अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति जनसांख्यिकी GK
भाग - 5: अनुसूचित जाति (SC) एवं अनुसूचित जनजाति (ST) जनसांख्यिकी
विस्तृत विषय-सूची
| खंड | विषय | परीक्षा में महत्व |
|---|---|---|
| 5.1 | समग्र विहंगावलोकन एवं राष्ट्रीय तुलना | ★★★★★ |
| 5.2 | अनुसूचित जाति जनसांख्यिकी: गहन विश्लेषण | ★★★★★ |
| 5.3 | अनुसूचित जनजाति जनसांख्यिकी: गहन विश्लेषण | ★★★★★ |
| 5.4 | राजस्थान की प्रमुख जनजातियाँ एवं उनका प्रादेशिक वितरण | ★★★★★ |
| 5.5 | विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह: सहरिया जनजाति विशेषांक | ★★★★★ |
| 5.6 | तुलनात्मक विश्लेषण: अनुसूचित जाति बनाम अनुसूचित जनजाति जनसांख्यिकी | ★★★★★ |
| 5.7 | स्मरण सूत्र एवं एक-पंक्ति त्वरित पुनरावृत्ति तथ्य | ★★★★ |
| 5.8 | परीक्षा-उपयोगी मुख्य बिंदु एवं वर्णनात्मक प्रश्न-उत्तर | ★★★★ |
5.1 समग्र विहंगावलोकन एवं राष्ट्रीय तुलना
जनगणना 2011 के अनुसार राजस्थान की कुल जनसंख्या (6,85,48,437) में आरक्षित सामाजिक वर्गों (अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति) का सम्मिलित अनुपात लगभग एक-तिहाई (31.31%) है।
[राजस्थान की कुल जनसंख्या: 6.85 करोड़]
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[अनुसूचित जाति - 17.83%] [अनुसूचित जनजाति - 13.48%]
• कुल जनसंख्या: 1,22,21,593 • कुल जनसंख्या: 92,38,534
• कुल लिंगानुपात: 923 • कुल लिंगानुपात: 948 (राज्य औसत 928 से अधिक)
• कुल साक्षरता दर: 59.20% • कुल साक्षरता दर: 52.80%
• शीर्ष प्रतिशत: श्रीगंगानगर (36.58%) • शीर्ष प्रतिशत: बांसवाड़ा (76.38%)
• न्यूनतम प्रतिशत: डूंगरपुर (3.76%) • न्यूनतम प्रतिशत: नागौर (0.31%)
राष्ट्रीय स्तर पर तुलनात्मक सारणी
| जनसांख्यिकीय प्राचल | राजस्थान (अनुसूचित जाति) | भारत (अनुसूचित जाति) | राजस्थान (अनुसूचित जनजाति) | भारत (अनुसूचित जनजाति) |
|---|---|---|---|---|
| कुल जनसंख्या का प्रतिशत | 17.83% | 16.60% | 13.48% | 8.60% |
| जनसंख्या की दृष्टि से देश में स्थान | 8वाँ | — | 6वाँ | — |
| कुल लिंगानुपात (प्रति 1000 पुरुष) | 923 | 945 | 948 | 990 |
| शिशु लिंगानुपात (0-6 आयु वर्ग) | 886 | 933 | 899 | 957 |
| कुल साक्षरता दर | 59.20% | 66.10% | 52.80% | 59.00% |
| पुरुष साक्षरता दर | 71.60% | 75.20% | 67.50% | 68.50% |
| महिला साक्षरता दर | 45.80% | 56.50% | 37.30% | 49.40% |
5.2 अनुसूचित जाति जनसांख्यिकी: गहन विश्लेषण
राजस्थान में अनुसूचित जाति की कुल जनसंख्या 1,22,21,593 है, जिसमें पुरुष: 63,55,564 (52.0%) तथा महिलाएं: 58,66,029 (48.0%) हैं।
