज, विशिष्ट खनन पट्टियाँ, एकाधिकार खनिज, ऊर्जा संसाधन (लिग्नाइट, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस), रिफाइनरी परियोजना, राज्य की खनिज नीतियां (1978 से 2015), एम-सैंड नीति 2020, डीएमएफटी (DMFT) तथा सिलिकोसिस नीति 2019 का संपूर्ण एवं प्रमाणिक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
1. राजस्थान का खनिज परिदृश्य: आधारभूत सांख्यिकी एवं प्रशासनिक ढांचा
1.1 खनिजों की विविधता एवं वर्तमान स्थिति
* **उपलब्ध खनिजों की संख्या**: राजस्थान में कुल **82 प्रकार के खनिज** पाए जाते हैं। * **व्यावसायिक रूप से उत्खनित खनिज**: वर्तमान में **57 खनिजों का व्यावसायिक (Commercial) खनन** किया जा रहा है। * **राष्ट्रीय रैंकिंग (National Ranking)**: * **खनिज उपलब्धता (विविधता) की दृष्टि से**: राजस्थान देश में **प्रथम स्थान** पर है। * **अप्रधान खनिजों (Minor Minerals) के उत्पादन में**: राजस्थान देश में **प्रथम स्थान** पर है। * **खनिजों के कुल उत्पादन मूल्य (Total Value of Mineral Production)**: राजस्थान ओडिशा के बाद देश में **द्वितीय स्थान** (लगभग 17% से 20% राष्ट्रीय मूल्य) पर रहता है। * **लौह-इतर (Non-Ferrous) धात्विक खनिजों में**: राजस्थान देश का अग्रणी राज्य है।1.2 भंडारण, संसाधन और उत्पादन की तकनीकी संकल्पनाएँ
सरकारी अभिलेखों (IBM Indian Minerals Yearbook तथा DMG राजस्थान) के अनुसार इन तीनों में स्पष्ट अंतर है: 1. **संसाधन (Resources)**: भूगर्भ में उपस्थित खनिज का वह कुल अनुमानित परिमाण जो वर्तमान वैज्ञानिक सर्वेक्षणों द्वारा खोजा गया है, चाहे उसका वर्तमान में आर्थिक दोहन संभव हो या न हो। 2. **भंडार (Reserves)**: संसाधनों का वह प्रमाणित भाग जिसे वर्तमान तकनीक और बाजार मूल्य पर आर्थिक रूप से लाभदायक ढंग से निकाला जा सकता है। 3. **उत्पादन (Production)**: एक वित्तीय वर्ष के दौरान खदानों से वास्तव में उत्खनित और प्रसंस्कृत किए गए खनिज की भौतिक मात्रा।1.3 प्रशासनिक एवं संस्थागत तंत्र
* **खान एवं भूविज्ञान विभाग (Department of Mines and Geology - DMG)**: * मुख्यालय: **उदयपुर**। * कार्य: खनिज अन्वेषण, पूर्वेक्षण (Prospecting), पट्टों (Mining Leases) का आवंटन एवं राजस्व संग्रहण। * **राजस्थान राज्य खान एवं खनिज लिमिटेड (RSMML)**: * स्थापना: **30 अक्टूबर 1974** (पब्लिक लिमिटेड कंपनी के रूप में)। * मुख्यालय: **उदयपुर**। * मुख्य प्रभाग: रॉक फॉस्फेट (झामरकोटड़ा), जिप्सम (बीकानेर), चूना पत्थर (जैसलमेर/जोधपुर) और लिग्नाइट (जयपुर/बाड़मेर/बीकानेर)। * *नोट*: वर्ष 2003 में 'राजस्थान राज्य खनिज विकास निगम' (RSMDC, स्थापना 1979) का RSMML में संविलियन (Merger) कर दिया गया था। * **राजस्थान खनिज अन्वेषण ट्रस्ट (RMET - Rajasthan Mineral Exploration Trust)**: * खनिज ब्लॉकों के त्वरित अन्वेषण एवं आधुनिक भूभौतिकीय सर्वेक्षण हेतु गठित निकाय। * **जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT - District Mineral Foundation Trust)**: * खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2015 (MMDR Act 2015) की धारा 9B के अंतर्गत राज्य के सभी 33/50 जिलों में गठित। * उद्देश्य: खनन गतिविधियों से प्रभावित क्षेत्रों और स्थानीय समुदायों का सामाजिक, आर्थिक एवं पर्यावरणीय कल्याण।2. राजस्थान के एकाधिकार एवं शीर्ष हिस्सेदारी वाले खनिज (Monopoly & Dominant Minerals)
