राजस्थान की फसलें एवं सस्य चक्र GK

भाग - 20: राजस्थान की फसलें एवं सस्य चक्र / समय


विस्तृत विषय-सूची

खंड विषय परीक्षा में महत्व
20.1 राजस्थान का सस्यीय कैलेंडर: त्रि-मौसमी प्रारूप ★★★★★
20.2 खरीफ (सियालू / सावणी) की प्रमुख फसलें: गहन विवरण ★★★★★
20.3 रबी (उनालू) की प्रमुख फसलें: गहन विवरण ★★★★★
20.4 जायद की प्रमुख फसलें ★★★★
20.5 सस्य चक्र एवं फसल चक्रण ★★★★
20.6 राजस्थान में प्रचलित कृषि की विशिष्ट शब्दावली ★★★★
20.7 परीक्षा-उपयोगी मुख्य बिंदु ★★★★★

📖 20.1 राजस्थान का सस्यीय कैलेंडर: त्रि-मौसमी प्रारूप

राजस्थान में कृषि जलवायु, मानसून की गतिकी और तापमान के आधार पर एक कृषि वर्ष (1 जुलाई से 30 जून) को तीन प्रमुख सस्य ऋतुओं में विभक्त किया जाता है:

                            [राजस्थान का वार्षिक फसल चक्र]
                                          │
       ┌──────────────────────────────────┼──────────────────────────────────┐
       ▼                                  ▼                                  ▼
[1. खरीफ (सियालू / सावणी)]         [2. रबी (उनालू)]                  [3. जायद (ग्रीष्मकालीन)]
 • बुआई: 15 जून - 15 जुलाई         • बुआई: 15 अक्टूबर - 15 नवम्बर    • बुआई: मार्च - अप्रैल
 • कटाई: सितम्बर - अक्टूबर         • कटाई: मार्च - अप्रैल            • कटाई: मई - जून
 • आधार: दक्षिण-पश्चिम मानसून      • आधार: संचित नमी + मावठ + सिंचाई • आधार: कृत्रिम सिंचाई / कछार
 • राज्य के सकल क्षेत्र का ~65%     • राज्य के सकल क्षेत्र का ~30%    • राज्य के सकल क्षेत्र का ~5%

तीनों ऋतुओं की तुलनात्मक सारणी

सस्य ऋतु स्थानीय नाम बुआई का समय कटाई का समय मौसमी दशाएँ सिंचाई निर्भरता सकल कृषित क्षेत्र में हिस्सा
खरीफ सियालू / सावणी 15 जून से 15 जुलाई सितम्बर के अंत से अक्टूबर उच्च तापमान (30°C-40°C), उच्च आर्द्रता ~70% असिंचित (बारानी) ~60-65%
रबी उनालू 15 अक्टूबर से 15 नवम्बर मार्च से अप्रैल शीत व शुष्क मौसम (10°C-15°C), पकते समय स्वच्छ धूप (25°C-30°C) ~75% सिंचित ~30-35%
जायद जायद / चौमासा पूर्व मध्य फरवरी से मार्च के अंत मई से जून तीव्र शुष्कता, उच्च तापमान (35°C-45°C) 100% सिंचित ~3-5%


📖 20.2 खरीफ (सियालू / सावणी) की प्रमुख फसलें: गहन विवरण

खरीफ फसलें मुख्य रूप से C4 पादप हैं, जो उच्च तापमान और तीव्र सौर विकिरण में त्वरित वानस्पतिक वृद्धि करती हैं:

