भारतीय एवं राजस्थान जनगणना: इतिहास, विधिक ढाँचा एवं कोडिंग आर्किटेक्चर GK
भाग - 1: भारतीय जनगणना: इतिहास, विधिक ढाँचा एवं कोडिंग आर्किटेक्चर#
विस्तृत विषय-सूची#
| खंड |
विषय |
परीक्षा में महत्व |
| 1.1 |
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं क्रमिक विकास |
★★★★★ |
| 1.2 |
जनगणना 2011: प्रशासनिक रूपरेखा एवं कार्यप्रणाली |
★★★★★ |
| 1.3 |
जनगणना कोडिंग प्रणाली (MDDS) |
★★★★★ |
| 1.4 |
परीक्षा-उपयोगी मुख्य बिंदु |
★★★★★ |
📖 1.1 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं क्रमिक विकास
जनगणना केवल जनसंख्या की गणना मात्र नहीं है, बल्कि यह किसी राष्ट्र के आर्थिक, सामाजिक, जनसांख्यिकीय एवं सांस्कृतिक विकास का प्रामाणिक दस्तावेज़ होती है।
[भारतीय जनगणना का ऐतिहासिक कालक्रम]
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[प्राचीन एवं मध्यकाल] [ब्रिटिश काल (1872-1881)] [स्वतंत्र भारत (1948-वर्तमान)]
• कौटिल्य का अर्थशास्त्र • 1872: लॉर्ड मेयो (प्रथम प्रयास) • 1948: जनगणना अधिनियम पारित
• आईन-ए-अकबरी (अबुल फजल) • 1881: लॉर्ड रिपन (प्रथम समकालिक) • 1949: स्थायी ORGI स्थापित
1. प्राचीन एवं मध्यकालीन साक्ष्य#
| स्रोत |
काल |
मुख्य विशेषताएँ |
| कौटिल्य का 'अर्थशास्त्र' |
321-296 ई.पू. |
भारत में राज्य-संचालित प्रशासनिक गणना का प्राचीनतम लिखित प्रमाण। इसमें कराधान नीतियों, सैन्य क्षमता के आकलन और राज्य के संसाधनों के सटीक नियोजन हेतु ग्राम स्तर पर जनसंख्या, व्यवसाय एवं पशुधन का नियमित विवरण दर्ज करने का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। |
| अबुल फजल कृत 'आईन-ए-अकबरी' |
1595-96 ई. |
मुगल सम्राट अकबर के शासनकाल में तैयार यह ग्रंथ मध्यकाल में जनसांख्यिकी का प्रमुख स्रोत है। इसमें प्रशासनिक नफरी, राजस्व आकलन और श्रमशक्ति के विस्तृत आंकड़े संकलित किए गए थे। |
2. आधुनिक युग का सूत्रपात (ब्रिटिश काल)#
| वर्ष |
घटना |
विवरण |
| 1872 |
भारत की प्रथम जनगणना |
वायसराय: लॉर्ड मेयो। प्रकृति: यह एक प्रायोगिक, आंशिक एवं गैर-समकालिक जनगणना थी, जो देश के विभिन्न प्रांतों में अलग-अलग समय पर आयोजित की गई थी (अतः इसे भारत की पहली पूर्ण जनगणना नहीं माना जाता)। |
| 1881 |
प्रथम पूर्ण समकालिक दशकीय जनगणना |
वायसराय: लॉर्ड रिपन — इन्हें भारत में स्थानीय स्वशासन एवं आधुनिक जनगणना का जनक माना जाता है। प्रथम जनगणना आयुक्त: डब्ल्यू. सी. प्लाउडेन। प्रकृति: 17 फरवरी 1881 को संपूर्ण ब्रिटिश भारत में एक साथ नियमित दशकीय जनगणना प्रारंभ हुई। यहीं से प्रति 10 वर्ष के अंतराल पर नियमित जनगणना की अटूट परंपरा स्थापित हुई। |
3. स्वतंत्रता उपरांत विधिक एवं संस्थागत ढाँचा#
| संवैधानिक / विधिक घटक |
प्रावधान एवं विवरण |
प्रतियोगी परीक्षा हेतु महत्व |
| संवैधानिक स्थिति |
भारतीय संविधान की 7वीं अनुसूची के अंतर्गत जनगणना संघ सूची का विषय है (प्रविष्टि संख्या 69)। |
राज्यों को जनगणना कराने का विधायी अधिकार नहीं है; यह पूर्णतः केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में है। |
| वैधानिक आधार |
भारतीय जनगणना अधिनियम, 1948 — तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की पहल पर संसद द्वारा पारित। |
यह अधिनियम जनगणना अधिकारियों को विधिक शक्तियाँ, नागरिकों द्वारा जानकारी देने की अनिवार्यता तथा आंकड़ों की पूर्ण गोपनीयता की गारंटी देता है। |