राजस्थान भारत का एकमात्र राज्य है जिसके पास कतिपय रणनीतिक व औद्योगिक खनिजों का लगभग 100% उत्पादन एकाधिकार (Sole Producer) है।
| खनिज (Mineral) | राजस्थान की राष्ट्रीय हिस्सेदारी | प्रमुख उत्पादक जिले एवं खदानें | मुख्य औद्योगिक उपयोग |
|---|---|---|---|
| वोलैस्टोनाइट (Wollastonite) | 100% (एकमात्र उत्पादक) | सिरोही (खिल्ला, बेलका पहाड़), अजमेर, डूंगरपुर, उदयपुर | सिरेमिक उद्योग, पेंट, प्लास्टिक, ब्रेक लाइनिंग |
| जास्पर (Jasper) | 100% (एकमात्र उत्पादक) | जोधपुर (ओसियां), जैसलमेर, बाड़मेर | सजावटी पत्थर, हस्तशिल्प, अर्ध-कीमती रत्न |
| तामड़ा / रक्तमणि (Garnet) | लगभग 100% | टोंक (राजमहल, जनकपुरा, कल्याणपुरा), अजमेर (सरवाड़) | अपघर्षक (Abrasive), रत्न उद्योग, सैंडब्लास्टिंग |
| सेलेनाइट (Selenite) | 100% | बीकानेर (लूणकरणसर), बाड़मेर, नागौर | जिप्सम का क्रिस्टलीय रूप, प्लास्टर ऑफ पेरिस, ऑप्टिकल शीट |
| सीसा एवं जस्ता (Lead & Zinc) | लगभग 99-100% | भीलवाड़ा (रामपुरा-आगुचा), राजसमंद (राजपुरा-दरीबा, सिंदेसर खुर्द), उदयपुर (जावर) | बैटरियां, गैल्वनाइजिंग, मिश्र धातुएं, रक्षा सामग्री |
| चाँदी (Silver) | 90% से अधिक | उदयपुर (जावर माइंस - सीसा-जस्ता का सह-उत्पाद), राजसमंद, भीलवाड़ा | आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर सेल, सिक्के |
| रॉक फॉस्फेट (Rock Phosphate) | लगभग 90-95% | उदयपुर (झामरकोटड़ा, माटून), जैसलमेर (बिरमानिया) | रासायनिक उर्वरक (DAP/SSP), फॉस्फोरिक एसिड |
| जिप्सम (Gypsum) | लगभग 90% | बीकानेर (जामसर, लूणकरणसर), नागौर (बड़वासी, मंगलोद), जैसलमेर, बाड़मेर | सीमेंट उद्योग, POP, क्षारीय भूमि सुधार (Soil Amendment) |
| कैल्साइट (Calcite) | 90% से अधिक | सीकर (मावंडा), सिरोही, उदयपुर, पाली | कांच, पेंट, रबर, ब्लीचिंग पाउडर |
| फेल्डस्पार (Feldspar) | 90% से अधिक | अजमेर (मकरेड़ा - 96% उत्पादन), ब्यावर, भीलवाड़ा, राजसमंद | सिरेमिक, कांच उद्योग, इनेमल |
| बेंटोनाइट (Bentonite) | शीर्ष उत्पादक | बाड़मेर (गिरल, शिव, हाथी की ढाणी), सवाई माधोपुर | तेल ड्रिलिंग मड, ढलाई उद्योग, कॉस्मेटिक्स |
| मुल्तानी मिट्टी (Fuller's Earth) | शीर्ष उत्पादक | बाड़मेर, बीकानेर, जैसलमेर | विरंजन (Bleaching), तेल शोधन, सौंदर्य प्रसाधन |
3. प्रमुख धात्विक खनिज (Metallic Minerals)
3.1 ताँबा (Copper / ताँबा भंडार व खनन)
राजस्थान ताँबा अयस्क के कुल **भंडार (Reserves) में देश में प्रथम स्थान** (लगभग 50% से अधिक भंडार) रखता है, जबकि उत्पादन में मध्य प्रदेश (मलंजखंड) के बाद **द्वितीय स्थान** पर है।- अयस्क के प्रमुख प्रकार: चालकोपायराइट ($CuFeS_2$), चालकोसाइट ($Cu_2S$), मैलाकाइट (हरा कार्बोनेट), एज्यूराइट (नीला कार्बोनेट)।
- प्रमुख खनन क्षेत्र एवं बेल्ट:
- खेतड़ी-सिंघाना ताँबा पट्टी (झुंझुनू):
- लगभग 80 किमी लंबी पट्टी।
- प्रमुख खदानें: मदन-कुदान, कोलिहान, चांदमारी, खेतड़ी।
- हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL): सार्वजनिक उपक्रम, खेतड़ी नगर में संयंत्र (1967 में स्थापित)।
- खो-दरीबा पट्टी (अलवर): अरावली की तलहटी में स्थित समृद्ध ताँबा निक्षेप।
- देलवाड़ा-केरोवली क्षेत्र (उदयपुर): उदयपुर जिले की प्राचीन तांबे की खदानें।
- पुर-बनेड़ा पट्टी (भीलवाड़ा): तांबा एवं लोहे के मिश्रित अयस्क।
- अंजनी, सलूम्बर, भगोनी (अलवर), बसंतगढ़ व पीपली (सिरोही)।
- खेतड़ी-सिंघाना ताँबा पट्टी (झुंझुनू):
3.2 सीसा-जस्ता एवं चाँदी (Lead-Zinc & Silver)
