राजस्थान डॉ. ए.के. तिवारी जलवायु वर्गीकरण GK
PART - 13: डॉ. ए.के. तिवारी का जलवायु वर्गीकरण#
विषय सूची#
| Section |
Topic |
Exam Importance |
| 13.1 |
Introduction & Scientific Basis |
★★★★★ |
| 13.2 |
Five Climatic Zones: Comparative Master Table |
★★★★★ |
| 13.3 |
Detailed Zonal Analysis |
★★★★★ |
| 13.4 |
Comparative Matrix: Koppen vs Thornthwaite vs Tiwari |
★★★★★ |
| 13.5 |
G.T. Trewartha's Classification: Reference Study |
★★★★ |
| 13.6 |
Key Exam Pointers |
★★★★★ |
| 13.7 |
Comparative Study |
★★★★ |
📖 13.1 परिचय एवं वर्गीकरण का वैज्ञानिक आधार
भारतीय भूगोलवेत्ता डॉ. ए.के. तिवारी ने राजस्थान के विशिष्ट भौगोलिक परिप्रेक्ष्य, उच्चावच, मौसमी वर्षा के स्थानिक वितरण तथा कृषि-पारिस्थितिकी को ध्यान में रखते हुए राज्य का एक व्यावहारिक एवं प्रादेशिक जलवायु वर्गीकरण प्रस्तुत किया।
विदेशी जलवायु वैज्ञानिकों (जैसे कोपेन या थार्नथवेट) के वर्गीकरण वैश्विक स्तर के सूत्रों पर आधारित थे, जिससे राजस्थान के स्थानीय सूक्ष्म-जलवायविक अंतर कई बार स्पष्ट नहीं हो पाते थे। इसके विपरीत, डॉ. तिवारी का वर्गीकरण क्षेत्रीय धरातलीय वास्तविकताओं पर आधारित है।
| प्राचल |
वैज्ञानिक आधार एवं विवरण |
| प्राथमिक आधार |
औसत वार्षिक वर्षा की मात्रा एवं प्रवणता |
| सहायक आधार |
ग्रीष्म व शीतकालीन तापीय दशाएँ, वाष्पीकरण की तीव्रता तथा प्राकृतिक वनस्पति के स्थानीय प्रारूप |
| कुल विभाजन |
राजस्थान को 5 सुस्पष्ट जलवायु प्रदेशों में विभक्त किया गया |
| व्यावहारिक महत्व |
यह वर्गीकरण राज्य के योजनाकारों, कृषि वैज्ञानिकों तथा भूमि उपयोग सर्वेक्षण हेतु अत्यधिक उपयोगी माना जाता है |
📖 13.2 पाँचों जलवायु प्रदेश: तुलनात्मक विहंगावलोकन
| क्र.सं. |
जलवायु प्रदेश |
औसत वर्षा सीमा |
ग्रीष्मकालीन औसत तापमान |
शीतकालीन औसत तापमान |
मुख्य विस्तार क्षेत्र (जिले) |
वनस्पति एवं मृदा का प्रकार |
| 1. |
अति-शुष्क मरुस्थलीय प्रदेश |
10-20 सेमी |
38°C-45°C+ |
10°C-15°C |
जैसलमेर, फलौदी, बाड़मेर (प.), बीकानेर (प.) |
मरुद्भिद (काँटेदार झाड़ियाँ) |
| 2. |
शुष्क मरुस्थलीय प्रदेश |
20-30 सेमी |
36°C-42°C |
8°C-14°C |
बीकानेर (पू.), चूरू, अनूपगढ़, हनुमानगढ़, गंगानगर (द.) |
स्टेपी-मरुद्भिद मिश्रित |
| 3. |
अर्द्ध-शुष्क प्रदेश |
30-50 सेमी |
34°C-40°C |
10°C-16°C |
जोधपुर, नागौर, डीडवाना-कुचामन, सीकर, झुंझुनूं, पाली, जालौर |
स्टेपी तुल्य घास व खेजड़ी |
| 4. |
उप-आर्द्र प्रदेश |
50-70 सेमी |
30°C-36°C |
12°C-18°C |
जयपुर, दौसा, अलवर, अजमेर, ब्यावर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ (उ.) |
मिश्रित पर्णपाती (धौकड़ा) |
| 5. |
आर्द्र प्रदेश |
70-100 सेमी |
28°C-34°C |
14°C-18°C |
झालावाड़, बारां, कोटा, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, सिरोही (आबू) |
सघन मानसूनी पतझड़ व सागवान |