1. जिलेवार चरम सांख्यिकी
| प्राचल | शीर्ष 3 जिले (घटते क्रम में) | न्यूनतम 3 जिले (बढ़ते क्रम में) |
|---|---|---|
| अनुसूचित जाति जनसंख्या (संख्यात्मक) | 1. जयपुर (10,03,299) 2. श्रीगंगानगर (7,19,658) 3. नागौर (6,99,782) |
1. डूंगरपुर (52,267) 2. प्रतापगढ़ (60,375) 3. बांसवाड़ा (80,022) |
| अनुसूचित जाति जनसंख्या (प्रतिशत) | 1. श्रीगंगानगर (36.58%) 2. हनुमानगढ़ (27.61%) 3. करौली (24.31%) |
1. डूंगरपुर (3.76%) 2. बांसवाड़ा (4.45%) 3. उदयपुर (6.06%) |
| अनुसूचित जाति लिंगानुपात (औसत: 923) | 1. राजसमंद (982) 2. डूंगरपुर (976) 3. झालावाड़ (964) |
1. धौलपुर (863) 2. भरतपुर (869) 3. जैसलमेर (870) |
2. अनुसूचित जाति जनसंख्या का भौगोलिक संकेंद्रण
- उत्तरी नहरी पट्टी (श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़): राज्य में सर्वाधिक अनुसूचित जाति संकेंद्रण इसी क्षेत्र में पाया जाता है। अकेले श्रीगंगानगर की एक-तिहाई से अधिक आबादी (36.58%) अनुसूचित जाति की है, जो गंग नहर व भाखड़ा प्रणाली में कृषि श्रमिक मांग से प्रेरित रही है।
- पूर्वी मैदान (करौली, भरतपुर, दौसा): कृषि एवं सेवा क्षेत्र में इस वर्ग की घनी आबादी व व्यापक सहभागिता है।
- दक्षिणी जनजातीय अंचल (डूंगरपुर, बांसवाड़ा): यहाँ अनुसूचित जनजाति आबादी की भारी बहुलता (70% से अधिक) होने के कारण अनुसूचित जाति का प्रतिशत राज्य में सबसे कम (5% से कम) है।
5.3 अनुसूचित जनजाति जनसांख्यिकी: गहन विश्लेषण
राजस्थान में अनुसूचित जनजाति की कुल जनसंख्या 92,38,534 है, जिसमें पुरुष: 47,42,943 (51.3%) तथा महिलाएं: 44,95,591 (48.7%) हैं।
1. जिलेवार चरम सांख्यिकी
| प्राचल | शीर्ष 3 जिले (घटते क्रम में) | न्यूनतम 3 जिले (बढ़ते क्रम में) |
|---|---|---|
| अनुसूचित जनजाति जनसंख्या (संख्यात्मक) | 1. उदयपुर (15,25,289) 2. बांसवाड़ा (13,72,999) 3. डूंगरपुर (9,83,437) |
1. बीकानेर (7,779) 2. नागौर (10,408) 3. चूरू (11,280) |
| अनुसूचित जनजाति जनसंख्या (प्रतिशत) | 1. बांसवाड़ा (76.38%) 2. डूंगरपुर (70.82%) 3. प्रतापगढ़ (63.42%) |
1. नागौर (0.31%) 2. बीकानेर (0.33%) 3. चूरू (0.55%) |
| अनुसूचित जनजाति लिंगानुपात (औसत: 948) | 1. डूंगरपुर (1000) (पूर्ण लैंगिक समता) 2. राजसमंद (999) 3. बांसवाड़ा (980) |
1. धौलपुर (842) 2. करौली (865) 3. अलवर (876) |
2. डूंगरपुर का लैंगिक समता कीर्तिमान
- डूंगरपुर जिले का अनुसूचित जनजाति लिंगानुपात ठीक 1000 है, जो राज्य के किसी भी सामाजिक वर्ग में पूर्ण लैंगिक समानता का अनूठा व ऐतिहासिक कीर्तिमान है।