सीसा ($Pb$) और जस्ता ($Zn$) प्राकृतिक रूप से मिश्रित अयस्क **'गैलेना' (Galena - $PbS$)** और **'स्फेलेराइट' (Sphalerite - $ZnS$)** के रूप में पाए जाते हैं। इन्हें 'जुड़वां खनिज' (Twin Minerals) कहा जाता है। चाँदी प्रायः सीसा-जस्ता के शोधन के दौरान उप-उत्पाद (By-product) के रूप में प्राप्त होती है।- प्रमुख खनन पट्टियाँ एवं केंद्र:
- रामपुरा-आगुचा (भीलवाड़ा):
- विश्व की सबसे समृद्ध एवं विशाल ओपनकास्ट (खुली) जिंक खदान (वर्तमान में भूमिगत खनन भी शुरू)।
- यहाँ के अयस्क में सीसा-जस्ता का संयुक्त ग्रेड 12-14% तक है।
- जावर माइंस (उदयपुर):
- राणा लाखा (14वीं सदी) के समय से प्रसिद्ध ऐतिहासिक खदान।
- पहाड़ियां: मोचिया मगरा, बरोड़ मगरा, जावरमाला, बलारिया।
- यहाँ विश्व का सबसे प्राचीन जस्ता प्रगलन (Zinc Smelting) अवशेष मिला है।
- राजपुरा-दरीबा एवं सिंदेसर खुर्द (राजसमंद):
- सिंदेसर खुर्द देश की सबसे बड़ी और अत्याधुनिक भूमिगत चाँदी-जस्ता खदान है।
- चौथ का बरवाड़ा (सवाई माधोपुर): सीसा-जस्ता का प्रसिद्ध निक्षेप।
- गुढ़ा किशोरीदास (अलवर)।
- कायड़ एवं घूघरा (अजमेर)।
- रामपुरा-आगुचा (भीलवाड़ा):
- हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड (HZL):
- स्थापना: 10 जनवरी 1966 (मुख्यालय: उदयपुर, वर्तमान में वेदांता समूह के अंतर्गत PPP उपक्रम)।
- प्रद्रावक (Smelters):
- चंदेरिया (चित्तौड़गढ़): एशिया का सबसे बड़ा जिंक प्रद्रावक (पायरो-मेटालर्जिकल एवं हाइड्रो-मेटालर्जिकल तकनीक)।
- देबारी (उदयपुर): हाइड्रो-मेटालर्जिकल जिंक स्मेल्टर।
- दरीबा (राजसमंद): सीसा-जस्ता स्मेल्टर।
3.3 लोहा (Iron Ore)
राजस्थान में मुख्य रूप से **हेमेटाइट ($Fe_2O_3$)** एवं **मैग्नेटाइट ($Fe_3O_4$)** प्रकार का लौह अयस्क पाया जाता है।| जिला | प्रमुख लौह अयस्क खनन क्षेत्र | अयस्क का प्रकार व टिप्पणी |
|---|---|---|
| जयपुर | मोरीजा-बानोल, चौमूं, सामोद | हेमेटाइट ग्रेड (60-65% Fe), राज्य का सबसे बड़ा भंडार |
| दौसा | नीमला-रायसेला | हेमेटाइट अयस्क |
| झुंझुनू | डाबला-सिंघाना | मैग्नेटाइट व हेमेटाइट |
| उदयपुर | थूर-हुंडेर, नाथरा की पाल | ऐतिहासिक लौह खनन क्षेत्र |
| सीकर | टोडा, नीम का थाना, बागेश्वर | लौह पट्टी |
| भीलवाड़ा | पुर-बनेड़ा, तिरंगा | मैग्नेटाइट निक्षेप |
3.4 टंगस्टन (Tungsten)
* **अयस्क**: वोल्फ्रामाइट ($[Fe,Mn]WO_4$) और स्कीलाइट ($CaWO_4$)। * **विशेषता**: अत्यंत उच्च गलनांक (3422 °C), रक्षा उपकरणों, कटिंग टूल्स और बल्ब फिलामेंट में प्रयुक्त। * **प्रमुख उत्पादक क्षेत्र**: 1. **डेगाना (भाकरी पहाड़ी, नागौर)**: देश की सबसे प्रसिद्ध और पुरानी टंगस्टन खदान। हाल ही में इस क्षेत्र में लिथियम के संभावित संकेत भी मिले हैं। 2. **नाना-कराब (पाली)**। 3. **वाल्दा एवं आबू-रेवदर (सिरोही)**।3.5 मैंगनीज (Manganese)
* **अयस्क**: पाइरोलुसाइट ($MnO_2$) एवं साइलोमिलेन। * **उपयोग**: इस्पात उद्योग (स्टील निर्माण में सल्फर हटाने और मजबूती देने हेतु)। * **प्रमुख उत्पादक जिला**: **बांसवाड़ा**। * प्रमुख खदानें: **लीलवाणी, तलवाड़ा, तलवंडी, सागवा, कालाखूंटा, कांसला, घटिया**।3.6 स्वर्ण (Gold)
* **आनंदपुरी-भूखिया एवं जगपुरा (बांसवाड़ा)**: राजस्थान में स्वर्ण अयस्क के विशालतम प्रमाणित भंडार। * राज्य सरकार द्वारा हाल ही में देश के प्रथम कमर्शियल गोल्ड माइनिंग ब्लॉक की ई-नीलामी संपन्न की गई है। * **धानी बासड़ी (दौसा)** एवं **खेड़ा-मुंडियावास (अलवर)**।3.7 यूरेनियम एवं परमाणु खनिज (Atomic Minerals)