खरीफ फसलों की मास्टर तालिका

फसल का नाम वानस्पतिक नाम बुआई का समय कटाई का समय अनुकूल वर्षा एवं तापमान प्रमुख उत्पादक जिले उन्नत किस्में विशिष्ट तथ्य
बाजरा Pennisetum glaucum 20 जून – 15 जुलाई सितम्बर – अक्टूबर वर्षा: 25-40 सेमी; ताप: 28°-35°C बाड़मेर, जोधपुर, अलवर, नागौर, बीकानेर RHB-177, RHB-121, HHB-67, राज-171 क्षेत्रफल व उत्पादन में राज्य देश में प्रथम
मक्का Zea mays 15 जून – 10 जुलाई सितम्बर – अक्टूबर वर्षा: 50-80 सेमी; ताप: 22°-30°C भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, बांसवाड़ा माही कंचन, माही धवल मेवाड़ की जीवन रेखा। लाल-लोमी मृदा आवश्यक।
ज्वार Sorghum bicolor 25 जून – 15 जुलाई अक्टूबर – नवम्बर वर्षा: 40-60 सेमी; ताप: 25°-32°C अजमेर, पाली, भीलवाड़ा, टोंक CSH-1, CSH-9, CSV-15 'गरीब की रोटी' तथा 'कैमल क्रॉप' कहलाता है।
चावल (धान) Oryza sativa 15 जून – 15 जुलाई अक्टूबर – नवम्बर वर्षा: >100 सेमी; ताप: 25°-35°C बूँदी, हनुमानगढ़, कोटा, बांसवाड़ा माही सुगंधा, बासमती अत्यधिक जल-सघन फसल। चंबल कमान में केंद्रित।
मूँग Vigna radiata 1 जुलाई – 20 जुलाई सितम्बर – अक्टूबर वर्षा: 30-50 सेमी; ताप: 25°-35°C नागौर (शीर्ष), जालौर, पाली, जोधपुर RMG-62, RMG-268, K-851 अल्पकालिक (60-65 दिन)। नाइट्रोजन स्थिरीकरण द्वारा मृदा सुधारक।
मोठ Vigna aconitifolia 1 जुलाई – 25 जुलाई अक्टूबर – नवम्बर वर्षा: 15-30 सेमी; ताप: 30°-38°C बीकानेर (शीर्ष), चूरू, बाड़मेर, जैसलमेर RMO-40 (मरुधर), RMO-435 विश्व में सर्वाधिक सूखा-सहिष्णु दलहन। बीकानेरी भुजिया का कच्चा माल।
उड़द Vigna mungo 25 जून – 15 जुलाई सितम्बर – अक्टूबर वर्षा: 50-70 सेमी; ताप: 25°-35°C कोटा, बारां, बूँदी, झालावाड़ T-9, कृष्णा, बरखा हाड़ौती की काली मृदा में बहुतायत।
सोयाबीन Glycine max 20 जून – 10 जुलाई अक्टूबर के प्रारंभ में वर्षा: 60-90 सेमी; ताप: 25°-32°C झालावाड़, बारां, कोटा, चित्तौड़गढ़ JS-335, JS-9305, NRC-37 40% प्रोटीन व 20% तेल। राजस्थान देश में तृतीय।
मूँगफली Arachis hypogaea 15 जून – 10 जुलाई अक्टूबर – नवम्बर वर्षा: 40-60 सेमी; ताप: 25°-30°C बीकानेर, जोधपुर, जयपुर ग्रामीण TG-37A, GG-20, चंद्रा लूणकरणसर 'राजस्थान का राजकोट'।
तिल Sesamum indicum 1 जुलाई – 20 जुलाई अक्टूबर वर्षा: 40-50 सेमी; ताप: 25°-32°C पाली (शीर्ष), सवाई माधोपुर RT-46, RT-127, चेतक बारानी क्षेत्रों का प्राचीनतम तिलहन।
कपास Gossypium spp. अप्रैल – मई अक्टूबर – दिसम्बर वर्षा: 50-80 सेमी; ताप: 25°-35°C श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, भीलवाड़ा नरमा, बीटी कॉटन, RST-9 'बणिया'; रेशा 'सफेद सोना'
ग्वार Cyamopsis tetragonoloba 1 जुलाई – 20 जुलाई अक्टूबर – नवम्बर वर्षा: 20-35 सेमी; ताप: 30°-40°C बाड़मेर, बीकानेर, जैसलमेर, चूरू RGC-936, RGC-1002, RGC-1017 विश्व का 70% ग्वार राजस्थान में।