- अनुसूचित जनजाति वर्ग का समग्र लिंगानुपात (948) राज्य के सामान्य औसत (928) और अनुसूचित जाति औसत (923) दोनों से 20 से 25 अंक अधिक है। जनजातीय संस्कृति में कन्या जन्म को सहर्ष स्वीकारना तथा दहेज हत्या व कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक कुरीतियों का अभाव इसका मूल कारण है।
5.4 राजस्थान की प्रमुख जनजातियाँ एवं उनका प्रादेशिक वितरण
जनगणना 2011 के अनुसार राज्य की कुल जनजातीय आबादी में प्रमुख जनजातियों का अनुपात:
[राजस्थान की प्रमुख जनजातियाँ (आबादी के घटते क्रम में)]
• मीणा (लगभग 47%) ──> पूर्वी एवं ढूँढाड़ क्षेत्र (जयपुर, दौसा, सवाई माधोपुर, करौली, अलवर, उदयपुर)
• भील (लगभग 40%) ──> दक्षिणी मेवाड़ एवं वागड़ (बांसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर, प्रतापगढ़)
• गरासिया (लगभग 7%) ──> सिरोही (पिण्डवाड़ा, आबू रोड), पाली (बाली), उदयपुर (गोगुंदा)
• सहरिया (लगभग 1.1%) ──> बारां (शाहबाद एवं किशनगंज तहसील) — राज्य का एकमात्र आदिम समूह
• डामोर (लगभग 0.6%) ──> डूंगरपुर (सीमलवाड़ा तहसील - 'डामरिया क्षेत्र')
• कथौड़ी व अन्य ──> उदयपुर (कोटड़ा, झाड़ोल, सराड़ा) एवं बारां
प्रमुख जनजातियों का विस्तृत विवरण
| जनजाति | राज्य में स्थान | मुख्य संकेंद्रण क्षेत्र | सामाजिक-आर्थिक एवं सांस्कृतिक पहचान |
|---|---|---|---|
| मीणा | प्रथम (सर्वाधिक आबादी: ~47%) | जयपुर, दौसा, सवाई माधोपुर, करौली, अलवर, उदयपुर | राज्य की सर्वाधिक साक्षर, आर्थिक रूप से सशक्त एवं प्रशासनिक सेवाओं में अग्रणी जनजाति। दो प्रमुख वर्ग: 'जमींदार मीणा' (कृषक) एवं 'चौकीदार मीणा' (रक्षक)। |
| भील | द्वितीय सबसे बड़ी (~40%) | बांसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर, प्रतापगढ़ | राजस्थान की प्राचीनतम जनजाति। कर्नल जेम्स टॉड ने इन्हें 'वनपुत्र' की उपाधि दी। मुख्य आवास: 'टापरा' या 'कू'; मोहल्ला: 'फला'; बस्ती मुखिया: 'गमेती'। |
| गरासिया | तृतीय सबसे बड़ी (~7%) | सिरोही (पिण्डवाड़ा, आबू रोड), पाली (बाली), उदयपुर | चौहान राजपूतों के वंशज माने जाते हैं। पवित्र तीर्थ स्थल: नक्की झील (माउंट आबू)। प्रमुख प्रसिद्ध लोकनृत्य: वालर (बिना किसी वाद्ययंत्र के किया जाने वाला युगल नृत्य)। |
| सहरिया | विशेष समूह (~1.1%) | बारां (शाहबाद एवं किशनगंज तहसील) | राजस्थान की एकमात्र अति-पिछड़ी आदिम जनजाति। बस्ती: 'सहराना'; सामुदायिक केंद्र: 'हथाई' या 'बंगला'; मुखिया: 'कोतवाल'; कुलदेवी: कोड़िया देवी; लोक देवता: तेजाजी। |