| नोडल प्रशासनिक संस्था |
गृह मंत्रालय (MHA), भारत सरकार के अधीन महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त, भारत (ORGI)। |
वर्ष 1949 में इस स्थायी कार्यालय की स्थापना हुई। इससे पूर्व प्रत्येक जनगणना के समय अस्थायी आयुक्त नियुक्त किए जाते थे। |
📖 1.2 जनगणना 2011: प्रशासनिक रूपरेखा एवं कार्यप्रणाली
जनगणना 2011 भारत की 15वीं राष्ट्रीय जनगणना तथा 1947 में स्वतंत्रता के उपरांत 7वीं जनगणना थी।
1. प्रशासनिक एवं परिचालन तथ्य#
| घटक |
आधिकारिक विवरण |
| भारत के तत्कालीन जनगणना आयुक्त |
डॉ. सी. चंद्रमौली |
| राजस्थान के जनगणना कार्य निदेशक |
श्रीमती शुभ्रा सिंह (IAS) |
| आधिकारिक ध्येय वाक्य |
"हमारी जनगणना, हमारा भविष्य" |
| आधिकारिक शुभंकर |
प्रगणक शिक्षिका — हाथ में बस्ता एवं प्रपत्र लिए हुए। |
| संदर्भ तिथि |
1 मार्च 2011 (रात्रि 00:00 बजे) |
2. गणना के दो चरण#
[चरण - 1] मकान सूचीकरण एवं आवास गणना (अप्रैल - सितम्बर 2010)
• राजस्थान में अवधि: 15 मई से 30 जून 2010
• प्रत्येक भवन का नंबर, निर्माण सामग्री, पेयजल, बिजली व परिसंपत्तियों की मैपिंग
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[चरण - 2] मुख्य जनसंख्या गणना (9 फरवरी - 28 फरवरी 2011)
• व्यक्तिगत जनसांख्यिकीय, सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक व वैवाहिक स्थिति की प्रविष्टि
• पुनरीक्षण दौर: 1 से 5 मार्च 2011 (जन्म/मृत्यु का समायोजन)
3. गणना पद्धति: विस्तारित वास्तविक पद्धति#
| पद्धति |
विवरण |
| वास्तविक पद्धति |
व्यक्ति गणना की रात को भौतिक रूप से जहाँ मौजूद है, वहीं उसकी गिनती की जाती है। |
| विधिक पद्धति |
व्यक्ति की गणना केवल उसके स्थायी कानूनी निवास स्थल पर की जाती है। |
| विस्तारित वास्तविक पद्धति (भारत द्वारा स्वीकृत) |
भारत में इसी संकर पद्धति का उपयोग किया जाता है। इसके तहत प्रगणक 20 दिन की अवधि में घर-घर जाकर सामान्य निवासियों की गणना करते हैं, और पुनरीक्षण दौर (1-5 मार्च) में उस अवधि के दौरान हुए जन्म एवं मृत्यु को समायोजित कर 1 मार्च की संदर्भ तिथि के अनुसार जनसंख्या को स्थिर करते हैं। |
📖 1.3 जनगणना कोडिंग प्रणाली
जनगणना 2011 में देश के प्रशासनिक विभाजनों को कम्प्यूटरीकृत प्रसंस्करण और भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) के अनुकूल बनाने हेतु मेटाडाटा एवं डायरेक्टरी प्रणाली (MDDS) लागू की गई।
1. पदानुक्रमिक कोड संरचना#
[राष्ट्रीय कोड] ──> [राज्य कोड] ──> [जिला कोड] ──> [तहसील/उप-जिला कोड] ──> [गाँव/वार्ड कोड]
(भारत: 00) (राजस्थान: 08) (01 से 33) (5-अंकीय कोड) (6-अंकीय कोड)
| कोड प्रकार |
विवरण |
| राज्य कोड |
भारत के सभी राज्यों को उत्तर से दक्षिण दिशा के भौगोलिक क्रम में 2-अंकीय कोड दिए गए: 01 = जम्मू-कश्मीर, 02 = हिमाचल प्रदेश, 03 = पंजाब, 04 = चंडीगढ़, 05 = उत्तराखंड, 06 = हरियाणा, 07 = दिल्ली, 08 = राजस्थान। |
2. राजस्थान के सभी 33 जिलों की आधिकारिक जनगणना 2011 कोडिंग सूची#
जनगणना 2011 के समय राजस्थान में 33 जिले थे। उत्तर से दक्षिण तथा पश्चिम से पूर्व के भौगोलिक क्रम में प्रत्येक जिले को आवंटित 2-अंकीय आधिकारिक कोड निम्नवत हैं:
| जिला कोड |
जिले का नाम |
जिला कोड |
जिले का नाम |
जिला कोड |
जिले का नाम |
| 01 |
श्रीगंगानगर |
12 |
जयपुर |