📖 20.3 रबी (उनालू) की प्रमुख फसलें: गहन विवरण

रबी फसलें शीतोष्ण एवं उपोष्ण कटिबंधीय प्रारूप की होती हैं, जिन्हें पकने हेतु मंद तापमान और कटाई के समय शुष्क वायुमंडलीय दशाएँ चाहिए:

रबी फसलों की मास्टर तालिका

फसल का नाम वानस्पतिक नाम बुआई का समय कटाई का समय अनुकूल वर्षा एवं तापमान प्रमुख उत्पादक जिले उन्नत किस्में विशिष्ट तथ्य
गेहूँ Triticum aestivum 15 अक्टूबर – 15 नवम्बर 15 मार्च – 15 अप्रैल वर्षा: 50-75 सेमी; ताप: 15°-22°C श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, कोटा, अलवर राज-3077, राज-3765, WH-147, HD-2967 राज्य की सबसे बड़ी खाद्यान्न फसल। 'मावठ' से अत्यधिक लाभ।
जौ Hordeum vulgare 20 अक्टूबर – 10 नवम्बर मार्च वर्षा: 40-50 सेमी; ताप: 12°-18°C जयपुर, श्रीगंगानगर, सीकर, अलवर RD-2052, RD-2552, बिलारा-2, ज्योति सर्वाधिक लवण एवं क्षार सहिष्णु खाद्यान्न
चना Cicer arietinum 1 अक्टूबर – 25 अक्टूबर मार्च के प्रारंभ में वर्षा: 35-50 सेमी; ताप: 15°-25°C बीकानेर, हनुमानगढ़, चूरू, झुंझुनूं RSG-888, GNG-469 (सम्राट), GNG-1581 (गणगौर) रबी दलहन में शीर्ष। पाले से अत्यधिक हानि।
सरसों एवं राई Brassica juncea 20 सितम्बर – 15 अक्टूबर फरवरी – मार्च वर्षा: 35-50 सेमी; ताप: 15°-20°C भरतपुर, अलवर, श्रीगंगानगर, टोंक वरुणा, पूसा बोल्ड, रोहिणी, DRMRIJ-31 (गिरिराज) राजस्थान देश में प्रथम (40-45%)। DRMR सेवर (भरतपुर) में।
तारामीरा Eruca sativa 15 सितम्बर – 10 अक्टूबर फरवरी वर्षा: 20-35 सेमी; ताप: 12°-20°C नागौर, चूरू, जयपुर, सीकर T-27, RTM-314, नरेंद्र तारा न्यूनतम वर्षा एवं रेतीली भूमि में भी सफल।
अलसी Linum usitatissimum 15 अक्टूबर – 10 नवम्बर मार्च वर्षा: 45-60 सेमी; ताप: 15°-22°C कोटा, बारां, झालावाड़, प्रतापगढ़ त्रिवेणी, श्वेता, रूचि ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर।
जीरा Cuminum cyminum 1 नवम्बर – 25 नवम्बर फरवरी अंत – मार्च वर्षा: शुष्क मौसम; ताप: 15°-25°C जोधपुर, बाड़मेर, नागौर, जालौर RZ-19, RZ-209, RZ-223 'छाछिया' व 'झुलसा' रोग से नष्ट।
धनिया Coriandrum sativum 15 अक्टूबर – 5 नवम्बर मार्च वर्षा: 50-60 सेमी; ताप: 15°-22°C बारां, कोटा, झालावाड़, बूँदी RCr-41, RCr-435, कुंभराज रामगंजमंडी एशिया की सबसे बड़ी धनिया मंडी।
मेथी (कसूरी मेथी) Trigonella foenum-graecum 15 अक्टूबर – 10 नवम्बर मार्च वर्षा: 35-50 सेमी; ताप: 10°-20°C नागौर (मेड़ता), सीकर, जयपुर RMt-1, RMt-143, पूसा अर्ली बंच नागौर की पान मेथी विश्वविख्यात।
ईसबगोल Plantago ovata 20 अक्टूबर – 15 नवम्बर मार्च वर्षा: शुष्क मौसम; ताप: 15°-25°C जालौर, सांचौर, बाड़मेर, जैसलमेर RI-89, GI-2, गुजरात ईसबगोल-1 'घोड़ा जीरा'; छिलके में औषधीय गुण।
अफ़ीम Papaver somniferum 15 अक्टूबर – 10 नवम्बर मार्च – अप्रैल वर्षा: शुष्क मौसम; ताप: 12°-20°C चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, झालावाड़ चेतक, जवाहर अफ़ीम-16 'काला सोना' / 'अमल'; CBN के नियंत्रण में।
लहसुन Allium sativum 15 सितम्बर – 15 अक्टूबर फरवरी – मार्च वर्षा: 50-70 सेमी; ताप: 15°-25°C बारां, झालावाड़, कोटा, चित्तौड़गढ़ G-1, G-282, भीमा पर्पल छीपाबड़ौद (बारां) प्रमुख लहसुन मंडी।