| डामोर | लघु समूह (~0.6%) | डूंगरपुर (सीमलवाड़ा तहसील) | मूलतः गुजरात सीमावर्ती क्षेत्र। पुरुष भी स्त्रियों की भाँति पारंपरिक आभूषण धारण करते हैं। प्रमुख मेले: 'छेला बावजी का मेला' (पंचमहल) एवं 'ग्यारस की रेवाड़ी' (डूंगरपुर)। |
| कथौड़ी | संकटग्रस्त समूह | उदयपुर (कोटड़ा, झाड़ोल तहसील) | महाराष्ट्र के खानदेश से आए। खैर के वृक्षों से हांडी प्रणाली द्वारा कत्था तैयार करने में सिद्धहस्त। महिलाएं मराठी शैली में 'फड़का' साड़ी पहनती हैं। |
| सांसी | खानाबदोश जनजाति | भरतपुर, अजमेर | दो प्रमुख उप-शाखाएं: 'बीजा' और 'माला'। विवाह से पूर्व कन्या के चारित्रिक परीक्षण की रूढ़िवादी परंपरा को 'कूकड़ी प्रथा' कहते हैं। |
| कंजर | विमुक्त जाति | कोटा, बूँदी, भीलवाड़ा, झालावाड़ | कठिन कार्य अथवा अपराध से पूर्व कुल देवताओं से आशीर्वाद मांगने की परंपरा 'पाती माँगना' कहलाती है। प्रसिद्ध तेज गति के लोकनृत्य: 'चकरी नृत्य' एवं 'धाकड़ नृत्य'। |
5.5 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह: सहरिया जनजाति विशेषांक
भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा अत्यंत पिछड़ी कृषि-पूर्व प्रौद्योगिकी, घटती आबादी, नगण्य साक्षरता एवं अत्यधिक निर्धनता के आधार पर देश के 75 जनजातीय समूहों को विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह घोषित किया गया है।
[सहरिया जनजाति: राजस्थान का एकमात्र आदिम समूह]
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[भौगोलिक संकेंद्रण] [पारंपरिक सामाजिक संरचना] [विशेष सुरक्षात्मक योजनाएं]
• बारां जिला (99% से अधिक आबादी) • बस्ती: सहराना • माँ-बाड़ी आवासीय/डे-केयर केंद्र
• शाहबाद एवं किशनगंज तहसील • सामुदायिक भवन: हथाई या बंगला • मनरेगा में 200 दिवस का कार्य
• सीताबाड़ी मेला (हाड़ौती का कुंभ) • सर्वोच्च पंचायत: चौरसिया • निःशुल्क विशेष पोषण किट योजना
1. सहरिया जनजाति की मुख्य सांस्कृतिक व प्रशासनिक विशेषताएँ
- भौगोलिक संकेन्द्रण: राजस्थान की कुल सहरिया जनसंख्या का 99% से अधिक भाग केवल बारां जिले की दो तहसीलों—शाहबाद एवं किशनगंज में निवास करता है।
- पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था:
- गाँव अथवा बस्ती को 'सहराना' कहा जाता है।
- सहराना के बीचों-बीच स्थित गोल सामुदायिक बैठक भवन को 'हथाई' या 'बंगला' कहते हैं।
- ग्राम पंचायत का मुखिया 'कोतवाल' कहलाता है।
- न्याय व्यवस्था तीन स्तरों में विभाजित है: पंचताई (5 गाँव) → एकदाशिया (11 गाँव) → चौरसिया (84 गाँवों की सर्वोच्च पंचायत, जिसका मुख्य केंद्र वाल्मीकि आश्रम, सीताबाड़ी है)।