* **रोहिल (खंडेला, सीकर)**: भारत में झारखंड के जादूगोड़ा और आंध्र प्रदेश के तुम्मालापल्ले के बाद यूरेनियम का विशाल भंडार। * **उमरा (उदयपुर)**: प्रारंभिक यूरेनियम निक्षेप। * **बेरिलियम**: बांदरसिंदरी (अजमेर), शिकारबाड़ी (उदयपुर)।4. प्रमुख अधात्विक खनिज (Non-Metallic Minerals)
4.1 रॉक फॉस्फेट (Rock Phosphate)
* **उपयोग**: रासायनिक उर्वरक उद्योग (डीएसपी/एसएसपी उर्वरक), पशु आहार, डिटर्जेंट। * **प्रमुख क्षेत्र**: 1. **झामरकोटड़ा (उदयपुर)**: * भारत की सबसे बड़ी और समृद्ध रॉक फॉस्फेट खदान। * यहाँ उच्च श्रेणी के अयस्क के साथ-साथ निम्न श्रेणी के अयस्क को शुद्ध करने हेतु **बेनिफिसिएशन प्लांट (Beneficiation Plant)** स्थापित है। * RSMML द्वारा संचालित। 2. **बिरमानिया ও लाठी (जैसलमेर)**। 3. **माटून, कानपुरा (उदयपुर)**। 4. **अचरोल (जयपुर)**।4.2 जिप्सम (Gypsum / हर्साेंथ / सेलखड़ी / सेलेनाइट)
* **रासायनिक नाम**: हाइड्रेटेड कैल्शियम सल्फेट ($CaSO_4 \cdot 2H_2O$)। * **उपयोग**: * सीमेंट उद्योग में सेटिंग समय नियंत्रित करने हेतु (Retarder)। * प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP), सर्जिकल कास्ट। * **क्षारीय/ऊसर भूमि सुधार (Alkaline Soil Amendment)**: सोडियम लवणों को निष्प्रभावी करने के लिए। * **प्रमुख खनन क्षेत्र**: 1. **बीकानेर**: **जामसर** (भारत का सबसे बड़ा जिप्सम निक्षेप), लूणकरणसर, बरसिंहसर। 2. **नागौर**: **बड़वासी, मंगलोद, भदवासी, गोठ-मांगलोद**। 3. **जैसलमेर**: मोहनगढ़, हमीरवाली ढाणी। 4. **बाड़मेर**: कवास, उत्तरलाई, शिव। 5. **श्रीगंगानगर/हनुमानगढ़**: किशनपुरा, सूरतगढ़।4.3 अभ्रक (Mica)
* **अयस्क**: मस्कोवाइट (सफेद अभ्रक - रूबी माइका) और बायोटाइट (काला अभ्रक)। * **विशेषता**: विद्युत और ताप का उत्तम कुचालक (Insulator)। * **प्रमुख उत्पादक**: * **भीलवाड़ा**: 'अभ्रक नगरी' (Mica City) के रूप में विख्यात। यहाँ **अभ्रक की ईंटें बनाने का कारखाना** स्थापित है। * प्रमुख खदानें: **दांता, भुणास, बनेड़ा, टूंकिया, शाहपुरा**। * अजमेर व उदयपुर में भी सीमित निक्षेप।4.4 रत्न एवं अर्ध-कीमती पत्थर
1. **पन्ना / हरी अग्नि (Emerald)**: * बेरिलियम और क्रोमियम युक्त हरा रत्न। * **पन्ना बेल्ट (Emerald Belt)**: उदयपुर से अजमेर तक विस्तृत (लगभग 221 किमी)। * प्रमुख क्षेत्र: **कालागुमान (राजसमंद - 1943 में प्रथम खोज)**, टिक्की, गामगुड़ा, राजगढ़ (अजमेर)। 2. **तामड़ा / रक्तमणि / गार्नेट (Garnet)**: * लाल रंग का कीमती खनिज। * दो किस्में: जेम गार्नेट (रत्न) एवं एब्रेसिव गार्नेट (अपघर्षक)। * प्रमुख क्षेत्र: **राजमहल, जनकपुरा, कुशालपुरा (टोंक)**; **सरवाड़ (अजमेर)**।4.5 सोपस्टोन / घिया पत्थर (Steatite / Talc)
* **विशेषता**: मोड्स कठोरता पैमाने पर सबसे कोमल खनिज (कठोरता = 1)। * **उपयोग**: टैल्कम पाउडर, कीटनाशक वाहक, सिरेमिक, कागज और रबर उद्योग। * **प्रमुख क्षेत्र**: **देवपुरा, गेवरिया (भीलवाड़ा)**, ऋषभदेव (उदयपुर), डागोटा-झरना (जयपुर/दौसा), डूंगरपुर।5. भवन निर्माण एवं सजावटी पत्थर (Building & Dimension Stones)
राजस्थान देश में विभिन्न रंगों और उत्कृष्ट गुणवत्ता वाले सजावटी पत्थरों (मार्बल, ग्रेनाइट, सैंडस्टोन) का सिरमौर राज्य है।
5.1 संगमरमर (Marble)
राजस्थान भारत के कुल संगमरमर उत्पादन का **90% से अधिक** योगदान देता है।| संगमरमर की किस्म / रंग | प्रमुख खनन क्षेत्र एवं जिला | विशेष टिप्पणी |