📖 13.3 प्रदेशवार विस्तृत भौगोलिक विश्लेषण
1️⃣ Extreme Arid Desert Zone#
यह राज्य का सुदूर पश्चिमी भू-भाग है, जहाँ चरम जलवायविक शुष्कता पाई जाती है:
| पहलू |
विवरण |
| वर्षा का वितरण |
वार्षिक औसत मात्र 10-20 सेमी। यहाँ वर्षा अत्यधिक आकस्मिक, अल्पकालिक और अनिश्चित होती है। कई बार वर्षों तक सूखा रहता है। |
| विस्तार क्षेत्र |
संपूर्ण जैसलमेर जिला, बाड़मेर का पश्चिमी भाग (शिव, चौहटन सीमांत), फलौदी का पश्चिमी भाग तथा बीकानेर का सीमावर्ती क्षेत्र। |
| तापीय दशाएँ |
ग्रीष्मकाल में तापमान प्रायः 46°C से 50°C तक पहुँच जाता है (तीव्र 'लू' का संचरण)। शीतकाल में रात का तापमान तेजी से गिरकर 2°C-5°C तक आ जाता है। दैनिक तापांतर 20°C से अधिक रहता है। |
| पारिस्थितिकी एवं कृषि |
प्राकृतिक वनस्पति अत्यंत विरल है; केवल मरुद्भिद झाड़ियाँ (फोग, कैर, लानी) तथा सेवण घास पाई जाती है। केवल वर्षा आधारित अल्पकालिक खरीफ फसलें (मोठ, बाजरा) सीमित मात्रा में ली जाती हैं। |
2️⃣ Arid Desert Zone#
यह अति-शुष्क मरुस्थल के उत्तर और पूर्व में स्थित संक्रमणकालीन मरुस्थलीय पट्टी है:
| पहलू |
विवरण |
| वर्षा का वितरण |
वार्षिक औसत 20-30 सेमी। |
| विस्तार क्षेत्र |
बीकानेर, चूरू, अनूपगढ़, हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर का दक्षिणी भाग। |
| तापीय दशाएँ |
इस प्रदेश की प्रमुख पहचान इसका उच्चतम वार्षिक तापांतर है। चूरू में गर्मियों में तापमान 49°C-50°C तक पहुँचता है, जबकि शीतकाल में तापमान शून्य (0°C) या हिमांक से नीचे चला जाता है। शीत ऋतु में तीव्र 'शीत लहर' तथा पाला का प्रकोप रहता है। |
| पारिस्थितिकी एवं कृषि |
वनस्पति में खेजड़ी, रोहिड़ा, बबूल और कंटीली झाड़ियाँ प्रमुख हैं। नहरी सिंचित क्षेत्रों (IGNP) में गेहूँ, चना, सरसों और नरमा कपास की खेती की जाती है, जबकि गैर-सिंचित क्षेत्रों में ग्वार और बाजरा प्रमुख हैं। |
3️⃣ Semi-Arid Zone#
यह अरावली पर्वतमाला के पश्चिमी पाद (तलहटी) और मरुस्थल के बीच स्थित राजस्थान की सबसे महत्वपूर्ण कृषि-आर्थिक पेटी (राजस्थान बांगर) है:
| पहलू |
विवरण |
| वर्षा का वितरण |
वार्षिक औसत 30-50 सेमी। |
| विस्तार क्षेत्र |
जोधपुर शहर व ग्रामीण, नागौर, डीडवाना-कुचामन, शेखावाटी (सीकर, झुंझुनूं), पाली, जालौर, सांचौर। |
| तापीय दशाएँ |
ग्रीष्मकालीन तापमान 34°C से 40°C। शीतकाल सामान्यतः सुखद रहता है, किंतु उत्तरी-पश्चिमी हवाओं के कारण जनवरी में कड़ी ठंड पड़ती है। |
| पारिस्थितिकी एवं कृषि |
स्टेपी तुल्य वनस्पति, जिसमें रोहिड़ा, खेजड़ी, बेर, नीम तथा धामण व करड़ घास प्रमुख हैं। यह राज्य का प्रमुख दलहन (मूँग, मोठ) एवं तिलहन क्षेत्र है। जीरा, ईसबगोल, सौंफ और मेथी जैसी वाणिज्यिक फसलों की सघन खेती की जाती है। |
4️⃣ Sub-Humid Zone#
यह प्रदेश अरावली पर्वत शृंखला के मध्यवर्ती भागों और उसके ठीक पूर्व में स्थित मैदानी ढलानों को सम्मिलित करता है:
| पहलू |