- सीताबाड़ी मेला (केलवाड़ा, बारां): ज्येष्ठ अमावस्या को आयोजित होने वाला यह मेला 'सहरिया जनजाति का कुंभ' तथा 'हाड़ौती अंचल का सबसे बड़ा मेला' कहलाता है।
2. राज्य सरकार के विशेष सुरक्षात्मक उपाय
- मनरेगा में 200 दिवस का अतिरिक्त रोजगार: सहरिया, कथौड़ी एवं विशेष योग्यजनों को केंद्र सरकार के 100 दिनों के अतिरिक्त राज्य मद से 100 दिवस का अतिरिक्त रोजगार (कुल 200 दिन) प्रदान किया जाता है।
- माँ-बाड़ी केंद्र: सहरिया बहुल बस्तियों में प्राथमिक शिक्षा, डे-केयर तथा बच्चों के पोषण स्तर को सुधारने हेतु संचालित विशेष अनौपचारिक आवासीय केंद्र।
- विशेष पोषण किट वितरण: परिवार के प्रत्येक सदस्य को कुपोषण से मुक्ति दिलाने हेतु निःशुल्क देसी घी, दाल, सोयाबीन एवं खाद्य तेल युक्त पोषण सामग्री किट का नियमित वितरण।
5.6 तुलनात्मक विश्लेषण: अनुसूचित जाति बनाम अनुसूचित जनजाति जनसांख्यिकी
तुलनात्मक जनसांख्यिकीय विश्लेषण सारणी
| घटक अथवा संकेतक | अनुसूचित जाति | अनुसूचित जनजाति | विश्लेषणात्मक टिप्पणी |
|---|---|---|---|
| राज्य जनसंख्या में अनुपात | 17.83% | 13.48% | अनुसूचित जाति की आबादी अनुसूचित जनजाति से 4.35% अधिक है। |
| कुल जनसंख्या (संख्यात्मक) | 1,22,21,593 | 92,38,534 | अनुसूचित जाति की आबादी लगभग 29.83 लाख अधिक है। |
| संख्या में सबसे बड़ा जिला | जयपुर (10,03,299) | उदयपुर (15,25,289) | अनुसूचित जाति राजधानी क्षेत्र में, जबकि अनुसूचित जनजाति दक्षिणी अरावली में संकेंद्रित है। |
| प्रतिशत में सबसे बड़ा जिला | श्रीगंगानगर (36.58%) | बांसवाड़ा (76.38%) | बांसवाड़ा में अनुसूचित जनजाति आबादी का अनुपात तीन-चौथाई से भी अधिक है। |
| प्रतिशत में सबसे छोटा जिला | डूंगरपुर (3.76%) | नागौर (0.31%) | नागौर, बीकानेर एवं चूरू में जनजातीय आबादी 0.6% से भी कम है। |
| समग्र लिंगानुपात (राज्य औसत: 928) | 923 | 948 | जनजातीय समाज का लिंगानुपात अनुसूचित जाति से 25 अंक तथा राज्य औसत से 20 अंक बेहतर है। |
| सर्वोच्च लिंगानुपात वाला जिला | राजसमंद (982) | डूंगरपुर (1000) | डूंगरपुर जिले में अनुसूचित जनजाति वर्ग में पूर्ण लैंगिक समता दर्ज हुई। |
| न्यूनतम लिंगानुपात वाला जिला | धौलपुर (863) | धौलपुर (842) | धौलपुर जिला सामान्य, अनुसूचित जाति एवं जनजाति तीनों श्रेणियों में सबसे निचले पायदान पर है। |
| कुल साक्षरता दर | 59.20% | 52.80% | अनुसूचित जाति की साक्षरता दर अनुसूचित जनजाति से 6.40% अधिक है। |
| महिला साक्षरता दर | 45.80% | 37.30% | अनुसूचित जनजाति की महिला साक्षरता (37.30%) राज्य के सभी वर्गों में सबसे कम है। |
5.7 स्मरण सूत्र एवं एक-पंक्ति त्वरित पुनरावृत्ति तथ्य