|---|---|---|
| सफेद संगमरमर (कैलसिटिक) | मकराना (डीडवाना-कुचामन / नागौर) | विश्वप्रसिद्ध; आगरा के ताजमहल और कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरियल में प्रयुक्त |
| हरा संगमरमर (Serpentine) | ऋषभदेव (उदयपुर), डूंगरपुर | अंतरराष्ट्रीय बाजार में अत्यधिक मांग |
| काला संगमरमर | भैंसलाना (कोटपूतली-बहरोड़ / जयपुर) | मूर्तिकला एवं फर्श में प्रयुक्त |
| गुलाबी संगमरमर | बाबरमल (उदयपुर), जालौर | सजावटी उपयोग |
| पीला संगमरमर | जैसलमेर | सुंदर नक्काशीदार हवेलियों में प्रयुक्त |
| बादामी संगमरमर | जोधपुर | स्थानीय स्थापत्य में बहुतायत |
| सतरंगी संगमरमर | खांदरा (पाली) | सात रंगों की मिश्रित छटा |
| भैंसिया/लहरदार संगमरमर | राजसमंद | राजस्थान में संगमरमर का सर्वाधिक उत्पादन राजसमंद जिले में होता है |
- किशनगढ़ (अजमेर): एशिया की सबसे बड़ी मार्बल मंडी।
5.2 ग्रेनाइट (Granite)
* **जालौर**: **'ग्रेनाइट सिटी' (Granite City)** के नाम से प्रसिद्ध। यहाँ गुलाबी एवं मरकरी रेड ग्रेनाइट पाया जाता है। * **काला ग्रेनाइट**: कालाडेरा (जयपुर), सिवाना (बालोतरा/बाड़मेर)। * **पीला ग्रेनाइट**: पीथलपुर (जैसलमेर)।5.3 चूना पत्थर (Limestone)
चूना पत्थर का वर्गीकरण उपयोग के आधार पर तीन ग्रेडों में किया जाता है: 1. **सीमेंट ग्रेड (Cement Grade)**: चित्तौड़गढ़ (राजस्थान की सीमेंट राजधानी), सिरोही, नागौर, कोटा, बूंदी। 2. **केमिकल ग्रेड (Chemical Grade)**: **गोटन (नागौर)**, जोधपुर, बिलाड़ा। 3. **स्टील / एसएमएस ग्रेड (Steel Melting Shop Grade)**: **सानू (जैसलमेर)** — सेल (SAIL) और टिस्को (TISCO) के इस्पात कारखानों को आपूर्ति।5.4 बलुआ पत्थर (Sandstone)
* **लाल बलुआ पत्थर (Red Sandstone)**: **धौलपुर एवं करौली**। दिल्ली के लाल किले, राष्ट्रपति भवन और संसद भवन में प्रयुक्त। * **पीला व बादामी सैंडस्टोन**: जोधपुर एवं जैसलमेर। * **कोटा स्टोन (Kota Stone)**: रामगंजमंडी (कोटा), झालावाड़। यह चूना पत्थर आधारित कठोर फर्श का पत्थर है।6. ऊर्जा खनिज: लिग्नाइट, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस
6.1 लिग्नाइट कोयला (Lignite Coal)
राजस्थान में कोयले का केवल **लिग्नाइट (भूरा कोयला - Tertiary Period)** प्रकार पाया जाता है।- प्रमुख बेसिन एवं खदानें:
- बीकानेर बेसिन:
- पलाना: विश्व में सर्वश्रेष्ठ गुणवत्ता वाले लिग्नाइट भंडारों में से एक (उच्च कैलोरी मान)।
- बरसिंगसर: NLC (नेवेली लिग्नाइट कॉर्पोरेशन) द्वारा तापीय विद्युत परियोजना संचालित।
- बीठनोक, गुढ़ा, रानेरी।
- बाड़मेर बेसिन:
- कपूरड़ी एवं जालीपा: राजवेस्ट पावर लिमिटेड के तापीय संयंत्र को आपूर्ति।
- गिरल: राजस्थान का प्रथम लिग्नाइट गैसीकरण तकनीक आधारित बिजली घर।
- भादरेश, गुड़ामालानी।
- नागौर बेसिन:
- मेड़ता रोड, कसनऊ-इग्यार, मातासुख, इंदावर।
- बीकानेर बेसिन:
6.2 हाइड्रोकार्बन एवं पेट्रोलियम (Crude Oil)
राजस्थान वर्तमान में भारत में बॉम्बे हाई (अपतटीय) के बाद **घरेलू कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य** (ऑनशोर यानी थलीय उत्पादन में देश में प्रथम) है, जो कुल घरेलू उत्पादन का लगभग **20% से अधिक** योगदान देता है।-
राजस्थान के चार प्रमुख पेट्रोलिफेरस बेसिन (Petroliferous Basins):
- ये बेसिन राज्य के 14 जिलों में लगभग 1,50,000 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले हैं:
- बाड़मेर-सांचौर बेसिन: बाड़मेर एवं जालौर/सांचौर जिले। (सर्वाधिक उत्पादक)।