विवरण |
| वर्षा का वितरण |
वार्षिक औसत 50-70 सेमी (दक्षिण-पश्चिम मानसून की बंगाल की खाड़ी शाखा द्वारा वर्षा)। |
| विस्तार क्षेत्र |
जयपुर, जयपुर ग्रामीण, दौसा, अलवर, कोटपूतली-बहरोड़, अजमेर, ब्यावर, भीलवाड़ा, टोंक, चित्तौड़गढ़ का उत्तरी भाग। |
| तापीय दशाएँ |
ग्रीष्मकाल का औसत तापमान 30°C से 36°C (अरावली की ऊँचाई के कारण मरुस्थल से कम गर्म)। शीतकाल शीतोष्ण एवं अनुकूल (12°C-18°C)। |
| पारिस्थितिकी एवं कृषि |
उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन—धौकड़ा, सालर, खैर, ढाक/पलाश। जलोढ़ व कछारी मिट्टी की उपलब्धता के कारण यह राज्य का सघन कृषि क्षेत्र है (गेहूँ, सरसों, जौ, मक्का और ज्वार)। |
5️⃣ Humid Zone#
यह राजस्थान का दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्वी भाग है, जो राज्य में सर्वाधिक वर्षा और उच्चतम प्राकृतिक हरियाली का क्षेत्र है:
| पहलू |
विवरण |
| वर्षा का वितरण |
वार्षिक औसत 70-100 सेमी+ (पर्वतीय ढालों तथा झालावाड़ में 100 सेमी से अधिक)। |
| विस्तार क्षेत्र |
1. हाड़ौती का पठार: झालावाड़, बारां, कोटा, बूँदी। 2. दक्षिणी राजस्थान: बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, उदयपुर का दक्षिणी भाग। 3. पर्वतीय क्षेत्र: सिरोही का माउंट आबू ब्लॉक (150 सेमी वर्षा)। |
| तापीय दशाएँ |
ग्रीष्मकालीन तापमान 28°C से 34°C; वायुमंडलीय आर्द्रता उच्च रहने के कारण उमस अधिक होती है। शीतकाल अत्यंत मृदुल एवं सुखद रहता है। वार्षिक तापांतर राज्य में सबसे कम होता है। |
| पारिस्थितिकी एवं कृषि |
सवाना तुल्य सघन वन, शुष्क सागवान वन (Tectona grandis), बाँस, आम, जामुन और महुआ। काली चिकनी (वर्टीसोल्स) मृदा में सोयाबीन, कपास, गन्ना, संतरा (झालावाड़) और अफीम (चित्तौड़गढ़/प्रतापगढ़) की उन्नत खेती होती है। |
📖 13.4 तुलनात्मक मैट्रिक्स: कोपेन vs थार्नथवेट vs तिवारी
प्रतियोगी परीक्षाओं में विभिन्न भूगोलवेत्ताओं के समतुल्य प्रदेशों के मिलान संबंधी प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं:
| भौतिक/प्रादेशिक क्षेत्र |
कोपेन का कोड |
थार्नथवेट का कोड |
डॉ. ए.के. तिवारी का वर्गीकरण |
वर्षा की सीमा (तिवारी अनुसार) |
| सुदूर पश्चिमी मरुस्थल (जैसलमेर) |
BWhw |
EA'd |
अति-शुष्क मरुस्थलीय प्रदेश |
10-20 सेमी |
| उत्तरी-पश्चिमी राजस्थान (बीकानेर, चूरू) |
BShw |
DB'w |
शुष्क मरुस्थलीय प्रदेश |
20-30 सेमी |
| मध्य व बांगर क्षेत्र (जोधपुर, नागौर) |
BShw |
DA'w |
अर्द्ध-शुष्क प्रदेश |
30-50 सेमी |
| पूर्वी मैदान व अरावली (जयपुर, अजमेर) |
Cwg |
DA'w |
उप-आर्द्र प्रदेश |
50-70 सेमी |
| हाड़ौती व वागड़ (झालावाड़, बांसवाड़ा) |
Aw |
CA'w |
आर्द्र प्रदेश |
70-100 सेमी+ |
📖 13.5 जी.टी. त्रिवार्था का जलवायु वर्गीकरण: संदर्भ अध्ययन
कई प्रतियोगी परीक्षाओं में 'तिवारी' और 'त्रिवार्था' के नामों को लेकर संशय उत्पन्न होता है। अमेरिकी भूगोलवेत्ता जी.टी. त्रिवार्था ने कोपेन के जटिल वर्गीकरण को सरल बनाकर 4 भागों में प्रस्तुत किया था:
| कोड |
प्रकार |
क्षेत्र |
विशेषताएँ |
| BWh |
उष्ण मरुस्थलीय |
जैसलमेर, बीकानेर, पश्चिमी फलौदी |
न्यूनतम वर्षा, मरुद्भिद वनस्पति |
| BSh |
स्टेपी |
जालौर, पाली, नागौर, शेखावाटी |
काँटेदार झाड़ियाँ |
| Caw |
उष्ण-आर्द्र |
पूर्वी राजस्थान का मैदान (जयपुर, अलवर, भरतपुर, सवाई माधोपुर) |
मिश्रित पर्णपाती वनस्पति |
| Aw |
उष्ण कटिबंधीय सवाना |
बांसवाड़ा, डूंगरपुर, झालावाड़ |
सवाना तुल्य वनस्पति, अधिक वर्षा |
📖 13.6 परीक्षा-उपयोगी मुख्य बिंदु
| तथ्य |
विवरण |
| विभाजन की संख्या |
डॉ. ए.के. तिवारी ने राजस्थान को 5 जलवायु प्रदेशों में विभाजित किया है (जबकि कोपेन, थार्नथवेट और त्रिवार्था तीनों ने 4-4 भागों में विभाजित किया है)। |
| वर्षा सीमाओं का क्रम |
तिवारी के वर्गीकरण की वर्षा सीमाएँ व्यवस्थित और याद रखने में सुगम हैं: अति-शुष्क = 10-20 सेमी; शुष्क = 20-30 सेमी; अर्द्ध-शुष्क = 30-50 सेमी; उप-आर्द्र = 50-70 सेमी; आर्द्र = 70-100 सेमी। |
| मरुस्थल का द्वि-विभाजन |
तिवारी वर्गीकरण की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसने थार मरुस्थल को दो स्पष्ट भागों—'अति-शुष्क' (10-20 सेमी) और 'शुष्क' (20-30 सेमी)—में विभाजित किया, जिससे चूरू-बीकानेर की जलवायु जैसलमेर से अलग होकर स्पष्ट रूप से पहचानी जा सकी। |
| चूरू जिले का स्थान |
डॉ. तिवारी के अनुसार चूरू जिला 'शुष्क मरुस्थलीय प्रदेश' के अंतर्गत आता है (अति-शुष्क में नहीं)। |
| हाड़ौती व वागड़ का संकुल |
झालावाड़ और बांसवाड़ा दोनों को तिवारी ने 'आर्द्र प्रदेश' के अंतर्गत एक साथ रखा है। |
📖 13.7 तुलनात्मक अध्ययन
| पहलू |
अति-शुष्क |
शुष्क मरुस्थल |
अर्द्ध-शुष्क |
उप-आर्द्र |
आर्द्र |
| वर्षा |
10-20 सेमी |
20-30 सेमी |
30-50 सेमी |
50-70 सेमी |
70-100+ सेमी |
| प्रतिनिधि जिले |
जैसलमेर, प. बाड़मेर |
बीकानेर, चूरू |
जोधपुर, नागौर, सीकर |
जयपुर, अजमेर, अलवर |
झालावाड़, कोटा, बांसवाड़ा |
| वनस्पति |
मरुद्भिद |
स्टेपी-मरुद्भिद |
स्टेपी |
मिश्रित पर्णपाती |
सघन मानसूनी/सागवान |
| ग्रीष्म ताप |
38-45°C+ |
36-42°C |
34-40°C |
30-36°C |
28-34°C |
| शीत ताप |
10-15°C |
8-14°C |
10-16°C |
12-18°C |
14-18°C |
| मुख्य फसलें |
मोठ, बाजरा |
गेहूँ, सरसों, ग्वार |
मूँग, मोठ, जीरा |
गेहूँ, सरसों, मक्का |
सोयाबीन, कपास, गन्ना |
परीक्षा पुनरावृत्ति#
डॉ. ए.के. तिवारी का 5 जलवायु प्रदेशों में वर्गीकरण -> प्राथमिक आधार: औसत वार्षिक वर्षा -> अति-शुष्क (10-20 सेमी, जैसलमेर) -> शुष्क (20-30 सेमी, बीकानेर/चूरू) -> अर्द्ध-शुष्क (30-50 सेमी, जोधपुर/नागौर) -> उप-आर्द्र (50-70 सेमी, जयपुर/अजमेर) -> आर्द्र (70-100+ सेमी, झालावाड़/बांसवाड़ा) -> त्रिवार्था का 4 भागों में वर्गीकरण (BWh, BSh, Caw, Aw)
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