त्वरित स्मरण सूत्र
- अनुसूचित जाति में शीर्ष (संख्या बनाम प्रतिशत):
- संख्या: जयपुर (10.03 लाख)
- प्रतिशत: श्रीगंगानगर (36.58%)
- अनुसूचित जनजाति में शीर्ष (संख्या बनाम प्रतिशत):
- संख्या: उदयपुर (15.25 लाख)
- प्रतिशत: बांसवाड़ा (76.38%)
- दोनों वर्गों में सबसे कम लिंगानुपात वाला जिला:
- धौलपुर (अनुसूचित जाति: 863, अनुसूचित जनजाति: 842)
- शीर्ष 3 जनजातियाँ घटते क्रम में:
- सूत्र: "मी-भी-ग" (मीणा ~47% > भील ~40% > गरासिया ~7%)
- डूंगरपुर का दोहरा रिकॉर्ड:
- न्यूनतम अनुसूचित जाति प्रतिशत (3.76%), किंतु अनुसूचित जनजाति में पूर्ण लिंगानुपात 1000।
20 अति-महत्वपूर्ण त्वरित पुनरावृत्ति तथ्य
- जनगणना 2011 के अनुसार राजस्थान में अनुसूचित जाति व जनजाति का सम्मिलित अनुपात 31.31% है।
- राजस्थान की कुल जनसंख्या में अनुसूचित जाति का प्रतिशत 17.83% (1,22,21,593) है।
- राजस्थान की कुल जनसंख्या में अनुसूचित जनजाति का प्रतिशत 13.48% (92,38,534) है।
- जनसंख्या के आकार में राजस्थान का अनुसूचित जाति में देश में 8वाँ तथा जनजाति में 6वाँ स्थान है।
- राजस्थान में अनुसूचित जाति का लिंगानुपात 923 तथा अनुसूचित जनजाति का 948 है।
- अनुसूचित जनजाति का लिंगानुपात (948) राज्य औसत (928) से 20 अंक अधिक है।
- शिशु लिंगानुपात (0-6 वर्ष) अनुसूचित जाति में 886 तथा जनजाति में 899 दर्ज किया गया।
- कुल साक्षरता दर अनुसूचित जाति में 59.20% तथा जनजाति में 52.80% है।
- अनुसूचित जनजाति की महिला साक्षरता दर 37.30% राज्य के सभी सामाजिक वर्गों में सबसे कम है।
- श्रीगंगानगर जिले में अनुसूचित जाति का प्रतिशत सर्वाधिक (36.58%) है।
- जयपुर जिले में अनुसूचित जाति की संख्या सर्वाधिक (10,03,299) है।
- डूंगरपुर जिले में अनुसूचित जाति का प्रतिशत सबसे कम (3.76%) है।
- बांसवाड़ा जिले में अनुसूचित जनजाति का प्रतिशत सर्वाधिक (76.38%) है।
- उदयपुर जिले में अनुसूचित जनजाति की संख्या सर्वाधिक (15,25,289) है।
- नागौर जिले में अनुसूचित जनजाति का प्रतिशत सबसे कम (0.31%) है।
- डूंगरपुर जिले में अनुसूचित जनजाति का लिंगानुपात ठीक 1000 दर्ज किया गया।
- धौलपुर जिला अनुसूचित जाति (863) एवं जनजाति (842) दोनों के लिंगानुपात में सबसे निचले स्थान पर है।
- मीणा राजस्थान की सबसे बड़ी जनजाति (~47%) है, जिसके बाद भील (~40%) व गरासिया (~7%) हैं।
- सहरिया राजस्थान का एकमात्र आदिम कमजोर जनजातीय समूह है, जो बारां के शाहबाद व किशनगंज में केंद्रित है।
- उदयपुर की कथौड़ी जनजाति खैर के पेड़ों से हंडी प्रणाली द्वारा कत्था बनाने हेतु प्रसिद्ध है।