📖 20.4 जायद की प्रमुख फसलें

जायद फसलें मुख्य रूप से दो प्रमुख ऋतुओं (रबी की कटाई और खरीफ की बुआई) के बीच के खाली समय (मार्च से जून) में उगाई जाती हैं:

जायद फसलों का विस्तृत विश्लेषण

फसल संवर्ग प्रमुख फसलें बुआई का समय कटाई का समय मुख्य उत्पादक क्षेत्र उपयोगिता
कुकरबिट्स (तरल फलदार) तरबूज एवं मतीरा फरवरी अंत से मार्च मई से जून नदी पेटे (बनास, चंबल कछार) तथा पश्चिमी मरुस्थल ग्रीष्मकाल में जल एवं इलेक्ट्रोलाइट्स की आपूर्ति।
खरबूजा मध्य फरवरी से मार्च अप्रैल अंत से मई टोंक, पाली, जयपुर (धोद/सांभर), बिलारा बनास नदी के पेटे के खरबूजे मिठास हेतु विख्यात।
ककड़ी एवं खीरा फरवरी से मार्च अप्रैल से जून जयपुर, दौसा, अजमेर, कोटा, अलवर पॉलीहाउस व नदी घाटियों में सघन नकदी उत्पादन।
अल्पकालिक दलहन ग्रीष्मकालीन मूँग व उड़द 15 मार्च से 10 अप्रैल मई अंत से जून प्रथम सप्ताह श्रीगंगानगर, कोटा, बूँदी, हनुमानगढ़ गेहूँ की कटाई के बाद खाली खेत का सदुपयोग; नाइट्रोजन जोड़ना।
पशु चारा फसलें रिजका (Lucerne) अक्टूबर-नवम्बर से मई-जून तक प्रति 20-25 दिन में संपूर्ण दुग्ध उत्पादक बेल्ट दुधारू पशुओं के लिए प्रोटीन-युक्त सर्वोत्तम हरा चारा।
चरी एवं सूडान घास मार्च से अप्रैल मई से जुलाई पश्चिमी एवं मध्य राजस्थान ग्रीष्मकालीन चारे के संकट का समाधान।


📖 20.5 सस्य चक्र एवं फसल चक्रण

मृदा की जैविक उर्वरता बनाए रखने, कीट-रोगों के चक्र को तोड़ने और जल की बचत हेतु राजस्थान के विभिन्न कृषि-पारिस्थितिक अंचलों में विशिष्ट फसल चक्र अपनाए जाते हैं:

[1. शुष्क मरुस्थलीय चक्र]  ──>  बाजरा / ग्वार (खरीफ) ──> परती / खाली खेत ──> मोठ / तिल
[2. नहरी सिंचित उत्तर-पश्चिमी]  ──>  अमेरिकन कपास (खरीफ) ──> गेहूँ या जौ (रबी)
[3. पूर्वी मैदान सिंचित]  ──>  बाजरा (खरीफ) ──> सरसों (रबी) ──> ग्वार / मूँग (जायद)
[4. हाड़ौती काली मृदा]  ──>  सोयाबीन (खरीफ) ──> गेहूँ / चना / धनिया (रबी)
[5. मेवाड़ पहाड़ी]  ──>  मक्का (खरीफ) ──> चना या गेहूँ (रबी)

फसल चक्र के वैज्ञानिक सिद्धांत

सिद्धांत विवरण
गहरी जड़ के बाद उथली जड़ जैसे कपास के बाद गेहूँ, ताकि विभिन्न मृदा संस्तरों से पोषक तत्व लिए जा सकें।
दलहनी फसलों का अनिवार्य अंतर्वेशन खाद्यान्न फसलों के बाद दलहनी फसलें (जो राइजोबियम द्वारा नाइट्रोजन लौटाती हैं) बोना।
अधिक जल माँग के बाद कम जल माँग जैसे धान या कपास के बाद चना या सरसों।


📖 20.6 राजस्थान में प्रचलित कृषि की विशिष्ट शब्दावली

राजस्थान के ग्रामीण परिवेश में कृषि प्रक्रियाओं से जुड़े विशिष्ट देशज शब्द:

स्थानीय शब्द मानक अर्थ एवं कृषि संदर्भ
सूड़ खरीफ की बुआई से पूर्व खेत में उगी अनावश्यक कंटीली झाड़ियों और खरपतवार को काटकर साफ करने की प्रक्रिया।
हळोतियो / हलौत्या वर्षा ऋतु की प्रथम मानसूनी वर्षा के पश्चात खेत में शुभ मुहूर्त देखकर हल चलाने की पारंपरिक रस्म।
बीजणी / ओढ़णी हल के पीछे लगी लकड़ी या लोहे की कीपयुक्त नली, जिसके माध्यम से बीज को कूँड में डाला जाता है।
नीराई-गुड़ाई खड़ी फसल में से खुरपी या कसी द्वारा अनावश्यक घास-फूस निकालने की क्रिया।
लावणी पकी हुई फसल की हँसिए द्वारा कटाई करने की प्रक्रिया
लाटा फसल कटाई के उपरांत खलिहान में अनाज और भूसे के सामूहिक ढेर को 'लाटा' कहते हैं।
गाहाई / दमाई सूखे पौधों की बालियों पर बैलों को चलाकर या थ्रेशर द्वारा दानों को भूसे से अलग करने की प्रक्रिया।
खाखला / कड़बी गेहूँ, जौ व चने के डंठलों से बना बारीक भूसा 'खाखला'; बाजरे व ज्वार के सूखे तने 'कड़बी'
पावटा / पूळा फसलों के पौधों को काटकर बाँधे गए बड़े-बड़े गट्ठर।
पलेवा फसल की बुआई से पूर्व बीज के सुगम अंकुरण हेतु सूखे खेत में पानी देकर जमीन में नमी तैयार करने की क्रिया।
कोरवण फसल बोने के बाद जब पौधे थोड़े बड़े हो जाएँ, तब दिया जाने वाला प्रथम हल्का पानी।