- जैसलमेर बेसिन: जैसलमेर जिला (मुख्यतः भारी गैस एवं तेल)।
- बीकानेर-नागौर बेसिन: बीकानेर, नागौर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू। (भारी तेल/हैवी ऑयल - बाघेवाला)।
- विंध्यन बेसिन: कोटा, बारां, बूंदी, झालावाड़, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़।
-
प्रमुख तेल क्षेत्र (बाड़मेर-सांचौर बेसिन):
- मंगला तेल क्षेत्र (Mangala Oil Field):
- जनवरी 2004 में खोजा गया।
- 29 अगस्त 2009 को व्यावसायिक उत्पादन प्रारंभ।
- अन्य प्रमुख कुएं: भाग्यम, ऐश्वर्या, शक्ति, सरस्वती, रागेश्वरी, कामेश्वरी, विजया, वंदना।
- उत्खनन कंपनी: केयर्न वेदांता (Cairn Oil & Gas) तथा ओएनजीसी (ONGC)।
- मंगला तेल क्षेत्र (Mangala Oil Field):
6.3 बाड़मेर पेट्रोकेमिकल रिफाइनरी (HPCL Rajasthan Refinery Ltd. - HRRL)
* **स्थान**: **पचपदरा (बालोतरा जिला)**। * **संयुक्त उपक्रम (Joint Venture)**: * **HPCL (हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड)**: **74% हिस्सेदारी**। * **राजस्थान सरकार (GoR)**: **26% हिस्सेदारी**। * **क्षमता**: **9 MMTPA (मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष)**। * **मानक**: देश की पहली एकीकृत रिफाइनरी सह पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स जो सीधे **BS-VI उत्सर्जन मानक** ईंधन का उत्पादन करेगी।6.4 प्राकृतिक गैस (Natural Gas)
* **प्रमुख गैस क्षेत्र (जैसलमेर बेसिन)**: * **तनोट, डांडेवाला, साधेवाला**। * **घोटारू**: यहाँ प्राकृतिक गैस के साथ **हीलियम (Helium)** गैस के भंडार पाए गए हैं। * **मनिहारी टिब्बा, बाघेवाला, चिन्नेवाला**। * **रामगढ़ (जैसलमेर)**: राजस्थान का प्रथम गैस आधारित विद्युत गृह (Gas Thermal Power Plant)। * **रागेश्वरी डीप गैस (बाड़मेर)**: उच्च दबाव वाली गहरी प्राकृतिक गैस।7. राजस्थान की खनिज नीतियां एवं विधिक ढांचा
7.1 खनिज नीतियों का कालानुक्रमिक विकास
1. **प्रथम खनिज नीति (1978)**: * तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत के कार्यकाल में घोषित। * राजस्थान देश में अपनी स्वतंत्र खनिज नीति घोषित करने वाला अग्रणी राज्य बना। 2. **द्वितीय खनिज नीति (1994)**: * निजी क्षेत्र की भागीदारी और आधुनिक तकनीक के उपयोग पर बल। 3. **तृतीय खनिज नीति (2011)**: * पर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक खनन तथा मूल्य संवर्धन (Value Addition) पर केंद्रित। 4. **नवीनतम राजस्थान खनिज नीति (4 जून 2015)**: * **उद्देश्य**: अप्रधान व प्रधान खनिजों के खनन पट्टों की नीलामी ई-ऑक्शन (E-Auction) के माध्यम से करना, राजस्व में वृद्धि, अवैध खनन की रोकथाम। * खनन पट्टों की अवधि बढ़ाकर 50 वर्ष की गई।7.2 एम-सैंड नीति 2020 (M-Sand Policy - Manufactured Sand)
* **अधिसूचना तिथि**: **25 जनवरी 2021** (नीति 2020)। * **पृष्ठभूमि**: नदियों से बजरी (River Sand) के अनियंत्रित दोहन पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा लगाई गई रोक के बाद विकल्प के रूप में। * **प्रमुख प्रावधान**: * खदानों के वेस्ट एवं पत्थरों को क्रशर द्वारा पीसकर तैयार रेत (M-Sand) को उद्योग का दर्जा। * **सरकारी निर्माण कार्यों में न्यूनतम 25% एम-सैंड का उपयोग अनिवार्य** किया गया।8. पर्यावरणीय प्रभाव, सिलिकोसिस एवं सतत खनन
8.1 खनन के पर्यावरणीय दुष्प्रभाव एवं अरावली संरक्षण