23 |
बूँदी |
| 02 |
हनुमानगढ़ |
13 |
सीकर |
24 |
भीलवाड़ा |
| 03 |
बीकानेर |
14 |
नागौर |
25 |
राजसमंद |
| 04 |
चूरू |
15 |
जोधपुर |
26 |
डूंगरपुर |
| 05 |
झुंझुनूं |
16 |
जैसलमेर |
27 |
बांसवाड़ा |
| 06 |
अलवर |
17 |
बाड़मेर |
28 |
चित्तौड़गढ़ |
| 07 |
भरतपुर |
18 |
जालौर |
29 |
कोटा |
| 08 |
धौलपुर |
19 |
सिरोही |
30 |
बारां |
| 09 |
करौली |
20 |
पाली |
31 |
झालावाड़ |
| 10 |
सवाई माधोपुर |
21 |
अजमेर |
32 |
उदयपुर |
| 11 |
दौसा |
22 |
टोंक |
33 |
प्रतापगढ़ (नवीनतम जिला) |
📖 1.4 परीक्षा-उपयोगी मुख्य बिंदु
| बिंदु |
विवरण |
| प्रथम जिला vs अंतिम जिला |
कोड 01 = श्रीगंगानगर (राज्य का उत्तरी छोर)। कोड 33 = प्रतापगढ़ (26 जनवरी 2008 को गठित राज्य का 33वाँ जिला, जो 2011 की जनगणना में पहली बार पृथक जिले के रूप में शामिल हुआ)। |
| राजधानी एवं संभाग कोड |
राजधानी जयपुर का जिला कोड = 12। पश्चिमी संभाग जोधपुर का कोड = 15। पूर्वी सीमांत धौलपुर का कोड = 08 (नोट: राज्य कोड भी 08 है और धौलपुर जिले का कोड भी 08 है)। |
| गोपनीयता का विधिक संरक्षण |
जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 15 के तहत प्रगणक द्वारा एकत्र की गई व्यक्तिगत जानकारी गोपनीय होती है। यह सूचना किसी न्यायालय में साक्ष्य के रूप में भी तलब नहीं की जा सकती। |
| विभाजक वर्ष |
वर्ष 1921 को भारतीय जनसांख्यिकी के इतिहास में "महान जनसांख्यिकीय विभाजक वर्ष" कहा जाता है, क्योंकि इस दशक (1911-1921) में भारत (-0.31%) और राजस्थान (-6.29%) दोनों में जनसंख्या की ऋणात्मक वृद्धि दर्ज की गई थी। |
परीक्षा पुनरावृत्ति#
प्राचीन साक्ष्य: कौटिल्य का अर्थशास्त्र (321-296 ई.पू., ग्राम स्तर पर जनसंख्या व पशुधन गणना) -> मध्यकालीन साक्ष्य: अबुल फजल कृत आईन-ए-अकबरी (1595-96 ई., प्रशासनिक नफरी व श्रमशक्ति) -> प्रथम जनगणना: 1872 (लॉर्ड मेयो, प्रायोगिक व गैर-समकालिक) -> प्रथम पूर्ण समकालिक दशकीय जनगणना: 1881 (17 फरवरी 1881, लॉर्ड रिपन - आधुनिक जनगणना के जनक, प्रथम आयुक्त: डब्ल्यू.सी. प्लाउडेन) -> संवैधानिक स्थिति: 7वीं अनुसूची, संघ सूची, प्रविष्टि संख्या 69 -> विधिक आधार: भारतीय जनगणना अधिनियम 1948 (सरदार वल्लभभाई पटेल, धारा 15: आंकड़ों की पूर्ण गोपनीयता) -> नोडल संस्था: ORGI (गृह मंत्रालय के अधीन, स्थापना 1949) -> जनगणना 2011: 15वीं राष्ट्रीय व स्वतंत्रता उपरांत 7वीं जनगणना -> तत्कालीन आयुक्त: डॉ. सी. चंद्रमौली -> राजस्थान जनगणना निदेशक: श्रीमती शुभ्रा सिंह (IAS) -> ध्येय वाक्य: 'हमारी जनगणना, हमारा भविष्य' -> शुभंकर: प्रगणक शिक्षिका -> संदर्भ तिथि: 1 मार्च 2011 (रात्रि 00:00 बजे) -> गणना पद्धति: विस्तारित वास्तविक पद्धति (Extended De-facto Method) -> दो चरण: चरण 1 (मकान सूचीकरण, राजस्थान में 15 मई से 30 जून 2010), चरण 2 (मुख्य गणना, 9 से 28 फरवरी 2011, पुनरीक्षण 1 से 5 मार्च) -> महान जनसांख्यिकीय विभाजक वर्ष: 1921 (भारत: -0.31%, राजस्थान: -6.29%, कारण: इन्फ्लुएंजा महामारी व अकाल) -> MDDS कोडिंग: राष्ट्रीय कोड (00), राज्य कोड उत्तर से दक्षिण क्रम (01 J&K ... 07 दिल्ली, 08 राजस्थान) -> राजस्थान के 33 जिले: कोड 01 श्रीगंगानगर, कोड 08 धौलपुर, कोड 12 जयपुर, कोड 15 जोधपुर, कोड 33 प्रतापगढ़ (26 जनवरी 2008 को गठित 33वाँ जिला)
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