📖 20.7 परीक्षा-उपयोगी मुख्य बिंदु

तथ्य विवरण
बुआई-कटाई समय नियम खरीफ: बुआई = मानसून आगमन (जून-जुलाई); कटाई = शीत प्रारंभ (सितम्बर-अक्टूबर)। रबी: बुआई = ठंड प्रारंभ (अक्टूबर-नवम्बर); कटाई = गर्मी प्रारंभ (मार्च-अप्रैल)। जायद: बुआई = वसंत अंत (मार्च); कटाई = ग्रीष्म चरम (मई-जून)।
माही कंचन एवं माही धवल ये मक्का की संकर किस्में हैं, जिन्हें कृषि अनुसंधान केंद्र, बांसवाड़ा द्वारा विकसित किया गया।
माही सुगंधा यह सुगंधित चावल (धान) की उन्नत किस्म है (भ्रम से बचें: माही कंचन = मक्का, माही सुगंधा = चावल)।
राज-3077 यह गेहूँ की किस्म है जो लवणीय एवं क्षारीय जल व मिट्टी में भी अच्छा उत्पादन देती है।
सेवर (भरतपुर) राष्ट्रीय सरसों अनुसंधान निदेशालय (DRMR) की स्थापना 20 अक्टूबर 1993 को ICAR द्वारा की गई।
C4 vs C3 फसलें खरीफ की प्रमुख फसलें (बाजरा, मक्का, ज्वार, गन्ना) C4 पादप हैं। रबी की फसलें (गेहूँ, जौ, सरसों, चना) C3 पादप हैं।
पाले से सर्वाधिक प्रभावित रबी की फसलों में सरसों और चना पाले के प्रति सर्वाधिक संवेदनशील हैं।
कैमल क्रॉप ज्वार को अत्यधिक सूखा सहन करने की क्षमता के कारण 'कैमल क्रॉप' कहा जाता है।


परीक्षा पुनरावृत्ति

कृषि वर्ष: 1 जुलाई से 30 जून -> त्रि-मौसमी प्रारूप: खरीफ (सियालू/सावणी - 15 जून से 15 जुलाई बुआई, 60-65% सकल क्षेत्र), रबी (उनालू - 15 अक्टूबर से 15 नवम्बर बुआई, 30-35% सकल क्षेत्र), जायद (मध्य फरवरी से मार्च बुआई, 3-5% क्षेत्र) -> C4 पादप: बाजरा, मक्का, ज्वार, गन्ना (उच्च प्रकाश संश्लेषण दक्षता) -> C3 पादप: गेहूँ, जौ, सरसों, चना -> राष्ट्रीय प्रथम स्थान: बाजरा, सरसों, कुल तिलहन, ग्वार -> DRMR सेवर (भरतपुर, 20 अक्टूबर 1993) -> सफेद सोना: कपास (बणिया) -> काला सोना: अफ़ीम (अमल, CBN नियंत्रण) -> गरीब की रोटी एवं कैमल क्रॉप: ज्वार -> लवण-सहिष्णु किस्में: गेहूँ (राज-3077), जौ (RD-2052) -> बांसवाड़ा संकर किस्में: मक्का (माही कंचन, माही धवल), धान (माही सुगंधा) -> विशिष्ट मंडियां: रामगंजमंडी (धनिया मंडी), छीपाबड़ौद (लहसुन मंडी) -> प्रसिद्ध क्षेत्र: नागौर (पान मेथी/कसूरी मेथी एवं मूँग), सोजत (मेंहदी), लूणकरणसर (राजस्थान का राजकोट - मूँगफली), मथानिया (लाल मिर्च), झालावाड़ (संतरा), श्रीगंगानगर (किन्नू) -> कृषि शब्दावली: सूड़ (खरपतवार सफाई), हळोतियो (प्रथम हल की रस्म), बीजणी (बीज नली), लावणी (फसल कटाई), पलेवा (बुआई पूर्व नमी), कोरवण (प्रथम हल्का पानी), खाखला (बारीक भूसा), कड़बी (सूखे तने), लाटा (खलिहान का ढेर)

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