* **अरावली पर्वतमाला में क्षरण**: अवैध खनन के कारण अरावली के 128 में से 31 पहाड़ी अंतराल (Gaps) क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे थार मरुस्थल का पूर्व की ओर प्रसार बढ़ा है। * **सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश**: अरावली पहाड़ियों में वाणिज्यिक खनन पर समय-समय पर प्रतिबंध तथा 1 किमी का अनिवार्य इको-सेंसिटिव जोन (ESZ)। * **जल संदूषण व टेलिंग्स**: मार्बल स्लरी (Marble Slurry) से भूमि बंजर होना (किशनगढ़ डंपिंग यार्ड) तथा जिंक-कॉपर टेलिंग्स से भूजल में भारी धातुओं का निक्षालन।8.2 राजस्थान सिलिकोसिस नीति 2019 (Rajasthan Silicosis Policy)
खनन एवं पत्थर तराशने के कार्य में लगे श्रमिकों में सिलिका धूल के फेफड़ों में जमने से होने वाली लाइलाज बीमारी 'सिलिकोसिस' से बचाव एवं राहत हेतु: * **लागू होने की तिथि**: **3 अक्टूबर 2019**। * **ऐतिहासिक पहल**: सिलिकोसिस पर स्वतंत्र नीति लागू करने वाला राजस्थान **देश का पहला राज्य** बना। * **वित्तीय सहायता प्रावधान**: 1. न्यूमोकोनियोसिस बोर्ड द्वारा सिलिकोसिस प्रमाणीकरण पर: **₹3 लाख** की एकमुश्त सहायता। 2. सिलिकोसिस से पीड़ित की मृत्यु होने पर: **₹2 लाख** आश्रितों को। 3. अंतिम संस्कार हेतु: **₹10,000** की सहायता। 4. पीड़ित व्यक्ति को जीवित रहने तक: **₹1,500 प्रतिमाह पेंशन**। 5. विधवा पेंशन एवं पालनहार योजना का स्वतः लाभ।9. परीक्षा दृष्टि: मास्टर रिवीजन तुलना सारणी (Master Comparative Tables)
सारणी 1: खनिज, प्रमुख खनन केंद्र एवं जिले
| खनिज | प्रमुख खनन स्थल (स्थान / खान) | जिला | |---|---|---| | ताँबा (Copper) | खेतड़ी, कोलिहान, चांदमारी, मदन-कुदान | झुंझुनू | | ताँबा | खो-दरीबा, भगोनी | अलवर | | सीसा-जस्ता (Lead-Zinc) | रामपुरा-आगुचा | भीलवाड़ा | | सीसा-जस्ता व चाँदी | जावर माइंस (मोचिया मगरा, बरोड़ मगरा) | उदयपुर | | सीसा-जस्ता व चाँदी | राजपुरा-दरीबा, सिंदेसर खुर्द | राजसमंद | | सीसा-जस्ता | चौथ का बरवाड़ा | सवाई माधोपुर | | टंगस्टन (Tungsten) | डेगाना (भाकरी पहाड़ी) | नागौर | | टंगस्टन | वाल्दा, आबू-रेवदर | सिरोही | | रॉक फॉस्फेट (Rock Phosphate) | झामरकोटड़ा, माटून | उदयपुर | | रॉक फॉस्फेट | बिरमानिया | जैसलमेर | | जिप्सम (Gypsum) | जामसर, लूणकरणसर | बीकानेर | | जिप्सम | बड़वासी, गोठ-मांगलोद | नागौर | | वोलैस्टोनाइट (Wollastonite) | खिल्ला, बेलका पहाड़ | सिरोही | | तामड़ा / गार्नेट (Garnet) | राजमहल, जनकपुरा | टोंक | | पन्ना (Emerald) | कालागुमान, टिक्की | राजसमंद | | लिग्नाइट (Lignite) | पलाना, बरसिंगसर, गुढ़ा | बीकानेर | | लिग्नाइट | कपूरड़ी, जालीपा, गिरल | बाड़मेर | | कच्चा तेल (Petroleum) | मंगला, भाग्यम, ऐश्वर्या, सरस्वती | बाड़मेर / बालोतरा | | प्राकृतिक गैस (Natural Gas) | तनोट, डांडेवाला, घोटारू, मनिहारी टिब्बा | जैसलमेर | | रासायनिक चूना पत्थर | गोटन | नागौर | | स्टील एसएमएस चूना पत्थर | सानू | जैसलमेर | | सफेद संगमरमर | मकराना | डीडवाना-कुचामन / नागौर | | हरा संगमरमर | ऋषभदेव | उदयपुर | | पीला संगमरमर | मूल सागर, काठोड़ी | जैसलमेर |10. राजस्थान का जिलावार प्रमुख खनिज वितरण (District-wise Mineral Matrix)
राजस्थान के विभिन्न जिलों में विशिष्ट भूगर्भीय संरचनाओं के कारण खनिजों का सघन वितरण पाया जाता है। प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर जिला-खनिज सुमेलन पर प्रश्न पूछे जाते हैं। निम्नलिखित सारणी में राज्य के प्रमुख जिलों और उनके विशिष्ट खनिजों का समग्र विवरण दिया गया है:
| जिला / संभाग | प्रमुख धात्विक खनिज | प्रमुख अधात्विक खनिज | प्रमुख सजावटी / औद्योगिक पत्थर |
|---|---|---|---|
| उदयपुर | सीसा-जस्ता व चाँदी (जावर माइंस), ताँबा (देलवाड़ा-केरोवली), लोहा (थूर-हुंडेर, नाथरा की पाल) | रॉक फॉस्फेट (झामरकोटड़ा, माटून), एस्बेस्टॉस (ऋषभदेव, खेरवाड़ा), सोपस्टोन | हरा संगमरमर (ऋषभदेव), गुलाबी संगमरमर (बाबरमल), चूना पत्थर |
| भीलवाड़ा | सीसा-जस्ता (रामपुरा-आगुचा), लोहा (तिरंगा, पुर-बनेड़ा), ताँबा | अभ्रक (दांता, भुणास, शाहपुरा), सोपस्टोन (गेवरिया, देवपुरा), क्वार्ट्ज | ग्रेनाइट, बलुआ पत्थर |
| राजसमंद | सीसा-जस्ता व चाँदी (राजपुरा-दरीबा, सिंदेसर खुर्द) | पन्ना (कालागुमान, टिक्की, गामगुड़ा) | सर्वाधिक संगमरमर उत्पादन, सफेद व बादामी मार्बल, ग्रेनाइट |
| झुंझुनू | ताँबा (खेतड़ी, कोलिहान, चांदमारी, मदन-कुदान), लोहा (डाबला-सिंघाना) | कैल्साइट, फ्लोराइट | ग्रेनाइट |
| अलवर | ताँबा (खो-दरीबा, भगोनी), सीसा-जस्ता (गुढ़ा किशोरीदास) | बैराइट्स, संगमरमर | स्लेट पत्थर (बहरोड़), काला संगमरमर (भैंसलाना समीप) |
| नागौर / डीडवाना | टंगस्टन (डेगाना - भाकरी पहाड़ी) | जिप्सम (बड़वासी, मंगलोद, भदवासी), लिग्नाइट (मेड़ता रोड, कसनऊ-इग्यार) | सफेद कैल्साइट संगमरमर (मकराना), केमिकल चूना पत्थर (गोटन) |
| बीकानेर | — | जिप्सम (जामसर - सबसे बड़ा भंडार, लूणकरणसर), सेलेनाइट, मुल्तानी मिट्टी, बॉल क्ले, फायर क्ले | लिग्नाइट कोयला (पलाना, बरसिंगसर, गुढ़ा, बीठनोक) |
| बाड़मेर / बालोतरा | — | बेंटोनाइट (गिरल, हाथी की ढाणी), जिप्सम (कवास, उत्तरलाई), फुलर अर्थ | खनिज तेल (मंगला, भाग्यम, ऐश्वर्या), लिग्नाइट (कपूरड़ी, जालीपा, गिरल), सिवाना काला ग्रेनाइट |
| जैसलमेर | — | रॉक फॉस्फेट (बिरमानिया, लाठी), जिप्सम (मोहनगढ़) | प्राकृतिक गैस (तनोट, डांडेवाला, घोटारू), पीला संगमरमर व सैंडस्टोन, स्टील ग्रेड चूना पत्थर (सानू) |
| सिरोही | टंगस्टन (वाल्दा, आबू-रेवदर), ताँबा (बसंतगढ़, पीपली) | वोलैस्टोनाइट (खिल्ला, बेलका पहाड़), कैल्साइट | सीमेंट ग्रेड चूना पत्थर, ग्रेनाइट |
| टोंक | — | तामड़ा / गार्नेट (राजमहल, जनकपुरा, कल्याणपुरा), क्वार्ट्ज, फेल्डस्पार | अभ्रक |
| बांसवाड़ा | मैंगनीज (लीलवाणी, तलवाड़ा, सागवा, कालाखूंटा), स्वर्ण (आनंदपुरी-भूखिया, जगपुरा) | सोपस्टोन, ग्रेफाइट (घाटोली) | हरा व सफेद संगमरमर |
| सीकर | यूरेनियम (रोहिल - खंडेला), लोहा (टोडा, बागेश्वर), ताँबा (बालेश्वर) | कैल्साइट (मावंडा), पाइराइट्स (सलादीपुरा) | संगमरमर |
| अजमेर / ब्यावर | सीसा-जस्ता (कायड़, घूघरा) | फेल्डस्पार (मकरेड़ा - 96% उत्पादन), क्वार्ट्ज, तामड़ा (सरवाड़), एस्बेस्टॉस | मार्बल मंडी (किशनगढ़), वर्मीकुलाइट |
| जालौर / सांचौर | — | फ्लोराइट (जालौर) | गुलाबी व मरकरी रेड ग्रेनाइट ('ग्रेनाइट सिटी') |
| चित्तौड़गढ़ | सीसा-जस्ता (चंदेरिया स्मेल्टर) | ऑकर (गेरू) | सीमेंट ग्रेड चूना पत्थर (राजस्थान की सीमेंट राजधानी) |
| धौलपुर / करौली | — | सिलिका सैंड | लाल बलुआ पत्थर (Red Sandstone) |
| कोटा / झालावाड़ | — | — | कोटा स्टोन (रामगंजमंडी), चूना पत्थर, विंध्यन सैंडस्टोन |
11. खनिज-आधारित प्रमुख उद्योग एवं प्रद्रावक (Mineral-Based Industries & Smelters)
राजस्थान के समृद्ध खनिज भंडार राज्य के औद्योगिक परिदृश्य की रीढ़ हैं। सीमेंट, प्रगलन, उर्वरक, तेल शोधन और ताप विद्युत उद्योग खनिजों पर प्रत्यक्ष रूप से निर्भर हैं: